Category: Indore news

  • सांवेर को मिली 133 करोड़ की सड़क परियोजना की सौगात, 50 से अधिक गांवों के 1 लाख लोग होंगे लाभान्वित

    मध्यप्रदेश के सांवेर क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है। लंबे समय से ग्रामीण इलाकों में सड़क निर्माण की मांग की जा रही थी और अब यह सपना सच होता नजर आ रहा है। जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट के प्रयासों से 133 करोड़ रुपये की लागत से 78 किलोमीटर लंबाई में 15 नई सड़कों की स्वीकृति मिल गई है। इस परियोजना से सांवेर के 50 से अधिक गांवों के करीब एक लाख लोगों को सीधा लाभ होगा।

    सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखकर हुआ फैसला

    सांवेर क्षेत्र की सड़क परियोजना को सिंहस्थ 2028 के दृष्टिकोण से भी बेहद अहम माना जा रहा है। इस दौरान क्षेत्र में आने-जाने वाले लाखों श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के लिए बेहतर सड़कें यातायात का दबाव कम करने में सहायक होंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने वित्तीय व्यय समिति की 292वीं बैठक में इस परियोजना को मंजूरी दी है।

    किन मार्गों का होगा विकास

    नए स्वीकृत मार्गों में चन्द्रावतीगंज से पोटलोद खेड़ी बलगारा- दयाखेड़ा-चित्तौड़ा मार्ग, कांकरिया बोर्डिया से जम्बूडी सरवर मार्ग, शिवनी से बावल्याखुर्द, अजनोद से पालकांकरिया, पुवार्डाहप्पा से हतुनिया, लालाखेड़ा से खण्डेलवाल गोदाम बायपास, पंचौला जेल से मंडोत मार्ग, हांसाखेड़ी से बरोदापंथ, चित्तौड़ा गौशाला मार्ग और गोगाखेड़ी से धतुरिया सहित अन्य सड़कें शामिल हैं। इन सड़कों के निर्माण से ग्रामीणों को शहर और आसपास के क्षेत्रों से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।

    ग्रामीणों के लिए नई उम्मीद

    यह सड़क परियोजना न केवल सांवेर क्षेत्र के लोगों के लिए सुविधा लेकर आएगी बल्कि शिक्षा, रोजगार और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति देगी। ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग हो रही थी और अब यह स्वीकृति ग्रामीणों के लिए किसी सौगात से कम नहीं है। मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने इस परियोजना को मंजूरी देने के लिए मुख्यमंत्री और लोक निर्माण मंत्री का आभार व्यक्त किया है।

    Disclaimer: यह जानकारी विभिन्न सरकारी घोषणाओं और स्वीकृतियों पर आधारित है। परियोजना की प्रगति और निर्माण कार्य समय-समय पर बदल सकते हैं।

  • उज्जैन और नर्मदापुरम को मिले बड़े तोहफे, प्रदेश में विकास की नई रफ्तार

    आज हम आपके साथ एक ऐसी खुशखबरी साझा करने जा रहे हैं जो पूरे मध्यप्रदेश के लिए गर्व और उम्मीद का नया अध्याय लेकर आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के विकास को नई उड़ान देने वाले कई बड़े फैसले लिए गए। इनमें उज्जैन, इंदौर और नर्मदापुरम जैसे अहम शहरों को करोड़ों रुपये की परियोजनाओं की सौगात मिली है।

    इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड मार्ग बनेगा आधुनिक एक्सप्रेस वे

    मंत्रि-परिषद ने इंदौर से उज्जैन को जोड़ने वाले ग्रीन फील्ड एक्सेस कंट्रोल मार्ग को हरी झंडी दी है। 48 किलोमीटर लंबाई वाले इस आधुनिक मार्ग का निर्माण चार लेन के साथ किया जाएगा और दोनों ओर सर्विस रोड भी होगी। इस परियोजना पर लगभग 2 हजार 935 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसे हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल के तहत तैयार किया जाएगा। इस हाईवे में 34 अंडरपास, 2 फ्लाईओवर, एक आरओबी और कई पुलों का निर्माण होगा जिससे आने वाले समय में सफर बेहद आसान और सुरक्षित बन जाएगा।

    उज्जैन को मिला नया रेलवे ओवर ब्रिज

    सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में हरिफाटक रेलवे क्रॉसिंग पर एक नया चार लेन ओवर ब्रिज बनने जा रहा है। करीब 980 मीटर लंबाई वाले इस ओवरब्रिज पर 371 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके बन जाने से ट्रैफिक जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी और श्रद्धालुओं व आम नागरिकों को सुगम आवाजाही का लाभ मिलेगा।

    नर्मदापुरम-टिमरनी मार्ग होगा और बेहतर

    मंत्रि-परिषद ने नर्मदापुरम-टिमरनी मार्ग को भी नया रूप देने की स्वीकृति दी है। लगभग 72 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर 972 करोड़ रुपये की लागत से दो लेन सड़क बनाई जाएगी। इसमें बड़े और मध्यम पुलों के साथ अंडरपास और जंक्शन सुधार भी होंगे। यह सड़क नर्मदापुरम से टिमरनी तक सफर को पहले से ज्यादा आसान और सुरक्षित बना देगी।

    जल जीवन मिशन को भी मिली नई गति

    बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की योजनाओं पर भी बड़ा फैसला लिया गया। जल जीवन मिशन के तहत पहले से चल रही हजारों योजनाओं की लागत में वृद्धि को मंजूरी दी गई है। अब तक लाखों परिवारों को नल-जल कनेक्शन मिल चुके हैं और आने वाले समय में और भी गांवों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का काम तेज़ी से होगा।

    इन सभी फैसलों से साफ है कि प्रदेश में सड़क, पुल और जल जैसी बुनियादी सुविधाओं पर सरकार गंभीरता से काम कर रही है। आने वाले वर्षों में इन योजनाओं के पूरे हो जाने से आम नागरिकों के जीवन में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

    Disclaimer: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी सरकारी घोषणाओं और मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णयों पर आधारित है। किसी भी प्रकार के निवेश या आधिकारिक कदम के लिए संबंधित विभाग की आधिकारिक सूचना को ही मानें।

  • ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की बड़ी छलांग : सौर ऊर्जा में 30% वृद्धि, 51 हजार से अधिक नए पदों से बिजली कंपनियों को मिला जीवनदान

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वर्तमान युग में विद्युत (ऊर्जा) का महत्व जल और वायु के समान है। गर्व की बात है कि मध्यप्रदेश न केवल उद्योगों और किसानों की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है, बल्कि देश की राजधानी दिल्ली की मेट्रो भी प्रदेश की बिजली से संचालित हो रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2047 तक प्रदेश को बिजली की कमी से मुक्त करने और ऊर्जा के क्षेत्र में सरप्लस बनाए रखने की दिशा में ठोस योजनाएँ बनाई जा रही हैं। प्रदेश में सभी उपलब्ध संसाधनों से बिजली उत्पादन किया जा रहा है और क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। पिछले 11 वर्षों में सौर ऊर्जा उत्पादन में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव रवीन्द्र भवन में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में 6 बिजली कंपनियों के नवनियुक्त 1060 कार्मिकों को नियुक्ति-पत्र प्रदान कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन कर समारोह का शुभारंभ किया और औषधीय पौधे से स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रदेश की बिजली कंपनियों में 51 हजार से अधिक नए पदों को भरा जाएगा। किसानों को इस वर्ष लगभग 20,267 करोड़ रुपये की सब्सिडी और एक करोड़ से अधिक परिवारों को 6445 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई है।

    उन्होंने बताया कि “पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना” को सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है। सांची को प्रदेश की पहली सोलर सिटी घोषित किया गया है और 32 लाख किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रदेश में विभिन्न विभाग भी अपनी ऊर्जा उत्पादन की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बिजली कंपनियों की उपलब्धियों पर केंद्रित प्रदर्शनी का शुभारंभ किया और संगठनों के प्रतिनिधियों से संवाद भी किया। कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा बड़ी संख्या में नियुक्तियों की स्वीकृति देकर बिजली कंपनियों को जीवनदान मिला है। अब किसानों को रात में सिंचाई करने की मजबूरी नहीं होगी, बल्कि दिन में बिजली उपलब्ध कराई जाएगी।

    अपर मुख्य सचिव ऊर्जा श्री नीरज मंडलोई ने कहा कि ऊर्जा विभाग सौर ऊर्जा और पारंपरिक ऊर्जा दोनों क्षेत्रों में नवाचारों के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में 51,700 नए स्थाई पदों की स्वीकृति से ऊर्जा क्षेत्र को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने बताया कि विभाग का लक्ष्य आने वाले उद्योगपतियों को हरसंभव सहयोग देना है।

    कार्यक्रम में महापौर श्रीमती मालती राय, विधायक श्री रामेश्वर शर्मा एवं श्री विष्णु खत्री सहित अनेक अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री का ऊर्जा क्षेत्र में किए गए योगदान पर पगड़ी, अंगवस्त्रम और प्रशस्ति पत्र भेंट कर अभिनंदन किया गया

  • ग्वालियर में रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव : पर्यटन निवेश, सांस्कृतिक धरोहर और क्षेत्रीय विकास को मिलेगा नया आयाम

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 29 और 30 अगस्त को ग्वालियर में आयोजित होने वाले रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में निवेशकों से सीधा संवाद करेंगे और प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं से अवगत कराएँगे। इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य ग्वालियर–चंबल एवं सागर संभाग में पर्यटन निवेश को प्रोत्साहित करना और प्रदेश में पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ नई संभावनाओं को साकार करना है। यह आयोजन ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में होगा, जिसमें केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर विशेष रूप से शामिल होंगे।

    पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने बताया कि यह कॉन्क्लेव पर्यटन व्यवसायियों, टूर ऑपरेटर्स और होटल इंडस्ट्री के बीच सहयोग और साझेदारी को मजबूत करेगा। “Timeless Gwalior: Echoes of Culture, Spirit of Legacy” थीम पर आधारित यह आयोजन पर्यटन निवेश, सांस्कृतिक धरोहर, अनुभवात्मक पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति और प्रबंध संचालक टूरिज्म बोर्ड श्री शिव शेखर शुक्ला ने जानकारी दी कि कॉन्क्लेव में होटल, रिसोर्ट, वेलनेस और ईको-टूरिज्म सेक्टर से जुड़े निवेशकों को लेटर ऑफ अवॉर्ड (LoA) प्रदान किए जाएंगे। साथ ही, विभिन्न एमओयू और अनुबंध भी होंगे। इन परियोजनाओं से स्थानीय समुदाय को पर्यटन आधारित रोजगार मिलेगा और क्षेत्रीय विकास को स्थायित्व प्राप्त होगा। कॉन्क्लेव में विशेष टूरिज्म प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिसमें मध्यप्रदेश के विविध पर्यटन स्थलों, हॉस्पिटैलिटी ब्रांड्स, होम-स्टे, रिसॉर्ट्स, हैंडलूम/हैंडिक्राफ्ट, साहसिक गतिविधियाँ और सांस्कृतिक धरोहरों को दर्शाने वाले स्टॉल शामिल होंगे।

    श्री शुक्ला ने बताया कि कॉन्क्लेव में दो महत्वपूर्ण पैनल डिस्कशन होंगे। पहला सत्र “Tourism as a Cultural Bridge – Branding Gwalior and Heartland of MP” विषय पर होगा, जिसमें ग्वालियर की सांस्कृतिक धरोहर, शास्त्रीय संगीत और स्थापत्य कला को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की रणनीतियों पर चर्चा की जाएगी। दूसरा सत्र “Gwalior and Chambal Rising – Inbound Appeal through Heritage, Luxury and Experience” विषय पर केंद्रित होगा, जिसमें विरासत, लग्ज़री स्टे, डेस्टिनेशन वेडिंग और अनुभवात्मक पर्यटन के नए आयामों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

  • इंदौर में पाँच दिवसीय कृषि सखी प्रशिक्षण सम्पन्न, महिलाओं ने सीखी प्राकृतिक खेती की तकनीकें

    आत्मा परियोजना और कृषि महाविद्यालय इंदौर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “कृषि सखी” कार्यक्रम के अंतर्गत पाँच दिवसीय प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण का समापन समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।

    समारोह में मुख्य अतिथि सांसद श्री शंकर लालवानी ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल उत्पादन बढ़ाने का साधन नहीं, बल्कि एक ऐसी जीवनशैली है, जो मिट्टी, जल और पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए किसानों की आमदनी बढ़ा सकती है। उन्होंने कहा कि “कृषि सखी” जैसे प्रयास ग्रामीण महिलाओं को नेतृत्व प्रदान करते हैं और स्थायी परिवर्तन की नींव रखते हैं।

    कृषि महाविद्यालय इंदौर के डीन डॉ. भारत सिंह ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्राकृतिक खेती की महत्ता बताई। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग की चुनौतियों के बीच प्राकृतिक खेती एक प्रभावी समाधान है।

    परियोजना संचालक (आत्मा) शर्ली थॉमस ने कहा कि कृषि सखियाँ अब सिर्फ प्रशिक्षित महिलाएँ नहीं रहेंगी, बल्कि अपने गाँवों में प्राकृतिक कृषि की पथप्रदर्शक बनेंगी। वहीं नोडल अधिकारी डॉ. दीक्षा ने बताया कि प्रशिक्षण को इस तरह तैयार किया गया था कि महिलाएँ प्राकृतिक खेती को न केवल समझें, बल्कि उसे व्यवहार में भी लागू कर सकें।

    कार्यक्रम में श्री नवीन शुक्ला (डीपीएम) और श्रीमती अल्पना वर्मा (डीपीडी) विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने महिला सहभागिता और प्रशिक्षण के आयोजन की सराहना की। समापन अवसर पर प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली कृषि सखियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण उनके लिए ज्ञानवर्धक और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला साबित हुआ।

    कार्यक्रम का संचालन डॉ. संजय दुबे ने किया और आभार प्रदर्शन श्री अमर दीक्षित द्वारा किया गया।

  • राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना का शुभारंभ मध्यप्रदेश से, निवेश और विकास की नई राह पर प्रदेश

    CM Mohan Yadav ने कहा कि बीते दो दशकों में मध्यप्रदेश ने विकास के हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और हम प्रदेश को देश का “मॉडल स्टेट” बनाने की दिशा में तेजी से कार्य कर रहे हैं। नई दिल्ली में आयोजित एक मीडिया समूह के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश को “न्यू फूड बास्केट” बनाने का लक्ष्य रखा गया है। किसानों की मेहनत से राज्य के गोदाम अनाज से भर गए हैं और अब फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि देश की महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना का शुभारंभ मध्यप्रदेश से हुआ है। लगभग एक लाख करोड़ रुपए की केन-बेतवा परियोजना बुंदेलखंड क्षेत्र के सभी जिलों को सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराएगी। वहीं 70 हजार करोड़ रुपए की पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना से मालवा और चंबल अंचल को स्थायी जल सुविधा मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन में उज्जैन की पहचान तेजी से बढ़ी है। श्री महाकाल लोक के निर्माण के बाद हर साल करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन पहुंच रहे हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है। सिंहस्थ-2028 की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। इसके साथ ही स्वास्थ्य पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मेडिकल कॉलेजों का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। सरकार पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज खोलने हेतु निवेशकों को सिर्फ 1 रुपये में जमीन और अस्पताल उपलब्ध करवा रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में एयर कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए नई एविएशन पॉलिसी लागू की गई है। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए एयर एम्बुलेंस और हेलीकॉप्टर सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही इंदौर और भोपाल मेट्रो परियोजनाओं के बाद जबलपुर और ग्वालियर में भी मेट्रो शुरू करने की योजना है।

    उद्योगों को लेकर उन्होंने बताया कि फरवरी 2025 में भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 30.77 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। राज्य सरकार निवेशकों को इंसेंटिव, बिजली-पानी में छूट, भूमि आवंटन और रोजगार आधारित सहायता जैसी सुविधाएं दे रही है। बीते एक साल में 285 उद्योगों को भूमि आवंटन किया गया है और कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हो चुका है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश का बजट 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक है और अगले पांच वर्षों में इसे दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लाड़ली बहना योजना में रोजगार आधारित प्रोत्साहन भी जोड़ा गया है। श्रम कानूनों में सुधार कर महिलाओं को नाइट शिफ्ट और लचीले कार्य घंटे की सुविधा दी गई है।

    उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश का हृदय प्रदेश है, जहां से 247 नदियां निकलती हैं। यहां जंगल, खनिज, पर्यटन और कृषि की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश ने 66 हजार करोड़ रुपए का निर्यात किया है और 6 प्रतिशत की विकास दर हासिल की है। बिजली उत्पादन में भी राज्य आत्मनिर्भर है और दिल्ली की मेट्रो तक मध्यप्रदेश की बिजली से चल रही है।

    मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि राज्य सरकार सभी सेक्टर्स में तेजी से आगे बढ़ रही है। उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और अधोसंरचना में प्रगति के साथ मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में शामिल हो चुका है।

  • इंदौर से शुरू होगा संभाग स्तरीय स्वास्थ्य शिविर, ग्रामीणों को मिलेगी निःशुल्क जांच और उपचार सुविधा

    संभाग स्तरीय स्वास्थ्य शिविर इंदौर: संभागायुक्त श्री दीपक सिंह की पहल पर इंदौर संभाग में इस सप्ताह से संभाग स्तरीय स्वास्थ्य शिविरों की श्रृंखला शुरू होने जा रही है। इसका पहला आयोजन 23 अगस्त को इंदौर जिले के होलकर विज्ञान महाविद्यालय में होगा। शिविर सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा।

    संभागायुक्त ने बताया कि पिछले वर्ष आयोजित स्वास्थ्य शिविरों को जनता का उत्साहजनक सहयोग मिला था। इस बार भी शिविरों को सफल बनाने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से मरीजों को पहले से चिन्हित कर उनकी सूची स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध करा दी जाएगी।

    शिविर में उच्च रक्तचाप, कैंसर, डायबिटीज, दंत और नेत्र रोगों सहित कई बीमारियों की जांच की जाएगी। मरीजों को जांच के बाद निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। इस बार सुविधा बढ़ाने के लिए सोनोग्राफी मशीनों की संख्या भी बढ़ाई गई है। शिविर में सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों के साथ-साथ निजी अस्पतालों और आयुष महाविद्यालयों के विशेषज्ञ भी अपनी सेवाएं देंगे।

    अलग-अलग जिलों में होंगे शिविर

    इंदौर के बाद 24 अगस्त को खरगोन जिले के भगवानपुरा, 30 अगस्त को खंडवा जिले के खालवा और 31 अगस्त को धार जिले के तिरला में शिविर आयोजित होंगे।
    सितंबर माह में क्रमशः बड़वानी, धार, झाबुआ, खंडवा और खरगोन जिलों के विभिन्न जनपदों में स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे।
    इसी तरह अक्टूबर और नवंबर में भी बुरहानपुर, अलीराजपुर और इंदौर जिले के अलग-अलग स्थानों पर शिविरों का आयोजन होगा।

    इस अभियान का उद्देश्य है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों को स्वास्थ्य जांच और उपचार की नि:शुल्क सुविधा आसानी से उपलब्ध हो सके

  • इंदौर संभाग ने सम्पूर्णता अभियान में चमकाया नाम, छह जिलों को मिले 10 मेडल

    महिलाओं के आर्थिक विकास, स्वास्थ्य और कृषि जैसे छह प्रमुख संकेतकों (इंडिकेटर्स) में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर इंदौर संभाग के छह जिलों को विशेष सम्मान प्राप्त हुआ है। सम्पूर्णता अभियान के तहत इन जिलों ने शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करते हुए अपनी सक्रियता और कार्यकुशलता का परिचय दिया। इसी उपलब्धि के लिए भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पदक और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर अधिकारियों को सम्मानित किया।

    महिलाओं और जनजातीय समाज पर विशेष फोकस

    केंद्र और राज्य शासन के संयुक्त प्रयासों से 4 जुलाई से 30 सितम्बर तक आकांक्षी जनपदों में चलाए गए इस विशेष अभियान में महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण, आर्थिक सशक्तिकरण और कृषि आधारित गतिविधियों पर खास ध्यान दिया गया। इसके अलावा जनजातीय समाज में हाई बीपी और मधुमेह की जांच जैसी स्वास्थ्य सेवाओं को भी प्राथमिकता दी गई।

    10 मेडल्स में इंदौर संभाग की बड़ी जीत

    इंदौर संभाग ने कुल 10 मेडल्स हासिल किए, जिनमें 3 गोल्ड, 1 सिल्वर और 6 ब्रॉन्ज शामिल हैं।

    • गोल्ड मेडल – बड़वानी जिले की पाटी जनपद, धार जिले की तिरला जनपद और खंडवा जिले की छैगांव जनपद

    • सिल्वर मेडल – अलीराजपुर जिले की कट्ठीवाड़ा जनपद

    • ब्रॉन्ज मेडल – झाबुआ जिले की मेघनगर, रामा और राणापुर जनपद, झाबुआ की थांदला जनपद तथा खरगोन जिले की भगवानपुरा और झिरन्या जनपद

    कलेक्टर्स को मिली विशेष सराहना

    कार्यक्रम में तात्कालिक और वर्तमान दोनों कलेक्टर्स को बुलाकर सम्मानित किया गया। इस दौरान मेडल्स के साथ स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किए गए।

    • बड़वानी जिले के तत्कालीन कलेक्टर डॉ. राहुल हरिदास फटिंग और वर्तमान कलेक्टर गुंचा सनोबर।

    • खंडवा जिले के तत्कालीन कलेक्टर अनूप कुमार सिंह और वर्तमान कलेक्टर ऋषव गुप्ता।

    • धार जिले के कलेक्टर प्रियंक मिश्रा।

    इन सभी को गोल्ड मेडल प्रदान कर उनकी टीम भावना और उत्कृष्ट कार्यप्रणाली की सराहना की गई।

    सम्भागायुक्त ने दी बधाई

    इंदौर सम्भागायुक्त दीपक सिंह ने छह जिलों के कलेक्टर्स और उनकी टीम को बधाई देते हुए कहा कि इस अभियान से यह स्पष्ट है कि यदि योजनाओं को गंभीरता और समर्पण के साथ लागू किया जाए तो आकांक्षी जनपदों में भी अभूतपूर्व विकास संभव है।

  • Indore News: स्वच्छता नियम तोड़ने वालों पर निगम की सख्ती, 32 हजार का जुर्माना वसूला

    शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए नगर निगम लगातार सख्त कदम उठा रहा है। आयुक्त शिवम वर्मा के निर्देशानुसार निगम दल द्वारा प्रतिदिन अलग-अलग क्षेत्रों में निगरानी की जा रही है और गंदगी फैलाने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में रविवार को निगम की टीम ने शहर के कई हिस्सों में चालानी अभियान चलाया। इस दौरान कुल 32 हजार रुपये का स्पॉट फाइन वसूला गया।

    अभियान का नेतृत्व अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया ने किया। उनके निर्देशन में झोन क्रमांक 13 के अंतर्गत राजीव गांधी चौराहा स्थित वाइन शॉप के बाहर फैली गंदगी की शिकायत पर मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की गई। सीएसआई सौरभ साहू और सहायक सीएसआई अनिकेत सिंह ने निरीक्षण के बाद वाइन शॉप संचालक पर 10 हजार रुपये और वहीं स्थित अहाते के मालिक पर 2 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। इसके अलावा नियमों का पालन न करने वाले चार ठेले वालों पर भी 10 हजार रुपये का चालान किया गया।

    नगर निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शहर को साफ-सुथरा रखने के लिए किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निगम की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा डालने वालों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जा रहे हैं।

    साथ ही, निगम ने नागरिकों से अपील की है कि वे गंदगी फैलाने से बचें और शहर को स्वच्छ रखने में सहयोग करें। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में भी इस तरह की कार्रवाई और अधिक सख्ती के साथ जारी रहेगी। निगम का लक्ष्य है कि इंदौर की स्वच्छता व्यवस्था और भी बेहतर हो और शहर स्वच्छ भारत मिशन में अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रखे।

  • इंदौर: पंचायत उन्नति सूचकांक 2022-23 में उत्कृष्ट कार्य करने वाली ग्राम पंचायतों को किया गया सम्मानित

    Indore: जिला पंचायत इंदौर में सोमवार को पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI 1.0) वर्ष 2022-23 का विमोचन एवं प्रचार-प्रसार के लिए जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीना सतीश मालवीय की अध्यक्षता में निर्धारित सूचकांकों पर उत्कृष्ट कार्य करने वाली ग्राम पंचायतों को सम्मानित किया गया। प्रथम पुरस्कार 11 हजार रुपये ग्राम पंचायत अजनोद (सांवेर) को, द्वितीय पुरस्कार 7100 रुपये ग्राम पंचायत दर्जी कराडिया (सांवेर) को और तृतीय पुरस्कार 5100 रुपये ग्राम पंचायत चित्तोड़ा (सांवेर) को प्रदान किया गया। इसके अलावा डांसरी, रंगवासा, लसुडिया परमार, मकोडिया, गुरान और नागपुर सहित कई पंचायतों को 2100 रुपये और अन्य पंचायतों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

    मुख्य कार्यपालन अधिकारी सिद्धार्थ जैन ने कहा कि यह सम्मान केवल उपलब्धि नहीं बल्कि अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणा और चुनौती है। कार्यक्रम में अधिकारियों ने बताया कि पंचायत उन्नति सूचकांक 9 विषयों पर आधारित है और इसका उद्देश्य पंचायतों को सशक्त एवं पारदर्शी बनाना है। कार्यशाला में जिलेभर से सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

    Live एशिया कप अपडेट : 19 अगस्त 2025, 12:02 PM