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- MP MLA: जबलपुर (प्रवाह टाइम्स)।
- मध्य प्रदेश में अब सांसदों और विधायकों के खिलाफ दर्ज क्रिमिनल केस वापस लेना आसान नहीं होगा।
- हाई कोर्ट ने फैसला दिया है कि इन मामलों को वापस लेने की अर्जी पर अब सिर्फ हाई कोर्ट ही फैसला करेगा।
- कोर्ट ने साफ कहा कि सभी स्पेशल अदालतों को अपने पास पेंडिंग केस वापसी की अर्जी को हाई कोर्ट भेजना होगा।
MP MLA: जबलपुर (प्रवाह टाइम्स)। मध्य प्रदेश में अब सांसदों और विधायकों के खिलाफ दर्ज क्रिमिनल केस वापस लेना आसान नहीं होगा। हाई कोर्ट ने फैसला दिया है कि इन मामलों को वापस लेने की अर्जी पर अब सिर्फ हाई कोर्ट ही फैसला करेगा। ट्रायल कोर्ट के पास अब यह पावर नहीं होगा।
हाई कोर्ट ही करेगा सुनवाई
चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की बेंच ने यह निर्देश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि सभी स्पेशल अदालतों को अपने पास पेंडिंग केस वापसी की अर्जी को हाई कोर्ट भेजना होगा। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की दिसंबर 2025 की गाइडलाइन के हिसाब से लिया गया है।
क्या है केस वापसी का विवाद
सुनवाई के दौरान यह सवाल उठा था कि क्या सीआरपीसी की धारा 321 के तहत स्पेशल कोर्ट खुद से केस वापस लेने की परमिशन दे सकते हैं या नहीं। कोर्ट ने इसी कानूनी उलझन को सुलझाते हुए यह कड़ा कदम उठाया है। इस मामले में अगली सुनवाई 16 नवंबर को तय की गई है।
कितने केस हैं पेंडिंग
एमपी-एमएलए के खिलाफ चल रहे केसों की निगरानी के लिए कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल बीडी सिंह भी मौजूद थे। अलग-अलग रिपोर्ट के मुताबिक, अभी ऐसे 17 से 19 मामले हैं जो केस वापसी के लिए पेंडिंग हैं। कोर्ट ने अब इन सभी पेंडिंग आवेदनों पर अपनी निगरानी बना ली है।
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विनोद किशन Pravah Times के लेखक हैं। वे खास तौर पर जबलपुर की स्थानीय खबरों, न्यायालय से जुड़े मामलों, प्रशासनिक गतिविधियों और जनहित के मुद्दों पर कंटेंट लिखते हैं।


