Indore Breaking: कड़ाके की ठंड में देवदूत बने सुवेग राठी: इंदौर की सड़कों पर जिंदा दिखी इंसानियत

इंदौर के कड़ाके की ठंड में जब अधिकतर लोग अपने घरों में सुरक्षित बैठे थे, तब शहर की सड़कों पर मानवता की एक सच्ची तस्वीर सामने आई। सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता सुवेग राठी बिना किसी प्रचार और सूचना के जरूरतमंदों के बीच देवदूत बनकर पहुंचे। रात का अंधेरा, सर्द हवाएं और फुटपाथों पर ठिठुरते लोग—इसी माहौल में सुवेग राठी ने इंसानियत का उजाला फैलाया।

बिना शोर के सेवा का उदाहरण बने सुवेग राठी

बस स्टैंड, चौराहों और सड़कों के किनारे सो रहे बेसहारा लोगों के पास पहुंचकर सुवेग राठी ने खुद अपने हाथों से ऊनी शॉल ओढ़ाई। यह पहल न किसी राजनीतिक मंच से जुड़ी थी और न ही किसी प्रचार अभियान से। यह सिर्फ मानवता की भावना से किया गया काम था, जिसने साबित किया कि सच्ची सेवा वही है जो खामोशी से की जाए।

एक शॉल और सैकड़ों दुआएं

कड़ाके की ठंड में एक ऊनी शॉल किसी के लिए मामूली हो सकती है, लेकिन ठिठुरते इंसान के लिए वही शॉल जिंदगी की सबसे बड़ी राहत बन जाती है। ठंड से राहत पाकर चेहरों पर लौटी मुस्कान ने यह साफ कर दिया कि सुवेग राठी जैसे लोग आज भी समाज में इंसानियत को जिंदा रखे हुए हैं।

 

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