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  • Indore city news: इंदौर में टूटा 48 साल का रिकॉर्ड सर्द उत्तरी हवाओं ने जमाया शहर सोमवार तक रहेगी शीतलहर की मार

    Indore city news: इन दिनों इंदौर में ठंड ने कुछ ऐसा रूप दिखाया है जिसने शहरवासियों को कांपने पर मजबूर कर दिया है। सर्द उत्तरी हवाओं की वजह से तापमान अचानक नीचे गिरा है और पिछले कई दशकों में पहली बार ऐसा कड़ाके की ठंड का अहसास हो रहा है। शहर में ऐसी ठिठुरन बनी हुई है कि दिन में भी लोग गर्म कपड़ों में नजर आ रहे हैं।

    सर्द उत्तरी हवाओं ने गिराया पारा और बना दी अतिशीत लहर की स्थिति

    शनिवार की सुबह इंदौर में तापमान गिरकर 6.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह गिरावट इतनी तीव्र थी कि पिछले 48 साल का रिकॉर्ड टूट गया। साल 1977 में शहर का न्यूनतम तापमान 4.8 डिग्री सेल्सियस था। मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार की तुलना में न्यूनतम तापमान में सीधे पांच डिग्री की कमी दर्ज की गई। यह गिरावट बताती है कि उत्तरी हवाएं कितनी तेजी से शहर को प्रभावित कर रही हैं।

    18 किलोमीटर प्रतिघंटा की बर्फीली हवा ने दिन में भी बढ़ाई ठंडक

    शनिवार को करीब 18 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली हवाओं ने दिन भर शहर को सर्दी का कड़ा अहसास कराया। सुबह से लेकर शाम तक हर समय ठिठुरन बनी रही। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह स्थिति हिमालय क्षेत्र से आने वाली उत्तर पश्चिमी हवाओं के कारण बनी है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान क्षेत्र में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के चलते इंदौर की ओर तेज सर्द हवाएं पहुंच रही हैं।

    सोमवार तक शीतलहर बरकरार धूप देगी हल्की राहत

    मौसम विभाग के अनुसार इंदौर में सोमवार तक शीतलहर की स्थिति जारी रहेगी। सुबह और रात के तापमान में अभी और गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि दिन में हल्की धूप निकलने से थोड़ी राहत मिल सकती है। शनिवार को आसमान में हल्के बादल छाए रहे और रविवार को भी ऐसा ही मौसम रहने का अनुमान है।

    तापमान में रिकॉर्ड गिरावट के पीछे वैज्ञानिकों का विश्लेषण

    भोपाल मौसम केंद्र के विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर पश्चिमी हवाएं तेज हो गई हैं। इसी चलते इंदौर का तापमान तेजी से गिरा। वैज्ञानिकों का कहना है कि एक ही दिन में पांच डिग्री की गिरावट काफी असामान्य मानी जाती है और यह दर्शाती है कि हवा का रुख पूरी तरह बदल गया है।

    प्रदेश के सबसे ठंडे शहरों में इंदौर भी शामिल

    शनिवार को प्रदेश के दस सबसे ठंडे शहरों की सूची में इंदौर भी शामिल रहा। इस सूची में शहडोल का तापमान सबसे कम यानी 4 डिग्री दर्ज किया गया। अन्य शहर जैसे उमरिया राजगढ़ पचमढ़ी रीवा और नौगांव में भी तापमान सामान्य से काफी नीचे रहा। ऐसे में यह साफ है कि प्रदेश भर में कड़ाके की ठंड ने पूरी तरह दस्तक दे दी है।

    पिछले सौ साल के तापमान रिकार्ड बताते हैं सर्दी का बदलता स्वरूप

    अगर पिछले सौ वर्षों के रिकॉर्ड देखें तो इंदौर ने कई बार बेहद कम तापमान झेला है। वर्ष 1936 में तो शहर का तापमान सिर्फ 1.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। इसके बाद भी कई वर्षों में तापमान 3 से 4 डिग्री के बीच दर्ज किया गया। यह आंकड़े बताते हैं कि इंदौर का मौसम समय समय पर बेहद कठोर हो सकता है।

    पिछले दस वर्षों के तापमान का रिकॉर्ड भी हुआ अपडेट

    पिछले दस साल में इंदौर का न्यूनतम तापमान कई बार 6 डिग्री से नीचे गया है। वर्ष 2018 और 2019 में तापमान 6.6 डिग्री दर्ज किया गया था। इस बार 6.2 डिग्री तक पहुंचना यह दर्शाता है कि सर्दी पिछले वर्षों की तुलना में और अधिक कठोर हो गई है।

    इंदौर को अभी और सहनी होगी कड़ाके की ठंड

    इंदौर में इस समय मौसम पूरी तरह सर्द हवाओं के कब्जे में है। कम तापमान और तेज हवा का मेल मिलकर ऐसी ठिठुरन बना रहे हैं जो कम से कम सोमवार तक जारी रह सकती है। शहरवासियों को सावधान रहने और गर्म कपड़े पहनने की सलाह दी गई है।

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  • Indore News: इंदौर सराफा चौपाटी में बड़ा बदलाव दुकानों की संख्या घटी और विवाद बढ़ा

    इंदौर की सराफा चौपाटी एक बार फिर सुर्खियों में है। शहर के लोग यहां की रौनक को बहुत पसंद करते हैं लेकिन इस बार माहौल थोड़ा अलग नजर आया। नगर निगम ने चौपाटी को और व्यवस्थित बनाने के इरादे से इसका आकार छोटा कर दिया है। दुकानों की संख्या कम होने से कई दुकानदार नाराज हैं और स्थिति काफी संवेदनशील हो गई है। आज हम आपको इस पूरे बदलाव और विवाद के बारे में आसान और समझने लायक भाषा में बता रहे हैं ताकि आप पूरी कहानी जान सकें।

    नगर निगम ने कम की दुकानों की संख्या और बदला पूरा सिस्टम

    नगर निगम ने सराफा चौपाटी में सिर्फ उनसठ दुकानों को ही लगाने की अनुमति दी है। पहले यहां डेढ़ सौ से ज्यादा दुकानें लगा करती थीं जिससे चौपाटी पर काफी भीड़ रहती थी। अब दुकानदारों को क्रम अनुसार नंबरों की तख्तियां दी गई हैं और उन्हीं तख्तियों को दिखाकर दुकान लगाने की अनुमति दी जाएगी। शुक्रवार को नई व्यवस्था लागू होते ही चौपाटी पहले से अधिक खुली नजर आई और भीड़ भी पहले की तुलना में कम रही।

    सूची से बाहर हुए दुकानदारों में गहरा असंतोष

    नई सूची में शामिल न किए गए कई दुकानदारों ने नगर निगम पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सूची तैयार करते समय पारदर्शिता नहीं रखी गई। पहले सौ दुकानों की सूची बनने की बात सामने आई थी लेकिन अचानक उनसठ दुकानों की अंतिम सूची जारी कर दी गई जिससे विवाद और बढ़ गया। कुछ दुकानदारों का यह भी आरोप है कि चौपाटी के पदाधिकारियों ने अपने पक्ष में एक से ज्यादा दुकानें ले लीं जिस कारण पुराने और वास्तविक दुकानदारों को बाहर होना पड़ा।

    मामला कोर्ट तक पहुंचने की तैयारी विवाद और गहरा

    चौपाटी से हटाए गए कई दुकानदार अब कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। इसी को देखते हुए नगर निगम ने भी कैविएट दाखिल कर दी है ताकि मामला अदालत में पहुंचने पर निगम अपना पक्ष मजबूत तरीके से रख सके। शुक्रवार को चायनिस और फास्ट फूड के नए स्टॉल भी लगाए जाने की बात उठी जिससे विरोध और बढ़ गया। सराफा चौपाटी की कमेटी ने कहा है कि यह सूची अंतिम नहीं है और जांच के बाद इसमें बदलाव हो सकता है। यही उम्मीद दुकानदारों को थोड़ी राहत देती है कि आगे स्थिति बदल सकती है।

    चौपाटी में नए नियम से रोजाना की रौनक पर असर

    नई व्यवस्था के अनुसार अब रोज दुकान लगाने से पहले तख्ती दिखाना अनिवार्य है। जिन ठेलों के पास नंबर नहीं होंगे वे सराफा चौपाटी में दुकान नहीं लगा सकेंगे। शुक्रवार को चौपाटी देर से लगी और कई दुकानदारों ने निराशा जताई कि बिना स्पष्ट आधार के उनकी रोजी रोटी पर असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि यह तय नहीं बताया गया कि सूची किस तरह तैयार की गई और किन मानकों को ध्यान में रखा गया।

    आगे क्या हो सकता है उम्मीद और अनिश्चितता दोनों

    नगर निगम का दावा है कि चौपाटी को व्यवस्थित करना जरूरी था और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए दुकानों की संख्या कम की गई है। हालांकि विवाद बढ़ता जा रहा है और कई दुकानदार अब भी फैसले से असंतुष्ट हैं। कमेटी द्वारा सूची में बदलाव की संभावना ने सबमें थोड़ी उम्मीद जरूर जगाई है लेकिन अभी भी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है।