Category: Agriculture

  • सफेद गुलाब की खेती सर्दियों में क्यों होती है खास White Rose Gardening Tips से गार्डन बनेगा खूबसूरत और खुशबूदार

    सर्दियां वैसे तो हर किसी के लिए सुकून लेकर आती हैं लेकिन गार्डनिंग करने वालों के लिए यह मौसम किसी तोहफे से कम नहीं होता. इस ठंडे मौसम में पौधे तेजी से बढ़ते हैं और कम देखभाल में भी शानदार फूल देते हैं. अगर आप भी अपने गार्डन को कम मेहनत में सुंदर खुशबूदार और आकर्षक बनाना चाहते हैं तो सफेद गुलाब आपके लिए सबसे बेहतर विकल्प बन सकता है. यह खूबसूरत फूल हल्की धूप और थोड़ी नमी में बहुत तेजी से बढ़ता है और अपनी सौम्यता से पूरे माहौल को जादुई बना देता है.

    सफेद गुलाब सर्दियों में सबसे ज्यादा क्यों बढ़ता है

    सफेद गुलाब उन फूलों में से है जो ठंडे मौसम को बेहद पसंद करते हैं. सर्दियों में इस पौधे की पत्तियां तेजी से फैलती हैं और कलियों का विकास भी ज्यादा होता है. इसी वजह से पौधा जल्दी घना दिखने लगता है और फूलों की संख्या बढ़ जाती है. गार्डनिंग प्रेमी इस मौसम की शुरुआत में ही इसकी पौध तैयार कर लेते हैं ताकि मौसम के चरम पर बगीचा सफेद गुलाबों से खिल उठे.

    सफेद गुलाब लगाने के लिए कैसी जगह चुनें

    अगर आप घर पर सफेद गुलाब लगाना चाहते हैं तो आपको बहुत खास तैयारी की जरूरत नहीं है. बस ऐसी जगह चुनें जहां हल्की धूप आती हो. तेज धूप इसकी जरूरत नहीं होती इसलिए यह बालकनी में भी आसानी से बढ़ता है. मिट्टी में थोड़ा कम्पोस्ट मिलाएं और पौधा लगाकर शुरुआत में हल्का पानी देते रहें. सही जगह मिलने पर यह पौधा बहुत तेजी से जड़ें पकड़ लेता है.

    पानी और खाद देकर आसान देखभाल कैसे करें

    इस पौधे की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे ज्यादा पानी नहीं चाहिए. हल्की नमी ही इसके लिए काफी होती है. ज्यादा पानी देने से जड़ें खराब हो सकती हैं इसलिए हफ्ते में दो से तीन बार हल्की सिंचाई सबसे सही रहती है. महीने में एक बार ऑर्गेनिक खाद डालने से पौधा और भी घना मजबूत और ज्यादा फूल देने वाला बन जाता है.

    कीटों से बचाने के घरेलू और सरल उपाय

    सर्दियों में कीटों का हमला कम होता है लेकिन गुलाब में एफिड्स या छोटे कीड़े लग सकते हैं. इससे बचने के लिए नीम के तेल का हल्का स्प्रे सबसे सुरक्षित उपाय माना जाता है. इससे पौधा बिना किसी रासायनिक नुकसान के स्वस्थ और चमकदार बना रहता है.

    सफेद गुलाब पूरे साल क्यों खिलता रहता है

    इस पौधे की एक और बड़ी खासियत यह है कि यह हर मौसम में फूल देता है. एक बार पौधा मजबूत हो जाए तो गर्मियों में भी इसमें कलियों की कमी नहीं होती. कम देखभाल में भी इसकी खुशबू आपके घर का माहौल हर मौसम में ताजा रखती है.

    घर की खूबसूरती बढ़ाने वाला सबसे आसान फूल

    अगर आप अपनी बालकनी गार्डन या टेरेस को जल्दी और आसानी से खूबसूरत बनाना चाहते हैं तो सफेद गुलाब इस सर्दी जरूर लगाएं. यह पौधा आपके घर की सुंदरता बढ़ाता है और इसकी सौम्य खुशबू हर दिन मन को सुकून देती है. कम मेहनत में ज्यादा परिणाम देने वाला यह फूल वास्तव में आपके गार्डन की शान बन जाएगा.

  • पीएम किसान सम्मान निधि योजना 22वीं किस्त: जानिए किसान कब पाएंगे अगली किस्त का लाभ

    देश के करोड़ों किसान पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता के लिए हमेशा उत्साहित रहते हैं। इस योजना की शुरुआत 2019 में की गई थी और तभी से यह किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना के तहत हर साल किसानों को 6 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है जिसे तीन किस्तों में डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाता है।

    21वीं किस्त का लाभ और खुशियों की बात

    भारत सरकार ने अब तक इस योजना की कुल 21 किस्तें जारी की हैं। 21वीं किस्त 19 नवंबर, 2025 को जारी की गई थी। इस किस्त का लाभ पाकर देश के करोड़ों किसान बहुत खुश हैं। किसानों ने इस राशि का इस्तेमाल अपने खेत और परिवार की जरूरतों में किया।

    22वीं किस्त कब आएगी?

    किसानों की सबसे बड़ी जिज्ञासा यह है कि 22वीं किस्त कब जारी होगी। पीएम किसान योजना की हर किस्त 4 महीनों के अंतराल पर जारी की जाती है। 21वीं किस्त नवंबर में आई है इसलिए मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 22वीं किस्त अगले साल फरवरी या मार्च महीने में जारी हो सकती है। हालांकि, सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। केंद्र सरकार किस्त जारी करने से कुछ ही दिन पहले तारीख का एलान करती है।

    किन किसानों को नहीं मिलेगा लाभ

    पीएम किसान योजना में अब ई-केवाईसी प्रक्रिया अनिवार्य कर दी गई है। जिन किसानों ने अभी तक ई-केवाईसी नहीं कराई है उन्हें 22वीं किस्त का लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा जिन किसानों ने अपने बैंक अकाउंट को आधार कार्ड से लिंक नहीं कराया है उनके खाते में भी पैसे नहीं आएंगे। इसी तरह स्कीम में गलत जानकारी दर्ज करने वाले किसानों को अपनी जानकारी सही करानी होगी। इसलिए लाभ पाने के लिए किसानों को जल्द से जल्द ई-केवाईसी पूरी करनी चाहिए और बैंक अकाउंट को आधार से लिंक करना चाहिए।

    किसानों के लिए संदेश

    दोस्तों पीएम किसान सम्मान निधि योजना हमारे देश के किसानों के लिए बेहद मददगार है। यदि आप चाहते हैं कि अगली किस्त आपके खाते में समय पर आए तो अभी से अपने दस्तावेज सही कर लें। योजना का सही तरीके से लाभ उठाना आपके लिए आर्थिक सुरक्षा और खेती में मदद का साधन है।

  • गोभी की खेती से कमाएं मार्च में शानदार मुनाफा किसान भाई अभी करें नर्सरी की तैयारी

    आज हम बात करने वाले हैं गोभी की ऐसी खेती के बारे में जो दिसंबर में शुरू होती है और मार्च तक आपको बेहतरीन कमाई देकर खेत और घर दोनों में खुशहाली ला सकती है। आज किसान भाई सब्जियों में सबसे ज्यादा फूलगोभी को पसंद कर रहे हैं क्योंकि इसकी बाजार में डिमांड हमेशा बनी रहती है और सही समय पर खेती करने से प्रॉफिट कई गुना बढ़ जाता है।

    गोभी की नर्सरी कैसे तैयार करें ताकि पौधे हों मजबूत और स्वस्थ

    किसान भाई अगर आप अपनी गोभी की खेती से अच्छा फायदा चाहते हैं तो सबसे पहला कदम नर्सरी तैयार करना है। नर्सरी में बीज बोने से पहले बीज का उपचार जरूर करें ताकि कोई बीमारी न लगे। उपचार के बाद हल्की मिट्टी में बीज दबा दें और उसे ढक दें। इसके बाद नियमित रूप से हल्का पानी देते रहें। लगभग 20 दिन में आपकी नर्सरी तैयार हो जाएगी और आप इन पौधों को खेत में ट्रांसप्लांट कर सकते हैं।

    दिसंबर में कौन सी किस्में लगाएं ताकि मार्च में मिले सबसे ज्यादा भाव

    सागर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर के एस यादव बताते हैं कि दिसंबर का महीना स्नोबॉल श्रेणी की किस्मों के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। किसान भाई पूसा स्नोबॉल एक पूसा स्नोबॉल दो जैसी किस्में लगा सकते हैं। इसके अलावा फूलगोभी की हाइब्रिड वैरायटी जैसे पूसा शुभ्रा पेंट गोभी भी बहुत अच्छी पैदावार देती है। अगर आपके पास नेट हाउस खाली है तो उसमें लगाई गई गोभी की क्वालिटी और भी बेहतर मिलती है और बाजार में इसके दाम अधिक मिलते हैं।

    खेत में ट्रांसप्लांट कैसे करें ताकि फसल जल्दी और बेहतर तैयार हो

    जब नर्सरी तैयार हो जाए तो पौधों को खेत में लगाते समय मिट्टी को अच्छी तरह तैयार कर लें। खेत में गोभी के लिए उचित नमी और खाद बहुत जरूरी है। ट्रांसप्लांट के बाद पौधों को शुरू के दिनों में नियमित पानी दें। डॉक्टर यादव बताते हैं कि सही देखभाल करने पर गोभी की फसल लगभग 90 दिन में पूरी तरह तैयार हो जाती है।

    पत्तागोभी लगाने वालों के लिए अहम जानकारी

    अगर किसान भाई पत्तागोभी की खेती करना चाहते हैं तो इसकी विधि लगभग वही है लेकिन इसमें उर्वरकों की मात्रा ज्यादा लगती है। खेत में पौधे लगाने से पहले प्रति हेक्टेयर 120 किलो नत्रजन 60 किलो फास्फोरस और 40 किलो पोटाश देना जरूरी है। इससे पत्तागोभी की पैदावार बढ़ती है और बाजार में बेहतर कीमत मिलती है।

    मार्च में क्यों मिलते हैं गोभी के सबसे ऊंचे दाम

    मार्च महीने में सामान्य सीजन वाली गोभी बाजार से लगभग समाप्त हो जाती है लेकिन डिमांड हमेशा बनी रहती है। ऐसे में दिसंबर में लगाई गई गोभी मार्च की शुरुआत में पूरी तरह तैयार रहती है और इसी वजह से किसान भाइयों को इस समय सबसे अच्छे दाम मिलते हैं। यह वह समय होता है जब आपकी मेहनत का असली फल मिलता है और खेत से कमाई सीधी जेब में जाती है।

    निष्कर्ष

    अगर किसान भाई दिसंबर में गोभी की खेती शुरू करते हैं और सही ढंग से नर्सरी से लेकर फसल तैयार होने तक सभी स्टेप फॉलो करते हैं तो मार्च में उन्हें बेहद अच्छा फायदा मिल सकता है। सही समय सही किस्म और सही देखभाल गोभी की खेती को मुनाफे का सौदा बना देती है।

    Disclaimer

    इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य कृषि सलाह पर आधारित है। किसी भी फसल को लगाने से पहले अपने स्थानीय कृषि विशेषज्ञ या कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह अवश्य लें।

  • Chukandar ki kheti: चुकंदर की खेती सर्दियों में बना रही है किसानों को मालामाल जानें पूरी खेती से लेकर मुनाफे तक की जानकारी

    Chukandar ki kheti: आज हम एक ऐसी फसल के बारे में बात करने वाले हैं जो सर्दियों में किसानों के लिए कमाई का बेहतरीन जरिया बन रही है. यह फसल मिट्टी की सेहत भी सुधारती है और अच्छी आमदनी भी देती है. बात हो रही है चुकंदर की खेती की जो आजकल देश भर में तेजी से लोकप्रिय हो रही है.

    चुकंदर की खेती क्यों बन रही है मुनाफे का साधन

    चुकंदर मिट्टी में नमी बनाए रखता है और अगली फसल के लिए उर्वरता बढ़ा देता है. इस कारण यह फसल उन किसानों के लिए शानदार विकल्प बन गई है जो पारंपरिक गेहूं या सरसों से हटकर कुछ और आजमाना चाहते हैं. चुकंदर का इस्तेमाल सलाद जूस अचार और कई तरह के औषधीय उपयोगों में किया जाता है. इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है इसलिए इसकी खेती कम जोखिम और अधिक लाभ देने वाली मानी जाती है.

    चुकंदर की बुवाई के लिए सबसे अच्छा समय

    सर्दियों का मौसम चुकंदर की खेती के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. अक्टूबर से दिसंबर तक बुवाई करने से फसल अच्छी तरह विकसित होती है. इसकी फसल लगभग नब्बे से सौ दिन में तैयार हो जाती है. दोमट या बलुई दोमट मिट्टी जिसमें पानी निकासी की ठीक व्यवस्था हो चुकंदर के लिए आदर्श मानी जाती है.

    खेती की तैयारी और बुवाई का तरीका

    खेती शुरू करने से पहले खेत की जुताई दो से तीन बार करके मिट्टी को भुरभुरा बनाना जरूरी है. इसके बाद गोबर की खाद या अच्छी कंपोस्ट डालकर मिट्टी में मिलाने से पौधों को शुरुआत में पर्याप्त पोषण मिलता है. बुवाई के लिए प्रति एकड़ चार से पांच किलोग्राम बीज पर्याप्त होते हैं. कतारों के बीच तीस सेंटीमीटर और पौधों के बीच दस सेंटीमीटर की दूरी रखनी चाहिए. बुवाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करना जरूरी है ताकि बीज अच्छी तरह अंकुरित हो सकें.

    सिंचाई और देखरेख का सही तरीका

    चुकंदर के खेत में हर दस से पंद्रह दिन में सिंचाई करनी चाहिए. जलभराव बिल्कुल नहीं होना चाहिए वरना जड़ें सड़ सकती हैं. खेत में खरपतवार न जमा होने दें और समय पर निराई गुड़ाई करते रहें. नाइट्रोजन फॉस्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग फसल को मजबूत बनाता है और जड़ें बड़ी और लाल बनती हैं. बाजार में ऐसे चुकंदर की कीमत भी अधिक मिलती है.

    उपज और मुनाफे की पूरी गणना

    चुकंदर की फसल तैयार होने पर इसकी खुदाई सावधानी से करनी चाहिए ताकि जड़ों को नुकसान न पहुंचे. एक एकड़ में लगभग डेढ़ सौ से एक सौ अस्सी क्विंटल तक उपज मिल सकती है. कुल लागत बीस से पच्चीस हजार रुपये तक आती है. बाजार भाव आठ से बारह रुपये प्रति किलो मिलने पर किसान प्रति एकड़ अस्सी हजार से एक लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ कमा सकते हैं. यही कारण है कि यह फसल तेजी से पसंद की जा रही है.

    अगर कोई किसान सर्दियों में कम लागत में ज्यादा मुनाफा पाना चाहता है तो चुकंदर उसकी सबसे अच्छी पसंद बन सकती है. यह फसल मिट्टी को भी सुधारती है और जेब को भी मजबूत करती है.

  • ठंड में मटर की फसल को बीमारियों से कैसे बचाएं आसान और असरदार तरीके

    मटर: आज हम बात करने वाले हैं मटर की उस फसल की जिसके ऊपर ठंड के दिनों में बीमारियों का सबसे ज्यादा खतरा रहता है. किसान इस मौसम में हरी मटर की खेती बड़े शौक और उम्मीदों के साथ करते हैं क्योंकि यह फसल बेहतर दाम देती है और कम समय में अच्छा मुनाफा भी दिलाती है. लेकिन यदि समय पर देखरेख और उपचार ना किया जाए तो यह पूरी फसल बीमारियों का शिकार होकर खेत में ही बरबाद हो सकती है. इसलिए मटर की खेती करने वाले हर किसान को इसकी बीमारियों और उनके समाधान की पूरी जानकारी होनी चाहिए.

    मटर की फसल में क्यों बढ़ जाता है बीमारियों का खतरा

    ठंड के मौसम में नमी अधिक होती है और तापमान कम रहता है. यही दो स्थितियां फंगल रोगों को तेजी से फैलने का मौका देती हैं. मटर की फसल में झुलसा रोग मोजेक रोग पत्ती धब्बा रोग जैसे कई रोग जल्दी फैलते हैं और बिना देर किए पूरे खेत में फैल जाते हैं. इसलिए समय पर पहचान और रोकथाम बहुत जरूरी है. फसल यदि शुरुआती दौर में ही संक्रमित हो जाए तो उत्पादन आधे से भी कम रह सकता है.

    पाउडर मिल्ड्यू रोग की पहचान और समाधान

    मटर में सबसे ज्यादा दिखने वाला रोग पाउडर मिल्ड्यू होता है. इस रोग में पत्तियों की निचली सतह पर पाउडर जैसे सफेद धब्बे दिखाई देते हैं जो धीरे धीरे पूरी पत्ती और पौधे पर फैल जाते हैं. यह फंगल ग्रोथ फसल को गंभीर नुकसान पहुंचाती है और पौधों की बढ़वार रुकने लगती है. इस रोग से फसल को बचाने के लिए हेक्साकोनाजोल सल्फर WP और कार्बेन्डाजिम एक से डेढ़ ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए. सही समय पर किया गया छिड़काव इस रोग को पूरी तरह काबू में कर देता है.

    रस्ट रोग से फसल को होने वाला नुकसान

    ठंड और नमी वाले मौसम में रस्ट रोग भी तेजी से फैलता है. इसमें पत्तियों पर छोटे छोटे धब्बे दिखाई देते हैं जो धीरे धीरे गहरे रंग के हो जाते हैं. यह फंगल रोग पौधों की सेहत को कमजोर कर देता है और उत्पादन गंभीर रूप से कम कर देता है. इस रोग के उपचार के लिए मैनकोज़ेब और कार्बेन्डाजिम दो ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए.

    डाउनी मिल्ड्यू रोग की पहचान और नियंत्रण

    डाउनी मिल्ड्यू रोग में पत्तियों पर पीले और हल्के भूरे धब्बे दिखने लगते हैं. यह रोग फसल के उत्पादन को चालीस प्रतिशत तक कम कर सकता है. इस रोग को रोकने के लिए मेटालेक्सिल और मैनकोज़ेब दो से ढाई ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना सबसे अच्छा उपाय माना जाता है. नियमित निगरानी और समय पर दवा देने से यह रोग पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है.

    फ्यूज़ेरियम विल्ट रोग और बीज उपचार की अहमियत

    मटर की फसल में एक और गंभीर बीमारी फ्यूज़ेरियम विल्ट भी लगती है. इस रोग में पौधे अचानक मुरझाने लगते हैं और उनका विकास रुक जाता है. यह रोग मिट्टी में पहले से मौजूद फंगस के कारण फैलता है. इस बीमारी से बचाव के लिए बुआई से पहले बीज उपचार करना सबसे जरूरी कदम है. बीज को उचित दवा से उपचारित करके ही बोना चाहिए ताकि फसल शुरुआत से ही सुरक्षित रहे.

    समय पर छिड़काव क्यों है सबसे जरूरी

    मटर की फसल को बीमारियों से बचाने के लिए सबसे जरूरी है समय पर दवाइयों का छिड़काव. यदि किसान नियमित रूप से खेत की स्थिति देखते रहें और शुरुआती लक्षणों पर ही दवा छिड़क दें तो किसी भी बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है. ठंड के मौसम में नमी बढ़ने की वजह से रोग तेजी से फैलते हैं इसलिए थोड़ी सी लापरवाही भी भारी नुकसान दे सकती है.

    मटर की फसल ठंड के मौसम में सबसे ज्यादा लाभ देती है लेकिन यह उसी समय बीमारियों से सबसे ज्यादा प्रभावित भी होती है. यदि किसान सही समय पर पहचान कर लें और दवाइयों का इस्तेमाल करें तो फसल को पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सकता है. मटर की खेती एक अच्छी कमाई देने वाली फसल है इसलिए इसकी सही देखभाल बहुत जरूरी है.

  • PM Kisan 21वीं किस्त आज जारी किसानों में खुशियों की लहर रबी सीजन से पहले मिलेगा बड़ा फायदा

    PM Kisan 21वीं किस्त : किसानों के लिए आज का दिन खुशियों से भरा है क्योंकि केंद्र सरकार की सबसे लोकप्रिय योजना पीएम किसान सम्मान निधि एक बार फिर लाखों परिवारों को आर्थिक सहारा देने जा रही है। खेती के बढ़ते खर्चों और रबी सीजन की तैयारियों के बीच यह राशि किसानों के लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार आज 19 नवंबर को सरकार 21वीं किस्त जारी करने जा रही है जिसका देशभर के करोड़ों किसानों को बेसब्री से इंतजार था।

    देशभर के 9 करोड़ से ज्यादा किसानों को आज मिलेगा पैसा

    केंद्र सरकार ने जानकारी दी है कि आज 9 करोड़ से अधिक पात्र किसानों के बैंक खातों में एक साथ 21वीं किस्त भेजी जाएगी। इस बार कुल 18 हजार करोड़ रुपये की भारी राशि किसानों तक पहुंचाई जाएगी जो उनके खेती से जुड़े खर्चों को कम करने में बड़ी मदद करेगी। मध्यप्रदेश के किसानों को भी इस राशि का सीधा लाभ मिलेगा जिससे खाद बीज सिंचाई और रबी फसल की तैयारी में आर्थिक मजबूती मिल सकेगी।

    पिछली बार अगस्त में आई थी 20वीं किस्त

    सरकार ने 20वीं किस्त 2 अगस्त को जारी की थी जिसके बाद तीन महीने का समय पूरा होने पर अब नई किस्त जारी की जा रही है। पीएम किसान योजना के तहत हर वर्ष किसानों को 6000 रुपये दिए जाते हैं जो तीन समान किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजे जाते हैं। हर चार महीने में मिलने वाली इस राशि का किसानों को पूरे साल भर इंतजार रहता है क्योंकि यह छोटी मगर बेहद महत्वपूर्ण आर्थिक मदद होती है।

    कौन ले सकता है पीएम किसान योजना का लाभ

    पीएम किसान सम्मान निधि योजना उन किसानों के लिए बनाई गई है जिन्हें खेती के खर्चों में सहारा देने की जरूरत होती है। इस योजना का लाभ वही किसान ले सकते हैं जो तय मानकों को पूरा करते हैं। आवेदक का अपने राज्य का स्थायी निवासी होना जरूरी है और उसके पास कृषि योग्य भूमि होनी चाहिए। इस योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलता है जिनके पास दो हेक्टेयर या उससे कम कृषि भूमि होती है।

    किसान के पास आधार कार्ड होना अनिवार्य है ताकि उसकी पहचान की सही तरीके से पुष्टि हो सके। बैंक खाता होना भी जरूरी है क्योंकि किस्त सीधे खाते में भेजी जाती है। इसके साथ ही किसान के पास फार्मर आईडी होना आवश्यक माना गया है ताकि उसे योजना में सही तरीके से शामिल किया जा सके। इन सभी योग्यताओं को पूरा करने वाले किसानों को हर वर्ष केंद्र सरकार की ओर से आर्थिक सहारा मिलता है जिससे वे खेती की तैयारी और अन्य खर्चों को आसानी से संभाल सकें।

    किसानों के लिए क्यों खास है यह किस्त

    त्योहारी मौसम के बाद और रबी फसल की शुरुआत से पहले यह किस्त किसानों के लिए नई ऊर्जा लेकर आती है। इस समय खेतों में तैयारी का खर्च बढ़ जाता है और कई बार किसानों को आर्थिक दबाव भी झेलना पड़ता है। ऐसे में पीएम किसान योजना के तहत मिलने वाला पैसा उनकी जरूरतों को पूरा करने में बड़ा सहारा साबित होता है।

    पीएम किसान सम्मान निधि योजना ने अब तक करोड़ों किसानों को राहत दी है और आज जारी होने वाली 21वीं किस्त भी किसानों के जीवन में खुशियां भरने वाली है। यह राशि छोटे और मझोले किसानों के लिए एक सुरक्षित सहारा बन चुकी है जो उनकी खेती और रोजमर्रा के खर्चों को संभालने में मदद करती है।

  • गेहूं की फसल में बढ़ती खरपतवार की समस्या इस तरह करें शुरुआती दिनों में पूरा नियंत्रण

    गेहूं की फसल : रबी सीजन की बोनी के साथ ही खेतों में काम तेजी से बढ़ जाता है। गेहूं की फसल बोने से लेकर शुरुआती दिनों की देखभाल तक किसानों की जिम्मेदारियां कई गुना बढ़ जाती हैं। इसी समय अनचाही घास भी तेजी से बढ़ने लगती है जो गेहूं के पौधों के साथ सीधी प्रतिस्पर्धा करती है। यह मिट्टी में डाला गया खाद और पानी सोख लेती है जिससे फसल कमजोर होने लगती है और उत्पादन पर गंभीर असर पड़ता है। खेती में मेहनत और खर्च करने के बावजूद जब पैदावार उम्मीद के अनुसार नहीं मिलती है तो किसानों की सबसे बड़ी चिंता यही रहती है कि आखिर गलती कहां हो रही है।

    शुरुआती 30 दिनों में नियंत्रण जरूरी

    खरपतवार नियंत्रण का सबसे महत्वपूर्ण समय बोनी के शुरुआती तीस दिन होते हैं। यदि इस अवधि में अनचाही घास को काबू में नहीं किया गया तो पूरी फसल की बढ़वार थम सकती है। गेहूं के पौधे कमजोर पड़ जाते हैं और उत्पादन में सीधा नुकसान होता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि शुरुआती चरण में खरपतवार सफाई समय पर कर दी जाए तो पैदावार में लगभग बीस से तीस प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है। यही वजह है कि खेती की सफलता का पहला कदम खरपतवार नियंत्रण ही माना जाता है।

    रासायनिक और यांत्रिक तरीकों का उपयोग

    खरपतवार हटाने के दो प्रमुख तरीके हैं। पहला तरीका रासायनिक विधि है जिसमें विशेष दवाओं का छिड़काव किया जाता है। हालांकि कई बार यह दवाएं फसल को भी प्रभावित कर देती हैं इसलिए सावधानी आवश्यक होती है। दूसरा तरीका यांत्रिक नियंत्रण है जिसमें पुराने समय से हंसिया और खुरपी जैसे औजारों का उपयोग होता आ रहा है। यह तरीका प्रभावी तो है लेकिन समय अधिक लेता है और इसमें बहुत मेहनत भी लग जाती है। बड़े खेतों में इस विधि से काम करना और भी कठिन होता है।

    पॉवर वीडर कैसे बदल रहा है खेती का तरीका

    किसानों की इन चुनौतियों को देखते हुए पॉवर वीडर खेती में सबसे बड़ी मदद बनकर सामने आया है। यह मशीन गेहूं की फसल में खरपतवार हटाने और मिट्टी को भुरभुरी करने में बेहद उपयोगी मानी जाती है। मिट्टी में हवा का संचार बढ़ने से पौधों की जड़ों को पोषक तत्व आसानी से मिलते हैं। इससे फसल की बढ़वार तेज होती है और उत्पादन बढ़ता है। पॉवर वीडर से समय श्रम और खर्च तीनों की बचत होती है। इसके अतिरिक्त इसमें कई तरह के अटैचमेंट लगाकर हल्की जुताई और छोटे कृषि कार्य भी किए जा सकते हैं।

    दो मॉडल उपलब्ध किसानों को मिल रहा विकल्प

    पॉवर वीडर दो प्रमुख मॉडलों में उपलब्ध है। पहला राइड ऑन मॉडल जिसमें किसान मशीन पर बैठकर काम कर सकता है। दूसरा वॉक बिहाइंड मॉडल जिसमें किसान मशीन को पीछे से नियंत्रित करता है। छोटे किसानों के लिए वॉक बिहाइंड मॉडल सबसे सुविधाजनक माना जाता है जबकि बड़े खेतों वाले किसान राइड ऑन मॉडल को प्राथमिकता देते हैं। इन दोनों मॉडलों की मांग तेजी से बढ़ रही है क्योंकि प्रदर्शन और सुविधा दोनों ही बेहतरीन हैं।

    क्षमता कीमत और सब्सिडी की पूरी जानकारी

    पॉवर वीडर पांच एचपी से बारह एचपी तक की क्षमता में आता है। पांच एचपी की मशीन एक घंटे में लगभग आधा से दो एकड़ तक खरपतवार साफ कर सकती है। बाजार में इसकी कीमत पच्चीस हजार से एक लाख रुपये तक होती है। सरकार किसानों को इस मशीन पर कुल पचास प्रतिशत तक की सब्सिडी दे रही है। इसमें चालीस प्रतिशत केंद्र और दस प्रतिशत राज्य सरकार का हिस्सा है। इसके लिए ई कृषि अनुदान पोर्टल mpdeg.org पर आवेदन किया जा सकता है। आवेदन के लिए आधार कार्ड पैन कार्ड बी 1 और लिंक मोबाइल नंबर जरूरी दस्तावेज होते हैं। यह अनुदान एसएमएएम योजना के अंतर्गत दिया जाता है।

    बागवानी में भी पॉवर वीडर की बड़ी उपयोगिता

    पॉवर वीडर सिर्फ फसली खेतों में ही नहीं बल्कि बागवानी में भी बेहद उपयोगी साबित हो रहा है। बागों में बड़े पेड़ों के बीच की खाली जमीन में घास तेजी से फैल जाती है जिसे हाथ से हटाना मुश्किल होता है। यह मशीन उस घास को आसानी से साफ कर देती है और साथ ही मिट्टी को ढीला करके फसल के लिए लाभदायक वातावरण तैयार करती है। इससे बागवानी की उत्पादकता भी बढ़ जाती है।

  • पालक की खेती से बनेगा बड़ा मुनाफा इस सीजन में तैयार करें कम खर्च में भरपूर फसल

    आज हम बात कर रहे हैं पालक की खेती के बारे में जो ठंड के मौसम में किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होती है। पालक एक ऐसी हरी भाजी है जिसकी मांग पूरे साल बनी रहती है लेकिन सर्दी आते ही इसका रेट और भी बढ़ जाता है। सबसे खास बात यह है कि पालक की फसल कम समय में तैयार हो जाती है और कम लागत में अच्छा मुनाफा देती है इसलिए कई किसान इसे सीजन की सबसे आसान और ज्यादा फायदेमंद फसल मानते हैं।

    ठंड के मौसम में बढ़ती है पालक की मांग

    जैसे ही ठंड शुरू होती है हरी सब्जियों का बाजार तेज हो जाता है और पालक भाजी की मांग अचानक बढ़ जाती है। लोग इसे खाने में खूब पसंद करते हैं क्योंकि यह शरीर को ताकत देती है और ठंड में सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है। इसी वजह से बाजार में इसकी कीमत अच्छी मिलती है और किसान बहुत जल्दी बढ़िया कमाई कर लेते हैं। इस समय पालक भाजी का रेट तीस से चालीस रुपए किलो तक मिल रहा है जो कम समय की फसल के हिसाब से बेहद बढ़िया माना जाता है।

    कम देखभाल में तैयार होती है पालक की फसल

    पालक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती है। ठंड के मौसम में फसल पर बीमारियों का प्रकोप भी कम रहता है जिससे खर्च भी कम आता है और फायदा ज्यादा मिलता है। खेत की दो बार जुताई करने के बाद मिट्टी को भुरभुरी बनाना बहुत जरूरी है क्योंकि इससे पालक के बीज अच्छी तरह जमते हैं। इसके बाद खेत में बेड बनाकर गोबर खाद के साथ बीज बो दिए जाएं तो अंकुरण अच्छा मिलता है और फसल तेजी से बढ़ती है।

    पोषक खाद से बढ़ता है उत्पादन

    अगर किसान चाहते हैं कि उत्पादन ज्यादा मिले तो गोबर खाद के साथ थोड़ी मात्रा में DAP और यूरिया का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे पत्तियां चौड़ी होती हैं और प्रति कटाई वजन अधिक मिलता है। समय पर सिंचाई करने से फसल बहुत तेजी से बढ़ती है और लगभग एक महीने में हरी ताजी पालक बाजार के लिए तैयार हो जाती है।

    कौन सी बीमारी से रहे सावधान

    पालक में आमतौर पर तना छेदक बीमारी देखने को मिलती है जिससे पत्तियां खराब होने लगती हैं। इसलिए जरूरत पड़ने पर उचित दवा का छिड़काव करना जरूरी है जिससे फसल सुरक्षित रहे और पूरा उत्पादन मिल सके। अगर किसान हाईटेक विधि का उपयोग करते हैं तो उत्पादन और भी बढ़ जाता है जिससे कम समय में बड़ा मुनाफा मिल सकता है।

    कम लागत में ज्यादा मुनाफा

    पालक भाजी की खेती में खर्च बहुत कम आता है और मुनाफा कई गुना तक बढ़ जाता है। एक छोटे से खेत में भी किसान अच्छी आमदनी ले सकते हैं क्योंकि यह भाजी बाजार में बहुत जल्दी बिक जाती है। सिर्फ तीस दिनों में तैयार होने वाली यह फसल किसानों के लिए कम समय में लाभ कमाने का बेहतर विकल्प बन चुकी है।

  • Agriculture: ब्रोकली की खेती से बदल सकती है किसानों की किस्मत, सितंबर-अक्टूबर है सबसे सही समय

    Agriculture : खेती-किसानी की दुनिया में मेहनत करने वाले किसान हमेशा यही सोचते हैं कि किस फसल से उन्हें ज्यादा मुनाफा मिल सके और परिवार की ज़िंदगी खुशहाल बने। आज हम आपको एक ऐसी सब्ज़ी के बारे में बताने जा रहे हैं जो सिर्फ शहरों में ही नहीं बल्कि अब गाँव और कस्बों की मंडियों में भी खूब बिक रही है। यह सब्ज़ी है ब्रोकली जिसे कई लोग हरी गोभी के नाम से भी जानते हैं।

    सितंबर के आखिरी सप्ताह से लेकर अक्टूबर के पहले सप्ताह तक ब्रोकली की खेती करने का सही समय माना जाता है। इस मौसम में इसकी पैदावार शानदार होती है और बाजार में भी इसके दाम आसमान छू रहे होते हैं। अगर किसान अभी इस सब्ज़ी की खेती शुरू करते हैं तो आने वाले महीनों में मंडी में उन्हें बहुत अच्छा भाव मिल सकता है।

    ब्रोकली की खासियत यह है कि इसकी खेती अभी बहुत कम किसान कर रहे हैं इसलिए बाजार में इसकी मांग ज़्यादा और आपूर्ति कम है। यही वजह है कि इसके दाम भी किसानों को बहुत अच्छा फायदा देते हैं। सामान्यत: ब्रोकली का भाव 50 से 80 रुपए प्रति किलो तक मिलता है और कई बार तो शहरों में इसकी कीमत 100 रुपए किलो तक पहुंच जाती है। यानी एक एकड़ में अगर किसान मेहनत से ब्रोकली लगाते हैं तो लाखों रुपए की कमाई आसानी से कर सकते हैं।

    आजकल सेहत के प्रति जागरूक लोग ब्रोकली को खूब पसंद करते हैं क्योंकि यह पौष्टिकता से भरपूर होती है। डॉक्टर भी मरीजों को इसे खाने की सलाह देते हैं। यही कारण है कि शहरों में इसकी खपत तेजी से बढ़ रही है। अगर आप किसी बड़े शहर के आसपास खेती करते हैं तो आपको मंडी में तुरंत खरीदार मिल जाएंगे। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के किसान भी इसे उगाकर आस-पास के बाजारों में बेच सकते हैं।

    दोस्तों अगर आप सोच रहे हैं कि इस सीजन में कौन सी सब्ज़ी लगानी चाहिए तो ब्रोकली आपके लिए एक शानदार विकल्प है। अभी यह समय इसकी खेती के लिए सबसे उपयुक्त है और अगर सही देखभाल की जाए तो यह फसल किसानों की किस्मत बदल सकती है।

  • Soyabean Mandi Bhav Today:मध्यप्रदेश की मंडियों में आज सोयाबीन के रेट में बड़ा बदलाव, देखें ताजा भाव लिस्ट

    Soyabean Mandi Bhav Today:  नमस्कार किसान भाइयों और दोस्तों,आज हम बात करने जा रहे हैं उस फसल के बारे में जो लाखों किसानों की मेहनत का नतीजा है—सोयाबीन। पिछले कुछ हफ्तों से सोयाबीन के भाव में कभी तेजी तो कभी गिरावट का दौर देखने को मिल रहा है, जिससे किसान और व्यापारियों दोनों की चिंता बढ़ गई है।

    आज मध्यप्रदेश की कई प्रमुख मंडियों से जो ताजा रिपोर्ट आई है, वह बताती है कि सोयाबीन के दाम में कुछ जगहों पर अचानक उछाल आया है, तो कुछ जगहों पर भाव सामान्य बने हुए हैं। यदि आप यह जानना चाहते हैं कि आपकी नजदीकी मंडी में आज क्या भाव चल रहा है और आपको कब और कैसे फसल बेचना चाहिए, तो यह जानकारी आपके लिए बहुत काम की है।

    किसान भाइयों के लिए यह समय बहुत ही सोच-समझकर निर्णय लेने का है। क्योंकि अभी की तेजी का मतलब यह नहीं कि कल भी यही हाल रहेगा। बाज़ार में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है, लेकिन सही समय पर सही जानकारी होना आपकी मेहनत का सही मोल दिला सकता है।

    मध्यप्रदेश की प्रमुख मंडियों में आज के सोयाबीन के ताजा भाव

     

    क्रमांक मंडी का नाम न्यूनतम मूल्य ( ₹/क्विंटल) अधिकतम मूल्य ( ₹/क्विंटल) मॉडल मूल्य ( ₹/क्विंटल)
    1 राजगढ़ 2535 4265 4250
    2 राजगढ़ 3850 3850 3850
    3 उज्जैन 800 4290 4240
    4 राजगढ़ 2551 4501 4250
    5 धार 3000 4200 4200
    6 सागर 3771 4366 4366
    7 साजापुर 1200 4276 4261
    8 साजापुर 2450 4700 4100
    9 धार 2650 4725 4325
    10 सागर 2911 4266 4266
    11 धार 3000 4876 4200
    12 हर्दा 3451 4321 4270
    13 रतलाम 3800 4945 4200
    14 होशंगाबाद 3877 3877 3877
    15 दिन्दौरी 4000 4100 4100
    16 खंडवा 4093 4099 4099
    17 उज्जैन 4100 7100 4320
    18 होशंगाबाद 4199 5805 4331
    19 मंदसौर 1601 4176 4040
    20 विदिशा 2200 4275 4261
    21 देवास 2300 4285 4000
    22 शिवपुरी 2600 4375 4295
    23 राजगढ़ 3000 4270 4270
    24 नीमच 3450 4379 4280
    25 रायसेन 3475 4357 4357
    26 रायसेन 3500 3600 3600
    27 रायसेन 3500 4230 4220
    28 शिवपुरी 3640 4160 4145
    29 उज्जैन 3676 4650 4145
    30 अशोकनगर 3705 4195 4195
    31 साजापुर 3800 4378 4065
    32 सागर 3925 4002 4002
    33 सागर 3950 4180 4180
    34 अशोकनगर 4000 4000 4000
    35 मंदसौर 4000 4151 4151
    36 नरसिंहपुर 4088 4251 4251
    37 साजापुर 4095 4140 4140
    38 छिंदवाड़ा 4125 4200 4175
    39 शिवपुरी 4135 4315 4315
    40 सागर 4151 4700 4270
    41 साजापुर 1000 4800 4278
    42 सिहौर 1800 4300 3800
    43 इन्दौर 1840 4320 4315
    44 गूना 2000 4120 4040
    45 सागर 2000 4302 4200
    46 राजगढ़ 2000 4820 4430
    47 राजगढ़ 2305 4570 4245
    48 गूना 2425 4230 4195
    49 हर्दा 2500 4266 4266
    50 देवास 2600 4100 4000
    51 रतलाम 2640 5503 4250
    52 उज्जैन 2855 4340 4281
    53 राजगढ़ 2900 4040 4010
    54 राजगढ़ 3050 4270 4270
    55 मंदसौर 3100 4350 4350
    56 गूना 3111 4307 4307
    57 सिहौर 3400 4841 4237
    58 साजापुर 3460 4270 4265
    59 मंदसौर 3500 4327 4241
    60 सतना 3550 3650 3650
    61 देवास 3591 4161 4100
    62 3600 3650 3650
    63 उज्जैन 3627 5080 4318
    64 खरगोन 3661 4246 4246
    65 राजगढ़ 3725 4325 3900
    66 देवास 3790 4080 3830
    67 रायसेन 3800 4000 4000
    68 इन्दौर 3800 4262 3800
    69 हर्दा 3801 4230 4230
    70 रतलाम 3801 4349 4349
    71 इन्दौर 3801 5750 4000
    72 शिवपुरी 3852 4151 4151
    73 खरगोन 3855 3895 3895
    74 विदिशा 3860 4291 4261
    75 राजगढ़ 3870 4000 4000
    76 खंडवा 3870 4231 4231
    77 नरसिंहपुर 3880 5500 5100
    78 सिहौर 3881 3881 3881
    79 सागर 3890 4265 4265
    80 झबुआ 3900 3900 3900
    81 खंडवा 3900 3950 3950
    82 साजापुर 3900 4290 4290
    83 नीमच 3900 4370 4280
    84 धार 3905 4000 4000
    85 धार 3925 4100 4100
    86 हर्दा 3950 4200 4200
    87 राजगढ़ 3965 4180 4175
    88 धार 4000 4050 4000
    89 खंडवा 4000 4081 4045
    90 अशोकनगर 4010 4385 4385
    91 राजगढ़ 4050 4235 4160
    92 विदिशा 4060 4300 4250
    93 साजापुर 4069 4248 4100
    94 सागर 4090 4200 4180
    95 साजापुर 1900 5551 4300
    96 रतलाम 2761 4512 4276
    97 अशोकनगर 3312 4301 4100
    98 सिहौर 3101 4350 4100
    99 होशंगाबाद 3075 4175 4175
    100 उज्जैन 4220 4220 4220
    101 उज्जैन 4300 4300 4300
    102 उज्जैन 3431 6701 4300
    103 मुरैना 3950 3950 3950
    104 खंडवा 2200 4320 4300
    105 खंडवा 3800 3950 3950
    106 सागर 2600 4336 4100
    107 खरगोन 2975 4325 4325
    108 देवास 2200 4294 4277
    109 विदिशा 3300 5210 4250
    110 रतलाम 3400 5701 4000
    111 टीकमगढ़ 3900 3900 3900
    112 उज्जैन 400 4400 4300
    113 देवास 1000 5401 4240
    114 धार 3905 4345 4305
    115 धार 1880 4500 4200
    116 सिहौर 3300 4150 4065
    117 सिहौर 4000 4081 4065
    118 नीमच 500 4390 4250
    119 झबुआ 4000 4000 4000
    120 झबुआ 3900 4050 4000
    121 दमोह 3800 4665 4290
    122 होशंगाबाद 3000 3000 3000
    123 बेतुल 3850 3960 3850
    124 बेतुल 4036 4293 4284
    125 4150 4200 4200
    126 भोपाल 2500 4480 4250
    127 भोपाल 2500 4225 4215
    128 राजगढ़ 4055 4295 4200
    129 राजगढ़ 3450 4650 4200
    130 भोपाल 3943 4122 4122
    131 मंदसौर 3460 4315 4100
    132 उज्जैन 3200 4802 4200
    133 इन्दौर 1451 4331 4220
    134 रतलाम 3500 4400 4325
    135 रायसेन 3760 3835 3835
    136 विदिशा 2800 4350 4350
    137 साजापुर 2800 4355 4261
    138 शिवपुरी 2300 4155 4155
    139 सिहौर 3240 4360 4295
    140 सिहौर 3350 4325 4295
    141 सिहौर 2901 3801 3801
    142 बरवानी 4200 4200 4200
    143 देवास 2000 4339 3980