Indore SIR Upadate : इंदौर में चुनावी लापरवाही पर कलेक्टर की कड़ी कार्रवाई एक साथ 13 अधिकारी कर्मचारियों को नोटिस जारी

इंदौर से आज एक बड़ी खबर सामने आई है जो प्रशासनिक व्यवस्था और निर्वाचन कार्य की गंभीरता को साफ दिखाती है। चुनावी प्रक्रिया के दौरान जरा सी चूक भी पूरे सिस्टम को प्रभावित कर सकती है। इसी कारण जब अधिकारी या कर्मचारी अपने कर्तव्य में कोताही बरतते हैं तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाती है। आज हम आपको उसी मामले की पूरी जानकारी सरल और भावनात्मक अंदाज में दे रहे हैं।

निर्वाचन कार्य में लापरवाही के मामले में 13 पर गिरा गाज

विशेष गहन पुनरीक्षण एसआइआर के दौरान कई अधिकारी और कर्मचारियों ने निर्वाचन का काम समय पर और जिम्मेदारी से पूरा नहीं किया। कलेक्टर ने इसे गंभीर मामला माना और गुरुवार को सभी 13 अधिकारी कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। प्रशासन ने साफ कहा है कि निर्वाचन कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

24 घंटे में जवाब देने के सख्त निर्देश

नोटिस में स्पष्ट लिखा है कि सभी संबंधित अधिकारी और कर्मचारी 24 घंटे के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करें। यह जवाब उनके संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के माध्यम से जमा किया जाना है। यदि कोई जवाब नहीं दिया जाता है तो कलेक्टर ने एक पक्षीय कार्रवाई करने की चेतावनी भी दे दी है। इससे पता चलता है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से देख रहा है।

किन कर्मचारी अधिकारियों पर हुई कार्रवाई

जिन 13 लोगों को नोटिस जारी हुआ है उनमें पंचायत विभाग से लेकर शिक्षा विभाग और आंगनवाड़ी से लेकर बीमा सेवाओं तक के कर्मचारी शामिल हैं। इन सभी का विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 205 इंदौर 2 और 208 इंदौर 5 के तहत निर्वाचन कार्य में दायित्व तय था। लेकिन समय पर कार्य न करने और आदेश की अवहेलना के कारण ये सभी कार्रवाई के दायरे में आ गए।

इन कर्मचारियों में मुकेश वर्मा राजेंद्र कुवाल कांता माने सुहागील मरावी संहिता अरदास मनीष कुरवाड़े आबिद खान राधेश्याम भंवर घनश्याम आर्य रेखा यादव किरण वर्मा शैलजा वर्मा और विवेक अखंड शामिल हैं। यह कार्रवाई भविष्य के लिए भी एक संदेश है कि चुनावी काम में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

प्रशासन ने दी सख्त चेतावनी

कलेक्टर ने स्पष्ट कहा है कि यदि कोई कर्मचारी समय पर जवाब नहीं देता है या संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं देता है तो उसके खिलाफ एक पक्षीय कठोर कदम उठाया जाएगा। इससे यह भी समझ आता है कि जिला प्रशासन निर्वाचन प्रक्रिया को बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहता।

यह मामला बताता है कि निर्वाचन जैसे महत्वपूर्ण कार्य में जरा सी भी लापरवाही पूरे तंत्र को नुकसान पहुंचा सकती है। प्रशासन की यह कार्रवाई बाकी कर्मचारियों के लिए भी एक चेतावनी है कि उन्हें अपने कर्तव्य को पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता से निभाना चाहिए।

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