Ai Overviewइस खबर का सार देखने के लिए टैप करेंबंद करने के लिए टैप करें
- सही समय पर पोषक तत्वों की पूर्ति, सिंचाई और रोग-कीट नियंत्रण भी जरूरी है।
- इस समय लहसुन की अच्छी पैदावार के लिए किसानों को क्या-क्या करना चाहिए इस संबंध में आईए जानते हैं लहसुन के संबंध में कृषि वैज्ञानिक के द्वारा दी गई सलाह…
- कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार लहसुन की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए नाशक गोल नामक दवा 1 लीटर प्रति हेक्टेयर या स्टाम्प 3.5 लि.
- प्रति हेक्टेयर की दर से पहला पानी लगाने के 3-4 दिन बाद स्प्रे करें।
किसान साथी वैज्ञानिक विधियों के प्रयोग से लहसुन का अधिक उत्पादन लें सकते हैं देखें (Garlic Agricultural Advice) कृषि वैज्ञानिकों की सलाह..
जुड़िए व्हाट्सएप ग्रुप
Garlic Agricultural Advice | रबी सीजन के दौरान लहसुन की खेती की जाती है। लहसुन की फसल इस समय 50 से 60 दिनों की होने को आई है। वैज्ञानिक एवं आधुनिक खेती करके किस लहसुन की अच्छी पैदावार ले सकते हैं।
लहसुन की फसल में पैदावार बढ़ाने के लिए केवल स्प्रे करना पर्याप्त नहीं है। सही समय पर पोषक तत्वों की पूर्ति, सिंचाई और रोग-कीट नियंत्रण भी जरूरी है। कौन-सा स्प्रे करना चाहिए, यह लहसुन की फसल की वर्तमान अवस्था और उसमें दिख रहे लक्षणों पर निर्भर करता है। इस समय लहसुन की अच्छी पैदावार के लिए किसानों को क्या-क्या करना चाहिए इस संबंध में आईए जानते हैं लहसुन के संबंध में कृषि वैज्ञानिक के द्वारा दी गई सलाह…
अधिक उत्पादन के लिए सही जानकारी होना जरूरी
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि लहसुन में पौष्टिक तत्वों की मात्रा भरपूर पाई जाती है। इसमें अनेक औषधीय गुण पाए जाते हैं, जिसके कारण इसकी मांग बहुत ज्यादा रहती है। Garlic Agricultural Advice
डॉ. आलोक कुमार सिंह, सहायक निदेशक एवं केंद्र प्रमुख, राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान, क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, सलारू, करनाल ने बताया कि लहसुन का अधिक उत्पादन करने के लिए फसल के 50 से 60 दिन होने के बाद दिसंबर में निराई गुड़ाई, कीट एवं बीमारियों के नियंत्रण इत्यादि के बारे में किसानों को सही जानकारियों का होना बहुत आवश्यक है।
अधिक पैदावार एवं खरपतवार नियंत्रण के लिए यह करें किसान
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार लहसुन की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए नाशक गोल नामक दवा 1 लीटर प्रति हेक्टेयर या स्टाम्प 3.5 लि. प्रति हेक्टेयर की दर से पहला पानी लगाने के 72 घंटे के बाद खेत में छिड़काव करना चाहिए। इसके अलावा निराई-गुड़ाई करें। Garlic Agricultural Advice
इसके साथ-साथ लहसुन की फसल में 30, 45 व 60 दिनों के बाद फसल में (1%) 19:19:19 पॉलीफीड (10 ग्राम प्रति ली. पानी में घोलकर) एवं 75,90 व 105 दिनों के बाद (2%) मल्टी-के नामक फोलियर फर्टीलाइजर का उपयोग अवश्य करें।
लहसुन के फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए खरपतवार नाशक गोल नामक दवा 1 लीटर प्रति हेक्टेयर या स्टाम्प 3.5 लि. प्रति हेक्टेयर की दर से पहला पानी लगाने के 3-4 दिन बाद स्प्रे करें। 45 दिन बाद हाथ से खरपतवार निकालने पर अच्छी पैदावार ले सकते हैं। Garlic Agricultural Advice
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि लहसुन की जड़े अपेक्षाकृत कम गहरी होती हैं। इसलिए सिंचाई समय-समय पर आवश्यकतानुसार करते रहें। सर्दियों में 10-15 दिनों के अंतराल पर एवं गर्मियों में 6-7 दिनों में सिंचाई करें।
लहसुन की फसल में बैंगनी धब्बा (पर्पल ब्लाच) रोग लगने पर मेन्कोजेब 2.5 ग्राम + 0.5 मिली स्टीकर प्रति लीटर पानी की दर से 10-15 दिन के अंतर से छिड़काव करें। ठंड से बचाव के लिए सल्फर का 200 ग्राम प्रति एकड़ छिड़काव करें। Garlic Agricultural Advice
पैदावार बढ़ाने के लिए क्या करें?
पत्तियों की बढ़वार के समय : संतुलित पोषण दें। नाइट्रोजन की मात्रा मिट्टी की स्थिति और पहले दी गई खाद के अनुसार रखें। Garlic Agricultural Advice
गांठ (बल्ब) बनने के समय : पोटाश और अन्य पोषक तत्वों की जरूरत का ध्यान रखें। कमी होने पर ही उचित उत्पाद का उपयोग करें।
पत्तियां पीली पड़ने पर : बिना कारण जाने स्प्रे न करें। पीलापन पोषक तत्वों की कमी, अधिक पानी, जड़ों की समस्या या रोग के कारण भी हो सकता है।
सिंचाई : खेत में नमी बनाए रखें, लेकिन पानी जमा न होने दें। अधिक पानी से जड़ों और गांठों को नुकसान हो सकता है। Garlic Agricultural Advice
जुड़िए व्हाट्सएप ग्रुप
यह भी पढ़िए..चने की फसल में अभी से रखें इन बातों का ध्यान, छोटी-छोटी गलतियां सुधार लीं तो बढेगी पैदावार
👉👉मध्य प्रदेश में खाद बुकिंग को लेकर किसानों के काम की जानकारी, ई-टोकन से पहले समझें ये नियम
किसान एग्रीकल्चर न्यूज़ से जुड़ने के लिए प्रवाह टाइम के व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें।

विशाल चौधरी Pravah Times के Editor हैं। वे कृषि और खेती-किसानी से जुड़ी खबरों व उपयोगी जानकारी पर विशेष रूप से काम करते हैं। उनका उद्देश्य किसानों तक सरल भाषा में खेती, फसल और कृषि से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचाना है।

Leave a Comment