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- MP OBC Reservation: मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।
- कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि आरक्षण से जुड़े मामले को सुलझाने के बजाय इसे कानूनी प्रक्रिया में उलझाया गया, जिसका असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है जो चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।
- राहुल गांधी ने 22 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण लागू करने और लंबित नियुक्तियों का रास्ता साफ करने की मांग की।
- जीतू पटवारी ने सरकार पर लगाए ₹200 करोड़ खर्च करने के आरोप
MP OBC Reservation: मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। राहुल गांधी की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर लंबित नियुक्तियों और आरक्षण के मुद्दे को उठाए जाने के बाद कांग्रेस ने भी सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि आरक्षण से जुड़े मामले को सुलझाने के बजाय इसे कानूनी प्रक्रिया में उलझाया गया, जिसका असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है जो चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।
राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखा पत्र
राहुल गांधी ने 22 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण लागू करने और लंबित नियुक्तियों का रास्ता साफ करने की मांग की। यह मुद्दा इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान भी सामने आया था, जहां छात्रों ने शिक्षा, रोजगार और अपने भविष्य से जुड़ी परेशानियां उनके सामने रखी थीं। MP OBC Reservation
13 प्रतिशत पदों पर क्यों अटका मामला?
रिपोर्टों के मुताबिक, 27 प्रतिशत OBC आरक्षण (MP OBC Reservation) से जुड़े विवाद के चलते भर्ती प्रक्रिया में 87:13 व्यवस्था अपनाई गई। इसके तहत 87 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां की जाती हैं, जबकि विवादित 13 प्रतिशत पदों को फिलहाल रोका गया है। राहुल गांधी ने अपने पत्र में कहा कि इन पदों पर चयनित कुछ अभ्यर्थी वर्ष 2022 से नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहे हैं।
जीतू पटवारी ने सरकार पर लगाए ₹200 करोड़ खर्च करने के आरोप
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने 27 प्रतिशत OBC आरक्षण के मामले को लागू करने के बजाय कानूनी दांव-पेच में उलझाए रखा और करीब 200 करोड़ रुपये वकीलों पर खर्च किए गए। यह आंकड़ा पटवारी के आरोप के रूप में सामने आया है; स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं होती।
सरकार का कहना है- मामला न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा है
दूसरी ओर, सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि शिक्षा और युवाओं से जुड़े विषयों पर तथ्यों के साथ बात होनी चाहिए। सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि OBC आरक्षण (MP OBC Reservation) को लेकर न्यायालय के निर्देशों के अनुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
नियुक्तियों का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों की चिंता
इस पूरे विवाद का सबसे सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है जिनकी परीक्षा और चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन आरक्षण से जुड़े विवाद के कारण कुछ पदों पर नियुक्तियां लंबित हैं। राहुल गांधी ने अपने पत्र में इन्हीं अभ्यर्थियों की नियुक्ति का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री से उनकी समस्याएं सुनने और लंबित प्रक्रिया पर निर्णय लेने की अपील की है।
2019 में लागू हुआ था 27 प्रतिशत OBC आरक्षण
मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण (MP OBC Reservation) का प्रावधान 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार के दौरान किया गया था। इसके बाद आरक्षण की संवैधानिक वैधता को लेकर न्यायालय में चुनौती दी गई। इसी कानूनी विवाद के चलते भर्ती में 87:13 व्यवस्था का इस्तेमाल किया गया और 13 प्रतिशत पदों को लंबित रखा गया।
आगे क्या होगा?
फिलहाल मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया से भी जुड़ा हुआ है। एक तरफ कांग्रेस लंबित नियुक्तियों और 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर सरकार से कार्रवाई की मांग कर रही है, वहीं सरकार न्यायालय से जुड़े निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ने की बात कह रही है। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि लंबित 13 प्रतिशत पदों और OBC आरक्षण को लेकर आगे क्या कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाए जाते हैं।

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