Author: Chayan__09

  • इंदौर नागपुर वंदे भारत ट्रेन में बढ़े कोच यात्रियों की खुशी दोगुनी हुई नया सफर अब और भी आरामदायक

    आज आपके लिए एक ऐसी खबर लेकर आया हूं जो इंदौर और नागपुर के रोजाना सफर करने वाले यात्रियों के लिए सच में राहत की सांस जैसी है। वंदे भारत ट्रेन में कोच बढ़ाए जाने के बाद अब यात्रा पहले से भी ज्यादा आसान हो गई है। जो लोग इंदौर से भोपाल या नागपुर के बीच रोजाना आना जाना करते हैं उनके लिए यह बदलाव एक बड़ी सुविधा लेकर आया है।

    अब 16 कोच के साथ रोज चलेगी वंदे भारत ट्रेन

    रविवार तक इंदौर नागपुर वंदे भारत ट्रेन सिर्फ आठ कोचों में चल रही थी जिसमें लगभग 530 सीटें उपलब्ध थीं। अब रेलवे ने इसमें बड़ा बदलाव करते हुए कोचों की संख्या दोगुनी कर दी है। सोमवार सुबह से यह ट्रेन सोलह नियमित कोचों के साथ चलनी शुरू हो गई है। सीटें बढ़ने के बाद ट्रेन की यात्री क्षमता 1124 तक पहुंच गई है जिससे सफर करने वाले लोगों को आसानी से सीट मिल सकेगी।

    इंदौर से नागपुर तक का सफर अब और भी आसान

    सोमवार की सुबह ट्रेन इंदौर से 6.10 बजे रवाना हुई। इसमें नए जुड़े कोचों के साथ ट्रेन उज्जैन पहुंची जहां 6.50 बजे दो मिनट का छोटा स्टाॅप था। इसके बाद ट्रेन भोपाल के लिए निकल गई और सुबह करीब सवा 9 बजे भोपाल पहुंची। यहां से भी बड़ी संख्या में यात्री नागपुर के लिए सवार हुए।
    पहले दिन यात्रियों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं दिखी लेकिन उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बुकिंग बढ़ेगी और सीटें पहले से अधिक भरेंगी।

    दो साल पहले मिली थी इंदौर की पहली वंदे भारत अब क्षमता दोगुनी

    करीब दो साल पहले इंदौर को पहली वंदे भारत ट्रेन मिली थी। शुरुआत में यह सिर्फ इंदौर से भोपाल के बीच चलती थी लेकिन बाद में सुविधा बढ़ाने के लिए इसे नागपुर तक बढ़ा दिया गया। पिछले सप्ताह इस ट्रेन के लिए नए रैक इंदौर लाए गए थे जिन्हें सोमवार सुबह ट्रेन से जोड़ दिया गया।
    पहले यह अतिरिक्त कोच दिल्ली पटना ट्रेन के लिए भेजे जा रहे थे लेकिन अब इन्हें इंदौर नागपुर वंदे भारत में शामिल कर दिया गया है जिससे यात्रियों की संख्या दोगुनी हो गई है।

    भोपाल और बीच के शहरों के यात्रियों को भी फायदा

    इंदौर से भोपाल जाने वाले यात्रियों के लिए यह ट्रेन पहले से ही एक अच्छा विकल्प थी क्योंकि यह तेज और आरामदायक सफर देती है। अब कोच बढ़ने से भोपाल से नागपुर तक जाने वालों को भी बड़ी राहत मिलेगी।
    सोमवार रात यह ट्रेन फिर इंदौर लौटेगी और इसी तरह आगे भी रोज सोलह कोचों के साथ नियमित रूप से चलेगी।

    Disclaimer

    इस लेख में दी गई जानकारी उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है। किसी भी प्रकार के बदलाव या अपडेट के लिए संबंधित विभाग की आधिकारिक जानकारी देखें।

  • Prakash kaur: धर्मेंद्र की पहली पत्नी प्रकाश कौर कौन हैं देओल परिवार की असली नींव की कहानी

    Prakash kaur:आज हम बात करने वाले हैं उस महिला की जिनका नाम शायद सुर्खियों में कम आता है लेकिन जिनकी वजह से देओल परिवार खड़ा है। लोग धर्मेंद्र को ही मैन के रूप में जानते हैं और हेमा मालिनी से उनकी शादी को लेकर हमेशा चर्चा होती रहती है लेकिन उनकी जिंदगी का असली और पहला अध्याय थी उनकी पहली पत्नी प्रकाश कौर। यह वही महिला हैं जिन्होंने कभी ग्लैमर नहीं चुना लेकिन पूरे जीवन परिवार को संवारने में लगा दिया।

    1954 की वो शादी जिसने धर्मेंद्र को एक नई शुरुआत दी

    धर्मेंद्र का असली नाम धर्मेंद्र सिंह देओल है। वह पंजाब के फगवाड़ा के जाट सिख परिवार में पैदा हुए थे। साल 1954 में सिर्फ 19 साल की उम्र में उनकी शादी प्रकाश कौर से हुई। उस वक्त न धर्मेंद्र बॉलीवुड में थे न उनके पास शोहरत थी। यह एक साधारण अरेंज्ड मैरिज थी। प्रकाश कौर सादगी और गरिमा से भरी एक ग्रेसफुल पंजाबन थीं। धर्मेंद्र हमेशा कहते थे कि फिल्मों में आने से पहले ही मेरी शादी हो गई थी और प्रकाश मेरी जिंदगी की पहली और असली हीरोइन हैं।

    सुर्खियों से दूर लेकिन देओल परिवार की मजबूत ताकत

    धर्मेंद्र फिल्म इंडस्ट्री की तरफ बढ़ते गए चमकती रोशनी में आए बड़े स्टार बने लेकिन प्रकाश कौर ने हमेशा दूरी बनाए रखी। उन्होंने घर की जिम्मेदारी निभाई चार बच्चों का पालन पोषण किया और परिवार की नींव को मजबूती दी। दोनों बेटों सनी देओल और बॉबी देओल को उन्होंने हमेशा संभाला बेटियां अजीता और विजेता ने पब्लिक लाइमलाइट से दूर जीवन चुना। एक बेटी साइकोलॉजिस्ट हैं और दूसरी फिल्म डायरेक्टर। इस पूरे परिवार का आधार प्रकाश कौर की ही मजबूती थी।

    हेमा मालिनी से दूसरी शादी के बाद भी नहीं टूटा रिश्ता

    साल 1980 में जब धर्मेंद्र ने हेमा मालिनी से शादी की तब यह खबर पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई। यह भी कहा गया कि उन्होंने पहली पत्नी से तलाक न लेने के लिए धर्म परिवर्तन किया। लेकिन इन उतार चढ़ावों में भी प्रकाश कौर ने कभी धर्मेंद्र को गलत नहीं कहा। अपने एकमात्र इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि धर्मेंद्र परफेक्ट पति नहीं हैं लेकिन बेहद अच्छे पिता हैं। उन्होंने हेमा मालिनी की खूबसूरती पर भी शांति से कहा था कि कोई भी पुरुष उनकी ओर आकर्षित हो सकता है।

    परिवार के लिए प्रकाश कौर की चुप्पी ही उनकी सबसे बड़ी गरिमा

    प्रकाश कौर ने कभी सुर्खियों का रास्ता नहीं चुना। उन्होंने सिर्फ परिवार चुना। वह आज भी अपने बच्चों और पोते पोतियों के साथ बेहद स्नेह भरा रिश्ता रखती हैं। अक्सर ऑनलाइन सनी देओल को अपनी मां और बहनों के साथ देखा जाता है जो इस परिवार की गहरी बॉन्डिंग बताता है। देओल परिवार की तीसरी पीढ़ी तक यह प्यार और संस्कार चल रहा है। करण देओल की एंट्री से लेकर सनी और बॉबी के सफल करियर तक हर जगह प्रकाश कौर की परवरिश की झलक दिखाई देती है।

    प्रकाश कौर वह नाम जो हमेशा सम्मान के साथ याद रखा जाएगा

    बॉलीवुड में धर्मेंद्र की मजबूत विरासत है लेकिन इस विरासत की जड़ें प्रकाश कौर हैं। उन्होंने अपने जीवन में बहुत कुछ सहा बहुत कुछ चुपचाप संभाला और शोहरत से दूर रहकर भी पूरे परिवार को एक धागे में बांधे रखा। उनकी सादगी उनके धैर्य और उनकी गरिमा को हमेशा याद रखा जाएगा।

  • dharmendra: धर्मेंद्र नहीं रहे बॉलीवुड में शोक की लहर ही मैन धर्मेंद्र का 89 साल की उम्र में निधन

    dharmendra: आज हिंदी सिनेमा जगत के लिए बहुत दुख भरा दिन है। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र का 89 साल की उम्र में निधन हो गया है। जैसे ही यह खबर सामने आई पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। लाखों प्रशंसकों के दिलों को झकझोर देने वाली इस खबर ने फिल्म इंडस्ट्री को भी गहरे सदमे में डाल दिया है। धर्मेंद्र लंबे समय से बीमार चल रहे थे और कुछ समय पहले उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। बाद में उन्हें घर ले जाया गया जहां उनका इलाज जारी रहा।

    धर्मेंद्र की तबीयत बिगड़ने से लेकर आखिरी वक्त तक परिवार रहा साथ

    धर्मेंद्र को 31 अक्टूबर 2025 को नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल लाया गया था। उस समय उन्हें सांस लेने में काफी मुश्किल हो रही थी। डॉक्टरों की निगरानी में उन्हें रखा गया लेकिन 10 नवंबर को उनकी तबीयत अचानक गंभीर हो गई। जैसे ही यह सूचना परिवार तक पहुंची हेमा मालिनी सनी देओल ईशा देओल करण देओल राजवीर देओल और अभय देओल तुरंत हॉस्पिटल पहुंचे और इस कठिन समय में वह उनके साथ बने रहे। परिवार की उपस्थिति में उन्होंने अंतिम सांस ली।

    फिल्म इंडस्ट्री के बड़े सितारे पहुंचे थे अस्पताल

    धर्मेंद्र सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे बल्कि हर कलाकार के लिए प्रेरणा थे। उनके बीमार होने की खबर सुनते ही बॉलीवुड के कई सितारे उनसे मिलने पहुंचे। सलमान खान से लेकर शाहरुख खान गोविंदा और अमीषा पटेल तक कई बड़े कलाकार हॉस्पिटल आए और उनके परिवार से मिले। यह सभी अपने ही मैन के जल्द ठीक होने की दुआ कर रहे थे लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

    धर्मेंद्र की आखिरी यात्रा पवन हंस श्मशान घाट पर

    IANS की रिपोर्ट के अनुसार धर्मेंद्र का अंतिम संस्कार पवन हंस श्मशान घाट पर किया जाएगा। उनके चाहने वालों के दिल आज भारी हैं क्योंकि एक ऐसा सितारा जिसने अपनी एक्टिंग अपनी सादगी और अपने दिल से करोड़ों लोगों का प्यार जीता वह आज हमेशा के लिए विदा हो गया। उनका पूरा नाम धर्मेंद्र केवल कृष्ण देओल था और उनका जन्म 8 दिसंबर 1935 को पंजाब के नसरानी गांव में हुआ था।

    हमेशा जिंदा रहेगी धर्मेंद्र की मुस्कान और उनकी यादें

    धर्मेंद्र ने भारतीय सिनेमा को सिर्फ फिल्में नहीं दीं बल्कि एक ऐसी विरासत दी जिसे आने वाली पीढ़ियां भी याद रखेंगी। शोले सीता और गीता धर्म वीर चुपके चुपके जैसी कई शानदार फिल्मों में उनका अभिनय आज भी दर्शकों के दिलों में बसता है। उनके डायलॉग उनकी मुस्कान और उनका ही मैन वाला अंदाज हमेशा जीवित रहेगा। वह सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे बल्कि भारतीय सिनेमा की पहचान थे।

    धर्मेंद्र के जाने से बॉलीवुड में एक युग का अंत हो गया है। करोड़ों लोग आज उनकी कमी महसूस कर रहे हैं। उनकी फिल्मों की चमक और उनके व्यक्तित्व की गर्माहट हमेशा दिलों में जिंदा रहेगी।

  • मध्यप्रदेश में आत्मनिर्भर पंचायतों की दिशा में बड़ा कदम तीन दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन

    आज हम आपको एक ऐसे बड़े आयोजन के बारे में बताने जा रहे हैं जो मध्यप्रदेश की पंचायतों के भविष्य को बदलने की क्षमता रखता है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग इस महीने एक महत्वपूर्ण तीन दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला और वाटरशेड महोत्सव का आयोजन करने जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रदेश की पंचायतों को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाना है ताकि विकास की रोशनी हर गांव हर घर तक पहुंच सके। यह आयोजन भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कंवेंशन सेंटर में 24 से 26 नवंबर तक होगा।

    मुख्यमंत्री करेंगे शुभारंभ बड़ी हस्तियों की रहेगी उपस्थिति

    कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा की जाएगी। इस महत्वपूर्ण अवसर पर उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल तथा जगदीश देवड़ा भी मौजूद रहेंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सहित कई विभागों के मंत्री जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी इस आयोजन में शामिल होंगे। यह आयोजन इसलिए विशेष बन रहा है क्योंकि पहली बार पंचायत स्तर से जुड़े इतने बड़े प्रतिनिधियों को एक ही मंच पर बुलाया जा रहा है।

    दो हजार से अधिक जनप्रतिनिधि और अधिकारी होंगे शामिल

    इस कार्यशाला में दो हजार से ज्यादा जनप्रतिनिधि और अधिकारी हिस्सा लेने वाले हैं। इसमें जिला पंचायत अध्यक्ष उपाध्यक्ष मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा जिला जनपद और ग्राम पंचायत स्तर के प्रतिनिधि शामिल रहेंगे। जल गंगा संवर्धन अभियान में शानदार प्रदर्शन करने वाले जिलों को भी यहां सम्मानित किया जाएगा जिसमें खंडवा पहले रायसेन दूसरे और बालाघाट तीसरे स्थान पर रहा। इसके अलावा खेत तालाब निर्माण और विकासखंड स्तर पर बेहतरीन काम करने वाले जिलों व अधिकारियों को भी पुरस्कृत किया जाएगा।

    स्वच्छ जल स्वच्छ ग्राम और प्रमुख योजनाओं पर व्यापक चर्चा

    संचालक सह आयुक्त पंचायत राज छोटे सिंह ने बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पंचायतों को प्रशासनिक वित्तीय और सामाजिक रूप से मजबूत बनाने की रणनीति तैयार करना है। तीन दिनों तक यह कार्यशाला अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित रहेगी। इसमें स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता स्वच्छ ग्राम अभियान वाटरशेड परियोजनाओं का सफल क्रियान्वयन पीएम आवास योजना पीएम जनमन योजना पीएम ग्राम सड़क योजना पीएम पोषण और पेसा ग्राम सभाओं की वर्तमान स्थिति पर गहन चर्चा होगी। इसके साथ ही स्वनिधि से समृद्धि अभियान और तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण के बीच पंचायतों की भूमिका जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

    उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों का विशेष सम्मान

    मनरेगा परिषद और राजीव गांधी जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन मिशन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को भी इस आयोजन में सम्मानित किया जाएगा। कार्यशाला में हर दिन उच्चस्तरीय पैनल चर्चाएँ तकनीकी सत्र केस स्टडी समूह गतिविधियाँ और अनुभव साझा करने के सत्र होंगे। इससे प्रतिभागियों को नीतिगत और व्यावहारिक दोनों प्रकार की अहम सीख मिलेगी। यह आयोजन प्रदेश की पंचायतों को अधिक आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने के लक्ष्य को और तेजी से पूरा करने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • स्मृति मंधाना और पलाश मुच्छल की शाही शादी सांगली में जश्न की हलचल प्रेम कहानी और वेडिंग अपडेट वायरल

    आज का दिन भारतीय क्रिकेट और म्यूजिक इंडस्ट्री के लिए बेहद खास है। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सुपरस्टार स्मृति मंधाना आज 23 नवंबर 2025 को म्यूजिक कंपोजर और सिंगर पलाश मुच्छल के साथ शादी के पवित्र बंधन में बंध रही हैं। महाराष्ट्र के सांगली में होने वाली इस शादी को लेकर पूरे देश में उत्साह है। उनकी हल्दी और संगीत की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं और फैंस इस खूबसूरत जोड़ी को शुभकामनाएं भेज रहे हैं।

    हल्दी और संगीत सेरेमनी ने बढ़ाया शादी का रंग

    स्मृति और पलाश की शादी से पहले हल्दी और संगीत समारोह की झलकियों ने इंटरनेट पर धूम मचा दी है। स्मृति की चमकती मुस्कान और पलाश का शांत अंदाज दोनों को एक खूबसूरत जोड़ी के रूप में दिखा रहा है। उनकी प्री वेडिंग वीडियो भी खूब वायरल हो रही है जिससे साफ पता चलता है कि यह शादी उनके परिवार और दोस्तों के लिए कितनी खास है।
    खास बात यह है कि इस शादी में महिला क्रिकेट टीम के खिलाड़ी, बॉलीवुड के कई चेहरे और कुछ दिग्गज पुरुष क्रिकेटर भी शामिल हो सकते हैं। सांगली शहर आज इस बड़ी सेरेमनी के लिए पूरी तरह तैयार है।

    उनकी प्रेम कहानी जिसने दिल जीत लिया

    स्मृति मंधाना और पलाश मुच्छल की मुलाकात एक इवेंट के दौरान हुई थी जहां पलाश ने अपना गाना प्रस्तुत किया था। इस मुलाकात के बाद दोनों एक दूसरे को जानने लगे और यह दोस्ती धीरे धीरे प्यार में बदल गई। करीब पांच साल तक दोनों ने चुपचाप अपने रिश्ते को निभाया और फिर 2024 में उन्होंने अपने रिश्ते को सार्वजनिक किया।
    पलाश ने अपनी बहन पलक मुच्छल के सामने स्मृति को प्रपोज किया था और शादी से कुछ दिन पहले ही डीवाई पाटिल स्टेडियम में घुटनों पर बैठकर उन्होंने स्मृति को एक बार फिर प्रपोज किया। यह पल सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ और फैंस ने इस जोड़ी को खूब प्यार दिया।

    उम्र में बेहद छोटे अंतर के साथ मजबूत रिश्ता

    दोनों के बीच उम्र का अंतर बहुत ही कम है। पलाश का जन्म 22 मई 1995 को हुआ था जबकि स्मृति का जन्म 18 जुलाई 1996 को हुआ। उनकी उम्र का यह करीब एक साल का अंतर उनके रिश्ते को और भी स्वाभाविक और खूबसूरत बनाता है।

    शादी की खास तैयारियां और गेस्ट लिस्ट

    स्मृति और पलाश की शादी सांगली में दोपहर के समय होने जा रही है। रिपोर्ट्स की मानें तो इस शादी में कुल 140 मेहमान शामिल होंगे। पलाश और स्मृति दोनों की तरफ से 70 70 मेहमान इस खास मौके का हिस्सा बनेंगे।
    विवाह स्थल पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं को खास ध्यान में रखा गया है। परिवार और करीबी रिश्तेदारों के बीच यह शादी बेहद पारंपरिक और धार्मिक रीति से संपन्न होगी।

    शादी में क्रिकेट और म्यूजिक का संगम

    संगीत सेरेमनी में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की खिलाड़ी खुलकर नाचते हुए नजर आईं। उनके डांस वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं और फैंस इन्हें देखकर बेहद खुश हैं।
    पलाश और स्मृति की शादी में खेल और संगीत की दुनिया का खूबसूरत मेल देखने को मिल रहा है जिसे देखने के लिए फैंस बेहद उत्साहित हैं।

    स्मृति मंधाना और पलाश मुच्छल की शादी भारत के सबसे खूबसूरत सेलिब्रिटी वेडिंग में से एक बन चुकी है। उनकी प्रेम कहानी ने लोगों को भावुक किया है और उनकी शादी के हर अपडेट पर फैंस की नजरें टिकी हुई हैं।
    नए जीवन की शुरुआत करने वाले इस जोड़े को हमारी ओर से ढेर सारी शुभकामनाएं।

  • इंदौर बिजली व्यवस्था में बड़ा बदलाव शहर को मिले पांच नए जोन और अंडरग्राउंड लाइन सब डिविजन की मंजूरी

    इंदौर शहर में बिजली वितरण से जुड़ी एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। शहर के लगातार विस्तार और नई कॉलोनियों के तेजी से विकसित होते स्वरूप को देखते हुए अब बिजली व्यवस्था को और मजबूत और आधुनिक बनाया जा रहा है। इसी दिशा में मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की बोर्ड बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए जिससे आने वाले समय में उपभोक्ताओं को और बेहतर बिजली सेवा मिल सकेगी।

    इंदौर में अब 35 जोन से होगी बिजली आपूर्ति

    बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इंदौर में बिजली वितरण अब मौजूदा 30 की जगह 35 जोन से होगा। शहर तेज़ी से फैल रहा है और नए क्षेत्रों में बसावट बढ़ रही है ऐसे में बिजली सेवा को त्वरित और सुचारू बनाए रखने के लिए यह कदम बेहद आवश्यक माना जा रहा है।
    कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री अनूप कुमार सिंह ने बताया कि नए जोन उपभोक्ताओं को उनके नजदीक से बिजली सेवा उपलब्ध कराएंगे ताकि समस्या आने पर समाधान भी तुरंत मिल सके। यह बदलाव शहर की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है।

    पांच नए जोन से शहर के उपभोक्ताओं को मिलेगी त्वरित सेवा

    बैठक में जिन पांच नए बिजली जोन की मंजूरी दी गई उनमें तुलसी नगर, मांगलिया शहरी जोन, सिलिकॉन सिटी जोन, बिलावली जोन और नंदबाग जोन शामिल हैं।
    इन नए जोन में आसपास के मौजूदा क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को जोड़ा जाएगा ताकि बिजली सेवा और अधिक तेजी से उपलब्ध हो सके। यह चुनाव उन इलाकों के विस्तार और उपभोक्ताओं की संख्या को देखते हुए किया गया है।

    अंडरग्राउंड लाइन के लिए बनेगा अलग सब डिविजन

    इंदौर स्मार्ट सिटी मिशन और नई कॉलोनियों में तेजी से बढ़ती अंडरग्राउंड बिजली लाइनों की संख्या को देखते हुए अंडरग्राउंड लाइन सब डिविजन बनाने का निर्णय भी लिया गया। यह नया डिविजन यूजीएन सब डिविजन के नाम से काम करेगा और शहर में अंडरग्राउंड लाइनों के संधारण की जिम्मेदारी संभालेगा।
    नई स्मार्ट कॉलोनियों और विस्तार वाले क्षेत्रों में इस कदम से समस्या समाधान की गति कई गुना बढ़ जाएगी।

    सिंहस्थ 2028 के लिए बनेगा विशेष डिविजन

    बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सिंहस्थ के लिए एक अलग डिविजन बनाया जाएगा। क्योंकि वर्ष 2028 का सिंहस्थ एक विशाल आयोजन है और इसमें बिजली की मांग और प्रबंधन एक बड़ी चुनौती होगी। इसलिए इस डिविजन को सिंहस्थ समाप्त होने तक की अनुमति दी गई है।

    बोर्ड बैठक में शामिल रहे वरिष्ठ अधिकारी

    यह अहम निर्णय मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में लिए गए जिसकी अध्यक्षता ऊर्जा सचिव श्री अविनाश लावनिया ने की। बैठक में वित्त विभाग के श्री आरआर मीणा, प्रबंध निदेशक श्री अनूप कुमार सिंह, ऊर्जा विभाग ओएसडी श्री वीके गौड़, डॉ अरूणा तिवारी, डॉ प्रशांत सालवान और अन्य वरिष्ठ अधिकारी विशेष रूप से मौजूद रहे।
    प्रमुख अभियंता, कार्यपालक निदेशक और मुख्य वित्त अधिकारी सहित कई महत्वपूर्ण अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे और शहर की बिजली व्यवस्था को और मजबूत करने पर गहन चर्चा हुई।

    इंदौर शहर तेजी से आधुनिक हो रहा है और उसकी जरूरतें भी उसी गति से बढ़ रही हैं। पांच नए जोन, अंडरग्राउंड लाइन सब डिविजन और सिंहस्थ डिविजन जैसे फैसले शहर के भविष्य को देखते हुए लिए गए हैं। इससे बिजली सेवा न सिर्फ मजबूत होगी बल्कि उपभोक्ताओं को हर स्तर पर ज्यादा बेहतर और त्वरित सुविधा मिलेगी।

  • इंदौर मैराथन 2025 हजारों धावकों की भागीदारी से खिल उठा शहर फिटनेस जागरुकता का बड़ा संदेश

    इंदौर की गुलाबी सर्द सुबह आज एक बेहद खास नजारा लेकर आई। हजारों लोग एक साथ सड़कों पर उतरे और Run Indore One Indore Marathon में शामिल होकर पूरे देश को एक सुंदर संदेश दिया कि जब जनता एकजुट होती है तो हर लक्ष्य बेहद आसान हो जाता है। यह मैराथन न सिर्फ एक खेल आयोजन था बल्कि फिटनेस, स्वच्छता और सामूहिक चेतना का शानदार प्रतीक भी बना।

    जनसहभागिता का अद्भुत उदाहरण बना इंदौर

    मैराथन की शुरुआत दशहरा मैदान से हुई जहां हर उम्र के धावक एक नई ऊर्जा और उत्साह के साथ मौजूद थे। मुख्यमंत्री मोहन यादव वर्चुअली जुड़े और उन्होंने कहा कि इंदौर हमेशा हर क्षेत्र में अद्भुत उदाहरण पेश करता है और अब फिटनेस भी इस शहर की नई पहचान बन रही है।
    दौड़ का मार्ग नरेंद्र तिवारी मार्ग, रणजीत हनुमान रोड, महूनाका, अन्नपूर्णा मार्ग से होकर वापस दशहरा मैदान पर समाप्त हुआ। तीन, पांच और सात किलोमीटर की इस दौड़ में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर किसी ने अपना पूरा उत्साह दिखाया।

    नेताओं ने सराहा इंदौर का फिटनेस और स्वच्छता प्रेम

    मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने प्रतिभागियों के जज्बे को सलाम करते हुए कहा कि इंदौर सिर्फ स्वच्छता ही नहीं बल्कि हर क्षेत्र में देश दुनिया में अग्रणी बन रहा है। उन्होंने बताया कि शहर सरकार से नहीं बल्कि नागरिकों के सहयोग से चलता है और यही कारण है कि इंदौर आज नंबर वन शहर है।
    महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने दौड़ को सामूहिक चेतना का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि फिटनेस का मूल आधार दौड़ है और इंदौर एक बार फिर पूरे देश को जनसहभागिता की मिसाल दिखा रहा है।
    जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने भी प्रतिभागियों के जोश की सराहना की और कहा कि इंदौर हमेशा अपने नवाचारों से आकर्षित करता है और यह मैराथन भी उसी का हिस्सा है।

    दिव्यांग धावकों ने जीता सबका दिल

    इस मैराथन में दिव्यांग धावकों के लिए विशेष तैयारियां की गई थीं। सैकड़ों दिव्यांग धावक भी इस दौड़ का हिस्सा बने और उन्होंने अपने अद्भुत साहस और उत्साह से लोगों का दिल जीत लिया। उनके जोश ने बताया कि सीमाएं सिर्फ सोच में होती हैं।

    स्वच्छता और स्वास्थ्य की शपथ के साथ आगे बढ़ा इंदौर

    मैराथन की शुरुआत वंदे मातरम के साथ हुई और उसके बाद सभी प्रतिभागियों ने स्वच्छता और स्वास्थ्य की शपथ ली। फिर अतिथियों द्वारा हरी झंडी दिखाकर इस शानदार आयोजन को रवाना किया गया। यह आयोजन एक बार फिर साबित कर गया कि इंदौर सिर्फ स्वच्छ नहीं बल्कि फिट और जागरूक शहर भी है।

    यह मैराथन सिर्फ एक दौड़ नहीं थी बल्कि एक भावना थी जो इंदौर के हर नागरिक के अंदर एकजुटता और जागरूकता का बड़ा संदेश छोड़ गई। इंदौर ने फिर दिखा दिया कि क्यों वह देश का सबसे आगे बढ़ने वाला शहर कहलाता है।

  • Chukandar ki kheti: चुकंदर की खेती सर्दियों में बना रही है किसानों को मालामाल जानें पूरी खेती से लेकर मुनाफे तक की जानकारी

    Chukandar ki kheti: आज हम एक ऐसी फसल के बारे में बात करने वाले हैं जो सर्दियों में किसानों के लिए कमाई का बेहतरीन जरिया बन रही है. यह फसल मिट्टी की सेहत भी सुधारती है और अच्छी आमदनी भी देती है. बात हो रही है चुकंदर की खेती की जो आजकल देश भर में तेजी से लोकप्रिय हो रही है.

    चुकंदर की खेती क्यों बन रही है मुनाफे का साधन

    चुकंदर मिट्टी में नमी बनाए रखता है और अगली फसल के लिए उर्वरता बढ़ा देता है. इस कारण यह फसल उन किसानों के लिए शानदार विकल्प बन गई है जो पारंपरिक गेहूं या सरसों से हटकर कुछ और आजमाना चाहते हैं. चुकंदर का इस्तेमाल सलाद जूस अचार और कई तरह के औषधीय उपयोगों में किया जाता है. इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है इसलिए इसकी खेती कम जोखिम और अधिक लाभ देने वाली मानी जाती है.

    चुकंदर की बुवाई के लिए सबसे अच्छा समय

    सर्दियों का मौसम चुकंदर की खेती के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. अक्टूबर से दिसंबर तक बुवाई करने से फसल अच्छी तरह विकसित होती है. इसकी फसल लगभग नब्बे से सौ दिन में तैयार हो जाती है. दोमट या बलुई दोमट मिट्टी जिसमें पानी निकासी की ठीक व्यवस्था हो चुकंदर के लिए आदर्श मानी जाती है.

    खेती की तैयारी और बुवाई का तरीका

    खेती शुरू करने से पहले खेत की जुताई दो से तीन बार करके मिट्टी को भुरभुरा बनाना जरूरी है. इसके बाद गोबर की खाद या अच्छी कंपोस्ट डालकर मिट्टी में मिलाने से पौधों को शुरुआत में पर्याप्त पोषण मिलता है. बुवाई के लिए प्रति एकड़ चार से पांच किलोग्राम बीज पर्याप्त होते हैं. कतारों के बीच तीस सेंटीमीटर और पौधों के बीच दस सेंटीमीटर की दूरी रखनी चाहिए. बुवाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करना जरूरी है ताकि बीज अच्छी तरह अंकुरित हो सकें.

    सिंचाई और देखरेख का सही तरीका

    चुकंदर के खेत में हर दस से पंद्रह दिन में सिंचाई करनी चाहिए. जलभराव बिल्कुल नहीं होना चाहिए वरना जड़ें सड़ सकती हैं. खेत में खरपतवार न जमा होने दें और समय पर निराई गुड़ाई करते रहें. नाइट्रोजन फॉस्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग फसल को मजबूत बनाता है और जड़ें बड़ी और लाल बनती हैं. बाजार में ऐसे चुकंदर की कीमत भी अधिक मिलती है.

    उपज और मुनाफे की पूरी गणना

    चुकंदर की फसल तैयार होने पर इसकी खुदाई सावधानी से करनी चाहिए ताकि जड़ों को नुकसान न पहुंचे. एक एकड़ में लगभग डेढ़ सौ से एक सौ अस्सी क्विंटल तक उपज मिल सकती है. कुल लागत बीस से पच्चीस हजार रुपये तक आती है. बाजार भाव आठ से बारह रुपये प्रति किलो मिलने पर किसान प्रति एकड़ अस्सी हजार से एक लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ कमा सकते हैं. यही कारण है कि यह फसल तेजी से पसंद की जा रही है.

    अगर कोई किसान सर्दियों में कम लागत में ज्यादा मुनाफा पाना चाहता है तो चुकंदर उसकी सबसे अच्छी पसंद बन सकती है. यह फसल मिट्टी को भी सुधारती है और जेब को भी मजबूत करती है.

  • Vande Bharat Update: इंदौर नागपुर वंदे भारत में बड़ा अपडेट अब चलेगी 16 कोच वाली हाई स्पीड ट्रेन और पातालपानी हेरिटेज रूट बंद

    Vande Bharat Update: भारत ट्रेन वर्तमान में रविवार को छोड़कर सप्ताह में छह दिन चलती है। अभी इसकी यात्री क्षमता लगभग 532 सीटों की है। लेकिन नए 16 कोच लगने के बाद प्रतिदिन 1,000 से ज्यादा यात्रियों को सफर करने का मौका मिलेगा। 2023 में भोपाल–इंदौर वंदे भारत को नागपुर तक विस्तार मिलने के बाद से इस ट्रेन को बेहतरीन रिस्पांस मिलता आ रहा है। लगातार बढ़ती लोकप्रियता ने ही कोच बढ़ाने को मजबूती दी है।

    पातालपानी–कालाकुंड हेरिटेज ट्रेन का संचालन बंद

    उधर, खूबसूरत घाटियों और मनमोहक झरनों के लिए मशहूर पातालपानी–कालाकुंड हेरिटेज ट्रेन को रेलवे ने आज से बंद करने की घोषणा कर दी है। पश्चिम रेलवे ने बताया कि हर साल मानसून की शुरुआत में इस हेरिटेज ट्रेन का संचालन शुरू किया जाता है और यह आम तौर पर अगस्त से मार्च–अप्रैल तक चलती है। लेकिन इस बार रेलवे ने नवंबर में ही इसे रोकने का फैसला कर लिया है।

    ब्रॉडगेज लाइन के काम के चलते हेरिटेज रूट बंद

    हेरिटेज ट्रेन बंद होने के पीछे मुख्य कारण है कि महू से पातालपानी तक अब ब्रॉडगेज लाइन तैयार कर दी गई है। आने वाले दिनों में चोरल के रास्ते खंडवा लाइन से जोड़ने के लिए ट्रैक बिछाने का बड़ा कार्य शुरू किया जाएगा। इस निर्माण कार्य के चलते पातालपानी–कालाकुंड सेक्शन पर ट्रेन संचालन को अभी रोकना जरूरी हो गया है। हेरिटेज ट्रेन रुकने से यात्रियों और पर्यटकों को थोड़ी निराशा जरूर होगी, लेकिन रेलवे भविष्य में इस रूट को और बेहतर बनाने की तैयारी में जुटा है।

  • ACC Mens Asia Cup Rising Stars 2025 सुपर ओवर ड्रामा बांग्लादेश ए की भारत पर जबरदस्त जीत कप्तान जितेश का बड़ा बयान

    आज हम बात कर रहे हैं उस रोमांचक मुकाबले की जिसने सभी क्रिकेट प्रेमियों का दिल हिला दिया। ACC Mens Asia Cup Rising Stars 2025 के पहले सेमीफाइनल में बांग्लादेश ए ने सुपर ओवर में भारत ए को हराकर शानदार अंदाज में फाइनल में प्रवेश किया। यह मैच इतना दिलचस्प रहा कि अंतिम गेंद तक रोमांच बना रहा और सुपर ओवर ने तो मानो पूरे मैच का माहौल ही बदल दिया।

    बांग्लादेश ए की शानदार एंट्री फाइनल में

    दोहा में खेले गए इस मुकाबले में दोनों टीमों ने पूरे दिल से खेला। निर्धारित बीस ओवर में भारत ए और बांग्लादेश ए दोनों ने 194 रन बनाए और मैच सुपर ओवर तक पहुंच गया। यहां बांग्लादेश ने शांत दिमाग से खेलते हुए जीत हासिल की और फाइनल का टिकट कटाया। अब फाइनल में बांग्लादेश ए का मुकाबला पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से होने वाला है।

    सुपर ओवर में भारत की चूक

    सुपर ओवर में जो हुआ उसने सभी को हैरान कर दिया। भारत ए की ओर से बल्लेबाजी के लिए जितेश शर्मा और रमनदीप सिंह उतरे जबकि दिनभर धमाल मचाने वाले वैभव सूर्यवंशी को बाहर रखा गया। सूर्यवंशी ने 15 गेंदों पर 38 रन बनाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया था। फिर भी उन्हें सुपर ओवर में नहीं भेजा गया जिससे सवाल उठने लगे।

    कप्तान जितेश का बड़ा बयान

    मैच के बाद कप्तान जितेश शर्मा ने बताया कि वैभव और प्रियांश पावरप्ले में शानदार बल्लेबाजी करते हैं जबकि आशुतोष और रमनदीप डेथ ओवरों में बेहतर खेल दिखाते हैं। इसलिए पूरी टीम की सलाह के बाद सुपर ओवर के लिए यह संयोजन चुना गया। जितेश ने यह भी कहा कि निर्णय का अंतिम अधिकार उनका था और वे इसके लिए जिम्मेदारी लेते हैं।

    अपनी जिम्मेदारी स्वीकारते दिखे कप्तान

    जितेश ने कहा कि एक सीनियर खिलाड़ी होने के नाते उन्हें मैच खत्म करना चाहिए था। उन्होंने बताया कि इस हार को सीख समझ कर आगे बढ़ना होगा क्योंकि जीत और हार खेल का हिस्सा है। उन्होंने युवा खिलाड़ियों की तारीफ भी की और कहा कि भविष्य में यही खिलाड़ी भारत के लिए बड़ा मुकाम हासिल कर सकते हैं।

    सुपर ओवर में भारत का संघर्ष

    सुपर ओवर की पहली ही गेंद पर जितेश शर्मा क्लीन बोल्ड हो गए और दूसरी गेंद पर आशुतोष कैच आउट हो गए। भारत ए एक भी रन नहीं बना पाया। बांग्लादेश को सिर्फ एक रन चाहिए था और भले ही पहली गेंद पर विकेट गिरा पर दूसरी गेंद वाइड चली गई और बांग्लादेश ने मैच जीत लिया।

    मैच ने सिखाई बड़ी सीख

    यह मुकाबला दिखाता है कि क्रिकेट कितना अनिश्चित और रोमांचक होता है। भारत ए की टीम ने शानदार खेल दिखाया लेकिन सुपर ओवर में दबाव ने उन्हें पीछे कर दिया। यह हार जरूर दुख देती है लेकिन युवा खिलाड़ियों के लिए यह सीख और अनुभव आगे जाकर बहुत काम आने वाला है।