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- Bhopal Master Plan 2047: भोपाल में प्रस्तावित मास्टर प्लान-2047 को लेकर किसानों ने विरोध तेज कर दिया है।
- मास्टर प्लान के प्रारूप में शामिल भूमि उपयोग के प्रस्तावों को लेकर किसानों की चिंता खेती और उससे होने वाली कमाई पर पड़ने वाले संभावित असर से जुड़ी है।
- खासकर 66 गांवों की कृषि भूमि को अलग-अलग आरक्षित श्रेणियों में शामिल करने के प्रस्ताव पर आपत्ति सामने आई है।
- किसान चाहते हैं कि उनकी जमीन का कृषि उपयोग बरकरार रहे और गांवों से जुड़े फैसले लेते समय ग्रामसभा की सहमति को महत्व दिया जाए।
Bhopal Master Plan 2047: भोपाल में प्रस्तावित मास्टर प्लान-2047 को लेकर किसानों ने विरोध तेज कर दिया है। गुरुवार, 22 अक्टूबर को मुगालिया छाप से किसानों ने पैदल मार्च करते हुए नगर तथा ग्राम निवेश (T&CP) के संयुक्त संचालक कार्यालय पहुंचकर घेराव किया। किसानों ने नए प्रारूप में कृषि भूमि के उपयोग को बदलने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई और अपनी शिकायतें लिखित रूप में अधिकारियों के सामने रखीं।
भोपाल मास्टर प्लान 2047 में कृषि भूमि को लेकर विरोध
विवाद की मुख्य वजह नए मास्टर प्लान में जमीन के उपयोग को लेकर किए गए प्रस्ताव हैं। प्रारूप के अनुसार, बड़े तालाब के आसपास के क्षेत्र और कुल 66 गांवों की उपजाऊ जमीन को रिवरफ्रंट, फॉरेस्ट और ग्रीन बेल्ट जैसी श्रेणियों में रखने की योजना है। किसानों को आशंका है कि इन बदलावों से उनकी खेती प्रभावित हो सकती है और आजीविका चलाने में मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
किसानों का कहना है कि जिस जमीन पर खेती की जा रही है, उसका उपयोग कृषि के लिए ही बनाए रखा जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर उन्होंने संबंधित कार्यालय तक मार्च निकाला। वहां पहुंचकर किसानों ने प्रस्तावित बदलावों के खिलाफ अपनी लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं।
ग्रामसभा की सहमति के बिना बदलाव नहीं करने की मांग
विरोध कर रहे किसानों की मांग है कि उनकी कृषि भूमि को दूसरी आरक्षित श्रेणियों में शामिल करने के बजाय खेती के लिए सुरक्षित रखा जाए। उनका यह भी कहना है कि गांवों की जमीन के उपयोग में किसी तरह का बदलाव ग्रामसभा की सहमति के बिना नहीं किया जाना चाहिए।
मास्टर प्लान के प्रारूप में शामिल भूमि उपयोग के प्रस्तावों को लेकर किसानों की चिंता खेती और उससे होने वाली कमाई पर पड़ने वाले संभावित असर से जुड़ी है। इसी मुद्दे पर किसानों ने एकजुट होकर अपनी बात अधिकारियों तक पहुंचाई है। उनकी आपत्तियां अब इस प्रस्तावित योजना को लेकर उठ रहे विरोध का हिस्सा बन गई हैं।
1995 के बाद भोपाल में तैयार हो रहा नया मास्टर प्लान
भोपाल में वर्ष 1995 के बाद पहली बार नया मास्टर प्लान तैयार किया गया है। मास्टर प्लान-2047 का प्रारूप शहर और आसपास के क्षेत्रों की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसमें 254 गांवों और 45 लाख की आबादी को ध्यान में रखा गया है। Bhopal Master Plan 2047
हालांकि, नए प्रारूप में जमीन के इस्तेमाल से जुड़े प्रस्तावों ने किसानों के बीच चिंता पैदा कर दी है। खासकर 66 गांवों की कृषि भूमि को अलग-अलग आरक्षित श्रेणियों में शामिल करने के प्रस्ताव पर आपत्ति सामने आई है। किसान चाहते हैं कि उनकी जमीन का कृषि उपयोग बरकरार रहे और गांवों से जुड़े फैसले लेते समय ग्रामसभा की सहमति को महत्व दिया जाए। Bhopal Master Plan 2047

भूपेंद्र बिसेन Pravah Times के लेखक हैं। वे मध्य प्रदेश से जुड़ी स्थानीय खबरों और जनहित से जुड़े विषयों पर कंटेंट तैयार करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सटीक और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है।

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