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- Diwali Puja Muhurat 2026: दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा किस समय की जाए, इसे लेकर हर साल लोगों के मन में कई सवाल रहते हैं।
- पूजा के लिए प्रदोष काल और स्थिर लग्न को विशेष महत्व दिया जाता है।
- उनकी प्रस्तुत गणना के अनुसार 8 नवंबर को प्रदोष काल शाम 5 बजकर 36 मिनट से रात 8 बजकर 14 मिनट तक रहेगा।
- दीपक शास्त्री ने अपने ज्योतिषीय विश्लेषण में शाम 6 बजकर 16 मिनट से 7 बजकर 5 मिनट तक के समय को लक्ष्मी पूजन शुरू करने के लिए विशेष रूप से शुभ बताया है।
दिवाली की शाम कब करें लक्ष्मी-गणेश की पूजा?
ज्योतिष गुरु जी चैनल पर ज्योतिषाचार्य दीपक शास्त्री ने बताया है कि लक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोष काल के साथ स्थिर लग्न का संयोग महत्वपूर्ण माना जाता है। उनकी प्रस्तुत गणना के अनुसार 8 नवंबर को प्रदोष काल शाम 5 बजकर 36 मिनट से रात 8 बजकर 14 मिनट तक रहेगा।
इसी गणना में वृषभ लग्न शाम 6 बजकर 4 मिनट से रात 8 बजकर 1 मिनट तक बताया गया है। धार्मिक परंपराओं में वृषभ को स्थिर लग्न माना जाता है। इसी वजह से दिवाली पर इस लग्न में मां लक्ष्मी की पूजा करने को शुभ माना जाता है।
शाम 6:16 से 7:05 बजे के बीच विशेष पूजा की सलाह
दीपक शास्त्री ने अपने ज्योतिषीय विश्लेषण में शाम 6 बजकर 16 मिनट से 7 बजकर 5 मिनट तक के समय को लक्ष्मी पूजन शुरू करने के लिए विशेष रूप से शुभ बताया है। उनके अनुसार इस अवधि में प्रदोष काल और स्थिर लग्न के साथ कुंभ स्थिर नवांश का भी महत्व है।
उन्होंने शाम 6 बजकर 16 मिनट से 6 बजकर 28 मिनट और शाम 6 बजकर 52 मिनट से 7 बजकर 5 मिनट तक की दो छोटी अवधियों को भी विशेष महत्व दिया है। ये समय वीडियो में प्रस्तुत ज्योतिषीय गणना पर आधारित हैं। इन्हें पूरे भारत के लिए एक समान लागू होने वाला मुहूर्त नहीं समझना चाहिए।
रात में पूजा करने वालों के लिए भी बताया गया समय
जो लोग देर रात लक्ष्मी पूजन करना चाहते हैं, उनके लिए भी वीडियो में एक अलग समय बताया गया है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार 9 नवंबर की मध्यरात्रि के बाद 12 बजकर 34 मिनट से सुबह 2 बजकर 50 मिनट तक सिंह लग्न रहेगा। इसे भी स्थिर लग्न की श्रेणी में रखा जाता है।
इसके अलावा चौघड़िया के आधार पर शाम 5 बजकर 36 मिनट से रात 10 बजकर 32 मिनट तक की अवधि का उल्लेख किया गया है। हालांकि इस पूरी अवधि को लगातार एक ही शुभ चौघड़िया मानना सही नहीं होगा। चौघड़िया के अलग-अलग हिस्सों का अपना महत्व होता है।
पूरे भारत में एक जैसा क्यों नहीं होता पूजा का मुहूर्त?
दिवाली की तारीख पूरे देश में एक हो सकती है, लेकिन पूजा के शुभ समय में स्थान के अनुसार अंतर आता है। प्रदोष काल की गणना सूर्यास्त से जुड़ी होती है, जबकि लग्न का समय भी भौगोलिक स्थिति के आधार पर बदलता है।
इसी कारण किसी एक स्थान के लिए निकाले गए मुहूर्त को देश के सभी शहरों पर लागू नहीं किया जा सकता। श्रद्धालुओं को अपने स्थानीय पंचांग में प्रदोष काल और वृषभ लग्न का समय देखकर लक्ष्मी पूजन करना चाहिए।
लक्ष्मी पूजन के लिए किन चीजों की होगी जरूरत?
दिवाली की पूजा के लिए मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा, लकड़ी की चौकी, लाल या पीला कपड़ा, रोली, कुमकुम, हल्दी, चंदन, अक्षत, फूल, फल, नारियल, पान, सुपारी, धूप, दीपक और घी जैसी सामग्री तैयार रखी जा सकती है। पूजा के लिए जल से भरे कलश का भी उपयोग किया जाता है।
पूजा शुरू करने से पहले स्थान की सफाई करें और चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर प्रतिमाएं स्थापित करें। इसके बाद भगवान गणेश की पूजा करें और मां लक्ष्मी को पारंपरिक सामग्री अर्पित करें। परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए संकल्प लें और अंत में आरती करें।
लक्ष्मी पूजा में मुहूर्त के साथ श्रद्धा का भी महत्व
दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजन का संबंध सुख, समृद्धि और मंगलकामना से जुड़ा है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार लोग प्रदोष काल में पूजा करना पसंद करते हैं। वहीं कई परिवार अपनी कुल परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजन करते हैं।
ऐसे में 8 नवंबर को लक्ष्मी पूजा की तैयारी कर रहे श्रद्धालुओं के लिए जरूरी है कि वे पहले अपने क्षेत्र का शुभ समय देख लें। पूजा सामग्री पहले से तैयार रखने पर निर्धारित मुहूर्त में बिना जल्दबाजी के पूजन किया जा सकता है।
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शीतल प्रजापत Pravah Times की फेस्टिवल राइटर हैं। वे त्योहारों, पर्व-तिथियों, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और परंपराओं से जुड़ी खबरें और लेख तैयार करती हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक त्योहारों की सही तारीख, मुहूर्त और धार्मिक महत्व की जानकारी सरल भाषा में पहुंचाना है।

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