Author: Chayan__09

  • ईरानी अकरकरा की खेती से कमाएं बड़ा मुनाफा जानें पूरी प्रक्रिया समय पैदावार और बाजार भाव की पूरी जानकारी

    आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसी औषधीय फसल के बारे में जो कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने के लिए जानी जाती है यह फसल है ईरानी अकरकरा जिसकी मांग बाजार में लगातार बढ़ रही है इसके सूखे फूल और जड़ें औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं और इस समय इसका भाव सत्तर हजार रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रहा है इसलिए यदि किसान किसी लाभदायक फसल की तलाश में हैं तो यह फसल उनके लिए एक बेहतरीन विकल्प बन सकती है

    दोनों सीजन में होती है खेती और शुरू होती है नर्सरी से

    ईरानी अकरकरा की खास बात यह है कि इसकी खेती रबी और खरीफ दोनों सीजन में की जा सकती है इसके लिए सबसे पहले नर्सरी तैयार की जाती है नर्सरी बनने के पंद्रह दिन बाद पौधों को खेत में रोप दिया जाता है इससे खेती की शुरुआत आसान हो जाती है और पौधे स्वस्थ तरीके से बढ़ते हैं बुवाई के समय खेत में जैविक खाद यानी गोबर की खाद मिलाई जाती है जिससे लागत भी कम आती है और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है

    एक बीघा में कितनी पैदावार मिलती है

    यदि एक बीघा में इसकी खेती की जाए तो लगभग पांच से छह क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है यह उत्पादन छह महीने की अवधि में प्राप्त होता है पौधों की रोपाई एक फीट की दूरी पर की जाती है जिससे उन्हें फैलने और बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है एक बीघा में लगभग डेढ़ किलो बीज की आवश्यकता होती है पूरी अवधि में चार बार निराई गुड़ाई करने से पौधा स्वस्थ रहता है और उत्पादन भी अच्छा मिलता है

    जड़ों और सूखे फूलों की बिक्री देती है उच्च मूल्य

    ईरानी अकरकरा के पौधे के सूखे फूल और जड़ दोनों की बाजार में काफी मांग है इसकी जड़ों में प्राकृतिक तेल आयरन कैल्शियम और विटामिन सी पाया जाता है यही कारण है कि यह औषधीय उद्योगों में व्यापक रूप से उपयोग होती है कई राज्यों में इसकी खेती की जा रही है जहां किसान इससे अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं यह फसल उन लोगों के लिए खासतौर पर फायदेमंद है जो कम खर्च में अधिक लाभ चाहते हैं

    यह फसल क्यों है इतना महत्वपूर्ण

    ईरानी अकरकरा को औषधीय फसलों में बेहद मूल्यवान माना जाता है इसका मुख्य उद्देश्य इसकी जड़ प्राप्त करना होता है जो दवाओं और हर्बल उत्पादों के निर्माण में उपयोग की जाती है इसकी खेती सरल है देखभाल कम लगती है और बाजार भाव हमेशा अच्छा मिलता है इसलिए यह फसल किसानों की आमदनी बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है

  • इंदौर में रणजीत हनुमान मंदिर की प्रभातफेरी 2025: तैयारियाँ जोरों पर, रथ की सजावट और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो

    इंदौर में हर साल श्रद्धालुओं के लिए एक अद्भुत दृश्य का आयोजन होता है। रणजीत हनुमान मंदिर की प्रभातफेरी इस वर्ष 12 दिसंबर को सुबह चार बजे निकलेगी। यह परंपरा वर्ष 1985 में पहली बार ठेले पर निकली थी। उसके पहले भक्त बाबा की तस्वीर लेकर मंदिर से महूनाका चौराहा तक निकलते थे। वर्ष 2008 में यह प्रभातफेरी बग्घी पर निकलने लगी और आज यह इंदौर के प्रसिद्ध त्योहारों में से एक बन गई है।

    प्रभातफेरी मार्ग और सजावट

    इस वर्ष प्रभातफेरी मंदिर से उषा नगर, महूनाका चौराहा, अन्नपूर्णा मंदिर, नरेंद्र तिवारी मार्ग होते हुए फिर मंदिर पहुँचेगी। जिस मार्ग से प्रभातफेरी निकलती है, उसे भगवा पताका और ध्वजों से सजाया जाता है। यह सजावट 10 दिसंबर से शुरू हो गई है। प्रभातफेरी के दौरान मंदिर परिसर से बाबा का रथ निकलते ही आकर्षक आतिशबाजी होती है। स्वागत मंचों पर भी इस दौरान आतिशबाजी का दौर चलता है। प्रभातफेरी के समय दीपावली जैसा दृश्य नजर आता है।

    श्रद्धालुओं की उपस्थिति और सोशल मीडिया का क्रेज़

    इस प्रभातफेरी में इंदौर के साथ-साथ आसपास के शहरों से भी श्रद्धालु शामिल होंगे। अनुमानित रूप से इस बार दो लाख से अधिक लोग प्रभातफेरी में भाग लेंगे। खास बात यह है कि रथ की यात्रा के वीडियो सोशल मीडिया पर पहले ही वायरल हो रहे हैं। लोग वीडियो साझा कर उत्साह बढ़ा रहे हैं और प्रभातफेरी की महिमा को ऑनलाइन भी अनुभव कर रहे हैं।

    https://www.instagram.com/reel/DR6OBVcEQOn/

    प्रभातफेरी की खासियत

    रणजीत हनुमान मंदिर की प्रभातफेरी सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि इंदौर की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का प्रतीक बन गई है। श्रद्धालु सुबह से ही रथ यात्रा में शामिल होने के लिए मंदिर पहुँचते हैं और पूरे मार्ग पर भगवा रंग और भक्तिमय वातावरण देखते ही बनता है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से यह परंपरा देशभर में लोगों तक पहुँच रही है।

  • CLAT 2026 Answer Key कब होगी जारी और आपत्तियों के साथ काउंसलिंग प्रक्रिया की पूरी जानकारी, स्नातक और स्नातकोत्तर प्रवेश के लिए महत्वपूर्ण अपडेट

    CLAT 2026 Answer Key: कंसोर्टियम ऑफ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज यानी एनएलयू की ओर से आयोजित कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट यानी CLAT 2026 सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। स्नातक और स्नातकोत्तर दोनों कार्यक्रमों के लिए यह प्रवेश परीक्षा देशभर में आयोजित की गई। परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अब उत्तर कुंजी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। CLAT 2026 उत्तर कुंजी बहुत जल्द जारी होने वाली है।

    अनंतिम उत्तर कुंजी और आपत्तियों की प्रक्रिया

    आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, CLAT 2026 की अनंतिम उत्तर कुंजी 10 दिसंबर को शाम 5 बजे उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद उम्मीदवारों को 12 दिसंबर शाम 5 बजे तक आपत्तियां दर्ज करने का मौका मिलेगा। इस बार प्रश्नपत्र में 120 बहुविकल्पीय प्रश्न थे, जिनमें प्रत्येक का मूल्य एक अंक था। परीक्षा की अंकन योजना के अनुसार प्रत्येक गलत उत्तर के लिए 0.25 अंक घटाए जाएंगे। स्नातक और स्नातकोत्तर परीक्षा के लिए उम्मीदवारों को दो घंटे का समय दिया गया, जबकि दिव्यांग अभ्यर्थियों को अतिरिक्त 40 मिनट की सुविधा प्रदान की गई।

    परीक्षा का दायरा और उम्मीदवारों की संख्या

    इस वर्ष CLAT 2026 परीक्षा 25 राज्यों, 93 शहरों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों के 156 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई। इस परीक्षा में कुल 92,344 उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया था, जिसमें स्नातक के लिए 75,009 और स्नातकोत्तर के लिए 17,335 अभ्यर्थी शामिल थे। सभी 25 राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय अपने बीए एलएलबी और एलएलएम कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए CLAT स्कोर का उपयोग केंद्रीकृत परामर्श प्रक्रिया के माध्यम से करेंगे।

    फीस और छात्रों की मांगें

    पिछले वर्ष, कई उम्मीदवारों ने प्रति प्रश्न 1,000 रुपये के आपत्ति शुल्क पर चिंता जताई थी। इस साल छात्र प्रतिनिधियों ने आवेदन शुल्क में कमी की मांग दोहराई। सामान्य वर्ग के लिए आवेदन शुल्क 4,000 रुपये और आरक्षित वर्ग के लिए 3,500 रुपये है। हालांकि, कंसोर्टियम ने अभी तक इस शुल्क संरचना में कोई बदलाव नहीं किया है।

    परिणाम और काउंसलिंग प्रक्रिया

    उत्तर कुंजी जारी होने और आपत्तियों का निपटान होने के बाद, योग्य उम्मीदवारों को काउंसलिंग के लिए पुनः पंजीकरण करना होगा। इस दौरान प्रत्येक उम्मीदवार अधिकतम 15 वरीयताएं प्रस्तुत कर सकता है। काउंसलिंग शुल्क सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए 30,000 और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए 20,000 रुपये निर्धारित है

  • SAGE University Indore: शिक्षा और शोध के माध्यम से भारत के उज्जवल भविष्य की दिशा में

    SAGE University Indore: आज हम आपको SAGE University, Indore के बारे में विस्तार से बताएँगे। यह विश्वविद्यालय भारत में शिक्षा और शोध के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। SAGE University, Bhopal और Indore के वैज्ञानिक और अकादमिक प्रोग्राम समाज की चुनौतियों को समझने और उनके समाधान खोजने पर केंद्रित हैं। विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा समाज बनाना है जो न्यायपूर्ण, सहानुभूतिपूर्ण और टिकाऊ हो।

    उत्कृष्ट शोध और व्यावहारिक शिक्षा

    SAGE University के शैक्षणिक कार्यक्रम प्राकृतिक विज्ञान, विकास, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन, शिक्षा, सार्वजनिक नीति, शासन, स्थिरता और समानता जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट शोध पर जोर देते हैं। विश्वविद्यालय न केवल अकादमिक ज्ञान प्रदान करता है बल्कि इसे भारत की प्रमुख उद्योगों में व्यावहारिक रूप से लागू करने पर भी ध्यान केंद्रित करता है।

    समस्या समाधान और अनुभवात्मक शिक्षा

    विश्वविद्यालय में छात्रों को वास्तविक समस्याओं को समझने और उनके समाधान खोजने के लिए विशेष प्रशिक्षण और शोध का अवसर मिलता है। SAGE University में अनुभवात्मक शिक्षा की विशेष व्यवस्था है जिसमें छात्र “करते हुए सीखते हैं” और अपने अनुभवों पर चिंतन करते हैं। यह शिक्षा प्रणाली प्रयोगशाला प्रयोग, इंटर्नशिप, प्रैक्टिकम, फील्ड एक्सरसाइज, अध्ययन भ्रमण, स्नातक स्तर के शोध और स्टूडियो प्रदर्शन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से होती है।

    अंतरविषयक सीखने और पेशेवर विकास

    अनुभवात्मक शिक्षा के माध्यम से छात्रों में अंतरविषयक ज्ञान, नागरिक भागीदारी, करियर विकास, सांस्कृतिक जागरूकता, नेतृत्व कौशल और अन्य पेशेवर और बौद्धिक क्षमताओं का विकास होता है। SAGE University यह सुनिश्चित करता है कि शिक्षा केवल सिद्धांत तक सीमित न रहे बल्कि छात्रों को वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के समाधान में सक्षम बनाया जाए।

    विश्वविद्यालय की जानकारी

    SAGE University, Indore की स्थापना 2007 में हुई थी। यह विश्वविद्यालय Indore-Dewas By-Pass Road, Kailod Kartal, Indore, Madhya Pradesh 452020 पर स्थित है। संपर्क के लिए 1800 100 7031 पर कॉल किया जा सकता है।

    Disclaimer: यह जानकारी सार्वजनिक स्रोतों और विश्वविद्यालय की आधिकारिक घोषणाओं पर आधारित है। पाठकों से अनुरोध है कि नवीनतम अपडेट और विस्तृत जानकारी के लिए विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ।

  • MP News: मुख्यमंत्री डॉ. यादव के समक्ष बालाघाट में 10 नक्सलियों का आत्मसमर्पण, मध्यप्रदेश नक्सल मुक्त बनने की राह पर

    MP News: मध्यप्रदेश में नक्सलवाद को खत्म करने की दिशा में एक बड़ी सफलता मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष बालाघाट में रविवार को 10 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें 4 महिला नक्सली भी शामिल थीं। मुख्यमंत्री ने उन्हें संविधान की प्रति प्रदान कर मुख्यधारा से जोड़ा। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने अपने हथियार भी मुख्यमंत्री को सौंपे। यह घटना प्रदेश में नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की सख्त नीति और प्रयासों का प्रतीक है।

    नक्सलियों के पुनर्वास की गारंटी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशानुसार मध्यप्रदेश को नक्सल मुक्त करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने नक्सलियों से आग्रह किया कि वे सरकार की पुनर्वास नीति अपनाएं। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग कानून की राह अपनाते हैं, उनके जीवन और पुनर्वास की पूरी चिंता सरकार करेगी।

    पुलिस अधिकारियों और जवानों की हौसला अफजाई

    डॉ. यादव ने पुलिस अधिकारियों और जवानों की हौसला अफजाई करते हुए कहा कि एंटी नक्सल अभियान को लगातार मजबूत किया जा रहा है। प्रदेश में 15 नए अस्थायी कैंप और विशेष सहयोगी दस्ते के 882 पद स्वीकृत किए गए हैं। सतत निगरानी और सघन जांच के कारण नक्सली दायरा तेजी से घट रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 46 एकल सुविधा केंद्र खोले गए, जहां रोजगार, वन अधिकार पत्र और अन्य जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

    नक्सलियों की सूची और पहचान

    आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में सुरेंद्र उर्फ कबीर, राकेश ओडी उर्फ मनीष, लालसिंह मरावी उर्फ सींगा, शिल्पा नुप्पो, सलीता उर्फ सावित्री, नवीन नुप्पो उर्फ हिडमा, जयशीला उर्फ ललीता, विक्रम उर्फ हिडमा, जरिना उर्फ जोगी मुसाक और समर उर्फ राजु अतरम शामिल हैं। सभी का मुख्यतः छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से संबंध है।

    डीजीपी का बयान और मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास

    डीजीपी श्री कैलाश मकवाना ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में एंटी नक्सल अभियान को और मजबूत किया गया है। नए कैंप स्थापित किए गए हैं, हॉक फोर्स और पुलिस बल में वृद्धि की गई है और अधिकारियों और जवानों को सतत प्रोत्साहन दिया जा रहा है। रोजगार और स्किल डेवलपमेंट के प्रयासों से नक्सल प्रभावित युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

    भविष्य की योजनाएं और संकल्प

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जनवरी 2026 तक लाल सलाम को अंतिम सलाम कहा जाएगा और प्रदेश पूरी तरह नक्सल मुक्त होगा। उन्होंने शहीद आशीष शर्मा की वीरता को नमन करते हुए 328 हॉक फोर्स सहित पुलिस अधिकारियों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन देने की घोषणा की। यह दिखाता है कि न केवल नक्सलियों का पुनर्वास किया जाएगा बल्कि कानून लागू करने वालों की भी सराहना की जाएगी।

  • दिसंबर में मटर की खेती ऐसा करें तैयार होगी भरपूर हरी फलियां और मिलेगी शानदार पैदावार

    आज हम बात कर रहे हैं मटर की खेती के बारे में जो इस समय पूरे उत्तर भारत में तेजी से हो रही है। ठंड के मौसम में मटर का विकास बेहद अच्छा होता है और अगर कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखा जाए तो पैदावार उम्मीद से भी ज्यादा मिल सकती है। इसलिए अगर आप भी मटर की खेती की तैयारी कर रहे हैं या बुवाई कर चुके हैं तो यह जानकारी आपके लिए बहुत उपयोगी है।

    सही समय पर बुवाई से मिलती है मजबूत शुरुआत

    ठंड के दिनों में मिट्टी में नमी पर्याप्त होती है और ऐसी स्थिति में मटर के पौधे तेजी से विकसित होते हैं। अच्छी पैदावार का पहला कदम सही समय पर बुवाई है। यदि बुवाई थोड़ी देर से हो रही है तो बीज उपचार जरूर करना चाहिए। इससे बीज रोगों से सुरक्षित रहते हैं और अंकुरण मजबूत होता है।

    बुवाई के बाद हल्की सिंचाई देती है फसल को जीवन

    जब बीज मिट्टी में जाते हैं तो उन्हें हल्की सिंचाई की जरूरत होती है। इससे बीज फटने में सहायता मिलती है और जड़ें मिट्टी में तेजी से फैलती हैं। पाला पड़ने की संभावना वाले मौसम में हल्की सिंचाई पौधों को ठंड के नुकसान से बचाती है और फसल का विकास संतुलित रहता है।

    20 से 25 दिन बाद निराई गुड़ाई से खेत रहता है साफ और फसल होती है मजबूत

    बुवाई के लगभग 20 से 25 दिन बाद पहली निराई गुड़ाई करना बेहद जरूरी है। इससे खेत में उगे खरपतवार नियंत्रित रहते हैं और पौधों को पोषण सही मात्रा में मिल पाता है। इस प्रक्रिया से मटर की फसल स्वस्थ रहती है और फूल तथा फलियों की संख्या बढ़ती है।

    जैविक खाद से बढ़ती है मिट्टी की ताकत और फसल की गुणवत्ता

    मटर की फसल के लिए खेत में जैविक खाद या अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद का उपयोग बेहद फायदेमंद होता है। इससे पौधों को अतिरिक्त पोषण मिलता है और तना मजबूत बनता है। जरूरत लगे तो पत्तियों पर 2 प्रतिशत डीएपी घोल या 1 प्रतिशत यूरिया का छिड़काव किया जा सकता है जिससे फसल हरी भरी रहती है। लेकिन ध्यान रहे कि नाइट्रोजन की अत्यधिक मात्रा पौधे को पत्तेदार तो बना देती है पर फलियों की संख्या कम कर देती है।

    कीट नियंत्रण जरूरी नहीं तो फसल हो सकती है कमज़ोर

    मटर की फसल को थ्रिप्स और एफिड जैसे कीट काफी नुकसान पहुंचाते हैं। इनके नियंत्रण के लिए नीम का घोल एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है। जरूरत पड़ने पर अनुशंसित दवा का प्रयोग भी किया जा सकता है। समय पर छिड़काव करने से पौधे सुरक्षित रहते हैं और उत्पादन पर असर नहीं पड़ता।

    जल निकास व्यवस्था रखें मजबूत नहीं तो हो सकती है जड़ गलन की समस्या

    मटर की फसल को नमी पसंद है लेकिन खेत में पानी नहीं रुकना चाहिए। पानी के जमाव से जड़ें गलने लगती हैं और फफूंद रोग तेजी से फैलते हैं। इसलिए खेत में जल निकास की व्यवस्था हमेशा बेहतर रखें ताकि फसल स्वस्थ और उत्पादक बनी रहे।

    अगर मटर की खेती वैज्ञानिक तरीके से की जाए तो फसल हरी भरी और फलियों से लदी रहती है। सही समय पर बुवाई हल्की सिंचाई निराई गुड़ाई जैविक खाद और कीट नियंत्रण जैसे कदम मटर की पैदावार को कई गुना बढ़ा सकते हैं। ठंड का यह मौसम मटर की खेती के लिए सबसे अनुकूल होता है तो इसे समझकर खेती करें और शानदार उत्पादन पाएं।

  • IPL 2026 News: आईपीएल 2026 मिनी ऑक्शन में मचेगी हलचल अबू धाबी में बड़े खिलाड़ियों की होगी बोली

    IPL 2026 News: अगर आप इंडियन प्रीमियर लीग के दीवाने हैं तो आपके लिए यह खबर दिल की धड़कन बढ़ाने वाली है। आईपीएल के अगले सीजन से पहले सभी दस फ्रेंचाइजियां अपनी टीमों को मजबूत करने में जुट गई हैं और अब सबकी नजरें लगी हैं मिनी ऑक्शन पर। हाल ही में सभी टीमों ने अपनी रिटेंशन लिस्ट जारी कर दी है और अब अगले चरण की तैयारी शुरू हो चुकी है। हर साल की तरह इस बार भी खिलाड़ियों की कुर्सी गर्म है और लाखों करोड़ों की बोली का रोमांच क्रिकेट प्रेमियों को इंतजार नहीं करने देता।

    दसों फ्रेंचाइजियों ने रिटेंशन लिस्ट जारी की टीमों में फिर से शुरू हुई नई रणनीति

    आईपीएल 2026 से पहले सभी दस फ्रेंचाइजियों ने अपनी रिटेंशन लिस्ट पूरी साफगोई के साथ जारी कर दी है। कौन खिलाड़ी टीम में रहेगा और कौन बाहर जाएगा यह फैसला अब अपनी जगह पक्का हो चुका है। क्रिकेट फैंस के बीच इस लिस्ट को लेकर खूब चर्चा रही क्योंकि कुछ बड़े नामों को टीमों ने रोके रखा वहीं कुछ खिलाड़ियों को रिलीज करके सभी को चौंका दिया। रिटेंशन के बाद अब टीमें अपनी जरूरत के हिसाब से नए खिलाड़ियों की तलाश में जुट गई हैं और हर फ्रेंचाइजी अब एक बेहतर संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।

    1355 खिलाड़ियों ने दर्ज कराया नाम 45 खिलाड़ियों का बेस प्राइस दो करोड़

    इस बार मिनी ऑक्शन में ऐसा जबरदस्त क्रेज देखने को मिला है कि कुल 1355 खिलाड़ियों ने नीलामी के लिए अपना नाम भेजा है। यह संख्या दर्शाती है कि आईपीएल की चमक दुनिया भर के खिलाड़ियों को आकर्षित करती है। सबसे खास बात है कि इनमें से 45 खिलाड़ियों ने अपना बेस प्राइस दो करोड़ रुपये रखा है जिससे यह साफ है कि नीलामी में इस बार भी पैसों की बरसात होने वाली है। कौन खिलाड़ी किस टीम में जाएगा और किस पर लगेगी सबसे मोटी बोली इस पर दुनिया भर की नजरें टिक गई हैं।

    सोलह दिसंबर को अबू धाबी में बजेगा नीलामी का बिगुल

    मिनी ऑक्शन 16 दिसंबर को अबू धाबी में आयोजित किया जाएगा। पहली बार नीलामी विदेश में होने जा रही है और इस वजह से उत्साह पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है। क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह दिन किसी त्योहार से कम नहीं होगा क्योंकि बड़े बड़े नामों पर टीमें पानी की तरह पैसा बहाती नजर आएंगी। यह आयोजन न सिर्फ खिलाड़ियों के भविष्य को तय करेगा बल्कि अगले सीजन की दिशा भी इसी के बाद साफ होगी। कौन सी टीम सबसे मजबूत बनकर उभरेगी यह देखने के लिए हर कोई बेसब्र है।

    आईपीएल 2026 के लिए तैयारियां तेज होने वाला है नया क्रिकेट रोमांच

    आईपीएल हमेशा से रोमांच और उम्मीदों का सबसे बड़ा केंद्र रहा है और इस बार भी माहौल बेहद खास है। रिटेंशन लिस्ट जारी होने के बाद अब टीमें अपनी रणनीतियों को और तेज कर चुकी हैं। मिनी ऑक्शन के बाद हर फ्रेंचाइजी की तस्वीर और साफ हो जाएगी और फैंस को भी पता चल जाएगा कि उनकी पसंदीदा टीम कैसा प्रदर्शन कर सकती है। नए खिलाड़ियों के साथ नई उम्मीदें भी जुड़ेंगी और मैदान में एक बार फिर वही जुनून और जोश देखने को मिलेगा जिसका इंतजार हर क्रिकेट प्रेमी को रहता है।

  • सांवेर क्षेत्र में दो बड़े ब्रिज जनवरी तक बनकर तैयार होंगे , जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने दिया 24 घंटे काम का आदेश

    सांवेर क्षेत्र से एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है जिसकी वजह से यहां के लोगों को जल्द बड़ी राहत मिलने वाली है। जल संसाधन मंत्री और सांवेर क्षेत्र के विधायक श्री तुलसीराम सिलावट ने आज स्वयं मौके पर पहुंचकर अर्जुन बड़ौदा ब्रिज और बेस्ट प्राइस के सामने निर्माणाधीन ब्रिज की प्रगति का निरीक्षण किया। तेज सर्दी के बीच भी मंत्री सिलावट ने निर्माण कार्यों का जायजा लिया और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि यह दोनों ब्रिज किसी भी स्थिति में जनवरी के अंत तक पूरी तरह तैयार होने चाहिए।

    अर्जुन बड़ौदा ब्रिज के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश

    मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने अर्जुन बड़ौदा ब्रिज पर पहुंचकर निर्माण एजेंसियों को निर्देश दिए कि कार्य की गति और बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि यह ब्रिज यातायात की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसके पूरा होने से हजारों वाहन चालकों को रोजाना होने वाली परेशानी खत्म होगी। उन्होंने अधिकारियों को कहा कि निर्माण कार्य बिना रुके 24 घंटे चले और जरूरत पड़े तो श्रमिकों की संख्या भी बढ़ाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिज निर्माण के दौरान डायवर्सन मार्गों की मरम्मत और लाइटिंग व्यवस्था सही रहनी चाहिए ताकि यातायात में कोई रुकावट न आए।

    बेस्ट प्राइस के सामने निर्माणाधीन ब्रिज की प्रगति की भी समीक्षा

    इसी निरीक्षण के दौरान मंत्री श्री सिलावट ने बेस्ट प्राइस के सामने बन रहे ब्रिज की स्थिति भी देखी। उन्होंने कहा कि यह ब्रिज भी जनवरी के अंत तक हर हाल में पूरा होना चाहिए। इसी संबंध में उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के रीजनल अधिकारी श्री श्रवण कुमार सिंह से मोबाइल पर चर्चा की और आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दोनों ब्रिजों के समय पर तैयार होने से क्षेत्र के नागरिकों व्यापारियों और वाहन चालकों को बड़ी राहत मिलेगी और यातायात में काफी सुधार होगा।

    समन्वय और गुणवत्ता पर मंत्री सिलावट का विशेष जोर

    निरीक्षण के दौरान मंत्री सिलावट ने अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कार्य की गुणवत्ता में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि तेजी के साथ साथ मजबूती और टिकाऊ निर्माण भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने प्रशासन और निर्माण एजेंसी के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई ताकि तय समय सीमा का पालन पूरी तरह हो सके।

    सांवेर क्षेत्र को जल्द मिलेगी यातायात से राहत

    सांवेर क्षेत्र के दोनों बड़े ब्रिजों का निर्माण अंतिम चरण में है और मंत्री सिलावट ने जो निर्देश दिए हैं उनके अनुसार जनवरी के अंत तक दोनों पुल उपयोग के लिए तैयार हो जाएंगे। इससे स्थानीय नागरिकों को काफी सुविधा होगी और पूरे क्षेत्र के यातायात में बड़ा सुधार दिखाई देगा।

    Indore city news: इंदौर में टूटा 48 साल का रिकॉर्ड सर्द उत्तरी हवाओं ने जमाया शहर सोमवार तक रहेगी शीतलहर की मार

  • Indore city news: इंदौर में टूटा 48 साल का रिकॉर्ड सर्द उत्तरी हवाओं ने जमाया शहर सोमवार तक रहेगी शीतलहर की मार

    Indore city news: इन दिनों इंदौर में ठंड ने कुछ ऐसा रूप दिखाया है जिसने शहरवासियों को कांपने पर मजबूर कर दिया है। सर्द उत्तरी हवाओं की वजह से तापमान अचानक नीचे गिरा है और पिछले कई दशकों में पहली बार ऐसा कड़ाके की ठंड का अहसास हो रहा है। शहर में ऐसी ठिठुरन बनी हुई है कि दिन में भी लोग गर्म कपड़ों में नजर आ रहे हैं।

    सर्द उत्तरी हवाओं ने गिराया पारा और बना दी अतिशीत लहर की स्थिति

    शनिवार की सुबह इंदौर में तापमान गिरकर 6.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह गिरावट इतनी तीव्र थी कि पिछले 48 साल का रिकॉर्ड टूट गया। साल 1977 में शहर का न्यूनतम तापमान 4.8 डिग्री सेल्सियस था। मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार की तुलना में न्यूनतम तापमान में सीधे पांच डिग्री की कमी दर्ज की गई। यह गिरावट बताती है कि उत्तरी हवाएं कितनी तेजी से शहर को प्रभावित कर रही हैं।

    18 किलोमीटर प्रतिघंटा की बर्फीली हवा ने दिन में भी बढ़ाई ठंडक

    शनिवार को करीब 18 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली हवाओं ने दिन भर शहर को सर्दी का कड़ा अहसास कराया। सुबह से लेकर शाम तक हर समय ठिठुरन बनी रही। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह स्थिति हिमालय क्षेत्र से आने वाली उत्तर पश्चिमी हवाओं के कारण बनी है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान क्षेत्र में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के चलते इंदौर की ओर तेज सर्द हवाएं पहुंच रही हैं।

    सोमवार तक शीतलहर बरकरार धूप देगी हल्की राहत

    मौसम विभाग के अनुसार इंदौर में सोमवार तक शीतलहर की स्थिति जारी रहेगी। सुबह और रात के तापमान में अभी और गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि दिन में हल्की धूप निकलने से थोड़ी राहत मिल सकती है। शनिवार को आसमान में हल्के बादल छाए रहे और रविवार को भी ऐसा ही मौसम रहने का अनुमान है।

    तापमान में रिकॉर्ड गिरावट के पीछे वैज्ञानिकों का विश्लेषण

    भोपाल मौसम केंद्र के विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर पश्चिमी हवाएं तेज हो गई हैं। इसी चलते इंदौर का तापमान तेजी से गिरा। वैज्ञानिकों का कहना है कि एक ही दिन में पांच डिग्री की गिरावट काफी असामान्य मानी जाती है और यह दर्शाती है कि हवा का रुख पूरी तरह बदल गया है।

    प्रदेश के सबसे ठंडे शहरों में इंदौर भी शामिल

    शनिवार को प्रदेश के दस सबसे ठंडे शहरों की सूची में इंदौर भी शामिल रहा। इस सूची में शहडोल का तापमान सबसे कम यानी 4 डिग्री दर्ज किया गया। अन्य शहर जैसे उमरिया राजगढ़ पचमढ़ी रीवा और नौगांव में भी तापमान सामान्य से काफी नीचे रहा। ऐसे में यह साफ है कि प्रदेश भर में कड़ाके की ठंड ने पूरी तरह दस्तक दे दी है।

    पिछले सौ साल के तापमान रिकार्ड बताते हैं सर्दी का बदलता स्वरूप

    अगर पिछले सौ वर्षों के रिकॉर्ड देखें तो इंदौर ने कई बार बेहद कम तापमान झेला है। वर्ष 1936 में तो शहर का तापमान सिर्फ 1.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। इसके बाद भी कई वर्षों में तापमान 3 से 4 डिग्री के बीच दर्ज किया गया। यह आंकड़े बताते हैं कि इंदौर का मौसम समय समय पर बेहद कठोर हो सकता है।

    पिछले दस वर्षों के तापमान का रिकॉर्ड भी हुआ अपडेट

    पिछले दस साल में इंदौर का न्यूनतम तापमान कई बार 6 डिग्री से नीचे गया है। वर्ष 2018 और 2019 में तापमान 6.6 डिग्री दर्ज किया गया था। इस बार 6.2 डिग्री तक पहुंचना यह दर्शाता है कि सर्दी पिछले वर्षों की तुलना में और अधिक कठोर हो गई है।

    इंदौर को अभी और सहनी होगी कड़ाके की ठंड

    इंदौर में इस समय मौसम पूरी तरह सर्द हवाओं के कब्जे में है। कम तापमान और तेज हवा का मेल मिलकर ऐसी ठिठुरन बना रहे हैं जो कम से कम सोमवार तक जारी रह सकती है। शहरवासियों को सावधान रहने और गर्म कपड़े पहनने की सलाह दी गई है।

    Indore latest news: सम्भागायुक्त डॉ खाड़े की अध्यक्षता में हुई इंदौर विमानतल पर्यावरण प्रबंधन समिति की अहम बैठक

  • जैविक खेती से बढ़ाएं आलू की पैदावार और मुनाफा पलामू के कृषि वैज्ञानिक ने बताए आसान तरीके

    पलामू जिले से एक बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है। यहां के कृषि वैज्ञानिक डॉ अखिलेश शाह ने बताया है कि किसान यदि आलू की खेती में जैविक तरीकों का इस्तेमाल करें तो उनकी पैदावार गुणवत्ता और मुनाफा तीनों तेजी से बढ़ सकते हैं। जैविक तकनीकों से उगाए गए आलू बाजार में अधिक कीमत पाते हैं और स्वास्थ्य के लिए भी सुरक्षित माने जाते हैं। आजकल शहरों और ऑनलाइन बाजारों में जैविक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है जिससे किसान की कमाई कई गुना तक बढ़ सकती है।

    मिट्टी को जीवांश से भरपूर बनाना है पहला कदम

    डॉ शाह बताते हैं कि जैविक खेती की नींव खेत की मिट्टी को उपजाऊ और जीवांश से भरपूर बनाने से शुरू होती है। जुताई के समय प्रति एकड़ बीस से पच्चीस क्विंटल गोबर की अच्छी तरह सड़ी खाद पांच किलो ट्राइकोडर्मा दस किलो नीमखली और दो क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट मिलाकर खेत में डालें। इससे मिट्टी नरम होती है रोग कम होते हैं और आलू की गांठें मोटी बनती हैं। जैविक खाद पानी को रोककर रखती है जिससे सिंचाई पर आने वाला खर्च भी काफी कम हो जाता है।

    अच्छे बीज से होती है बंपर पैदावार की शुरुआत

    उच्च गुणवत्ता वाले बीज का चुनाव खेती की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। तीस से चालीस ग्राम वजन वाले चिकने और रोग रहित आलू ही बोआई के लिए चुनें। डॉ शाह बताते हैं कि बोने से पहले बीज का उपचार करना बेहद जरूरी है। इसके लिए दस लीटर पानी में पचास ग्राम ट्राइकोडर्मा पचास मिली नीम तेल और पांच ग्राम स्यूडोमोनास मिलाकर बीज को तीस मिनट डुबोकर रखें। यह तरीका सस्ता भी है और झुलसा गलन और वायरस जैसे रोगों से मजबूत सुरक्षा भी देता है।

    सही दूरी पर रोपाई से फसल रहती है स्वस्थ

    आलू को सही दूरी पर लगाना उत्पादन बढ़ाने का बेहद प्रभावी तरीका है। पौधों की कतार दूरी पैंतालीस से साठ सेंटीमीटर और पौधे की दूरी बीस से पच्चीस सेंटीमीटर रखें। इससे पौधों को पर्याप्त धूप और खुली हवा मिलती है और फसल स्वस्थ रहती है। रोपाई के बाद मिट्टी में हल्की नमी बनाए रखना जरूरी है लेकिन अत्यधिक गीलापन सड़न बढ़ा सकता है।

    जैविक पोषक घोल से बढ़ती है आलू की गांठ बनाने की क्षमता

    डॉ शाह बताते हैं कि फसल की बढ़वार और गांठ बनने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए जैवामृत और जीवामृत जैसे जैविक घोल बहुत लाभकारी हैं। प्रति एकड़ दो सौ लीटर जैवामृत तीस से पैंतीस दिन की अवस्था में डालने से मिट्टी में सूक्ष्म जीव सक्रिय होते हैं। ह्यूमिक एसिड समुद्री शैवाल और गौमूत्र आधारित घोल की दो से तीन बार स्प्रे करने से आलू की गांठें भारी बनती हैं और उत्पादन बीस से पच्चीस प्रतिशत तक बढ़ सकता है।

    रोग और कीट नियंत्रण के लिए प्रभावी जैविक उपाय

    आलू फसल में सबसे बड़ा खतरा झुलसा रोग और कीटों से होता है। जैविक उपाय बेहद सस्ते और कारगर हैं। पांच लीटर गौमूत्र पांच लीटर नीम अर्क और चालीस ग्राम ट्राइकोडर्मा का घोल हर पंद्रह दिन पर छिड़कें। इल्ली और पत्ती खाने वाले कीटों पर नियंत्रण के लिए नीम तेल और बवेरिया बेसियाना का प्रयोग करें। फेरोमोन ट्रैप और पीले चिपचिपे कार्ड लगाने से रासायनिक दवाओं की जरूरत लगभग समाप्त हो जाती है।

    सिंचाई और मल्चिंग से मिलता है अतिरिक्त फायदा

    जैविक खेती में बूंद बूंद सिंचाई का उपयोग करने से पानी की बचत होती है और फसल बेहतर बढ़ती है। खेत में धान का पुआल या भूसा बिछाकर जैविक मल्चिंग करने से मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है खरपतवार कम होते हैं और आलू की गांठें आकार में एक समान बनती हैं। मल्चिंग से उत्पादन दस से पंद्रह प्रतिशत तक बढ़ जाता है और श्रम खर्च भी काफी कम होता है।

    जैविक आलू की बढ़ती मांग से किसानों को मिलता है अधिक लाभ

    शहरों और ऑनलाइन बाजार में जैविक आलू की मांग लगातार बढ़ रही है। किसान यदि अपनी फसल को किसान मंडी FPO या सीधी बिक्री के माध्यम से बेचें तो सामान्य आलू से बीस से चालीस प्रतिशत अधिक कीमत मिल सकती है। रासायनिक दवाओं और उर्वरकों का खर्च न होने से जैविक खेती में होने वाला मुनाफा सामान्य खेती की तुलना में दोगुना तक हो सकता है।