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- Chana Sowing: मध्य प्रदेश में इस बार कई इलाकों में बारिश कम हुई है।
- खेतों में पानी कम होने के कारण किसान गेहूं की फसल को लेकर चिंता में हैं।
- गेहूं की जगह चना लगाने की तैयारी
- अब आने वाले दिनों में मौसम और खेत में पानी की हालत कैसी रहती है, इसी के हिसाब से चने की बुवाई और रबी की खेती की तस्वीर साफ होगी।
Chana Sowing: मध्य प्रदेश में इस बार कई इलाकों में बारिश कम हुई है। इसका असर अब रबी की खेती पर भी दिखने लगा है। खेतों में पानी कम होने के कारण किसान गेहूं की फसल को लेकर चिंता में हैं। जिन किसानों के पास सिंचाई के साधन कम हैं, वे अब ऐसी फसल लगाने की सोच रहे हैं जिसे कम पानी में भी तैयार किया जा सके। इसी वजह से कई किसान इस बार गेहूं की जगह चना लगाने का मन बना चुके हैं।
कम बारिश ने बदला किसानों का प्लान
किसानों का कहना है कि इस बार खेत में नमी पहले जैसी नहीं है। अगर आगे भी पानी की कमी रहती है तो गेहूं की फसल को संभालना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में किसान अपनी जमीन और पानी की हालत देखकर फसल चुन रहे हैं। कई गांवों में किसान आपस में चने की खेती को लेकर बात कर रहे हैं और बुवाई की तैयारी में जुटने लगे हैं। Chana Sowing
जिन किसानों के पास पानी की अच्छी सुविधा है, वे गेहूं की खेती कर सकते हैं, लेकिन कम पानी वाले खेतों में किसान इस बार चने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। किसानों का मानना है कि जब पानी कम है तो ऐसी फसल लगाना ठीक रहेगा जिसे खेत की बची हुई नमी के सहारे आगे बढ़ाया जा सके। इसी सोच के चलते कुछ किसान गेहूं का रकबा कम करके चने की खेती बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। Chana Sowing
कम पानी में कौन सा चना लगाया जा सकता है
कम बारिश और पानी की कमी वाले इलाकों में किसान चने की ऐसी किस्म देख रहे हैं जो इन हालात में ठीक रह सके। Pusa JG 16 का नाम ऐसी ही किस्मों में आता है। इसे ऐसे इलाकों के लिए तैयार किया गया है जहां बारिश कम होने या सूखे जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। मध्य प्रदेश भी इसके लिए बताए गए इलाकों में शामिल है। Chana Sowing
JG 14 भी किसानों के लिए एक विकल्प
मध्य प्रदेश में JG 14 चने की खेती करने वाले किसानों के बीच जाना-पहचाना नाम है। कम पानी और देर से बुवाई जैसी स्थिति में भी इस किस्म का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि बीज खरीदने से पहले किसान अपने इलाके के हिसाब से इसकी सही जानकारी जरूर लें, क्योंकि हर खेत और हर जगह का मौसम एक जैसा नहीं होता। Chana Sowing
RVG 202 और RVG 203 पर भी दे सकते हैं ध्यान
चना लगाने की तैयारी कर रहे किसान RVG 202 और RVG 203 के बारे में भी जानकारी ले सकते हैं। इन किस्मों को मध्य प्रदेश की खेती को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। सूखे और ज्यादा गर्मी वाली हालत में इनके इस्तेमाल की जानकारी भी दी गई है। किसान अपने खेत की मिट्टी और पानी को देखते हुए इनमें से सही किस्म चुन सकते हैं।
चना बोने से पहले खेत की हालत जरूर देखें
सिर्फ यह सोचकर कि चना कम पानी में हो जाता है, किसी भी खेत में तुरंत इसकी बुवाई नहीं करनी चाहिए। किसान को पहले यह देखना चाहिए कि खेत में कितनी नमी है, मिट्टी कैसी है और आगे पानी की क्या व्यवस्था रहेगी। अगर खेत में बिल्कुल नमी नहीं है तो बुवाई के समय भी परेशानी हो सकती है। इसलिए बीज डालने से पहले खेत की हालत देखना बहुत जरूरी है।
सही बीज लेने में जल्दबाजी न करें
किसानों को बीज खरीदते समय भी सावधानी रखनी चाहिए। अपने इलाके में कौन सी किस्म अच्छी रहती है और किस समय उसकी बुवाई करना ठीक रहता है, इसकी जानकारी आसपास के कृषि जानकार या कृषि विभाग से ली जा सकती है। सही बीज और सही समय पर बुवाई होने से किसान को फसल संभालने में आसानी रहती है। Chana Sowing
पानी कम है तो खेती का तरीका भी बदलना होगा
इस बार कम बारिश के कारण किसानों के सामने खेती को लेकर नई परेशानी खड़ी हुई है। ऐसे में किसान पानी को देखते हुए फसल का फैसला कर रहे हैं। कई किसान गेहूं की जगह चने की ओर जा रहे हैं। अब आने वाले दिनों में मौसम और खेत में पानी की हालत कैसी रहती है, इसी के हिसाब से चने की बुवाई और रबी की खेती की तस्वीर साफ होगी। Chana Sowing

विशाल चौधरी Pravah Times के Editor हैं। वे कृषि और खेती-किसानी से जुड़ी खबरों व उपयोगी जानकारी पर विशेष रूप से काम करते हैं। उनका उद्देश्य किसानों तक सरल भाषा में खेती, फसल और कृषि से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचाना है।

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