Indore Kite Market: इंदौर में पतंगोत्सव को लेकर बाजार पूरी तरह सज गया है और शहर में पतंगों की मांग तेजी से बढ़ गई है। इस साल इंदौर के आसमान में गुजरात और राजस्थान में बनी पतंगें उड़ेंगी जबकि डोर उत्तर प्रदेश के बरेली से मंगाई गई है। रानीपुरा और छावनी जैसे इलाकों में खरीदारी का माहौल साफ नजर आ रहा है और दुकानों पर भीड़ बढ़ने लगी है।
बाजार में बाहरी राज्यों की पतंगों की भरमार
इस बार इंदौर में स्थानीय पतंगों के साथ अहमदाबाद सूरत वडोदरा जयपुर और जोधपुर में बनी पतंगें भी बाजार में पहुंची हैं। कागज और पन्नी दोनों तरह की पतंगें उपलब्ध हैं। कागज की जोधपुरी पतंग की मांग सबसे ज्यादा देखी जा रही है। पन्नी की पतंगें नए आकारों में आई हैं जिनमें मटका स्टार और रॉकेट शेप शामिल हैं।
पतंगों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्टून कैरेक्टर और ऑपरेशन सिंदूर थीम भी लोगों को आकर्षित कर रही है। होलसेल के बाद अब रिटेल बाजार पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। कागज की पतंग होलसेल में 3 रुपए से 50 रुपए तक और पन्नी की पतंग 1 रुपए 70 पैसे से 50 रुपए प्रति नग तक बिकी है। यहां से पतंगें प्रदेश के कई शहरों के साथ महू उज्जैन और देवास तक सप्लाई हो रही हैं।
कारीगर घटे पर मांग बनी हुई
इंदौर में सात से आठ महीने तक पतंग निर्माण का काम चलता है लेकिन मांग के मुकाबले उत्पादन कम रहता है। इसी कारण हर साल बड़ी संख्या में पतंगें बाहर से मंगानी पड़ती हैं। व्यापारियों के अनुसार काछी मोहल्ला में पहले 50 से अधिक कारीगर थे लेकिन अब यह संख्या घटकर 5 से 8 रह गई है। नई पीढ़ी इस काम में रुचि नहीं ले रही है।
फिलहाल काछी मोहल्ला में 10 से 12 दुकानें रानीपुरा में 3 हरिसिद्धि में 1 और छावनी में कुछ बड़ी दुकानें हैं जहां सालभर पतंगें मिलती हैं। त्योहारों पर थीम डेकोरेशन का चलन बढ़ने से दो इंच से पांच इंच तक की सजावटी पतंगों और छोटी फिरकियों की मांग भी बढ़ी है। बैटरी वाली ऑटोमैटिक चकरी बाजार में मौजूद है लेकिन महंगी होने के कारण लोग आज भी पारंपरिक चकरी को ही पसंद कर रहे हैं।

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