Category: Madhya Pradesh

  • Indore Kalka Temple: इंदौर के पूर्वी क्षेत्र का प्रसिद्ध मां कालका मंदिर जहां मजदूरों की मेहनत से हुई थी स्थापना और आज भी मन्नत पूरी होने पर माता को चढ़ती है नींबू की माला

    Indore Kalka Temple: आज हम आपको इंदौर शहर के उस खास मंदिर की कहानी सुनाने जा रहे हैं जो केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि आस्था और श्रमिक वर्ग की मेहनत का प्रतीक भी है। यह मंदिर है पूर्वी क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध कालका मंदिर, जिसकी विशेषता यह है कि यहां स्थापित मां कालका की मूर्ति खास काले पत्थर से बनाई गई है।

    1975 में इस मंदिर की स्थापना हुई थी। उस समय इंदौर की कपड़ा मिलों में काम करने वाले मजदूर यहां अपने खाली समय में जुटते थे और भजन गाते थे। स्वदेशी मिल के पास मौजूद एक बड़ा गड्ढा मजदूरों ने मिलकर भरा और वहां पर एक चबूतरा तैयार किया। इसी चबूतरे से मां कालका मंदिर की शुरुआत हुई। जयपुर से विशेष कारीगर बुलाए गए, जिन्होंने काले पत्थर से मां की छह फीट ऊंची भव्य मूर्ति बनाई और प्राण प्रतिष्ठा की गई।

    मां कालका की यह प्रतिमा आज भी भक्तों को आकर्षित करती है। मंदिर का तोरण द्वार भी काले पत्थरों से बना हुआ है जो इसे और अधिक भव्य बनाता है। खासतौर पर शारदीय नवरात्र में मंदिर सुबह से रात तक खुला रहता है। अन्य दिनों में यह दोपहर में बंद रहता है। नवरात्र के समय यहां पूजा की बुकिंग पहले से ही हो जाती है और भक्त बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

    इस मंदिर की सबसे खास परंपरा है हरे नींबू की माला चढ़ाना। भक्त अपनी मनोकामनाएं पूरी होने पर मां को नींबू की माला अर्पित करते हैं। यहां 51 और 108 नींबुओं की माला चढ़ाने का विशेष महत्व है। मंगलवार शनिवार अमावस्या और पूर्णिमा के दिन मां कालका के दर्शन और नींबू की माला चढ़ाने का महत्व और भी बढ़ जाता है। मंदिर परिसर में लगी दुकानों पर नींबू की छोटी माला 51 रुपये और बड़ी माला लगभग 300 रुपये में मिलती है।

    मंदिर की स्थापना में मजदूर वर्ग का बड़ा योगदान रहा था। अब जबकि मिलें बंद हो चुकी हैं तो भी यह मंदिर इंदौर शहर के सभी क्षेत्रों के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया है। कई बुजुर्ग भक्त बताते हैं कि वे मंदिर की स्थापना के समय से यहां आते आ रहे हैं। यही कारण है कि यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि इंदौर के श्रमिक इतिहास का भी गवाह है।

    आज भी सुबह और शाम की आरती में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। यहां हर व्यक्ति मां कालका से अपने सुख-दुःख साझा करता है और जब उसकी मन्नत पूरी होती है तो वह नींबू की माला और पूजन सामग्री अर्पित करता है। यही परंपरा इस मंदिर को विशेष और अलग बनाती है।

  • Indore Ranipura accident: चार दिन पहले दी गई चेतावनी को नजरअंदाज करने की लापरवाही ने ली मासूम जिंदगियां और उजाड़ दिए कई परिवार

    कभी आपने सोचा है कि छोटी-सी लापरवाही कितनी बड़ी कीमत वसूल सकती है। इंदौर के रानीपुरा क्षेत्र में हुआ हादसा इसका जीता-जागता उदाहरण है। कुछ दिन पहले ही मकान का एक कॉलम धंस गया था और दुकानदार ने मकान मालिक को इस बारे में चेताया भी था। लेकिन अफसोस कि उस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया गया और यही लापरवाही आखिरकार दो जिंदगियों के खत्म होने और कई परिवारों के टूटने की वजह बन गई।

    यह मकान लगभग सात सौ वर्गफीट में बना था और अवैध तरीके से खड़ा किया गया था। निचली मंजिल में बिना अनुमति दुकानों का निर्माण हुआ और ऊपर शेड डाल दिए गए। निर्माण के दौरान कॉलम में पतले सरिए डाले गए थे, जो इमारत का बोझ सह नहीं पाए। धीरे-धीरे झुकते मकान को नजरअंदाज करना भारी पड़ गया।

    चार दिन पहले जब कॉलम धंसा तो दुकानदार ने मकान मालिक से शटर न लग पाने की समस्या बताई थी। लेकिन मकान मालिक ने इसे हल्के में लिया। अगर नगर निगम के अफसर और मालिक समय रहते जाग जाते तो शायद यह हादसा टल सकता था।

    Indore News: एमवाय अस्पताल से हटेंगे चूहों का खतरा अब सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में शिफ्ट होंगे नन्हें बच्चों के वार्ड

    त्योहार का समय था और दुकानों में ग्राहकी कम थी। रात आठ बजे के करीब सभी दुकानें बंद हो गईं। यह संयोग ही था कि कर्मचारी और दुकानदार समय पर निकल गए और बड़ी संख्या में लोग हादसे से बच गए। कुछ परिवार भी रिश्तेदारों से मिलने बाहर गए हुए थे। वरना मलबे में दबने वालों की संख्या कहीं ज्यादा होती।

    रात डेढ़ बजे तक राहत और बचाव का काम चलता रहा। जेसीबी से मलबा हटाने से पहले पूरी गली की बिजली काट दी गई ताकि बचाव कार्य में कोई बाधा न आए। वहां मौजूद हर शख्स के दिल में यही सवाल था कि आखिर कब तक हम लापरवाही और अवैध निर्माणों की कीमत अपनी जिंदगियों से चुकाते रहेंगे।

    रानीपुरा की इस त्रासदी ने फिर साबित कर दिया कि छोटी सी अनदेखी भी कितनी बड़ी तबाही ला सकती है। मकान मालिक और जिम्मेदार अधिकारियों को यदि समय रहते चेतना होता तो मासूम जिंदगियां बच सकती थीं। अब जरूरत है कि अवैध निर्माण और लापरवाही पर सख्ती हो ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।

  • इंदौर के दिल राजवाड़ा पर गूंजा भारत की जीत का जश्न देर रात तक छाया उत्साह

    क्रिकेट का जुनून हर भारतीय के दिल में बसता है और जब बात भारत पाकिस्तान मैच की हो तो यह उत्साह कई गुना बढ़ जाता है। रविवार रात टीम इंडिया ने एशिया कप में पाकिस्तान को शानदार अंदाज में छह विकेट से हराया। इस जीत के बाद इंदौर का दिल कहे जाने वाला राजवाड़ा चौक फिर से क्रिकेटप्रेमियों के जश्न का गवाह बना।

    तिरंगे के साथ नारेबाजी और ढोलक की थाप

    जैसे ही टीम इंडिया ने जीत दर्ज की, शहर के क्रिकेटप्रेमी तिरंगे झंडे लेकर राजवाड़ा पर जमा हो गए। वहां नारेबाजी की गूंज सुनाई दी और कई युवक ढोलक की थाप पर नाचने लगे। भीड़ भले ही पिछली बार जितनी नहीं थी लेकिन जो भी लोग पहुंचे उन्होंने पूरे जोश और गर्व के साथ अपनी खुशी जाहिर की।

    पुलिस की तैनाती और सुरक्षा व्यवस्था

    भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए आसपास के थानों से पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया। जवानों ने चौकसी रखी और किसी भी अव्यवस्था को होने से पहले ही नियंत्रित किया। देर रात करीब एक बजे तक माहौल जश्न में डूबा रहा और उसके बाद पुलिस ने लोगों को शांति से घर जाने के लिए रवाना किया।

    सराफा चौपाटी भी बनी जश्न का हिस्सा

    इंदौर की सराफा चौपाटी जहां रात में चहल-पहल हमेशा रहती है, वह भी इस बार क्रिकेट प्रेमियों के उत्साह से सराबोर हो गई। वहां मौजूद लोग भी टीम इंडिया की जीत के जश्न में शामिल हो गए और भारत माता की जय के नारे गूंजने लगे।

    भारत की लगातार जीत और इंदौर का जोश

    दोस्तों यह पहली बार नहीं था जब भारतीय टीम की जीत का जश्न राजवाड़ा पर मनाया गया हो। इससे पहले भी जब टीम इंडिया ने पाकिस्तान को हराया था, तब भी यही चौक क्रिकेट प्रेमियों से खचाखच भर गया था। इस बार भी नजारा कुछ ऐसा ही रहा। जीत का जश्न भले ही थोड़ी देर का था लेकिन हर किसी के चेहरे पर गर्व और खुशी साफ झलक रही थी।

  • Indore News: एमवाय अस्पताल से हटेंगे चूहों का खतरा अब सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में शिफ्ट होंगे नन्हें बच्चों के वार्ड

    आज हम आपको इंदौर के एमवाय अस्पताल से जुड़ी एक बड़ी और संवेदनशील खबर बताने जा रहे हैं जो हर माता पिता के दिल को छू जाती है। हाल ही में अस्पताल में चूहों की समस्या ने इतनी गंभीर स्थिति पैदा कर दी कि नवजात बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया। बच्चों के जीवन से किसी भी तरह का जोखिम न उठाने के लिए अब प्रशासन ने कड़ा फैसला लिया है। एमवाय अस्पताल के नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट यानी NICU और पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट यानी PICU को सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है।

    हाई कोर्ट की सख्ती और विशेषज्ञों की राय

    एमवाय अस्पताल में चूहों द्वारा बच्चों को नुकसान पहुँचाने की घटना के बाद यह मामला सीधे हाई कोर्ट तक पहुँचा। कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए विशेषज्ञों की टीम को मौके पर भेजा। टीम ने जब NICU और PICU का निरीक्षण किया तो वहाँ की स्थिति को बेहद असुरक्षित माना। चूंकि ये यूनिट नवजात और गंभीर बच्चों के इलाज के लिए सबसे अहम माने जाते हैं इसलिए विशेषज्ञों ने साफ सुझाव दिया कि इन्हें किसी सुरक्षित जगह शिफ्ट किया जाना चाहिए जहाँ चूहों या संक्रमण का कोई खतरा न हो।

    शासन की रिपोर्ट और नई जगह का चुनाव

    इस मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने भी अपनी रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश की जिसमें सुरक्षा इंतज़ामों की पोल खुल गई। इसके बाद अस्पताल के डॉक्टरों और अधिकारियों ने सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का दौरा किया और वहाँ की व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने यह देखने की कोशिश की कि इन नाज़ुक यूनिटों को किस जगह सबसे सुरक्षित तरीके से स्थापित किया जा सकता है।

    स्टाफ भी जाएगा साथ

    सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में इन यूनिटों को शिफ्ट करने में किसी बड़े तकनीकी अवरोध की आशंका नहीं है लेकिन वहाँ स्टाफ की कमी ज़रूर है। इसी वजह से यह तय किया गया है कि एमवाय अस्पताल के NICU और PICU में कार्यरत पूरा स्टाफ भी साथ ही स्थानांतरित किया जाएगा। ताकि बच्चों के इलाज में किसी भी तरह की दिक्कत न आए और उनका स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता पर सुरक्षित रहे।

    माता पिता के लिए राहत की खबर

    दोस्तों यह फैसला उन माता पिता के लिए बड़ी राहत की खबर है जिनके नन्हें मासूम एमवाय अस्पताल में भर्ती थे। अब बच्चों का इलाज एक सुरक्षित और बेहतर माहौल में होगा और परिवार के लोग सुकून की सांस ले पाएंगे।

  • Indore News: इंदौर मेट्रो का सफर हुआ लंबा, लेकिन यात्रियों की राह अभी दूर

    Indore News: आज हम बात करेंगे हमारे अपने इंदौर शहर की शान बनने वाली मेट्रो के बारे में। शुरुआत में जब मेट्रो ट्रेन पहली बार ट्रैक पर दौड़ी थी तो पूरा शहर इसे देखने उमड़ पड़ा था। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी में एक अलग उत्साह था क्योंकि पहली बार इंदौर को मेट्रो जैसा तोहफा मिला था। लेकिन अब हालात थोड़े बदले-बदले नजर आ रहे हैं।

    अभी फिलहाल मेट्रो का संचालन सिर्फ छह किलोमीटर तक ही किया जा रहा है और यह हिस्सा आबादी वाले क्षेत्र से दूर है। इसी कारण यात्रियों की संख्या बहुत कम हो गई है। शुरुआती दिनों में जहां ट्रेन देखने वालों की भीड़ स्टेशन पर रहती थी वहीं अब सीटें खाली नजर आने लगी हैं। हालांकि मेट्रो ने अब तक दो लाख से ज्यादा यात्रियों को सफर कराया है लेकिन आगे की राह अभी लंबी है।

    शुक्रवार को मेट्रो ने एक नया इतिहास रचते हुए पहली बार दस किलोमीटर का ट्रायल रन पूरा किया। ट्रेन की स्पीड अभी सिर्फ दस किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है ताकि सुरक्षा जांच सही तरीके से हो सके। सुरक्षा विशेषज्ञों ने चार किलोमीटर तक के रन की अनुमति दी थी और धीरे-धीरे ट्रायल बढ़ाते हुए इसे रेडिसन चौराहे तक ले जाने की तैयारी की जा रही है।

    इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट में असली रौनक तब आएगी जब इसका संचालन विजय नगर और सुखलिया जैसे व्यस्त क्षेत्रों से होकर सुपर कॉरिडोर तक पहुंचेगा। यहां हजारों विद्यार्थी और आईटी कंपनियों के कर्मचारी रोजाना सफर करते हैं और उनके लिए मेट्रो सबसे सुरक्षित और तेज साधन साबित हो सकती है। अभी पांच से ज्यादा मेट्रो स्टेशनों का काम अधूरा है लेकिन अधिकारियों का कहना है कि अगले साल तक रेडिसन चौराहे तक मेट्रो चलाने का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा।

    दोस्तों इंदौर मेट्रो सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट नहीं है बल्कि यह हमारे शहर की पहचान बनने वाली है। अगर यह अपने पूरे रूट पर शुरू हो जाती है तो हजारों लोगों को न केवल ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी बल्कि समय और ऊर्जा दोनों की बचत होगी। आने वाले वक्त में मेट्रो हमारे शहर के हर कोने को जोड़कर विकास की नई दिशा तय करेगी।

  • सांवेर को मिली 133 करोड़ की सड़क परियोजना की सौगात, 50 से अधिक गांवों के 1 लाख लोग होंगे लाभान्वित

    मध्यप्रदेश के सांवेर क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है। लंबे समय से ग्रामीण इलाकों में सड़क निर्माण की मांग की जा रही थी और अब यह सपना सच होता नजर आ रहा है। जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट के प्रयासों से 133 करोड़ रुपये की लागत से 78 किलोमीटर लंबाई में 15 नई सड़कों की स्वीकृति मिल गई है। इस परियोजना से सांवेर के 50 से अधिक गांवों के करीब एक लाख लोगों को सीधा लाभ होगा।

    सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखकर हुआ फैसला

    सांवेर क्षेत्र की सड़क परियोजना को सिंहस्थ 2028 के दृष्टिकोण से भी बेहद अहम माना जा रहा है। इस दौरान क्षेत्र में आने-जाने वाले लाखों श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के लिए बेहतर सड़कें यातायात का दबाव कम करने में सहायक होंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने वित्तीय व्यय समिति की 292वीं बैठक में इस परियोजना को मंजूरी दी है।

    किन मार्गों का होगा विकास

    नए स्वीकृत मार्गों में चन्द्रावतीगंज से पोटलोद खेड़ी बलगारा- दयाखेड़ा-चित्तौड़ा मार्ग, कांकरिया बोर्डिया से जम्बूडी सरवर मार्ग, शिवनी से बावल्याखुर्द, अजनोद से पालकांकरिया, पुवार्डाहप्पा से हतुनिया, लालाखेड़ा से खण्डेलवाल गोदाम बायपास, पंचौला जेल से मंडोत मार्ग, हांसाखेड़ी से बरोदापंथ, चित्तौड़ा गौशाला मार्ग और गोगाखेड़ी से धतुरिया सहित अन्य सड़कें शामिल हैं। इन सड़कों के निर्माण से ग्रामीणों को शहर और आसपास के क्षेत्रों से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।

    ग्रामीणों के लिए नई उम्मीद

    यह सड़क परियोजना न केवल सांवेर क्षेत्र के लोगों के लिए सुविधा लेकर आएगी बल्कि शिक्षा, रोजगार और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति देगी। ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग हो रही थी और अब यह स्वीकृति ग्रामीणों के लिए किसी सौगात से कम नहीं है। मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने इस परियोजना को मंजूरी देने के लिए मुख्यमंत्री और लोक निर्माण मंत्री का आभार व्यक्त किया है।

    Disclaimer: यह जानकारी विभिन्न सरकारी घोषणाओं और स्वीकृतियों पर आधारित है। परियोजना की प्रगति और निर्माण कार्य समय-समय पर बदल सकते हैं।

  • उज्जैन और नर्मदापुरम को मिले बड़े तोहफे, प्रदेश में विकास की नई रफ्तार

    आज हम आपके साथ एक ऐसी खुशखबरी साझा करने जा रहे हैं जो पूरे मध्यप्रदेश के लिए गर्व और उम्मीद का नया अध्याय लेकर आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के विकास को नई उड़ान देने वाले कई बड़े फैसले लिए गए। इनमें उज्जैन, इंदौर और नर्मदापुरम जैसे अहम शहरों को करोड़ों रुपये की परियोजनाओं की सौगात मिली है।

    इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड मार्ग बनेगा आधुनिक एक्सप्रेस वे

    मंत्रि-परिषद ने इंदौर से उज्जैन को जोड़ने वाले ग्रीन फील्ड एक्सेस कंट्रोल मार्ग को हरी झंडी दी है। 48 किलोमीटर लंबाई वाले इस आधुनिक मार्ग का निर्माण चार लेन के साथ किया जाएगा और दोनों ओर सर्विस रोड भी होगी। इस परियोजना पर लगभग 2 हजार 935 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसे हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल के तहत तैयार किया जाएगा। इस हाईवे में 34 अंडरपास, 2 फ्लाईओवर, एक आरओबी और कई पुलों का निर्माण होगा जिससे आने वाले समय में सफर बेहद आसान और सुरक्षित बन जाएगा।

    उज्जैन को मिला नया रेलवे ओवर ब्रिज

    सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में हरिफाटक रेलवे क्रॉसिंग पर एक नया चार लेन ओवर ब्रिज बनने जा रहा है। करीब 980 मीटर लंबाई वाले इस ओवरब्रिज पर 371 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके बन जाने से ट्रैफिक जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी और श्रद्धालुओं व आम नागरिकों को सुगम आवाजाही का लाभ मिलेगा।

    नर्मदापुरम-टिमरनी मार्ग होगा और बेहतर

    मंत्रि-परिषद ने नर्मदापुरम-टिमरनी मार्ग को भी नया रूप देने की स्वीकृति दी है। लगभग 72 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर 972 करोड़ रुपये की लागत से दो लेन सड़क बनाई जाएगी। इसमें बड़े और मध्यम पुलों के साथ अंडरपास और जंक्शन सुधार भी होंगे। यह सड़क नर्मदापुरम से टिमरनी तक सफर को पहले से ज्यादा आसान और सुरक्षित बना देगी।

    जल जीवन मिशन को भी मिली नई गति

    बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की योजनाओं पर भी बड़ा फैसला लिया गया। जल जीवन मिशन के तहत पहले से चल रही हजारों योजनाओं की लागत में वृद्धि को मंजूरी दी गई है। अब तक लाखों परिवारों को नल-जल कनेक्शन मिल चुके हैं और आने वाले समय में और भी गांवों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का काम तेज़ी से होगा।

    इन सभी फैसलों से साफ है कि प्रदेश में सड़क, पुल और जल जैसी बुनियादी सुविधाओं पर सरकार गंभीरता से काम कर रही है। आने वाले वर्षों में इन योजनाओं के पूरे हो जाने से आम नागरिकों के जीवन में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

    Disclaimer: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी सरकारी घोषणाओं और मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णयों पर आधारित है। किसी भी प्रकार के निवेश या आधिकारिक कदम के लिए संबंधित विभाग की आधिकारिक सूचना को ही मानें।

  • ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की बड़ी छलांग : सौर ऊर्जा में 30% वृद्धि, 51 हजार से अधिक नए पदों से बिजली कंपनियों को मिला जीवनदान

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वर्तमान युग में विद्युत (ऊर्जा) का महत्व जल और वायु के समान है। गर्व की बात है कि मध्यप्रदेश न केवल उद्योगों और किसानों की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है, बल्कि देश की राजधानी दिल्ली की मेट्रो भी प्रदेश की बिजली से संचालित हो रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2047 तक प्रदेश को बिजली की कमी से मुक्त करने और ऊर्जा के क्षेत्र में सरप्लस बनाए रखने की दिशा में ठोस योजनाएँ बनाई जा रही हैं। प्रदेश में सभी उपलब्ध संसाधनों से बिजली उत्पादन किया जा रहा है और क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। पिछले 11 वर्षों में सौर ऊर्जा उत्पादन में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव रवीन्द्र भवन में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में 6 बिजली कंपनियों के नवनियुक्त 1060 कार्मिकों को नियुक्ति-पत्र प्रदान कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन कर समारोह का शुभारंभ किया और औषधीय पौधे से स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रदेश की बिजली कंपनियों में 51 हजार से अधिक नए पदों को भरा जाएगा। किसानों को इस वर्ष लगभग 20,267 करोड़ रुपये की सब्सिडी और एक करोड़ से अधिक परिवारों को 6445 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई है।

    उन्होंने बताया कि “पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना” को सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है। सांची को प्रदेश की पहली सोलर सिटी घोषित किया गया है और 32 लाख किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रदेश में विभिन्न विभाग भी अपनी ऊर्जा उत्पादन की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बिजली कंपनियों की उपलब्धियों पर केंद्रित प्रदर्शनी का शुभारंभ किया और संगठनों के प्रतिनिधियों से संवाद भी किया। कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा बड़ी संख्या में नियुक्तियों की स्वीकृति देकर बिजली कंपनियों को जीवनदान मिला है। अब किसानों को रात में सिंचाई करने की मजबूरी नहीं होगी, बल्कि दिन में बिजली उपलब्ध कराई जाएगी।

    अपर मुख्य सचिव ऊर्जा श्री नीरज मंडलोई ने कहा कि ऊर्जा विभाग सौर ऊर्जा और पारंपरिक ऊर्जा दोनों क्षेत्रों में नवाचारों के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में 51,700 नए स्थाई पदों की स्वीकृति से ऊर्जा क्षेत्र को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने बताया कि विभाग का लक्ष्य आने वाले उद्योगपतियों को हरसंभव सहयोग देना है।

    कार्यक्रम में महापौर श्रीमती मालती राय, विधायक श्री रामेश्वर शर्मा एवं श्री विष्णु खत्री सहित अनेक अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री का ऊर्जा क्षेत्र में किए गए योगदान पर पगड़ी, अंगवस्त्रम और प्रशस्ति पत्र भेंट कर अभिनंदन किया गया

  • ग्वालियर में रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव : पर्यटन निवेश, सांस्कृतिक धरोहर और क्षेत्रीय विकास को मिलेगा नया आयाम

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 29 और 30 अगस्त को ग्वालियर में आयोजित होने वाले रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में निवेशकों से सीधा संवाद करेंगे और प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं से अवगत कराएँगे। इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य ग्वालियर–चंबल एवं सागर संभाग में पर्यटन निवेश को प्रोत्साहित करना और प्रदेश में पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ नई संभावनाओं को साकार करना है। यह आयोजन ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में होगा, जिसमें केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर विशेष रूप से शामिल होंगे।

    पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने बताया कि यह कॉन्क्लेव पर्यटन व्यवसायियों, टूर ऑपरेटर्स और होटल इंडस्ट्री के बीच सहयोग और साझेदारी को मजबूत करेगा। “Timeless Gwalior: Echoes of Culture, Spirit of Legacy” थीम पर आधारित यह आयोजन पर्यटन निवेश, सांस्कृतिक धरोहर, अनुभवात्मक पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति और प्रबंध संचालक टूरिज्म बोर्ड श्री शिव शेखर शुक्ला ने जानकारी दी कि कॉन्क्लेव में होटल, रिसोर्ट, वेलनेस और ईको-टूरिज्म सेक्टर से जुड़े निवेशकों को लेटर ऑफ अवॉर्ड (LoA) प्रदान किए जाएंगे। साथ ही, विभिन्न एमओयू और अनुबंध भी होंगे। इन परियोजनाओं से स्थानीय समुदाय को पर्यटन आधारित रोजगार मिलेगा और क्षेत्रीय विकास को स्थायित्व प्राप्त होगा। कॉन्क्लेव में विशेष टूरिज्म प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिसमें मध्यप्रदेश के विविध पर्यटन स्थलों, हॉस्पिटैलिटी ब्रांड्स, होम-स्टे, रिसॉर्ट्स, हैंडलूम/हैंडिक्राफ्ट, साहसिक गतिविधियाँ और सांस्कृतिक धरोहरों को दर्शाने वाले स्टॉल शामिल होंगे।

    श्री शुक्ला ने बताया कि कॉन्क्लेव में दो महत्वपूर्ण पैनल डिस्कशन होंगे। पहला सत्र “Tourism as a Cultural Bridge – Branding Gwalior and Heartland of MP” विषय पर होगा, जिसमें ग्वालियर की सांस्कृतिक धरोहर, शास्त्रीय संगीत और स्थापत्य कला को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की रणनीतियों पर चर्चा की जाएगी। दूसरा सत्र “Gwalior and Chambal Rising – Inbound Appeal through Heritage, Luxury and Experience” विषय पर केंद्रित होगा, जिसमें विरासत, लग्ज़री स्टे, डेस्टिनेशन वेडिंग और अनुभवात्मक पर्यटन के नए आयामों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

  • इंदौर में पाँच दिवसीय कृषि सखी प्रशिक्षण सम्पन्न, महिलाओं ने सीखी प्राकृतिक खेती की तकनीकें

    आत्मा परियोजना और कृषि महाविद्यालय इंदौर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “कृषि सखी” कार्यक्रम के अंतर्गत पाँच दिवसीय प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण का समापन समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।

    समारोह में मुख्य अतिथि सांसद श्री शंकर लालवानी ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल उत्पादन बढ़ाने का साधन नहीं, बल्कि एक ऐसी जीवनशैली है, जो मिट्टी, जल और पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए किसानों की आमदनी बढ़ा सकती है। उन्होंने कहा कि “कृषि सखी” जैसे प्रयास ग्रामीण महिलाओं को नेतृत्व प्रदान करते हैं और स्थायी परिवर्तन की नींव रखते हैं।

    कृषि महाविद्यालय इंदौर के डीन डॉ. भारत सिंह ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्राकृतिक खेती की महत्ता बताई। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग की चुनौतियों के बीच प्राकृतिक खेती एक प्रभावी समाधान है।

    परियोजना संचालक (आत्मा) शर्ली थॉमस ने कहा कि कृषि सखियाँ अब सिर्फ प्रशिक्षित महिलाएँ नहीं रहेंगी, बल्कि अपने गाँवों में प्राकृतिक कृषि की पथप्रदर्शक बनेंगी। वहीं नोडल अधिकारी डॉ. दीक्षा ने बताया कि प्रशिक्षण को इस तरह तैयार किया गया था कि महिलाएँ प्राकृतिक खेती को न केवल समझें, बल्कि उसे व्यवहार में भी लागू कर सकें।

    कार्यक्रम में श्री नवीन शुक्ला (डीपीएम) और श्रीमती अल्पना वर्मा (डीपीडी) विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने महिला सहभागिता और प्रशिक्षण के आयोजन की सराहना की। समापन अवसर पर प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली कृषि सखियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण उनके लिए ज्ञानवर्धक और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला साबित हुआ।

    कार्यक्रम का संचालन डॉ. संजय दुबे ने किया और आभार प्रदर्शन श्री अमर दीक्षित द्वारा किया गया।