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- Potato Crop Care: आलू की फसल बोने के बाद किसान का काम खत्म नहीं होता, असली मेहनत तो इसके बाद शुरू होती है।
- खासकर जब मौसम में बारिश कम हो और खेत में नमी जरूरत से कम रहे, तब आलू की फसल पर थोड़ा ज्यादा ध्यान देना पड़ता है।
- सही समय पर पानी, मिट्टी चढ़ाना, खरपतवार हटाना और बीमारी पर नजर रखना जरूरी है, तभी पौधे अच्छे से बढ़ेंगे और जमीन के अंदर आलू का आकार भी बढ़िया आएगा।
- किसान भाई अगर शुरुआत से खेत में नमी का संतुलन बनाए रखें, समय पर मिट्टी चढ़ाएं, खरपतवार हटाते रहें और पौधों में बीमारी के लक्षणों पर नजर रखें तो फसल को संभालना काफी आसान हो जाता है।
Potato Crop Care: आलू की फसल बोने के बाद किसान का काम खत्म नहीं होता, असली मेहनत तो इसके बाद शुरू होती है। खासकर जब मौसम में बारिश कम हो और खेत में नमी जरूरत से कम रहे, तब आलू की फसल पर थोड़ा ज्यादा ध्यान देना पड़ता है। सही समय पर पानी, मिट्टी चढ़ाना, खरपतवार हटाना और बीमारी पर नजर रखना जरूरी है, तभी पौधे अच्छे से बढ़ेंगे और जमीन के अंदर आलू का आकार भी बढ़िया आएगा।
आलू बो दिया है तो शुरुआत में इन बातों का रखें ध्यान
आलू लगाने के बाद सबसे पहले खेत की नमी पर नजर रखो। मिट्टी बिल्कुल सूखने लगे तो पौधे की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि खेत में जरूरत से ज्यादा पानी भर दिया जाए। आलू की फसल को पानी चाहिए, मगर खेत में लंबे समय तक पानी खड़ा रहना भी नुकसान कर सकता है। सिंचाई ऐसी रखनी चाहिए कि मिट्टी में नमी बनी रहे और जड़ों के आसपास हवा भी मिलती रहे।
पौधे निकलने के समय खेत को सूखने न दें
जब आलू (Potato Crop Care) के पौधे जमीन से निकलना शुरू करें, उस समय खेत की नमी खास मायने रखती है। अगर मिट्टी बहुत सूखी है तो पौधों की शुरुआती बढ़वार कमजोर पड़ सकती है। वहीं बहुत ज्यादा पानी देने से सड़न और दूसरी दिक्कतों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए किसान भाई खेत देखकर जरूरत के हिसाब से हल्की सिंचाई करें और एक ही बार में बहुत ज्यादा पानी देने से बचें।
आलू की फसल में मिट्टी चढ़ाना क्यों जरूरी है
जब पौधे थोड़े बड़े हो जाएं और उनकी बढ़वार ठीक दिखाई देने लगे, तब आलू की क्यारियों में मिट्टी चढ़ाने का काम किया जाता है। इससे जमीन के अंदर बनने वाले आलू अच्छी तरह ढके रहते हैं। आलू अगर मिट्टी से बाहर निकल आए तो धूप लगने से उसका रंग हरा पड़ सकता है। इसलिए समय पर मिट्टी चढ़ाना फसल की अच्छी देखभाल का जरूरी हिस्सा है।
खरपतवार को खेत में ज्यादा दिन न रहने दें
आलू के खेत (Potato Crop Care) में उगने वाली बेकार घास भी फसल का खाना, पानी और जगह लेती है। शुरुआत में ही खरपतवार को निकालते रहना बेहतर रहता है। खेत साफ रहेगा तो आलू के पौधों को बढ़ने के लिए जरूरी नमी और पोषक तत्व अच्छे से मिल पाएंगे। किसान अगर शुरुआत में ही खेत पर ध्यान दे दे तो बाद में खरपतवार का झंझट काफी कम हो जाता है।
पत्तियों का रंग बदल रहा है तो तुरंत खेत देखें
आलू के पौधे (Potato Crop Care) की पत्तियां फसल की हालत का इशारा देती हैं। अगर पत्तियों पर असामान्य दाग दिखाई दें, पत्तियां तेजी से सूखने लगें या पौधे की बढ़वार अचानक रुक जाए तो इसे नजरअंदाज न करें। ठंड, ज्यादा नमी और मौसम में अचानक बदलाव के दौरान आलू में झुलसा जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे समय खेत का लगातार निरीक्षण करना और बीमारी की सही पहचान के बाद ही कृषि विशेषज्ञ की सलाह से उपचार करना समझदारी है।
सिंचाई में जल्दबाजी भी नुकसान कर सकती है
आलू में किसान अक्सर सोचता है कि ज्यादा पानी मिलेगा तो आलू भी ज्यादा बड़ा होगा, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। जरूरत से ज्यादा पानी खेत में जलभराव पैदा कर सकता है और कंदों को नुकसान पहुंचा सकता है। दूसरी तरफ लंबे समय तक मिट्टी में नमी की कमी रहने से भी कंदों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। इसलिए मौसम, मिट्टी और फसल की अवस्था देखकर सिंचाई का फैसला करना ज्यादा सही रहता है।
आलू निकालने से पहले भी खेत पर नजर रखें
फसल तैयार होने के समय भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए। जब पौधों की पत्तियां और तने प्राकृतिक रूप से सूखने लगें तो किसान को फसल की पकने की अवस्था देखनी चाहिए। खुदाई बहुत जल्दी करने पर आलू की बाहरी त्वचा पूरी तरह मजबूत नहीं हुई हो सकती है, जिससे भंडारण के दौरान नुकसान बढ़ सकता है। खुदाई का सही समय फसल की अवस्था और स्थानीय मौसम को देखकर तय करना बेहतर रहता है।
हर साल आलू लगाते हैं तो खेत की मिट्टी को भी समझें
जो किसान हर साल आलू की खेती (Potato Crop Care)करते हैं, उनके लिए सिर्फ फसल की देखभाल ही नहीं बल्कि मिट्टी की सेहत पर ध्यान देना भी जरूरी है। एक ही खेत में बार-बार एक जैसी फसल लेने से पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ सकता है और कुछ रोगों का दबाव भी बढ़ सकता है। इसलिए मिट्टी की जांच के आधार पर खाद और उर्वरक की मात्रा तय करना ज्यादा फायदे का सौदा रहता है। खेत की जरूरत के हिसाब से फसल चक्र अपनाना भी अच्छी खेती का हिस्सा है।
आलू की अच्छी पैदावार के लिए सबसे जरूरी बात
आलू की खेती में कोई एक ऐसा तरीका नहीं है जिससे हर खेत में बराबर उत्पादन मिल जाए। मिट्टी कैसी है, मौसम कैसा चल रहा है, सिंचाई की सुविधा कितनी है और बीज की गुणवत्ता कैसी है, इन सभी बातों का असर फसल पर पड़ता है। किसान भाई अगर शुरुआत से खेत में नमी का संतुलन बनाए रखें, समय पर मिट्टी चढ़ाएं, खरपतवार हटाते रहें और पौधों में बीमारी के लक्षणों पर नजर रखें तो फसल को संभालना काफी आसान हो जाता है। Potato Crop Care

विशाल चौधरी Pravah Times के Editor हैं। वे कृषि और खेती-किसानी से जुड़ी खबरों व उपयोगी जानकारी पर विशेष रूप से काम करते हैं। उनका उद्देश्य किसानों तक सरल भाषा में खेती, फसल और कृषि से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचाना है।

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