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- इसके तहत सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए उनकी जरूरत के मुताबिक AI आधारित तकनीकी समाधान तैयार किए जाएंगे।
- मुख्यालय इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ इस साझेदारी में समन्वय की भूमिका निभाएगा, जबकि Sarvam AI सिस्टम तैयार करने और उन्हें लागू करने में सहयोग करेगी।
- रक्षा क्षेत्र में देश के भीतर विकसित तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना भारत की आत्मनिर्भरता से जुड़ा महत्वपूर्ण लक्ष्य है।
- इसका मतलब है कि तकनीक अधिकारियों को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने में सहायक होगी, जबकि वास्तविक परिचालन फैसलों पर इंसानी नियंत्रण बनाए रखने की बात कही गई है।
Army Navy Air Force AI: युद्ध के मैदान में सही समय पर मिली जानकारी कई बार पूरी रणनीति बदल सकती है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए भारत अब रक्षा क्षेत्र में अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षमता को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारतीय AI कंपनी Sarvam ने रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के साथ पांच साल का समझौता किया है। इसके तहत सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए उनकी जरूरत के मुताबिक AI आधारित तकनीकी समाधान तैयार किए जाएंगे।
एक ही तकनीकी ढांचे से जुड़ेंगी तीनों सेनाएं
इस समझौते की खास बात यह है कि इसका दायरा केवल किसी एक सैन्य सेवा तक सीमित नहीं रहेगा। इसके अंतर्गत तीनों सेनाओं के साथ संयुक्त रक्षा संगठनों की जरूरतों पर भी काम किया जाएगा। मुख्यालय इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ इस साझेदारी में समन्वय की भूमिका निभाएगा, जबकि Sarvam AI सिस्टम तैयार करने और उन्हें लागू करने में सहयोग करेगी।
मैदान में मिलने वाली जानकारी को समझने में मिलेगी मदद
रक्षा क्षेत्र में AI का एक अहम इस्तेमाल अलग-अलग उपकरणों और सेंसर से आने वाले डेटा को एक साथ समझना है। प्रस्तावित तकनीक का उपयोग लक्ष्य की पहचान, सूचनाओं के विश्लेषण और अधिकारियों को निर्णय लेने में सहायता देने के लिए किया जा सकता है। इससे सैन्य कर्मियों को बिखरी हुई जानकारी को व्यवस्थित रूप में देखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि सिस्टम को किस तरह विकसित और इस्तेमाल किया जाता है।
सिर्फ ऑपरेशन नहीं, प्रशिक्षण में भी होगा तकनीक का उपयोग
साझेदारी के तहत AI का इस्तेमाल सैन्य प्रशिक्षण और रोजमर्रा की परिचालन संबंधी जरूरतों के लिए भी किया जाएगा। इसके अलावा, तकनीक लागू होने के बाद कंपनी की ओर से जरूरी तकनीकी सहायता देने का प्रावधान है। इससे अलग-अलग परियोजनाओं के दौरान सामने आने वाली जरूरतों के अनुसार सिस्टम में सुधार करने का अवसर मिल सकता है। Army Navy Air Force AI
स्वदेशी तकनीक पर क्यों दिया जा रहा है जोर
रक्षा क्षेत्र में देश के भीतर विकसित तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना भारत की आत्मनिर्भरता से जुड़ा महत्वपूर्ण लक्ष्य है। इस परियोजना में AI सिस्टम को भारत में विकसित करने और देश के नियंत्रण वाले तकनीकी ढांचे पर संचालित करने पर जोर दिया गया है। इससे रक्षा संबंधी संवेदनशील सूचनाओं और तकनीकी जरूरतों के लिए स्वदेशी समाधान तैयार करने की दिशा में काम आगे बढ़ सकता है।
परियोजना की लागत और तैनाती का इंतजार
समझौते की अवधि पांच साल तय की गई है, लेकिन अभी इसकी कुल वित्तीय लागत, अलग-अलग परियोजनाओं की संख्या और उनके लागू होने की तारीखों का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि नई प्रणालियां कब तक पूरी तरह काम करने लगेंगी। फिलहाल इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य तीनों सेनाओं के लिए AI आधारित क्षमताएं विकसित करना है।Army Navy Air Force AI
फैसले की जिम्मेदारी इंसानों के पास रहेगी
रक्षा क्षेत्र में AI का इस्तेमाल जानकारी जुटाने और उसका विश्लेषण करने की प्रक्रिया को बेहतर बना सकता है, लेकिन सैन्य फैसलों में मानवीय निगरानी बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। इसका मतलब है कि तकनीक अधिकारियों को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने में सहायक होगी, जबकि वास्तविक परिचालन फैसलों पर इंसानी नियंत्रण बनाए रखने की बात कही गई है। आने वाले समय में इस परियोजना की प्रगति बताएगी कि स्वदेशी AI भारतीय रक्षा व्यवस्था में कितना उपयोगी साबित होता है। Army Navy Air Force AI
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निहारिका शाह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), नई तकनीक और डिजिटल दुनिया से जुड़े विषयों पर लिखने वाली लेखिका हैं। उन्हें AI टूल्स, मशीन लर्निंग और टेक्नोलॉजी के बदलते दौर को समझने में विशेष रुचि है। निहारिका जटिल तकनीकी विषयों को सरल और आसान हिंदी में पाठकों तक पहुंचाने पर ध्यान देती हैं। उनके लेखों में AI के नए टूल्स, तकनीकी अपडेट, डिजिटल इनोवेशन और आम लोगों की जिंदगी पर तकनीक के प्रभाव जैसे विषय शामिल रहते हैं।



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