इंदौर हाई कोर्ट में नेत्रदान जागरूकता सेशन ने छुआ दिल और जगाई नई उम्मीद

इंदौर हाई कोर्ट परिसर में आयोजित नेत्रदान जागरूकता सत्र ने पूरे न्यायिक समुदाय में एक नई आशा और प्रेरणा का जन्म दिया। बार काउंसिल हॉल में हुए इस विशेष टॉक और इंटरएक्टिव सेशन में लोगों ने न सिर्फ नेत्रदान के महत्व को समझा बल्कि समाज में रोशनी फैलाने का संकल्प भी लिया। यह सत्र हर उस व्यक्ति को गहराई से छू गया जो मानवता और सेवा की भावना को दिल से मानता है।

डॉ तेजेश ए मेहता का प्रेरक संदेश जिसने सभी के दिल को छुआ

इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ तेजेश ए मेहता ने नेत्रदान के महत्व को बहुत सरल और भावनात्मक अंदाज में समझाया। उन्होंने बताया कि मृत्यु के बाद हमारी आंखें किसी जरूरतमंद व्यक्ति की दुनिया रोशन कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि जीवन के अंतिम पड़ाव के बाद भी हम किसी और की जिंदगी में उजाला बन सकते हैं। यह सोच वहां मौजूद वकीलों न्यायाधीशों और स्टाफ के दिलों में गूंजती रही।

डॉ मेहता ने सभी को प्रेरित किया कि आंखें व्यर्थ न जाने दें बल्कि किसी जरूरतमंद को उपहार में दे दें। उनकी बातों से प्रभावित होकर कई प्रतिभागियों ने नेत्रदान आंदोलन को समर्थन देने की इच्छा जताई। यह कार्यक्रम सिर्फ एक सेशन नहीं बल्कि मानवता की एक जागरूक पुकार बनकर सामने आया।

पांच वर्षों से समाज में फैला रहे हैं रोशनी का संदेश

डॉ मेहता पिछले पांच वर्षों से रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3040 के साथ मिलकर नेत्रदान जागरूकता अभियान चला रहे हैं। इस अवधि में उन्होंने हजारों लोगों को जागरूक किया और अनेक नागरिकों को नेत्रदान के लिए प्रेरित किया। उनका यह प्रयास समाज की सोच को बदलने और जरूरतमंदों के जीवन में रोशनी पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम बन रहा है।

इंदौर हाई कोर्ट में हुआ यह कार्यक्रम उनके निरंतर प्रयासों को एक बड़ा प्रोत्साहन देता है। यह साबित करता है कि जब जागरूकता सही दिशा में बढ़ती है तो समाज में सकारात्मक बदलाव जरूर आता है।

Conclusion

इंदौर हाई कोर्ट परिसर में आयोजित यह नेत्रदान जागरूकता सत्र सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं बल्कि मानवता की एक गहरी सीख है। यह हमें याद दिलाता है कि जीवन के बाद भी हम किसी और के लिए आशा की किरण बन सकते हैं। समाज में ऐसे अभियान लगातार चलते रहें तो निश्चित ही उजाला और संवेदना दोनों बढ़ते रहेंगे।

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