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- Divya Mittal latest news: उत्तर प्रदेश की पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने आखिरकार अपने अगले कदम से पर्दा उठा दिया है।
- उनका कहना है कि वह किसी दल के झंडे के नीचे राजनीति शुरू करने के बजाय लोगों के साथ मिलकर काम करना चाहती हैं।
- दिव्या मित्तल ने बताया राजनीति में आने का कारण
- दिव्या मित्तल के ऐलान के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनका प्रस्तावित मंच किस रूप में सामने आता है और उत्तर प्रदेश की राजनीति में उसकी वास्तविक भूमिका क्या होगी।
Divya Mittal latest news: उत्तर प्रदेश की पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने आखिरकार अपने अगले कदम से पर्दा उठा दिया है। प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के बाद पिछले कई दिनों से उनके राजनीति में आने को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन अब उन्होंने खुद साफ कर दिया है कि वह राजनीति में कदम रखेंगी। खास बात यह है कि दिव्या मित्तल ने किसी राजनीतिक दल के साथ जुड़ने के बजाय लोगों के साथ मिलकर अलग राजनीतिक मंच खड़ा करने की बात कही है। अपने वीडियो संदेश में उन्होंने शिक्षा, रोजगार, ग्रामीण सुविधाओं, न्याय और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
IAS के बाद अब राजनीति का रास्ता चुना
दिव्या मित्तल 2013 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी रही हैं। उन्होंने 30 अगस्त 2026 को प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने की घोषणा की थी और उनका इस्तीफा 15 सितंबर से प्रभावी हो गया। इस्तीफे के बाद उनके अगले कदम को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। कुछ रिपोर्टों में राजनीति, कोचिंग, लेखन और विदेश लौटने जैसे विकल्पों का जिक्र किया गया था। खुद दिव्या ने भी 29 सितंबर को अपने अगले कदम की घोषणा करने की बात कही थी। Divya Mittal latest news
अब अपने वीडियो संदेश में उन्होंने इन सभी अटकलों को खत्म करते हुए राजनीति में जाने का ऐलान कर दिया। हालांकि उन्होंने किसी पार्टी का नाम नहीं लिया। उनका कहना है कि वह किसी दल के झंडे के नीचे राजनीति शुरू करने के बजाय लोगों के साथ मिलकर काम करना चाहती हैं। Divya Mittal latest news
दिव्या मित्तल ने बताया राजनीति में आने का कारण
करीब नौ मिनट के वीडियो संदेश में दिव्या मित्तल ने कहा कि उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि आईएएस की नौकरी छोड़ने के बाद आगे क्या करना है। उन्होंने इसका जवाब देते हुए राजनीति का रास्ता चुना। उनके मुताबिक उनका उद्देश्य सिर्फ किसी पद तक पहुंचना नहीं है, बल्कि उन लोगों की आवाज उठाना है जिनकी शिकायतें और समस्याएं सरकारी दफ्तरों तक पहुंचने के बावजूद कई बार अनसुनी रह जाती हैं। Divya Mittal latest news
उन्होंने अपने प्रशासनिक अनुभव से जुड़े कई उदाहरण भी साझा किए। इनमें ग्रामीण इलाकों में स्कूल की कमी, सरकारी जमीन पर कब्जा न मिलना, खराब सड़कें और युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता जैसे मुद्दे शामिल रहे। दिव्या ने कहा कि उन्होंने अधिकारी के रूप में कई ऐसी परिस्थितियां देखीं, जिनके बाद उन्हें लगा कि व्यवस्था में बदलाव को लेकर राजनीति के स्तर पर भी काम करने की जरूरत है।
एक गांव की महिला की बात ने छोड़ी छाप
दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो में एक ग्रामीण महिला से हुई मुलाकात का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एक पहाड़ी इलाके में निरीक्षण के दौरान एक महिला उनके पास अपनी समस्या लेकर पहुंची थी। दिव्या को लगा कि वह शायद पेंशन, मकान या किसी दूसरी सरकारी सुविधा की मांग करेगी, लेकिन महिला ने अपने गांव में पांचवीं कक्षा के बाद बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए स्कूल की मांग रखी। Divya Mittal latest news
दिव्या के मुताबिक स्कूल को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ी, लेकिन लंबे समय बाद भी निर्माण शुरू नहीं हो सका। उन्होंने इस घटना को प्रशासनिक व्यवस्था की उस चुनौती से जोड़कर बताया, जिसमें मंजूरी और प्रक्रिया होने के बावजूद काम जमीन पर समय पर नहीं पहुंचता।
सरकारी जमीन और न्याय का भी किया जिक्र
पूर्व आईएएस ने एक अन्य मामले का उल्लेख करते हुए बताया कि एक भूमिहीन व्यक्ति को सरकारी जमीन का पट्टा मिलने के बावजूद मौके पर कब्जा नहीं मिल पाया था। उनके अनुसार मामले की रिपोर्ट में गड़बड़ी सामने आने के बाद उसे ठीक कराया गया, लेकिन कब्जा दिलाने की प्रक्रिया फिर भी आगे नहीं बढ़ी। दिव्या ने सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति को सरकारी प्रक्रिया के तहत अधिकार मिला है तो उसे अपना हक पाने के लिए बार-बार अधिकारियों के चक्कर क्यों लगाने पड़ें।
अपने भाषण में उन्होंने इसी तरह के मामलों को न्याय और जवाबदेही से जोड़ते हुए कहा कि आम नागरिक को अपनी समस्या के समाधान के लिए किसी सिफारिश या प्रभावशाली व्यक्ति के सहारे की जरूरत नहीं होनी चाहिए। Divya Mittal latest news
युवाओं और AI को लेकर भी उठाया सवाल
दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो में युवाओं के भविष्य का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं की लंबी तैयारी और रोजगार के बदलते स्वरूप का जिक्र किया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कई तरह के काम तकनीक से प्रभावित हो सकते हैं और युवाओं के भविष्य को लेकर इस बदलाव पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
उन्होंने खुद को दो बेटियों की मां बताते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य को लेकर सवाल केवल युवाओं का नहीं, बल्कि माता-पिता का भी है। उनके मुताबिक राजनीति में सत्ता और चुनावी चर्चा के साथ-साथ भविष्य की नीतियों पर भी पर्याप्त बातचीत होनी चाहिए।
किसी पार्टी में शामिल होने से इनकार, बनाया जाएगा नया मंच
दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो में स्पष्ट संकेत दिया कि वह फिलहाल किसी राजनीतिक दल का हिस्सा बनकर राजनीति शुरू नहीं करना चाहतीं। उन्होंने कहा कि वह लोगों के साथ मिलकर एक ऐसा मंच बनाने की कोशिश करेंगी, जिसमें शिक्षक, डॉक्टर, किसान, मजदूर, वकील, छात्र और आम नागरिक शामिल हो सकें।
उन्होंने राजनीति में पैसे, बाहुबल और जातीय समीकरणों की भूमिका का भी उल्लेख किया और कहा कि उनकी राजनीति इन आधारों पर नहीं होगी। उन्होंने अपने प्रशासनिक अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि अधिकारी रहते हुए उन्होंने लोगों की पहचान से ज्यादा उनकी समस्या पर ध्यान देने की कोशिश की और राजनीति में भी इसी सोच को आगे बढ़ाना चाहती हैं।
राहुल गांधी से मुलाकात के दावे पर क्या बोलीं?
दिव्या मित्तल के राजनीति में आने की चर्चाओं के बीच उनके राहुल गांधी से मुलाकात को लेकर भी सोशल मीडिया पर दावे सामने आए थे। उन्होंने अपने वीडियो में इस दावे को खारिज किया। दिव्या ने कहा कि एक राजनीतिक दल के प्रवक्ता की ओर से उनकी एक बड़े विपक्षी नेता से मुलाकात का दावा किया गया, जबकि उनके मुताबिक ऐसी कोई मुलाकात हुई ही नहीं थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के दावों का उद्देश्य उन्हें डराना था। यह दिव्या मित्तल का अपना आरोप है और उपलब्ध रिपोर्टों में संबंधित दावे के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसलिए इस हिस्से को उनके बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश को ही क्यों चुना?
राजनीति की शुरुआत के लिए दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बताया। उन्होंने कहा कि अधिकारी के रूप में काम करते हुए उन्हें प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों के बीच रहने और उनकी समस्याओं को करीब से देखने का मौका मिला। उन्होंने संतकबीरनगर, मिर्जापुर और देवरिया जैसे जिलों में अपने प्रशासनिक कार्यकाल से जुड़े अनुभवों का भी उल्लेख किया।
दिव्या के अनुसार उत्तर प्रदेश में उन्होंने ऐसे लोगों को देखा जिन्होंने स्थानीय स्तर पर समस्याओं को हल करने के लिए खुद पहल की। इसी अनुभव के आधार पर वह अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत भी इसी राज्य से करना चाहती हैं।
‘मुझ पर भरोसा मत करिए’, लोगों से क्या कहा?
अपने संदेश के आखिर में दिव्या मित्तल ने लोगों से एक दिलचस्प अपील की। उन्होंने कहा कि लोग केवल किसी एक व्यक्ति पर भरोसा करने के बजाय खुद पर भरोसा करें और राजनीति में भागीदारी करें। उन्होंने शिक्षकों, डॉक्टरों, किसानों, मजदूरों, वकीलों, छात्रों और अभिभावकों से इस पहल से जुड़ने की अपील की।
उन्होंने यह भी कहा कि नई राजनीति केवल एक व्यक्ति के दम पर नहीं बनाई जा सकती। इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों की भागीदारी जरूरी होगी। इस तरह दिव्या मित्तल ने अपने राजनीतिक प्रवेश को किसी एक पार्टी में शामिल होने के बजाय एक नए तरह के राजनीतिक मंच की शुरुआत के रूप में पेश किया है। Divya Mittal latest news
अब आगे क्या होगा?
दिव्या मित्तल के ऐलान के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनका प्रस्तावित मंच किस रूप में सामने आता है और उत्तर प्रदेश की राजनीति में उसकी वास्तविक भूमिका क्या होगी। उन्होंने अभी किसी राजनीतिक दल में शामिल होने की घोषणा नहीं की है और न ही किसी चुनाव क्षेत्र या विधानसभा सीट को लेकर कोई औपचारिक ऐलान किया है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि आईएएस की नौकरी छोड़ने के बाद दिव्या मित्तल ने राजनीति में सक्रिय होने का रास्ता चुना है। आने वाले समय में उनके मंच का स्वरूप, संगठनात्मक ढांचा और चुनावी राजनीति में उनकी भूमिका सामने आने के बाद तस्वीर और साफ होगी Divya Mittal latest news

चयन प्रजापत Pravah Times के संस्थापक और कंटेंट राइटर हैं। उन्हें हिंदी डिजिटल पत्रकारिता, समाचार लेखन और ऑनलाइन कंटेंट के क्षेत्र में अनुभव है। उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल, स्पष्ट और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है।

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