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काले हिरण के शिकार का मामला पहुंचा हाईकोर्ट, जमानत नहीं मिली; अब रोज होगी सुनवाई, खाल-ट्रॉफी नेटवर्क की तलाश तेज

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Blackbuck poaching case Indore
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  • Blackbuck poaching case Indore: इंदौर से सामने आए काले हिरण के शिकार और कथित मांस तस्करी के मामले में अदालत ने आरोपितों को फिलहाल राहत नहीं दी है।
  • लंबे समय से जेल में बंद मुख्य आरोपित की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने मामले की गंभीरता और ट्रायल में हो रही देरी को ध्यान में रखा।
  • अदालत ने अब सुनवाई की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए हैं, जबकि जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि शिकार के बाद वन्यजीवों के दूसरे हिस्सों को कहां और किस नेटवर्क के जरिए पहुंचाया जाता था।
  • शुरुआती कार्रवाई के बाद मामला सामान्य वन्यजीव अपराध से आगे बढ़ा।
इस लेख से स्वतः तैयार किया गया सार।

Blackbuck poaching case Indore: इंदौर से सामने आए काले हिरण के शिकार और कथित मांस तस्करी के मामले में अदालत ने आरोपितों को फिलहाल राहत नहीं दी है। लंबे समय से जेल में बंद मुख्य आरोपित की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने मामले की गंभीरता और ट्रायल में हो रही देरी को ध्यान में रखा। अदालत ने अब सुनवाई की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए हैं, जबकि जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि शिकार के बाद वन्यजीवों के दूसरे हिस्सों को कहां और किस नेटवर्क के जरिए पहुंचाया जाता था।

पीथमपुर के पास हुई थी बड़ी कार्रवाई

यह मामला दिसंबर 2024 में उस समय सामने आया था, जब आगरा-मुंबई मार्ग पर पीथमपुर के आसपास वन विभाग और पुलिस की टीम ने कार्रवाई की थी। जांच के दौरान तीन लोगों को हिरासत में लिया गया था। अधिकारियों के मुताबिक उनके कब्जे से बड़ी मात्रा में काले हिरण का मांस बरामद हुआ था। इसके अलावा मोबाइल फोन, हथियार, कारतूस और एक वाहन भी कार्रवाई का हिस्सा बने थे।

शुरुआती कार्रवाई के बाद मामला सामान्य वन्यजीव अपराध से आगे बढ़ा। जांच के दौरान जब्त किए गए मोबाइल फोन की पड़ताल की गई तो अधिकारियों को कई ऐसी तस्वीरें और वीडियो मिले, जिनका संबंध वन्यजीवों के शिकार से बताया गया। इसके बाद जांचकर्ताओं ने यह भी पता लगाने की कोशिश शुरू की कि आरोपितों के संपर्क किन लोगों से थे और कथित तौर पर शिकार किए गए जानवरों को लेकर आगे क्या किया जाता था। Blackbuck poaching case Indore

जांच में सामने आए दूसरे नाम

जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में कुछ और लोगों की भूमिका की पड़ताल की गई। शाजापुर जिले के राघौखेड़ी गांव निवासी आजाद सिंह सोलंकी और मुंबई निवासी सबाह पुत्र सलाहुद्दीन को भी प्रकरण से जोड़ा गया। इस तरह जांच का दायरा पहले सामने आए आरोपों से आगे निकलकर संभावित संपर्कों और आपूर्ति श्रृंखला तक पहुंचने लगा।

स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि वन्यजीवों के शिकार से जुड़े लोग आपस में किस तरह जुड़े हुए थे। जांच में मध्य प्रदेश के साथ दूसरे राज्यों में मौजूद संभावित संपर्कों को भी खंगाला जा रहा है। Blackbuck poaching case Indore

सिर्फ मांस नहीं, खाल और ट्रॉफी पर भी नजर

इस केस में जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अब वन्यजीवों की खाल और ट्रॉफी से जुड़ा बताया जा रहा है। जांच एजेंसी यह जानकारी जुटा रही है कि कथित शिकार के बाद जानवरों के बचे हुए हिस्सों को किस तरह ठिकाने लगाया जाता था और क्या उन्हें दूसरे शहरों या राज्यों तक पहुंचाया जाता था। Blackbuck poaching case Indore

पूछताछ के दौरान इस पहलू पर पूरी तस्वीर सामने नहीं आने के कारण जांचकर्ताओं की मुश्किल बढ़ी हुई है। इसी वजह से एसटीएसएफ संभावित संपर्कों की जानकारी जुटाने के साथ महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश तक मामले की कड़ियां तलाश रही है। हालांकि जांच पूरी होने से पहले किसी संभावित नेटवर्क की भूमिका को अंतिम रूप से तय नहीं किया जा सकता।

मुख्य आरोपित को 22 महीने बाद भी जमानत नहीं

इस मामले का मुख्य आरोपित करीब 22 महीने से जेल में बंद बताया जा रहा है। जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया गया, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने फिलहाल राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत के सामने मामले की सुनवाई में लग रहा समय भी एक अहम मुद्दा रहा।

हालांकि अदालत ने केवल जमानत के सवाल पर ही ध्यान नहीं दिया। लंबे समय से चल रही कार्यवाही को देखते हुए ट्रायल को तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है, ताकि मामले में न्यायिक प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबी न खिंचे। Blackbuck poaching case Indore

अब गवाहों की मौजूदगी पर भी रहेगी नजर

अदालत ने मामले की सुनवाई रोजाना करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए गवाहों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण माना गया है। वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो को नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे गवाहों को अदालत में पेश कराने और सुनवाई को लगातार आगे बढ़ाने में मदद मिल सके।

अब इस मामले में जांच और कोर्ट की कार्यवाही दोनों महत्वपूर्ण चरण में हैं। एक तरफ एसटीएसएफ कथित वन्यजीव तस्करी की पूरी कड़ी समझने की कोशिश कर रही है, वहीं अदालत रोजाना सुनवाई के जरिए ट्रायल में तेजी लाने पर जोर दे रही है। आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही यह साफ होगा कि इस मामले में कथित तौर पर कितने लोग जुड़े थे और वन्यजीवों के अवशेषों की तस्करी को लेकर वास्तविक तस्वीर क्या सामने आती है। Blackbuck poaching case Indore

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