DAVV Students: इंदौर के डीएवीवी छात्रों की बड़ी सफलता, सेना के लिए मल्टी फ्रीक्वेंसी कामिकाजा ड्रोन तैयार

इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के दो छात्रों ने रक्षा क्षेत्र से जुड़ी बड़ी उपलब्धि हासिल की है। डीएवीवी के अमोघ द्विवेदी और पार्थ तिवारी ने ऐसा फ्रीक्वेंसी हापिंग कामिकाजा ड्रोन विकसित किया है जो दुश्मन की फ्रीक्वेंसी ब्लाकिंग के बावजूद अपना ऑपरेशन जारी रखता है। यह ड्रोन सेना के टास्क पर तैयार किया गया है और इसकी टेस्टिंग सफल रही है।

ड्रोन तकनीक आज सुरक्षा और निगरानी में अहम भूमिका निभा रही है। इसी जरूरत को समझते हुए इंदौर के छात्रों ने यह नवाचार किया है। यह ड्रोन निगरानी सामग्री पहुंचाने और ग्रेनेड लॉन्च करने में सक्षम है। इससे रक्षा क्षेत्र में इसकी उपयोगिता और भरोसा दोनों बढ़ जाते हैं।

ब्लाकिंग के बावजूद सक्रिय रहने की खास तकनीक

डीएवीवी के इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलाजी संस्थान के विद्यार्थियों ने इस ड्रोन को फ्रीक्वेंसी हापिंग कामिकाजा ड्रोन नाम दिया है। आम तौर पर ड्रोन एक ही फ्रीक्वेंसी पर काम करते हैं। जब दुश्मन उस फ्रीक्वेंसी को ब्लाक कर देता है तो ड्रोन निष्क्रिय हो जाता है।

इस कमी को दूर करने के लिए छात्रों ने मल्टी फ्रीक्वेंसी सिस्टम विकसित किया है। यह ड्रोन एक साथ कई फ्रीक्वेंसी पर काम करने में सक्षम है। इसी कारण यह कठिन परिस्थितियों में भी गिरता नहीं और अपना मिशन पूरा करता है।

कामिकाजा ड्रोन ऐसे मिशन के लिए बनाए जाते हैं जिनमें लक्ष्य तक पहुंचना सबसे जरूरी होता है। इन्हें वापसी के लिए नहीं बल्कि मिशन को सफल बनाने के लिए डिजाइन किया जाता है। तकनीकी भाषा में इन्हें लाइटरिंग म्यूनिशन भी कहा जाता है।

सेना के टास्क पर हुआ सफल अनुसंधान

विद्यार्थियों के अनुसार वे पिछले दो वर्षों से ड्रोन टेक्नोलाजी पर अनुसंधान कर रहे थे। इसी दौरान सेना की एक तकनीकी टीम की ओर से उन्हें मल्टी फ्रीक्वेंसी ड्रोन विकसित करने का टास्क मिला।

करीब डेढ़ साल की लगातार रिसर्च के बाद ड्रोन का प्रोटोटाइप तैयार किया गया। पहले इसकी टेस्टिंग प्रयोगशाला स्तर पर हुई। इसके बाद सेना के अधिकारियों के सामने इसका परीक्षण किया गया जो पूरी तरह सफल रहा।

इस नवाचार को लेकर छात्रों ने पेटेंट के लिए आवेदन भी किया है। इंदौर में हुए इस प्रयास को रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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