Khajrana Ganesh Temple Indore: खजराना गणेश मंदिर इंदौर तीन माह बाद खुलीं दान पेटियां निकले करोड़ों रुपये और भक्तों की मन्नतें

Khajrana Ganesh Temple Indore: इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर से जुड़ी यह खबर हर भक्त के दिल को छू लेने वाली है। जब आस्था और विश्वास एक साथ जुड़ते हैं तो नतीजा भी खास होता है। तीन माह बाद जब मंदिर की दान पेटियां खोली गईं तो हर कोई हैरान रह गया।

तीन माह बाद खुलीं चालीस दान पेटियां

इंदौर के खजराना गणेश मंदिर में रखी गई चालीस दान पेटियां तीन माह बाद खोली गईं। इन पेटियों से नकद राशि के साथ सोने चांदी के जेवर और विदेशी मुद्रा भी निकली। दो दिन से लगातार गिनती का काम चल रहा है और अभी भी प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

डेढ़ करोड़ से ज्यादा की दान राशि

दान पेटियों से अब तक डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि निकल चुकी है। यह गिनती पच्चीस कर्मचारियों की टीम कर रही है। जिस कक्ष में नोट गिने जा रहे हैं वहां सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। दान पेटियों में बंद हो चुके पांच सौ और दो हजार रुपये के नोट भी मिले हैं।

ऑनलाइन दान के कारण राशि में आई हल्की कमी

इस बार दान पेटियों से निकली राशि पिछली गिनती की तुलना में थोड़ी कम रही। इसका मुख्य कारण यह है कि मंदिर में अब ऑनलाइन दान की सुविधा भी उपलब्ध है। मंदिर परिसर में क्यूआर कोड लगाए गए हैं और बड़ी संख्या में भक्त अब डिजिटल माध्यम से भी दान कर रहे हैं।

हर दिन उमड़ती है भक्तों की भीड़

खजराना गणेश मंदिर में हर दिन हजारों भक्त दर्शन के लिए आते हैं। भक्त अपनी श्रद्धा अनुसार दान पेटियों में चढ़ावा चढ़ाते हैं। हर तीन माह में इन पेटियों की गिनती की जाती है। दान से मिली राशि से ही मंदिर प्रबंध समिति सेवा कार्य अन्न क्षेत्र और धार्मिक आयोजनों का संचालन करती है।

मन्नतों की पर्चियों ने खींचा ध्यान

दान पेटियों से कई मन्नतों की पर्चियां भी मिलीं। किसी ने गणपति बप्पा से जल्दी शादी की प्रार्थना की थी तो किसी ने अच्छे नंबरों से पास होने की अर्जी लगाई थी। एक पर्ची पर लिखा था बप्पा मुझे पास करा देना। कई भक्तों ने अपनी मन्नत पूरी होने के बाद धन्यवाद स्वरूप चढ़ावा भी चढ़ाया था।

आस्था और विश्वास का जीवंत उदाहरण

खजराना गणेश मंदिर की यह दान गिनती एक बार फिर साबित करती है कि भक्तों का विश्वास आज भी उतना ही मजबूत है। बदलते समय के साथ भले ही दान के तरीके बदले हों लेकिन गणपति बप्पा पर आस्था पहले जैसी ही बनी हुई है।

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