इंदौर के प्रसिद्ध Khajrana Ganesh Temple में एक बार फिर आस्था और परंपरा का अद्भुत दृश्य देखने को मिलेगा। छह जनवरी से आठ जनवरी तक यहां पारंपरिक तिल चतुर्थी मेला आयोजित किया जा रहा है। तीन दिनों तक चलने वाला यह मेला श्रद्धालुओं के लिए भक्ति और उल्लास से भरा रहने वाला है।
पहले दिन सवा लाख तिल गुड़ लड्डुओं का भोग
मेले के पहले दिन सुबह भगवान गणेश को तिल और गुड़ से बने सवा लाख लड्डुओं का भोग अर्पित किया जाएगा। इस भोग के साथ ही प्रसाद वितरण की शुरुआत होगी। मंदिर परिसर में इस आयोजन को लेकर विशेष धार्मिक वातावरण बना हुआ है और श्रद्धालुओं में खास उत्साह दिखाई दे रहा है।
दस भट्टियों पर बन रहे हैं प्रसाद के लड्डू
मंदिर में दस भट्टियों पर पारंपरिक विधि से लड्डू तैयार किए जा रहे हैं। सात जनवरी को भगवान गणेश को गोंद के लड्डुओं का भोग लगाया जाएगा जबकि आठ जनवरी को उड़द के लड्डुओं का भोग अर्पित किया जाएगा। पुजारीगण पूरे विधि विधान के साथ यह कार्य करवा रहे हैं।
ध्वजा पूजन और विशेष सजावट
मेले का शुभारंभ छह जनवरी को सुबह ध्वजा पूजन से होगा। इस अवसर पर भगवान गणेश को आकर्षक फूल बंगले में विराजमान किया जाएगा। मंदिर और आसपास के क्षेत्र को विशेष विद्युत और पुष्प सज्जा से सजाया गया है।
श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं और मनोरंजन
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर तक पहुंचने वाले मार्गों को दुरुस्त किया गया है। मेले में पारंपरिक झूले और चकरी जैसे मनोरंजन के साधन भी लगाए जा रहे हैं जिससे बच्चों और परिवारों को आनंद मिल सके।
तिल चतुर्थी का धार्मिक महत्व
तिल चतुर्थी का दिन विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं संतान की लंबी आयु और सुखी जीवन की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। मान्यता है कि तिल का दान करने से रोग दूर होते हैं और भगवान गणेश शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

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