Sajjan Singh Verma statement:इंदौर के भगीरथपुरा इलाके में जो कुछ हुआ उसने पूरे शहर का दिल तोड़ दिया है। साफ पानी की उम्मीद लेकर जी रहे लोग अचानक बीमारी और मौत के साये में आ गए। दूषित पानी ने घर घर में मातम ला दिया। लगातार बढ़ती मौतों ने सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि संवेदनहीनता की तस्वीर बन गया है।
भगीरथपुरा में बढ़ता मौत का आंकड़ा और टूटी उम्मीदें
भगीरथपुरा में अब तक पंद्रह लोगों की मौत की बात सामने आ रही है और यह संख्या थमती नहीं दिख रही। अस्पतालों में भर्ती मरीज दर्द और डर के बीच जूझ रहे हैं। परिवार अपने अपनों को बचाने के लिए दुआ कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें समय पर न तो सही जानकारी मिली और न ही भरोसेमंद मदद।
सत्ता पर तीखा हमला और जवाबदेही का सवाल
कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने इस पूरे मामले पर सत्ता पक्ष को घेरा है। उनका कहना है कि इंदौर में भाजपा का सांसद है। सभी विधायक भाजपा के हैं। नगर निगम भी भाजपा के पास है। फिर भी जवाबदेही तय नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि जब पूरा सिस्टम एक ही दल के हाथ में है तो जिम्मेदारी से बचने का कोई बहाना नहीं होना चाहिए।
मंत्री और प्रशासन पर गंभीर आरोप
सज्जन सिंह वर्मा ने नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि मंत्री इसी शहर में रहते हैं फिर भी हालात संभालने में नाकाम रहे। प्रशासन अलग अलग आंकड़े बता रहा है जिससे भ्रम फैल रहा है। कहीं चार मौतें बताई जा रही हैं। कहीं आठ या नौ। कहीं सोलह का दावा है। इससे जनता का भरोसा और टूट रहा है।
देवदूत नहीं यमदूत वाली सियासत
वर्मा ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि जो लोग जनता की पीड़ा नहीं समझते वे देवदूत नहीं बल्कि यमदूत बन गए हैं। उनका कहना है कि मरते लोगों पर भी राजनीति हो रही है। संवेदनशीलता पूरी तरह गायब है। यही वजह है कि जनता का गुस्सा सड़कों पर दिखने लगा है।
मुख्यमंत्री की भूमिका पर उठते सवाल
इस पूरे संकट के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए। आरोप है कि मुख्यमंत्री का ध्यान इंदौर से ज्यादा उज्जैन पर है। लोग महसूस कर रहे हैं कि इंदौर को नजरअंदाज किया जा रहा है जबकि यहां हालात बेहद गंभीर हैं।
विपक्ष की आवाज और राष्ट्रीय स्तर की प्रतिक्रिया
वर्मा ने कहा कि इस समय राहुल गांधी ही हैं जो जनता के हक और न्याय की बात मजबूती से उठा रहे हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भी सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। इससे साफ है कि मामला अब सिर्फ स्थानीय नहीं रहा।
दबाव में एक्शन और इस्तीफे की मांग
हाल ही में हुई उच्च स्तरीय बैठक और एक अतिरिक्त आयुक्त को हटाने की चर्चा को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। सज्जन सिंह वर्मा का कहना है कि यह कार्रवाई जनता के दबाव का नतीजा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव अपने विभाग नहीं संभाल पा रहे तो उन्हें जनता के हित में पद छोड़ देना चाहिए।
जनता की पीड़ा और भरोसे की लड़ाई
भगीरथपुरा की यह त्रासदी इंदौर के लिए चेतावनी है। लोग सिर्फ बयान नहीं बल्कि सुरक्षित पानी और जिम्मेदार शासन चाहते हैं। जब तक सच सामने नहीं आएगा और दोषियों को सजा नहीं मिलेगी तब तक यह दर्द खत्म नहीं होगा।

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