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- महीने के दौरान पूरे जीवन बीमा उद्योग के न्यू बिजनेस प्रीमियम में सालाना आधार पर गिरावट दर्ज की गई।
- सबसे ज्यादा असर देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी LIC के कारोबार पर दिखाई दिया, जबकि निजी क्षेत्र की कंपनियों ने इस दौरान वृद्धि दर्ज कर कुल तस्वीर को कुछ हद तक संभाला।
- फरवरी 2023 में LIC (जीवन बीमा)का ग्रुप सिंगल प्रीमियम करीब 40 प्रतिशत कम हुआ।
- निजी बीमा कंपनियों ने दर्ज की वृद्धि
जीवन बीमा: नई पॉलिसियों से मिलने वाले प्रीमियम को लेकर फरवरी 2023 में भारतीय जीवन बीमा बाजार के आंकड़े चौंकाने वाले रहे। महीने के दौरान पूरे जीवन बीमा उद्योग के न्यू बिजनेस प्रीमियम में सालाना आधार पर गिरावट दर्ज की गई। सबसे ज्यादा असर देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी LIC के कारोबार पर दिखाई दिया, जबकि निजी क्षेत्र की कंपनियों ने इस दौरान वृद्धि दर्ज कर कुल तस्वीर को कुछ हद तक संभाला।
फरवरी में 17 प्रतिशत घटा जीवन बीमा उद्योग का नया प्रीमियम
लाइफ इंश्योरेंस काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार फरवरी 2023 में जीवन बीमा कंपनियों का कुल न्यू बिजनेस प्रीमियम करीब 22,847.65 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल फरवरी की तुलना में यह आंकड़ा लगभग 17 प्रतिशत कम है। न्यू बिजनेस प्रीमियम में नई पॉलिसियों से मिलने वाला पहले साल का प्रीमियम और सिंगल प्रीमियम शामिल किया जाता है।
आमतौर पर वित्त वर्ष के आखिरी महीनों में जीवन बीमा कंपनियों के कारोबार में तेजी देखने को मिलती है। इसकी एक वजह यह भी होती है कि ग्राहक टैक्स बचत और वित्तीय योजना के लिए नई बीमा एवं बचत योजनाओं में निवेश करते हैं। हालांकि फरवरी में उद्योग के आंकड़ों ने इस सामान्य रुझान से अलग तस्वीर पेश की।
LIC के प्रीमियम में आई बड़ी गिरावट
फरवरी में LIC (जीवन बीमा) के न्यू बिजनेस प्रीमियम पर सबसे ज्यादा दबाव दिखाई दिया। कंपनी का प्रीमियम सालाना आधार पर करीब 32 प्रतिशत घटकर 11,879.49 करोड़ रुपये रह गया। फरवरी 2022 में यही आंकड़ा लगभग 17,489 करोड़ रुपये था। यानी एक साल के भीतर LIC के नए कारोबार से आने वाले प्रीमियम में उल्लेखनीय कमी दर्ज हुई।
LIC (जीवन बीमा) के प्रदर्शन पर ग्रुप सिंगल प्रीमियम कारोबार में आई गिरावट का खासा असर पड़ा। यह सेगमेंट कंपनी के कुल न्यू बिजनेस प्रीमियम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और फरवरी में इसी हिस्से में कमजोरी ने पूरे आंकड़े को प्रभावित किया।
ग्रुप सिंगल प्रीमियम में 40 प्रतिशत की कमी
फरवरी 2023 में LIC (जीवन बीमा)का ग्रुप सिंगल प्रीमियम करीब 40 प्रतिशत कम हुआ। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कंपनी ने इस सेगमेंट से फरवरी में लगभग 7,000 करोड़ रुपये जुटाए, जबकि एक साल पहले इसी महीने में यह रकम करीब 12,062 करोड़ रुपये थी। इस बदलाव का सीधा असर कंपनी के कुल नए प्रीमियम पर देखने को मिला।
ग्रुप पॉलिसियों की हिस्सेदारी में भी कमी दर्ज की गई। फरवरी 2022 में जहां LIC के बेचे गए कारोबार में ग्रुप पॉलिसियों की हिस्सेदारी करीब 32 प्रतिशत थी, वहीं फरवरी 2023 में यह घटकर लगभग 19 प्रतिशत रह गई।
निजी बीमा कंपनियों ने दर्ज की वृद्धि
जहां LIC (जीवन बीमा) के आंकड़ों में गिरावट रही, वहीं निजी क्षेत्र की जीवन बीमा कंपनियों ने फरवरी में बेहतर प्रदर्शन किया। निजी कंपनियों का न्यू बिजनेस प्रीमियम करीब 10 प्रतिशत बढ़कर 10,968 करोड़ रुपये पहुंच गया। इससे साफ हुआ कि पूरे उद्योग की गिरावट का मुख्य दबाव सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी के प्रदर्शन से जुड़ा रहा।
निजी बीमा कंपनियों के व्यक्तिगत नॉन-सिंगल प्रीमियम कारोबार में भी मजबूती देखने को मिली। इसके अलावा ग्रुप सिंगल प्रीमियम सेगमेंट में भी निजी कंपनियों ने बढ़त दर्ज की, जिससे उनके कुल कारोबार को सहारा मिला।
जनवरी के मुकाबले फरवरी में बदली तस्वीर
फरवरी के आंकड़े इसलिए भी खास रहे क्योंकि इससे ठीक एक महीने पहले यानी जनवरी में जीवन बीमा उद्योग के प्रीमियम में करीब 20 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज हुई थी। उस समय निजी कंपनियों का योगदान काफी महत्वपूर्ण रहा था और उनके प्रीमियम में लगभग 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। LIC ने भी जनवरी में पिछले साल की तुलना में करीब 18 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की थी।
फरवरी में स्थिति बदल गई और LIC के कारोबार में तेज गिरावट आने से पूरे उद्योग का प्रदर्शन प्रभावित हुआ। हालांकि निजी कंपनियों की वृद्धि ने कुल गिरावट को कुछ हद तक सीमित रखा।
साल की शुरुआत से अब तक उद्योग की स्थिति
फरवरी तक वित्त वर्ष 2022-23 में जीवन बीमा उद्योग का कुल प्रीमियम सालाना आधार पर करीब 25.06 प्रतिशत बढ़कर 3.18 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। इस अवधि में LIC के प्रीमियम में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि निजी बीमा कंपनियों का प्रीमियम करीब 17.38 प्रतिशत बढ़ा।
पूरे वित्त वर्ष के दौरान उद्योग की वृद्धि में ग्रुप सिंगल प्रीमियम और पिछले साल का अपेक्षाकृत कम आधार भी महत्वपूर्ण कारण रहे। वहीं निजी बीमा कंपनियां व्यक्तिगत नॉन-सिंगल प्रीमियम वाले कारोबार में लगातार अपनी पकड़ मजबूत करती दिखाई दीं।
रिटेल कारोबार में निजी कंपनियों की बढ़त
अगर एनुअलाइज्ड प्रीमियम इक्वीवेलेंट यानी APE के आधार पर रिटेल कारोबार को देखा जाए तो फरवरी में उद्योग की वृद्धि करीब 10.5 प्रतिशत रही। इस दौरान निजी क्षेत्र की कंपनियों ने लगभग 18.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसके विपरीत LIC के रिटेल APE में सालाना आधार पर करीब 3 प्रतिशत की कमी आई।
APE को बीमा कंपनियों के नए कारोबार को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है। इसमें नियमित रूप से मिलने वाले प्रीमियम के साथ नए सिंगल प्रीमियम का एक हिस्सा शामिल किया जाता है। इससे कंपनियों के नए रिटेल कारोबार की दिशा को समझने में मदद मिलती है।
मार्च में कारोबार बढ़ने की उम्मीद क्यों थी
बीमा उद्योग के जानकारों के मुताबिक फरवरी में कम कार्यदिवस होने का असर भी प्रीमियम संग्रह पर पड़ सकता है। इसके अलावा वित्त वर्ष समाप्त होने से पहले मार्च में आमतौर पर बीमा और निवेश से जुड़ी गतिविधियां बढ़ जाती हैं। उस समय ग्राहक टैक्स प्लानिंग और वित्तीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पॉलिसियां खरीदने में अधिक रुचि दिखा सकते हैं।
उस समय नए बीमा मानकों में होने वाले बदलावों को देखते हुए महंगी पॉलिसियों की बिक्री में मार्च के दौरान तेजी आने की संभावना भी जताई गई थी। ऐसे में फरवरी के कमजोर आंकड़ों के बाद मार्च का प्रदर्शन बीमा कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था।

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