आज हम एक ऐसी घटना पर बात कर रहे हैं जिसने पूरे इंदौर शहर को झकझोर कर रख दिया है। स्वच्छता और सुव्यवस्थित जीवन के लिए पहचाने जाने वाले Indore में पानी दूषित होने से सोलह लोगों की असमय मौत हो गई। इस दुखद घटना पर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष Sumitra Mahajan ने जो बातें कहीं हैं वे केवल बयान नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए आत्मचिंतन का संदेश हैं।
ऐसा हादसा कभी नहीं हुआ था
सुमित्रा महाजन ने इस त्रासदी पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में इंदौर में ऐसा हादसा कभी नहीं देखा। उनके शब्दों में पीड़ा भी थी और हैरानी भी। एक ऐसा शहर जो विकास और व्यवस्था का उदाहरण माना जाता रहा वहां इस तरह की लापरवाही से जानें जाना बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने कई बार जनता से माफी मांगते हुए कहा कि यह दुख शब्दों में बयान करना मुश्किल है।
दोषारोपण नहीं सामूहिक जिम्मेदारी जरूरी
महाजन ने साफ कहा कि इस घटना के बाद एक दूसरे पर आरोप लगाने से कोई समाधान नहीं निकलेगा। अधिकारी हों पार्षद हों या विधायक सभी की सामूहिक जिम्मेदारी बनती है। उनका मानना है कि सार्वजनिक मंचों पर बयानबाजी करने के बजाय सभी को एक साथ बैठकर यह समझना चाहिए कि कमी कहां रह गई। जब तक हम अपनी गलती स्वीकार नहीं करेंगे तब तक सुधार संभव नहीं है।
अनुभवी लोगों से सलाह लेने की जरूरत
उन्होंने सुझाव दिया कि इस तरह की गंभीर समस्या के समाधान के लिए अनुभवी इंजीनियरों और सेवानिवृत्त नगर निगम अधिकारियों की सलाह ली जानी चाहिए। वर्षों का अनुभव रखने वाले लोग ऐसी तकनीकी खामियों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है और व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
सत्ता एक जिम्मेदारी है चेतावनी नहीं
महाजन ने कहा कि सत्ता केवल अधिकार नहीं बल्कि एक निरंतर जिम्मेदारी है। जो भी सत्ता में है उसे हर दिन बेहतर काम करने का प्रयास करना चाहिए। यह हादसा उन सभी के लिए सबक है जो जिम्मेदार पदों पर बैठे हैं। जनता ने भरोसा दिया है और उस भरोसे की रक्षा करना सबसे बड़ा कर्तव्य है।
आत्ममंथन का समय
उनका मानना है कि इस घटना के बाद केवल अधिकारी ही नहीं बल्कि नागरिकों और जनप्रतिनिधियों को भी आत्ममंथन करना चाहिए। हर किसी को देखना चाहिए कि उसने अपनी भूमिका सही ढंग से निभाई या नहीं। जब समाज का हर वर्ग अपनी जिम्मेदारी समझेगा तभी व्यवस्था मजबूत होगी।
जनप्रतिनिधि और अधिकारी संवाद से हल निकलेगा
महापौर की इस शिकायत पर कि अधिकारी बात नहीं सुनते महाजन ने कहा कि उन्हें कभी ऐसा व्यक्तिगत अनुभव नहीं हुआ। उनका विश्वास है कि यदि जनप्रतिनिधि लगातार जनता के बीच रहें और सीधे संवाद करें तो अधिकारी भी गंभीरता से काम करते हैं। मीडिया में बयान देने के बजाय अंदरूनी चर्चा से ही ठोस समाधान निकलते हैं।
इंदौर की एकता ही सबसे बड़ी ताकत
महाजन ने यह भी कहा कि इंदौर में आमतौर पर अलग अलग दलों के जनप्रतिनिधि मिलकर काम करते हैं। यही इस शहर की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने सभी से इस सहयोग की भावना को बनाए रखने की अपील की। अंत में उन्होंने फिर से जनता से माफी मांगते हुए कहा कि इस दुख की घड़ी में पूरा शहर एक साथ खड़ा रहे और भविष्य के लिए सीख ले।

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