Category: Agriculture

  • PM किसान सम्मान निधि घोटाला: राजस्थान में 440 करोड़ की गड़बड़ी से मचा हड़कंप

    राजस्थान में PM किसान सम्मान निधि घोटाला सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। करीब 440 करोड़ रुपये की गड़बड़ी उजागर होने से यह मामला बेहद गंभीर बन गया है। PM किसान सम्मान निधि घोटाला ने सरकार की योजनाओं की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    राज्य सरकार ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए साफ किया है कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही, किसानों को अटकी हुई राशि जल्द जारी करने का भरोसा भी दिया गया है।

    PM किसान सम्मान निधि घोटाला की जांच तेज

    PM किसान सम्मान निधि घोटाला को लेकर जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा कि सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है और पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घोटाले के पीछे काम कर रहे पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश किया जाएगा। साथ ही, दोषियों की पहचान कर उन्हें कानून के तहत कड़ी सजा दी जाएगी।

    कैसे हुआ इतना बड़ा फर्जीवाड़ा

    PM किसान सम्मान निधि घोटाला में शुरुआती जांच में सामने आया है कि फर्जी दस्तावेजों और गलत डेटा के जरिए बड़ी संख्या में अपात्र लोगों को योजना का लाभ दिया गया। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।

    इस घोटाले ने यह भी दिखाया कि योजना के क्रियान्वयन में कई स्तरों पर निगरानी की कमी रही। अब सरकार इस पूरी प्रक्रिया को और मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है।

    किसानों को मिलेगा उनका हक

    PM किसान सम्मान निधि घोटाला के बीच सरकार ने यह भी साफ किया है कि असली किसानों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। जिन किसानों की किस्तें रुकी हुई हैं, उन्हें जल्द से जल्द भुगतान किया जाएगा।

    सरकार का कहना है कि जांच पूरी होते ही दोषियों पर कार्रवाई के साथ-साथ पूरी प्रणाली में सुधार किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हो सकें।

    सरकार का सख्त रुख

    PM किसान सम्मान निधि घोटाला पर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    आने वाले दिनों में इस मामले में बड़े खुलासे होने की संभावना है, जिससे पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है।

  • सरसों बेचने वालों के लिए बड़ा मौका या बड़ा जाल… 23 मार्च से शुरू हुई योजना में एक गलती और पैसा खत्म

    मध्य प्रदेश में किसानों के लिए बड़ा फैसला सामने आया है लेकिन इसके साथ ही कई सख्त नियम भी लागू कर दिए गए हैं। सरसों बेचने वाले किसानों को अब सीधे फायदा मिल सकता है लेकिन अगर एक भी नियम छूट गया तो पूरा लाभ हाथ से निकल सकता है। 23 मार्च से शुरू हुई इस नई व्यवस्था ने किसानों के बीच हलचल बढ़ा दी है।

    इंदौर समेत पूरे मध्य प्रदेश में शुरू हुई नई खरीदी

    इंदौर सहित पूरे मध्य प्रदेश की मंडियों में 23 मार्च 2026 से सरसों की खरीदी शुरू हो गई है। यह खरीदी भावांतर भुगतान योजना के तहत हो रही है और इसकी आखिरी तारीख 30 मई 2026 तय की गई है।

    इंदौर के किसान इस योजना को लेकर खासे सक्रिय नजर आ रहे हैं। मंडियों में पहले ही दिन से किसानों की आवाजाही बढ़ गई है क्योंकि सभी चाहते हैं कि उन्हें सरकार की तरफ से तय लाभ मिल सके।

    सिर्फ मुख्य मंडी में ही मिलेगा फायदा

    इस योजना का सबसे बड़ा नियम यह है कि किसान को अपनी उपज केवल मुख्य मंडी प्रांगण में ही बेचनी होगी। इंदौर में भी यही नियम लागू है और उपमंडी में सरसों बेचने पर कोई लाभ नहीं मिलेगा।

    इसके अलावा किसान को उसी जिले की मंडी में जाना होगा जहां उसका पंजीयन है। अगर इंदौर का किसान है तो उसे इंदौर जिले की मंडी में ही सरसों बेचनी होगी।

    कितनी सरसों बेच पाएंगे किसान

    सरकार ने इस बार खरीदी की मात्रा भी तय कर दी है। एक हेक्टेयर पर अधिकतम 13.22 क्विंटल सरसों ही इस योजना में शामिल होगी।

    अगर किसी किसान ने 1 मार्च से 22 मार्च के बीच पहले ही सरसों बेच दी है तो वह मात्रा उसकी कुल पात्रता से घटा दी जाएगी। यानी अब वह केवल बची हुई मात्रा पर ही लाभ ले सकेगा।

    भुगतान का नियम बदला तो खेल बदल गया

    इंदौर के किसानों के लिए सबसे अहम नियम भुगतान से जुड़ा है। इस योजना में नकद पैसा लेना पूरी तरह से मना है।

    अगर किसान ने नकद भुगतान लिया तो उसे योजना का कोई लाभ नहीं मिलेगा। व्यापारी को पूरी राशि ऑनलाइन ही डालनी होगी और वही मान्य होगी।

    MSP से कम रेट पर मिलेगा फायदा

    सरसों का समर्थन मूल्य इस बार 6000 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। अगर मंडी में इससे कम भाव मिलता है और सरकार के मॉडल रेट से ऊपर रहता है तो ही भावांतर का लाभ मिलेगा।

    इंदौर में कई किसान इसी गणित को समझने में लगे हुए हैं ताकि उन्हें सही समय पर सही फायदा मिल सके।

    मंडी में एंट्री से पहले ये काम जरूरी

    इंदौर की मंडियों में प्रवेश के लिए भी नए नियम लागू किए गए हैं। किसान को अपनी ट्रॉली के साथ एंट्री गेट पर रुकना होगा और सरसों का सैंपल दिखाना होगा।

    उसे प्रवेश पर्ची भी लेनी होगी और साथ में आधार कार्ड की कॉपी और पंजीयन दस्तावेज रखना अनिवार्य है। बिना इन दस्तावेजों के मंडी में एंट्री मुश्किल हो सकती है।

    बिना नंबर प्लेट के वाहन नहीं चलेंगे

    इस बार एक और सख्ती की गई है। अगर किसान का वाहन नंबर प्लेट के बिना आता है तो उसे योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

    इंदौर में कई जगह इस नियम को लेकर पहले ही सख्ती शुरू हो गई है ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न हो।

    नई सरसों ही होगी मान्य

    इस योजना का लाभ केवल नई फसल पर ही मिलेगा। पुरानी सरसों को इसमें शामिल नहीं किया गया है।

    साथ ही सरसों की क्वालिटी भी साफ सुथरी होनी चाहिए तभी किसान को लाभ मिलेगा। खराब या गंदी सरसों पर योजना लागू नहीं होगी।

  • कम जमीन और कम खर्च में होगी तगड़ी कमाई, इस स्मार्ट खेती फार्मूले ने बदल दी आमदनी की पूरी कहानी, जानिए कैसे एक ही खेत से खुलेंगे कई कमाई के रास्ते

    Low Cost Farming| खेती में बढ़ती लागत और घटते मुनाफे के बीच अब एक ऐसा तरीका सामने आया है जिसने किसानों की सोच बदल दी है. अब कम जमीन और कम खर्च में भी अच्छी कमाई संभव हो रही है. बदलते समय में पारंपरिक खेती से हटकर नए तरीकों को अपनाने वाले किसान तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और उनकी आय में साफ बढ़ोतरी देखने को मिल रही है.

    एक ही खेत से कई कमाई के रास्ते कैसे खुल रहे हैं

    अब खेती सिर्फ एक फसल तक सीमित नहीं रही. नई सोच यह कहती है कि खेत को अलग अलग हिस्सों में बांटकर कई तरह की फसलें उगाई जाएं. इससे एक तरफ जोखिम कम होता है तो दूसरी तरफ हर दिन कुछ न कुछ आय आती रहती है. अगर एक फसल का दाम गिर जाए तो दूसरी फसल नुकसान को संभाल लेती है. Low Cost Farming

    छोटे खेत वाले लोग भी इस तरीके से फायदा उठा रहे हैं. आधे खेत में अनाज और बाकी हिस्से में सब्जियां और बागवानी करने से आमदनी के नए रास्ते बनते हैं. इससे बाजार में लगातार बिक्री बनी रहती है और नकदी की कमी नहीं होती. Low Cost Farming

    समय पर बुवाई से बदल सकती है किस्मत

    खेती में समय सबसे बड़ा फैक्टर माना जा रहा है. सही समय पर बुवाई करने से फसल की ग्रोथ बेहतर होती है और उत्पादन भी बढ़ता है. खासकर गर्मी के मौसम में सब्जियों की समय पर बुवाई करने वाले लोग जल्दी और ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं.

    जो लोग मौसम के हिसाब से फसल बदलते रहते हैं उन्हें बाजार में हमेशा डिमांड मिलती है. इससे उनकी फसल जल्दी बिकती है और अच्छी कीमत भी मिलती है.

    मल्टी क्रॉपिंग से रोजाना आय का मौका

    अब एक ही तरह की खेती करने का दौर खत्म हो रहा है. विशेषज्ञ मानते हैं कि दो या तीन तरह की सब्जियों की खेती एक साथ करना ज्यादा फायदेमंद है. इससे हर फसल का अलग बाजार मिलता है और कीमत भी बेहतर मिलती है.

    इस तरीके से खेत में हमेशा कुछ न कुछ तैयार रहता है जो सीधे बाजार में बिक सकता है. इससे रोजाना आय का एक स्थायी जरिया बन जाता है जो आर्थिक रूप से काफी मजबूत करता है.

    नई तकनीक से घटेगा खर्च बढ़ेगा उत्पादन

    खेती में अब मशीनों और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. छोटे ट्रैक्टर और पावर टिलर जैसे उपकरण काम को आसान बनाते हैं और समय भी बचाते हैं. इसके साथ ही उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है. Low Cost Farming

    ड्रिप सिंचाई और स्प्रिंकलर जैसी तकनीक पानी की बचत के साथ साथ फसल की गु णवत्ता को भी बेहतर बनाती हैं. इससे लागत कम होती है और पैदावार ज्यादा मिलती है.

    मल्चिंग तकनीक से खेत रहेगा सुरक्षित

    मल्चिंग तकनीक खेती में एक गेम चेंजर साबित हो रही है. इसमें जमीन को प्लास्टिक कवर से ढक दिया जाता है जिससे खरपतवार नहीं उगते और नमी बनी रहती है. इससे पानी की जरूरत कम हो जाती है और फसल तेजी से बढ़ती है. Low Cost Farming

    इसके साथ स्ट्रिंगर जैसी विधियों को अपनाने से पौधों को सहारा मिलता है और उत्पादन में सुधार होता है. यह तरीका खासकर सब्जियों की खेती में काफी कारगर माना जा रहा है.

    ग्रेडिंग से बढ़ेगी बाजार में कीमत

    फसल उगाने के बाद उसकी सही तरीके से ग्रेडिंग करना भी उतना ही जरूरी है. जब उत्पाद को आकार और गुणवत्ता के हिसाब से अलग किया जाता है तो बाजार में उसकी कीमत ज्यादा मिलती है. Low Cost Farming

    अच्छी क्वालिटी और साफ सुथरे तरीके से तैयार किया गया माल ग्राहकों को जल्दी आकर्षित करता है. इससे बिक्री तेजी से होती है और मुनाफा बढ़ता है

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  • इन तारीखों से शुरू होगी MP में गेहूं खरीदी 2026, किसानों को मिलेगा 2625 रुपए प्रति क्विंटल, भोपाल सहित इन संभागों को पहले मौका

    Madhya Pradesh Wheat Purchase 2026| मध्य प्रदेश में किसानों के लिए बड़ी राहत और खुशी की खबर सामने आई है। सरकार ने गेहूं खरीदी को लेकर ऐसा फैसला लिया है जो सीधे किसानों की जेब पर असर डालेगा। इस बार समर्थन मूल्य के साथ बोनस जोड़कर कीमत को इतना बढ़ा दिया गया है कि हर किसान को अपनी मेहनत का सही दाम मिलने की उम्मीद है।

    1 अप्रैल से शुरू होगी खरीदी भोपाल समेत इन संभागों में पहले मिलेगा मौका

    खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने साफ कर दिया है कि गेहूं खरीदी का पूरा प्लान तैयार हो चुका है। इंदौर उज्जैन भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 1 अप्रैल से खरीदी शुरू होगी। वहीं बाकी संभागों में 7 अप्रैल से प्रक्रिया शुरू होगी। भोपाल में रहने वाले किसानों के लिए यह खबर खास मायने रखती है क्योंकि यहां से बड़ी संख्या में किसान समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचते हैं। सुबह 8 बजे से लेकर रात 8 बजे तक खरीदी होगी जिससे किसानों को लंबी लाइन या परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। Madhya Pradesh Wheat Purchase 2026

    अब मिलेगा 2625 रुपए प्रति क्विंटल सीधे खाते में आएगा फायदा

    इस बार सरकार ने 40 रुपए बोनस देने का बड़ा फैसला लिया है। इसके बाद गेहूं (Madhya Pradesh Wheat Purchase 2026) का समर्थन मूल्य बढ़कर 2625 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है। यह बढ़ोतरी सीधे किसानों की आमदनी बढ़ाने वाली है। भोपाल और आसपास के जिलों में किसान लंबे समय से बेहतर दाम की मांग कर रहे थे। ऐसे में यह फैसला उनके लिए किसी राहत पैकेज से कम नहीं है।

    रिकॉर्ड तोड़ पंजीयन इस बार किसानों का जबरदस्त उत्साह

    इस साल गेहूं खरीदी (Madhya Pradesh Wheat Purchase 2026) के लिए 19 लाख से ज्यादा किसानों ने पंजीयन कराया है। यह आंकड़ा पिछले साल से काफी ज्यादा है जब करीब 15 लाख किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। भोपाल जिले में भी हजारों किसानों ने पंजीयन कराया है जिससे साफ है कि इस बार खरीदी का दायरा और प्रभाव दोनों बढ़ने वाले हैं। सीहोर विदिशा रायसेन और राजगढ़ जैसे भोपाल के आसपास के जिलों में भी भारी संख्या में किसानों ने हिस्सा लिया है

    भोपाल सहित पूरे प्रदेश में दिखेगा बड़ा असर बाजार से लेकर गांव तक बदलेगी तस्वीर

    भोपाल में गेहूं खरीदी (Madhya Pradesh Wheat Purchase 2026) शुरू होते ही मंडियों में रौनक बढ़ेगी। ट्रैक्टर ट्रॉली की आवाजाही बढ़ेगी और गांव से लेकर शहर तक आर्थिक गतिविधियां तेज हो जाएंगी। इस फैसले का असर सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि व्यापारी मजदूर और परिवहन से जुड़े लोगों को भी फायदा मिलेगा। भोपाल और आसपास के इलाकों में इसका सीधा असर देखने को मिलेगा जहां खेती मुख्य आय का जरिया है।

    सिर्फ 2 महीने में हो सकती है गर्मियों में तगड़ी कमाई! इस सब्जी की खेती से मिलेगा बड़ा मुनाफा, जानिए कौन सी है खेती

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  • सिर्फ 2 महीने में हो सकती है गर्मियों में तगड़ी कमाई! इस सब्जी की खेती से मिलेगा बड़ा मुनाफा, जानिए कौन सी है खेती

     Bottle Gourd Farming| गर्मियों के सीजन की शुरुआत होते ही किसानों के लिए एक बड़ा मौका सामने आ जाता है जहां सही फैसला सीधे कमाई से जुड़ जाता है. इस बार अगर आपने समय रहते सही सब्जी और सही तकनीक चुन ली तो सिर्फ दो महीने में खेत से ऐसा मुनाफा निकल सकता है जो पूरे साल की मेहनत का रास्ता आसान कर दे. मध्य प्रदेश और आसपास के इलाकों में इस समय लौकी की खेती तेजी से चर्चा में है क्योंकि यह कम लागत में तेज रिटर्न देने वाली फसल बनकर उभरी है.

    मार्च में क्यों बनती है लौकी खेती की सबसे बड़ी टाइमिंग

    मार्च का महीना गर्मी की शुरुआत का संकेत देता है और यही समय लौकी की खेती ( Bottle Gourd Farming) के लिए सबसे बेहतर माना जाता है. इस मौसम में बीज जल्दी अंकुरित होते हैं और बेल तेजी से बढ़ती है. इंदौर और भोपाल जैसे इलाकों में तापमान भी इस फसल के लिए अनुकूल रहता है जिससे पौधों की ग्रोथ मजबूत होती है. अगर इस समय सही तरीके से बुवाई की जाए तो फसल का चक्र बहुत तेज चलता है और बाजार में मांग भी लगातार बनी रहती है. यही कारण है कि कई किसान अब पारंपरिक खेती छोड़कर सब्जियों की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं.

    बेड विधि ने बदला खेती का पूरा खेल

    खेती ( Bottle Gourd Farming) में सबसे बड़ा नुकसान तब होता है जब फल जमीन से सटकर खराब होने लगते हैं. इसी समस्या का समाधान बेड विधि देती है. इसमें खेत को समतल रखने के बजाय ऊंची मेड़ बनाई जाती है और उसी पर बीज बोया जाता है. इस तकनीक से पौधों को बेहतर ड्रेनेज मिलता है. पानी रुकता नहीं है और जड़ों तक सही मात्रा में नमी पहुंचती है. सबसे बड़ी बात यह है कि फल जमीन से दूर रहते हैं जिससे सड़ने का खतरा लगभग खत्म हो जाता है. भोपाल और आसपास के किसानों के लिए यह तरीका काफी फायदेमंद साबित हो रहा है क्योंकि पानी की बचत भी इसमें अच्छी होती है.

    मचान तकनीक से बढ़ती है लंबाई और क्वालिटी

    अगर आप चाहते हैं कि आपकी लौकी ( Bottle Gourd Farming) बाजार में सबसे अलग दिखे तो मचान तकनीक जरूरी है. इसमें बेल को जमीन पर फैलने देने के बजाय ऊपर चढ़ाया जाता है. इसके लिए बांस या तार का सहारा दिया जाता है.

    जब लौकी हवा में लटकती है तो उसका आकार सीधा और लंबा बनता है. इसमें किसी तरह का दबाव नहीं पड़ता इसलिए उसकी चमक और क्वालिटी दोनों बेहतर होती हैं. इंदौर मंडी में ऐसी लौकी की कीमत भी ज्यादा मिलती है क्योंकि ग्राहक साफ और आकर्षक सब्जी को ज्यादा पसंद करते हैं.

    खाद और देखभाल में छोटी गलती भी कर सकती है नुकसान

    अच्छी पैदावार के लिए सिर्फ तकनीक ही नहीं बल्कि सही पोषण भी जरूरी है. खेत में जैविक खाद का इस्तेमाल करने से मिट्टी की ताकत बनी रहती है और उत्पादन भी बढ़ता है. वर्मी कंपोस्ट जैसी खाद पौधों को धीरे धीरे पोषण देती है जिससे फसल मजबूत होती है.  ( Bottle Gourd Farming)

    समय समय पर हल्का छिड़काव करना भी जरूरी होता है ताकि कीट और रोग फसल को नुकसान न पहुंचा सकें. खास बात यह है कि अगर शुरुआत से ही देखभाल सही की जाए तो बाद में दवाओं पर ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ता.

    कम लागत में तेज कमाई का पूरा गणित समझें

    लौकी की खेतीBottle Gourd Farming) की सबसे बड़ी खासियत इसकी लागत और रिटर्न का अंतर है. एक हेक्टेयर में खेती करने पर खर्च काफी सीमित रहता है. वहीं फसल तैयार होने में ज्यादा समय नहीं लगता.

    करीब 60 दिनों के अंदर फसल तैयार हो जाती है और गर्मियों में इसकी डिमांड भी बहुत ज्यादा होती है. ऐसे में सही तकनीक अपनाने वाले किसान आसानी से अपनी लागत से कई गुना ज्यादा कमाई कर सकते हैं. भोपाल और इंदौर के बाजारों में इस समय लौकी की मांग लगातार बनी रहती है जिससे बिक्री में भी परेशानी नहीं आती. ( Bottle Gourd Farming)

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  • Potato Prices: आलू के भाव में भारी गिरावट से किसानों में आक्रोश MSP की मांग तेज पश्चिम बंगाल और उत्तरप्रदेश की बंपर पैदावार बनी बड़ी वजह

    Potato प्रिंसेस :आज हम बात कर रहे हैं आलू किसानों की उस चिंता की जो इस समय पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। पश्चिम बंगाल और उत्तरप्रदेश में इस साल आलू की बंपर पैदावार हुई है लेकिन खुशी की यह खबर किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। बाजार में आलू के दाम पिछले साल से करीब दस रुपए तक सस्ते हो गए हैं जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

    आलू के भाव में लगातार गिरावट से बढ़ी चिंता

    इस साल आलू की अच्छी पैदावार होने से बाजार में आपूर्ति बढ़ने की संभावना है। हालांकि अभी मंडियों में उतनी आवक नहीं हो रही जितनी होनी चाहिए। उज्जैन के कारोबारी विनोद सिद्धवानी के अनुसार मंडी में आलू की आवक सामान्य से कम है क्योंकि कई किसानों ने अभी तक खेतों से आलू निकाला ही नहीं है। आने वाले दिनों में जब बड़े स्तर पर आलू बाजार में आएगा तो दाम और गिरने की आशंका जताई जा रही है।

    व्यापारियों का कहना है कि चिप्स वाला आलू आठ से नौ रुपए किलो बिक रहा है जबकि सामान्य आलू चार से पांच रुपए किलो तक पहुंच गया है। यह दाम किसानों के लिए बेहद निराशाजनक हैं।

    लागत से भी कम मिल रहा है भाव

    आलू की खेती करना आसान काम नहीं है। बीज खाद दवा सिंचाई मजदूरी और ट्रांसपोर्ट पर भारी खर्च आता है। एक किलो आलू तैयार करने में जितनी लागत लगती है उससे कहीं कम दाम किसानों को बाजार में मिल रहा है। ऐसे में उनकी मेहनत और पूंजी दोनों दांव पर लग जाती हैं। कई किसान कर्ज लेकर खेती करते हैं और जब फसल का सही दाम नहीं मिलता तो उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर हो जाती है।

    इस बार अचानक भाव गिरने से कई जगह किसान आलू की खुदाई तक नहीं कर पा रहे हैं। खेत से निकालने और बाजार तक पहुंचाने का खर्च भी निकल पाना मुश्किल हो रहा है। कुछ किसान मजबूरी में फसल को खेत में ही छोड़ने पर विचार कर रहे हैं।

    किसानों ने उठाई MSP तय करने की मांग

    देशभर की मंडियों में आलू के दाम नीचे चल रहे हैं जिससे किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। किसानों का कहना है कि वर्तमान में मिल रहा दाम उत्पादन लागत का आधा भी नहीं है। इसलिए उन्होंने सरकार से मांग की है कि आलू के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाए और बाजार में दाम स्थिर रखने के लिए हस्तक्षेप किया जाए।

    किसानों की यह भी मांग है कि भंडारण और प्रोसेसिंग की बेहतर व्यवस्था की जाए ताकि फसल को सुरक्षित रखा जा सके और सही समय पर बेचा जा सके। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में आलू किसानों की स्थिति और भी खराब हो सकती है।

    देशभर की मंडियों में यह चल रहे हैं आलू के भाव

    गुजरात में आलू ग्रेड ए पांच सौ से सात सौ पचास रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है। बनासकांठा में आलू दो सौ पचासी से छह सौ पचपन रुपए प्रति क्विंटल तक है। भरूच में ग्रेड ए आलू एक हजार से तेरह सौ रुपए प्रति क्विंटल के बीच बिक रहा है। दाहोद सब्जी मंडी में लोकल आलू सात सौ से एक हजार रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंचा है। कच्छ में देसी आलू नौ सौ से बारह सौ रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है।

    कपडवंज एपीएमसी खेड़ा में मीडियम आलू चार सौ से आठ सौ पचास रुपए प्रति क्विंटल है। नडियाद एपीएमसी खेड़ा में आलू चौदह सौ से अठारह सौ रुपए प्रति क्विंटल तक दर्ज किया गया है। मेहसाणा वेज एपीएमसी में लोकल आलू दो सौ से एक हजार रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है। नवसारी एपीएमसी में ग्रेड ए आलू आठ सौ से बारह सौ रुपए प्रति क्विंटल के बीच है। पोरबंदर एपीएमसी में रेड नैनीताल आलू एक हजार से पंद्रह सौ रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंचा है।

    इन दामों से साफ है कि कई जगहों पर भाव में भारी उतार चढ़ाव है और किसानों को स्थिर आय नहीं मिल पा रही है।

    आखिर में यही कहा जा सकता है कि आलू की बंपर पैदावार जहां एक ओर अच्छी खेती का संकेत है वहीं दूसरी ओर कम दाम किसानों के लिए चिंता का विषय बन गए हैं। जरूरत है कि सरकार समय रहते ठोस निर्णय ले ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके और वे आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें।

  • PM Kisan Maandhan Yojana: किसानों के बुढ़ापे की गारंटी प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना, में मिलेगी हर महीने 3000 रुपये पेंशन

    PM Kisan Maandhan Yojana: किसानों से जुड़ी एक अहम सरकारी योजना की जानकारी सामने आई है। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को साठ वर्ष की उम्र के बाद हर महीने तीन हजार रुपये पेंशन दी जाती है। यह योजना किसानों के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से चलाई जा रही है और इसका लाभ देशभर के पात्र किसानों को मिल रहा है।

    यह योजना नौ अगस्त दो हजार उन्नीस को शुरू की गई थी। इसका मकसद ऐसे किसानों को आर्थिक सहारा देना है जिनकी आमदनी सीमित है और जिनके पास बुढ़ापे के लिए कोई नियमित पेंशन नहीं होती। सरकार का कहना है कि इससे किसानों को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।

    कौन किसान ले सकता है योजना का लाभ

    योजना का लाभ अठारह से चालीस वर्ष की उम्र के छोटे और सीमांत किसान ले सकते हैं। जिन किसान परिवारों के पास कम भूमि है उन्हें इसमें शामिल किया गया है। जो लोग पहले से एनपीएस ईएसआईसी या ईपीएफ जैसी योजनाओं से जुड़े हैं वे इसके पात्र नहीं हैं।

    इसके अलावा बड़े भूमि मालिक संवैधानिक पदों पर रहे लोग वर्तमान या पूर्व विधायक सांसद सरकारी कर्मचारी और आयकर दाता इस योजना में शामिल नहीं हो सकते। पात्रता को लेकर आवेदन के समय पूरी जांच की जाती है।

    आवेदन की प्रक्रिया और जरूरी जानकारी

    प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के लिए आवेदन नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर पर किया जाता है। वहां मौजूद वीएलई किसान का फॉर्म भरने में मदद करता है। आवेदन के लिए आधार कार्ड बैंक पासबुक भूमि से जुड़े दस्तावेज फोटो और ऑटो डेबिट फॉर्म जरूरी होता है।

    किसान अपनी सुविधा के अनुसार मासिक तिमाही अर्धवार्षिक या वार्षिक किस्त चुन सकता है। किस्त की राशि पचपन रुपये से दो सौ रुपये प्रति माह के बीच होती है। आवेदन पूरा होने के बाद किसान को एक यूनिक पेंशन नंबर दिया जाता है। साठ साल की उम्र पूरी होने पर किसान को हर महीने तीन हजार रुपये की पेंशन मिलती है।

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  • Bhavantar Yojana MP: जावरा में किसानों को बड़ी सौगात 810 करोड़ की भावांतर राशि एक क्लिक में खातों में पहुंची

    मध्यप्रदेश के किसानों के लिए जावरा से एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जावरा में आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन में सोयाबीन उत्पादक किसानों को भावांतर राशि का वितरण किया। इस दौरान 3.77 लाख किसानों के बैंक खातों में 810 करोड़ रुपए सिंगल क्लिक से अंतरित किए गए। इसमें रतलाम जिले के 12 हजार से ज्यादा किसान भी शामिल रहे।

    भावांतर योजना किसानों के अधिकार का प्रतीक

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भावांतर केवल एक योजना नहीं बल्कि किसानों के प्रति सरकार का श्रद्धा भाव है। यह राशि किसानों का अधिकार है और उनकी समृद्धि के लिए सरकार के संकल्प को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 को अन्नदाताओं के कल्याण को समर्पित किया गया है और आने वाले समय में कृषि उत्सव मनाया जाएगा।

    रोजगार विकास और किसान कल्याण पर सरकार का फोकस

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के हर जरूरतमंद और हुनरमंद युवा को रोजगार दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि 32 लाख से अधिक किसानों को सोलर पंप दिए जाएंगे जिन पर 90 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा। लाड़ली बहनों को मिलने वाली सहायता राशि को भविष्य में तीन हजार रुपए तक बढ़ाने का भी भरोसा दिया गया।

    जावरा और रतलाम को मिले नए विकास कार्य

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने करीब 145 करोड़ रुपए लागत के 33 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। जावरा में आधुनिक आउटडोर और इंडोर स्टेडियम बनेगा। निराश्रित महिलाओं के लिए वन स्टॉप सेंटर बनाया जाएगा। हेरिटेज भवन निर्माण और पुराने स्कूल की मरम्मत के लिए दो दो करोड़ रुपए दिए जाएंगे। ग्राम शुजापुर और पिपलौदा में बालिका छात्रावास भी बनाए जाएंगे।

    कृषि और इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी नई ताकत

    मुख्यमंत्री ने बताया कि पार्वती कालीसिंध चंबल नदी जोड़ो परियोजना से रतलाम जिले को भी लाभ मिलेगा। मालवा क्षेत्र में पांच हजार करोड़ की लागत से नया फोर लेन हाईवे बनेगा जिससे क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी। किसानों की मांगों का पूरा ध्यान रखा जाएगा और जरूरत पड़ी तो मुआवजा भी बढ़ाया जाएगा।

  • सर्दियों में फूलों की खास देखभाल से बगीचे को रखें हमेशा हरा भरा

    सर्दियों का मौसम मन को सुकून देता है लेकिन यही मौसम बगीचे के फूलों के लिए कई मुश्किलें भी लेकर आता है। ठंड के साथ कोहरा और ओस पौधों की सेहत पर असर डालते हैं। खासतौर पर गमलों और घर की बागवानी में लगे फूल नमी के कारण जल्दी मुरझाने लगते हैं। अगर समय रहते सही देखभाल न की जाए तो फूल झड़ने लगते हैं और पौधों की बढ़वार रुक जाती है। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। थोड़ी सी समझदारी और रोज की हल्की देखभाल से आप अपने बगीचे को सर्दियों में भी खिलता हुआ रख सकते हैं।

    सही जगह पर रखें फूलों के गमले

    सर्दियों में फूलों को सही स्थान पर रखना सबसे जरूरी काम होता है। गमलों को ऐसी जगह रखें जहां सुबह की हल्की धूप जरूर पहुंचे। धूप मिलने से पौधों पर जमी ओस जल्दी सूख जाती है और फंगल बीमारी का खतरा कम हो जाता है। कोशिश करें कि पौधों को लंबे समय तक खुले में कोहरे के बीच न रखें। सही रोशनी मिलने से पौधों की ताकत बनी रहती है और फूल भी लंबे समय तक खिले रहते हैं।

    रात में पौधों को ढकना क्यों है जरूरी

    रात के समय कोहरा और ओस सबसे ज्यादा गिरती है। ऐसे में फूलों के गमलों को हल्के कपड़े या बोरी से ढक देना बहुत फायदेमंद होता है। ढकते समय ध्यान रखें कि हवा के लिए थोड़ी जगह जरूर रहे। अगर पूरी तरह बंद कर दिया गया तो अंदर नमी जमा हो सकती है जो पौधों के लिए नुकसानदायक होती है। यह छोटी सी आदत फूलों को ठंड के असर से काफी हद तक बचा लेती है।

    सर्दियों में पानी देने का सही तरीका

    ठंड के मौसम में पानी देने में जरा सी भी लापरवाही पौधों को नुकसान पहुंचा सकती है। जरूरत से ज्यादा पानी देने से जड़ें सड़ने लगती हैं। इसलिए हमेशा सुबह के समय ही पानी दें। दिन में धूप मिलने से मिट्टी की अतिरिक्त नमी सूख जाती है। शाम या रात में पानी देने से ओस के साथ नमी बढ़ जाती है जो फूलों के लिए सही नहीं होती।

    मिट्टी और खाद का संतुलन बनाए रखें

    सर्दियों में मिट्टी की देखभाल भी बहुत जरूरी होती है। समय समय पर मिट्टी को हल्का सा खोदते रहें ताकि हवा का संचार बना रहे। इससे मिट्टी में नमी संतुलित रहती है और पौधे स्वस्थ रहते हैं। जैविक खाद का सीमित मात्रा में उपयोग करें। इससे पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और वे ठंड को आसानी से सहन कर पाते हैं।

    पत्तियों पर दिखे बीमारी के संकेत तो तुरंत ध्यान दें

    अगर पौधों की पत्तियों पर सफेद धब्बे या फंगल संक्रमण नजर आए तो तुरंत उन पत्तियों को हटा दें। समय पर सफाई करने से बीमारी पूरे पौधे में नहीं फैलती। घरेलू उपाय के तौर पर नीम के तेल का हल्का घोल छिड़कना भी काफी फायदेमंद माना जाता है। इससे पौधे सुरक्षित रहते हैं और फूलों की सुंदरता बनी रहती है।

    थोड़ी सी सावधानी से सर्दियों में भी खिलता रहेगा बगीचा

    कुल मिलाकर सर्दियों में फूलों की देखभाल कोई मुश्किल काम नहीं है। सही समय पर धूप देना संतुलित पानी देना रात में ढकना और मिट्टी की हल्की देखभाल जैसे छोटे उपाय आपके बगीचे को ठंड में भी जीवंत बनाए रखते हैं। अगर आप नियमित रूप से इन आसान टिप्स को अपनाते हैं तो सर्दियों का मौसम भी आपके फूलों की खूबसूरती को कम नहीं कर पाएगा।

  • मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना 14वीं किस्त अपडेट, दिसंबर में आएंगे 2000 रुपये, एमपी किसानों को बड़ी राहत

    आज हम मध्यप्रदेश के किसानों के लिए आई एक राहत भरी खबर पर बात करने जा रहे हैं जो इस समय हर किसान के मन में उम्मीद जगा रही है पीएम किसान की 21वीं किस्त मिलने के बाद अब राज्य के किसान मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना की 14वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं यह योजना किसानों की आर्थिक मजबूती से सीधे जुड़ी हुई है और इसी वजह से इसकी हर किस्त किसानों के लिए खास बन जाती है

    मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना की 14वीं किस्त को लेकर बड़ी उम्मीद

    राज्य के किसानों के बीच इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना की 14वीं किस्त कब आएगी सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है लेकिन पिछले वर्षों के अनुभव को देखें तो दिसंबर का महीना इस योजना के लिए अहम माना जाता है पहले भी अधिकतर किस्तें इसी समय के आसपास किसानों के खातों में भेजी गई हैं इसी कारण माना जा रहा है कि इस बार भी दिसंबर के आखिरी दिनों में यह राशि किसानों को मिल सकती है

    दिसंबर में क्यों मानी जा रही है किस्त आने की संभावना

    कृषि विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार इस योजना के लिए किसानों का डेटा वेरिफिकेशन लगभग पूरा हो चुका है जब भी यह प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंचती है तब किस्त जारी होने की संभावना मजबूत हो जाती है अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो दिसंबर के अंत तक दो हजार रुपये की यह किस्त सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जा सकती है यह पैसा रबी फसल की तैयारी में किसानों के लिए बड़ी मदद साबित हो सकता है

    क्या है मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना की असली ताकत

    मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना को मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया था यह योजना पीएम किसान सम्मान निधि योजना की पूरक योजना है यानी जो किसान पीएम किसान योजना के पात्र हैं उन्हें ही इसका लाभ मिलता है इसके तहत राज्य सरकार हर साल किसानों को छह हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता देती है यह राशि खेती से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में किसानों का सहारा बनती है

    एमपी के किसानों को सालाना मिलते हैं पूरे बारह हजार रुपये

    मध्यप्रदेश के किसानों के लिए यह योजना इसलिए खास है क्योंकि उन्हें केंद्र और राज्य दोनों सरकारों से आर्थिक मदद मिलती है पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत केंद्र सरकार छह हजार रुपये देती है वहीं मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत राज्य सरकार भी छह हजार रुपये देती है इस तरह पात्र किसानों को हर साल कुल बारह हजार रुपये सीधे उनके खाते में मिलते हैं जो खेती और घर की जरूरतों के काम आते हैं

    कितने किसानों को मिलता है इस योजना का लाभ

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना का लाभ प्रदेश के करीब तिरासी लाख से ज्यादा किसानों को मिलता है सरकार हर साल इस योजना पर बड़ी राशि खर्च करती है इस बार भी 14वीं किस्त को लेकर सभी जरूरी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि पात्र किसानों को जल्द ही इसका लाभ मिलेगा

    कैसे जानें आपको मिलेगी 14वीं किस्त या नहीं

    अगर आप भी यह जानना चाहते हैं कि आपका नाम मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना की लाभार्थी सूची में है या नहीं तो आप घर बैठे इसकी जानकारी ले सकते हैं इसके लिए आपको राज्य सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर जाना होगा वहां योजना से जुड़े विकल्प में जाकर अपनी किसान संबंधी जानकारी भरनी होती है अगर आपका नाम पात्र किसानों की सूची में शामिल है तो आपको 14वीं किस्त का लाभ जरूर मिलेगा

    किसानों के लिए क्यों है यह किस्त बेहद जरूरी

    पीएम किसान की 21वीं किस्त के बाद मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना की 14वीं किस्त किसानों के लिए एक और सहारा बन सकती है खासकर रबी सीजन की तैयारी के समय यह राशि बीज खाद और अन्य जरूरतों को पूरा करने में मददगार होती है अब किसानों को बस सरकार की ओर से आधिकारिक तारीख की घोषणा का इंतजार है