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- Mp News| मध्य प्रदेश में कमजोर मानसून का असर अब साफ दिखाई देने लगा है।
- इंदौर की करीब 40 लाख आबादी को पानी उपलब्ध कराने वाले जलस्रोत भी खाली होने लगे हैं, जबकि उज्जैन में गंभीर डैम से केवल 70 दिनों तक ही पानी की सप्लाई हो सकेगी।
- कम बारिश के कारण शहर के प्रमुख तालाबों और जलस्रोतों में पानी का स्तर घटने लगा है।
- वहीं इस बार प्रदेश में सामान्य से करीब 4 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
Mp News| मध्य प्रदेश में कमजोर मानसून का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। प्रदेश के 11 जिलों में जलसंकट का खतरा बढ़ गया है। कहीं नदियों का जलस्तर घट रहा है तो कहीं डैम और तालाबों में पानी तेजी से कम हो रहा है। हालात ऐसे हैं कि गर्मी शुरू होने से पहले ही कई शहरों में पेयजल संकट की आशंका जताई जा रही है। इंदौर की करीब 40 लाख आबादी को पानी उपलब्ध कराने वाले जलस्रोत भी खाली होने लगे हैं, जबकि उज्जैन में गंभीर डैम से केवल 70 दिनों तक ही पानी की सप्लाई हो सकेगी। आइए जानते हैं मध्य प्रदेश में जलसंकट की पूरी स्थिति।
मध्य प्रदेश के 11 जिलों में जलसंकट का खतरा
इस साल मध्य प्रदेश के कई जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। प्रदेश के 11 जिलों में सामान्य से 80 प्रतिशत या उससे कम बारिश होने के कारण जलस्रोतों पर दबाव बढ़ने लगा है। इनमें इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, शाजापुर, पांढुर्णा, आलीराजपुर, धार और झाबुआ शामिल हैं।
कम बारिश का असर अब नदियों, तालाबों और डैम के जलस्तर पर दिखाई दे रहा है। धार और झाबुआ समेत पांच जिलों में सबसे कम बारिश हुई है। वहीं आलीराजपुर में सामान्य से 52 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। हालांकि, अभी तक प्रदेश सरकार ने किसी भी जिले को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया है। प्रभावित क्षेत्रों में किसानों और स्थानीय लोगों की ओर से सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग उठ रही है।
उज्जैन में गंभीर डैम में बचा सिर्फ 70 दिन का पानी
उज्जैन में कम बारिश के कारण पेयजल व्यवस्था पर संकट गहराने लगा है। इस साल शहर में औसतन 682 मिलीमीटर यानी करीब 27 इंच बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश लगभग 35 इंच होती है। कम बारिश की वजह से शहर को पानी सप्लाई करने वाला गंभीर डैम पूरी तरह नहीं भर पाया।
गंभीर डैम की कुल क्षमता 2,250 एमसीएफटी है, लेकिन इस बार इसमें पानी का स्तर केवल 636 एमसीएफटी तक पहुंचा। इसमें से 100 एमसीएफटी डेड स्टोरेज घटाने के बाद जलापूर्ति के लिए उपलब्ध पानी से करीब 70 दिन तक ही सप्लाई हो सकेगी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, यह पानी 22 दिसंबर तक चलने का अनुमान है।
उज्जैन में नर्मदा नदी से पानी लेने की तैयारी
गंभीर डैम में पानी की कमी को देखते हुए उज्जैन नगर निगम नर्मदा पाइपलाइन से पानी लेने की तैयारी कर रहा है। निगम के अपर आयुक्त पवन कुमार सिंह के मुताबिक, इससे पहले भी इस साल जून में गंभीर डैम में पानी की कमी होने पर रोजाना जलप्रदाय के लिए नर्मदा की पाइपलाइन से पानी लिया गया था।
अब एक बार फिर नर्मदा के पानी पर निर्भरता बढ़ सकती है। पानी की कमी का असर केवल आम लोगों की पेयजल व्यवस्था पर ही नहीं, बल्कि आने वाले समय में सिंहस्थ की तैयारियों पर भी पड़ सकता है। शहर में भूजल स्तर भी गिरकर करीब 200 फीट तक पहुंचने की बात सामने आई है।
पानी की कमी से गेहूं की खेती का रकबा 75% तक घटने की आशंका
कम बारिश का असर अब खेती पर भी दिखाई देने लगा है। भारतीय किसान संघ से जुड़े किसानों के अनुसार, इस बार पानी की कमी के चलते गेहूं की बुवाई का रकबा 75 प्रतिशत तक घट सकता है। इसका असर आने वाले समय में खाद्यान्न उत्पादन और बाजार में कीमतों पर पड़ने की आशंका है।
मालवा क्षेत्र में लहसुन और प्याज की खेती का रकबा भी करीब 70 प्रतिशत तक कम होने की आशंका जताई जा रही है। यदि फसलों का उत्पादन घटता है तो किसानों की आमदनी प्रभावित होने के साथ बाजार में महंगाई बढ़ने का खतरा भी पैदा हो सकता है।
धार में खेती पर संकट, किसानों की बढ़ी परेशानी
धार जिले में इस बार बारिश की स्थिति काफी कमजोर रही है। यहां केवल 25.84 इंच बारिश हुई, जो सामान्य से करीब 10 इंच कम है। पिछले साल 2025 में जिले में औसतन 51.13 इंच बारिश दर्ज की गई थी। इस बार कम बारिश के कारण खेतों से लेकर बाजार तक इसका असर दिखाई देने की आशंका है। Mp News
पर्याप्त बारिश होने पर किसान गेहूं, लहसुन, प्याज और मटर जैसी फसलों की बुवाई करते हैं, लेकिन इस बार पानी की कमी को देखते हुए कई किसान कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। इनमें चना, तिवड़ा, तुकमरी, रायड़ा और अन्य कम पानी वाली फसलें शामिल हैं।
जिले में कई बोरिंग अभी से बंद हो गए हैं, जबकि कुछ बोरिंग में रुक-रुककर पानी आ रहा है। इससे किसानों को सिंचाई करने में परेशानी हो रही है। समय पर पानी नहीं मिलने से फसलों का उत्पादन घटने की आशंका भी बढ़ गई है।
धार शहर के तालाबों में बचा सिर्फ 25 से 30% पानी
धार शहर की करीब डेढ़ लाख आबादी की पेयजल जरूरतें पूरी करने वाले तालाबों में भी पानी तेजी से घट रहा है। दिलावरा, नटनागरा, नयापुरा और सीतापाट तालाबों में अब करीब 25 से 30 प्रतिशत पानी ही बचा है। वहीं मुंज तालाब भी लगभग 40 प्रतिशत भरा हुआ है। Mp News
बोरिंग में पानी कम होने और तालाबों का जलस्तर लगातार घटने से आने वाले महीनों में पेयजल संकट गहराने की आशंका है। यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो लोगों को टैंकरों के जरिए पानी मंगवाना पड़ सकता है, जिससे आम परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
इंदौर में जलसंकट से निपटने के लिए मांगे 50 करोड़ रुपये
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में भी पानी की कमी को लेकर चिंता बढ़ गई है। शहर में सामान्य तौर पर करीब 37 इंच बारिश होती है, लेकिन इस बार केवल 23 इंच बारिश दर्ज की गई है। कम बारिश के कारण शहर के प्रमुख तालाबों और जलस्रोतों में पानी का स्तर घटने लगा है।
जलसंकट की आशंका को देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल प्रबंधन के लिए 50 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज मांगा है। इस मामले को लेकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और तुलसी सिलावट भी बैठकें कर चुके हैं। Mp News
इंदौर के तालाबों में तेजी से घट रहा पानी
इंदौर के कई प्रमुख तालाबों में पानी की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। छोला बिलावली और लिंबोदी तालाब में एक फीट से भी कम पानी बचा है। वहीं पिपलियापाला तालाब में 22 फीट की क्षमता के मुकाबले केवल 7.6 फीट पानी उपलब्ध है।
इसके अलावा यशवंत सागर, बड़ा बिलावली, बड़ा सिरपुर और छोटा सिरपुर तालाब में भी पानी की कमी देखी जा रही है। इंदौर में रोजाना करीब 800 एमएलडी पानी की जरूरत होती है। ऐसे में जलस्रोतों में घटता पानी आने वाले महीनों में शहर के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। Mp News
2015 के बाद फिर सूखे जैसे हालात, जानिए कितनी हुई बारिश
मध्य प्रदेश में बारिश के पुराने आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2017 में औसतन 29.9 इंच, 2018 में 34.3 इंच, 2019 में 53 इंच, 2022 में 46 इंच और 2025 में 45.2 इंच बारिश दर्ज की गई थी। वहीं इस बार प्रदेश में सामान्य से करीब 4 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
इस साल स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि बारिश सभी क्षेत्रों में समान रूप से नहीं हुई। कई जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश हुई, जिससे जलस्रोत पर्याप्त मात्रा में नहीं भर सके। अब इसका असर पेयजल, खेती और आने वाले महीनों की जल व्यवस्था पर पड़ने की आशंका है।
आने वाले महीनों में बढ़ सकती है पानी की परेशानी
मध्य प्रदेश के कई जिलों में अभी से घटते जलस्तर ने प्रशासन और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इंदौर, उज्जैन और धार जैसे शहरों में पानी की उपलब्धता बनाए रखना बड़ी चुनौती बन सकता है। वहीं किसानों के सामने सिंचाई और फसल उत्पादन का संकट खड़ा हो रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में जल प्रबंधन, पानी की बचत और वैकल्पिक जलस्रोतों की व्यवस्था बेहद जरूरी होगी।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट और आंकड़ों पर आधारित है। जलस्तर और पेयजल उपलब्धता की स्थिति समय के साथ बदल सकती है। किसी भी आधिकारिक निर्णय या वर्तमान स्थिति के लिए संबंधित विभाग की जानकारी देखें।
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भूपेंद्र बिसेन Pravah Times के लेखक हैं। वे मध्य प्रदेश से जुड़ी स्थानीय खबरों और जनहित से जुड़े विषयों पर कंटेंट तैयार करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सटीक और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है।

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