मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के नेपानगर क्षेत्र के चेनपुरा गांव में आदिवासी समाज की एकता और पहचान की मजबूत तस्वीर देखने को मिली। तैंतीसवां आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन पूरे उत्साह और गर्व के साथ आयोजित किया गया। इस ऐतिहासिक आयोजन में देश के अलग अलग राज्यों से हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। हर चेहरे पर अपनी संस्कृति पर गर्व और एकजुट रहने का संदेश साफ दिखाई दे रहा था।
आदिवासियों के लिए अलग धार्मिक कोड की मांग
सम्मेलन के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आदिवासी समाज के लिए अलग धार्मिक कोड की जोरदार मांग रखी। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की परंपराएं संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था बाकी समाज से अलग हैं। इसी कारण उनकी पहचान भी अलग और स्पष्ट होनी चाहिए। उनके शब्दों में आदिवासी समाज की आत्मा उसकी संस्कृति में बसती है और इसे संवैधानिक पहचान मिलना जरूरी है।
एकता के संदेश के साथ गूंजा आदिवासी स्वाभिमान
इस महासम्मेलन में झाबुआ विधायक विक्रांत भूरिया ने आदिवासी समाज को बांटने की कोशिशों के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। उन्होंने साफ कहा कि आदिवासी समाज हमेशा एक रहा है और आगे भी एक ही रहेगा। उन्होंने धर्म या उप जाति के नाम पर विभाजन को खतरनाक बताया और समाज को सतर्क रहने की अपील की। मंच से एक तीर एक कमान आदिवासी एक समान का नारा गूंजा जिसने पूरे माहौल को एकता के रंग में रंग दिया।
तीन दिन चला आदिवासी संस्कृति का उत्सव
यह विशाल सम्मेलन तेरह जनवरी से पंद्रह जनवरी तक चला। इन तीन दिनों में आदिवासी परंपराएं संस्कृति और सामाजिक चेतना खुलकर सामने आई। चेनपुरा गांव आदिवासी एकता और स्वाभिमान का प्रतीक बन गया। इस आयोजन ने यह साफ कर दिया कि आदिवासी समाज अपनी पहचान और अधिकारों को लेकर पूरी तरह जागरूक और संगठित है।

दोस्तों में प्रवाह टाइम्स के माध्यम से आप तक खबर पहुचाता हूं, मुझे लेख लिखने का अनुभव पिछले दो सालो से है. अगर आप मुझसे सोशल मीडिया पर कनेक्ट करना चाहते हे तो निचे मेरे सोशल मीडिया हैंडल दिए गए हैं





