Til Chaturthi Indore: तिल चतुर्थी पर खजराना गणेश मंदिर में सवा लाख लड्डुओं का महाभोग और मेले की भव्य शुरुआत 4 Hello खजराना गणेश मंदिर

Til Chaturthi Indore: इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में माघ माह की तिल चतुर्थी के पावन अवसर पर आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस विशेष दिन भगवान गणेश को तिल गुड़ के सवा लाख लड्डुओं का महाभोग अर्पित किया गया। पवित्र ध्वजा पूजन के साथ तीन दिवसीय पारंपरिक तिल चतुर्थी मेले की शुरुआत हुई और पूरे परिसर में भक्ति का वातावरण छा गया।

वैदिक मंत्रों के साथ भोग अर्पण और महाआरती

तिल चतुर्थी के अवसर पर मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान गणेश के समक्ष सवा लाख लड्डुओं का संग्रह कराया गया। इसके बाद भोग अर्पित कर प्रसाद वितरण की शुरुआत की गई। महाआरती के दौरान श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही और पूरे मंदिर परिसर में जयकारों की गूंज सुनाई दी। इस आयोजन ने भक्तों के मन में गहरी श्रद्धा और आनंद भर दिया।

72 घंटे की मेहनत से तैयार हुआ महाभोग

सवा लाख तिल गुड़ लड्डुओं का यह विशाल भोग 72 घंटे की लगातार मेहनत से तैयार किया गया। मंदिर परिसर में अनुभवी हलवाइयों की टीम ने दिन रात परिश्रम कर इस महाभोग को आकार दिया। तिल चतुर्थी के इस पावन प्रसाद को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया और भक्तों ने इसे भगवान गणेश की कृपा का प्रतीक माना।

स्वर्ण आभूषणों से सजा गणेश परिवार

इस पावन अवसर पर भगवान गणेश और उनके परिवार को स्वर्ण आभूषण धारण कराए गए। भव्य श्रृंगार और आकर्षक सजावट ने भक्तों का मन मोह लिया। ध्वजा पूजन के बाद महाआरती संपन्न हुई और आगामी दिनों में अलग अलग प्रकार के लड्डुओं का भोग अर्पित किए जाने की परंपरा भी शुरू की गई जिससे मेले की धार्मिक गरिमा और बढ़ गई।

चंद्रोदय और विशेष योग का महत्व

तिल चतुर्थी व्रत का समापन चंद्रोदय दर्शन के बाद होता है। इस दिन रात्रि में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व माना गया। पूरे दिन शुभ योग बना रहा जिसे श्रद्धालुओं ने पूजा और व्रत के लिए अत्यंत फलदायी माना। बड़ी संख्या में भक्तों ने व्रत रखकर भगवान गणेश से सुख समृद्धि की कामना की।

मेले में विशेष व्यवस्थाएं और आकर्षण

तीन दिवसीय तिल चतुर्थी मेले के लिए मंदिर परिसर को फूलों और आकर्षक लाइटिंग से सजाया गया। बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले लगाए गए और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाया गया। दान के लिए डिजिटल सुविधाएं भी शुरू की गईं जिससे भक्त आसानी से अपनी श्रद्धा अर्पित कर सकें।

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