Indore Nagar Nigam: इंदौर में नगर निगम ने शहर की जलप्रदाय व्यवस्था को सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। भागीरथपुरा की दुखद घटना से सबक लेते हुए पूरे शहर में तीन हजार किलोमीटर लंबी पानी की पाइपलाइन का सर्वे शुरू कर दिया गया है। इसके साथ ही छह हजार से अधिक सरकारी बोरिंग की जियो टैगिंग और क्लोरिनेशन का काम एक साथ चल रहा है। प्रशासन का साफ कहना है कि पेयजल की शुद्धता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि इंदौर में करीब तीन हजार किलोमीटर लंबी पानी की पाइपलाइन फैली हुई है। इस पूरी लाइन का निरीक्षण किया जा रहा है ताकि किसी भी तरह के लीकेज को समय रहते ठीक किया जा सके। उन्होंने बताया कि शहर में मौजूद छह हजार से अधिक सरकारी बोरिंग से भी पेयजल की आपूर्ति होती है। इसी कारण हर बोरिंग पर जियो टैगिंग के साथ क्लोरीन डालने का काम तेज गति से किया जा रहा है।
भागीरथपुरा की घटना के बाद राज्य सरकार ने सभी नगरीय निकायों के लिए नई गाइडलाइन जारी की थी। इन्हीं निर्देशों के तहत इंदौर में यह अभियान शुरू किया गया है। प्रशासन का उद्देश्य है कि भविष्य में किसी भी इलाके में दूषित पानी की आपूर्ति न हो और नागरिकों का भरोसा बना रहे।
ड्रेनेज और जलप्रदाय लाइनों की सघन निगरानी
नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने बताया कि शहर के कई हिस्सों में पानी और ड्रेनेज की लाइनें एक दूसरे के काफी करीब हैं। ऐसे में मामूली लीकेज भी बड़ा खतरा बन सकता है। इसी वजह से इस सर्वे में खास तौर पर उन स्थानों पर ध्यान दिया जा रहा है जहां पानी और ड्रेनेज लाइनें पास पास हैं।
उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा जैसे संवेदनशील इलाकों में निजी बोरिंग का भी क्लोरिनेशन कराया गया है। हर जोनल कार्यालय में नर्मदा परियोजना और पेयजल व्यवस्था के लिए अलग टीम बनाई गई है। ये टीमें पूरे शहर में लगातार निरीक्षण कर रही हैं ताकि कहीं भी गड़बड़ी न रह जाए।
स्काडा सिस्टम से निगरानी और शिकायतों का त्वरित समाधान
नगर निगम आयुक्त ने हाल ही में मूसाखेड़ी स्थित स्काडा सिस्टम और विजलपुर कंट्रोल रूम का निरीक्षण भी किया। यहां से पूरे शहर के जल वितरण की निगरानी की जाती है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि स्मार्ट सिटी के तीन एक एक ऐप पर आने वाली पानी और ड्रेनेज से जुड़ी शिकायतों का समाधान तय समय सीमा में किया जाए।
निगम प्रशासन का कहना है कि इस व्यापक सर्वे के बाद पूरे शहर में जलप्रदाय व्यवस्था और अधिक सुरक्षित हो जाएगी। कहीं भी लीकेज या दूषित पानी की संभावना नहीं रहेगी और नागरिकों को शुद्ध पेयजल मिल सकेगा।

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