इंदौर हाई कोर्ट की सख्ती से हिला नगर निगम आवारा कुत्तों की समस्या पर बड़ा घोटाला उजागर

आज हम बात कर रहे हैं इंदौर शहर की उस परेशानी की जो हर आम परिवार की जिंदगी से जुड़ी हुई है। शहर की गलियों और सड़कों पर घूमते आवारा कुत्तों ने लोगों का सुकून छीन लिया है। इसी गंभीर मुद्दे पर इंदौर हाई कोर्ट ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है और साफ शब्दों में इसे बड़ा घोटाला बताया है।

कागजी आंकड़ों और जमीनी हकीकत पर कोर्ट का सवाल

कोर्ट के सामने जब नगर निगम ने दावा किया कि शहर में दो लाख से ज्यादा कुत्तों की नसबंदी हो चुकी है तो माननीय न्यायाधीशों ने इस दावे पर गहरी शंका जताई। कोर्ट ने कहा कि अगर सच में इतनी बड़ी संख्या में नसबंदी हुई होती तो सड़कों पर कुत्तों की बढ़ती तादाद नजर नहीं आती। कोर्ट की टिप्पणी ने साफ कर दिया कि फाइलों में दिखाई जा रही तस्वीर और जमीन पर दिख रही सच्चाई में बहुत बड़ा अंतर है।

बच्चों के भविष्य को लेकर कोर्ट की चिंता

माननीय न्यायाधीशों ने इस मुद्दे को सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि सामाजिक समस्या बताया। कोर्ट ने कहा कि कॉलोनियों में बच्चे डर के कारण घर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। खेलना कूदना और दोस्तों के साथ समय बिताना बच्चों के विकास के लिए जरूरी है लेकिन कुत्तों के डर ने उनका बचपन छीन लिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि एक कुत्ते की नसबंदी पर भारी खर्च दिखाना और फिर भी हालात न बदलना गंभीर चिंता का विषय है।

आम लोगों की सुरक्षा पर मंडराता खतरा

कोर्ट ने यह भी कहा कि रात के समय पैदल चलना या दोपहिया वाहन चलाना अब सुरक्षित नहीं रहा। कुत्तों के झुंड राहगीरों पर हमला कर रहे हैं जिससे हादसे बढ़ रहे हैं। यह सिर्फ डर की बात नहीं बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का खतरा बन चुका है। कोर्ट ने निगम के इस तर्क को भी खारिज किया कि शिकायत मिलने पर ही कार्रवाई की जाती है। न्यायालय के अनुसार समस्या इतनी बड़ी है कि इसके लिए खुद से सक्रिय अभियान चलाना जरूरी है।

न्यायिक जांच की चेतावनी से बढ़ा दबाव

कोर्ट ने साफ चेतावनी दी है कि अगर ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो अब तक हुए नसबंदी अभियान की न्यायिक जांच कराई जाएगी। यह चेतावनी नगर निगम के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इंदौर धीरे धीरे आवारा कुत्तों का हब बनता जा रहा है जो किसी भी हाल_db किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।

अगली सुनवाई से पहले सख्त आदेश

हाई कोर्ट ने इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता पीयूष माथुर को न्यायमित्र नियुक्त किया है। साथ ही नगर निगम को आदेश दिया गया है कि अगली सुनवाई से पहले शहर के प्रमुख इलाकों से आवारा कुत्तों को हटाने की ठोस कार्रवाई की जाए। इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 12 जनवरी को होगी और अब सभी की नजरें इसी पर टिकी हैं कि प्रशासन जमीन पर क्या कदम उठाता है।

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