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  • Indore में लायंस क्लब सनशाइन का नशा मुक्ति सेमिनार युवाओं को मिला स्वस्थ जीवन का संदेश

    आज हम आपको इंडौर की एक ऐसी ख़बर बताने जा रहे हैं जिसने युवाओं के दिलों को छू लिया है और उन्हें एक बेहतर जीवन की ओर प्रेरित किया है। लायंस क्लब सनशाइन ने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय यानी DAVV के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान में नशा मुक्ति पर एक जागरूकता सेमिनार आयोजित किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था युवाओं को नशे के खतरनाक दुष्प्रभावों से अवगत कराना और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना।

    सेमिनार में पुलिस और नारकोटिक्स विभाग के अधिकारी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ और योग गुरु मौजूद रहे जिन्होंने युवाओं के साथ खुलकर अपने विचार साझा किए। मध्य प्रदेश पुलिस के उप निरीक्षक शिवम् ठक्कर ने नशा मुक्त जीवन को अपनाने का महत्व समझाया और युवाओं को सकारात्मक आदतें अपनाने का आग्रह किया। वहीं नारकोटिक्स विभाग की उप अधीक्षक प्रीति तिवारी ने नशे के शारीरिक मानसिक और सामाजिक दुष्प्रभावों पर गहराई से चर्चा की और इससे बचने के व्यावहारिक उपाय बताए।

    कार्यक्रम की एक खास कड़ी रहे लायन मुरली अरोरा जिन्होंने मानसिक स्वास्थ्य और नशा मुक्ति के बीच गहरे रिश्ते पर प्रकाश डाला। उन्होंने युवाओं को बताया कि तनाव और कुंठा से बचने के लिए योग व्यायाम और सामाजिक सेवा जैसे सरल उपाय बेहद कारगर हैं। योगा क्लब की संस्थापक सुदिति राजपूत ने भी युवाओं को आंतरिक शांति और संतुलन पाने के लिए योग की शक्ति के बारे में प्रेरित किया।

    सेमिनार का सबसे आकर्षक पल रहा छात्रों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक। इस नाटक ने बेहद संवेदनशील अंदाज़ में नशे की लत के खतरनाक परिणामों को दिखाया और दर्शकों को गहराई से सोचने पर मजबूर किया। छात्रों का संदेश साफ था कि नशा सिर्फ जीवन को बर्बाद करता है और इससे दूर रहकर ही असली सफलता और खुशी हासिल की जा सकती है।

    इस मौके पर रोटेरियन घनश्याम सिंह कार्यक्रम संयोजक रूपाली जोन चेयरपर्सन आशमा मल्होत्रा और क्लब अध्यक्ष संगीता पाठक समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। घनश्याम सिंह ने सभी वक्ताओं का सम्मान किया और छात्रों को नशा मुक्ति अभियान का हिस्सा बने रहने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का संचालन मुस्कान ने किया और सभी ने मिलकर इसे बेहद यादगार बना दिया।

    यह सेमिनार न केवल युवाओं को जागरूक करने का एक प्रयास था बल्कि यह एक ऐसा कदम भी था जो समाज को नशामुक्त और स्वस्थ बनाने की दिशा में प्रेरणादायक साबित होगा।

  • Indore Airport पर चूहे का हमला यात्री की परेशानी ने खड़ी कर दी बड़ी बहस

     Indore Airport: आज हम आपको एक ऐसी घटना के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे सुनकर आप भी हैरान हो जाएंगे। सोचिए जरा आप फ्लाइट पकड़ने एयरपोर्ट पर पहुंचे हों और अचानक वहां आपको किसी इंसान ने नहीं बल्कि एक चूहे ने काट लिया हो। जी हां इंदौर एयरपोर्ट पर बिल्कुल ऐसा ही हुआ और इस घटना ने यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

    यात्री के साथ हुआ चौंकाने वाला हादसा

    इंडिगो की फ्लाईट से यात्रा करने पहुंचे यात्री अरुण मोदी अपनी पत्नी के साथ इंदौर एयरपोर्ट पहुंचे थे। उड़ान का समय होने में अभी देर थी इसलिए वे पैसेंजर ब्लॉक में बैठ गए। तभी अचानक एक चूहा आया और उनकी पेंट में घुस गया। जब अरुण मोदी ने उसे पकड़ने की कोशिश की तो चूहे ने उनके घुटने के ऊपर काट लिया। घाव देखकर मोदी घबरा गए और तुरंत मेडिकल डेस्क की ओर दौड़े।

    इंजेक्शन तक नहीं मिला एयरपोर्ट पर

    यहां जाकर मामला और भी गंभीर हो गया। डॉक्टर से मिलने के बाद जब उन्होंने रैबीज इंजेक्शन की मांग की तो पता चला कि एयरपोर्ट पर यह उपलब्ध ही नहीं है। टिटनेस का इंजेक्शन भी आसानी से नहीं मिला। काफी मशक्कत के बाद उन्हें टिटनेस का इंजेक्शन लगाया गया लेकिन रैबीज का इंजेक्शन उन्हें बेंगलुरु जाकर लगवाना पड़ा। सोचिए जरा अंतरराष्ट्रीय दर्जा पाने वाले एयरपोर्ट पर भी इतनी लापरवाही कैसी हो सकती है।

    मामले ने पकड़ा राजनीतिक रंग

    इस घटना ने अब तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस के प्रवक्ता अमित चौरसिया ने भी इस मामले को उठाने की तैयारी कर ली है। उनका कहना है कि पेस्ट कंट्रोल के नाम पर विभागों में घोटाले हो रहे हैं और इसी कारण एयरपोर्ट पर चूहों की समस्या बढ़ रही है। यह केवल एक यात्री का मामला नहीं है बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा है।

    एयरपोर्ट प्रबंधन के इंतजामों पर सवाल

    अरुण मोदी जो कि बेंगलुरु की आईटी कंपनी में कार्यरत हैं और भोपाल में रहते हैं वे अब भी हैरान हैं कि आखिर एयरपोर्ट पर ऐसी बड़ी चूक कैसे हो सकती है। आपको बता दें कि इंदौर एयरपोर्ट को इंटरनेशनल एयरपोर्ट का दर्जा प्राप्त है लेकिन वहां अक्सर कुत्तों और चूहों के दिखाई देने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इस घटना के बाद प्रबंधन ने पेस्ट कंट्रोल करवाने की जानकारी दी है लेकिन यात्री अब भी आशंकित हैं।

    दोस्तों इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि केवल नाम के लिए अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिल जाना पर्याप्त नहीं है। जरूरी यह है कि वहां सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी हर सुविधा समय पर उपलब्ध हो। यात्रियों का भरोसा तभी बना रहेगा जब एयरपोर्ट प्रशासन इन घटनाओं को गंभीरता से लेकर सख्त कदम उठाए।

  • Indore Ranipura accident: चार दिन पहले दी गई चेतावनी को नजरअंदाज करने की लापरवाही ने ली मासूम जिंदगियां और उजाड़ दिए कई परिवार

    कभी आपने सोचा है कि छोटी-सी लापरवाही कितनी बड़ी कीमत वसूल सकती है। इंदौर के रानीपुरा क्षेत्र में हुआ हादसा इसका जीता-जागता उदाहरण है। कुछ दिन पहले ही मकान का एक कॉलम धंस गया था और दुकानदार ने मकान मालिक को इस बारे में चेताया भी था। लेकिन अफसोस कि उस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया गया और यही लापरवाही आखिरकार दो जिंदगियों के खत्म होने और कई परिवारों के टूटने की वजह बन गई।

    यह मकान लगभग सात सौ वर्गफीट में बना था और अवैध तरीके से खड़ा किया गया था। निचली मंजिल में बिना अनुमति दुकानों का निर्माण हुआ और ऊपर शेड डाल दिए गए। निर्माण के दौरान कॉलम में पतले सरिए डाले गए थे, जो इमारत का बोझ सह नहीं पाए। धीरे-धीरे झुकते मकान को नजरअंदाज करना भारी पड़ गया।

    चार दिन पहले जब कॉलम धंसा तो दुकानदार ने मकान मालिक से शटर न लग पाने की समस्या बताई थी। लेकिन मकान मालिक ने इसे हल्के में लिया। अगर नगर निगम के अफसर और मालिक समय रहते जाग जाते तो शायद यह हादसा टल सकता था।

    Indore News: एमवाय अस्पताल से हटेंगे चूहों का खतरा अब सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में शिफ्ट होंगे नन्हें बच्चों के वार्ड

    त्योहार का समय था और दुकानों में ग्राहकी कम थी। रात आठ बजे के करीब सभी दुकानें बंद हो गईं। यह संयोग ही था कि कर्मचारी और दुकानदार समय पर निकल गए और बड़ी संख्या में लोग हादसे से बच गए। कुछ परिवार भी रिश्तेदारों से मिलने बाहर गए हुए थे। वरना मलबे में दबने वालों की संख्या कहीं ज्यादा होती।

    रात डेढ़ बजे तक राहत और बचाव का काम चलता रहा। जेसीबी से मलबा हटाने से पहले पूरी गली की बिजली काट दी गई ताकि बचाव कार्य में कोई बाधा न आए। वहां मौजूद हर शख्स के दिल में यही सवाल था कि आखिर कब तक हम लापरवाही और अवैध निर्माणों की कीमत अपनी जिंदगियों से चुकाते रहेंगे।

    रानीपुरा की इस त्रासदी ने फिर साबित कर दिया कि छोटी सी अनदेखी भी कितनी बड़ी तबाही ला सकती है। मकान मालिक और जिम्मेदार अधिकारियों को यदि समय रहते चेतना होता तो मासूम जिंदगियां बच सकती थीं। अब जरूरत है कि अवैध निर्माण और लापरवाही पर सख्ती हो ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।