SGSITS: इंदौर के प्रसिद्ध इंजीनियरिंग कॉलेज एसजीएसआईटीएस में नई शिक्षा नीति के तहत एक नई पहल की जा रही है। संस्थान में अब फ्रेंच जर्मन और हिंदी के साथ संस्कृत और प्राकृत भाषा के सर्टिफिकेट कोर्स भी शुरू किए जाएंगे। इस फैसले से विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय भाषाई विरासत से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
संस्थान अपने लैंग्वेज विंग के माध्यम से लंबे समय से विदेशी और भारतीय भाषाओं के कोर्स चला रहा है। अब इसी कड़ी में संस्कृत और प्राकृत को भी जोड़ा जा रहा है। आगामी सत्रों से विद्यार्थियों के लिए ये दोनों प्राचीन भाषाएं एक नए विकल्प के रूप में उपलब्ध होंगी।
भारतीय संस्कृति से जोड़ने की तैयारी
लैंग्वेज विंग द्वारा हाल ही में संस्कृत भाषा का ओरिएंटेशन और विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में बताया गया कि संस्थान का उद्देश्य नई शिक्षा नीति के अनुसार भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच पर आगे बढ़ाना है।
कार्यक्रम में यह भी स्पष्ट किया गया कि आधुनिक इंजीनियरिंग के साथ भारतीय भाषाओं का अध्ययन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में मदद करेगा। संस्थान का मानना है कि यह कदम शिक्षा को और समृद्ध बनाएगा।
संस्कृत की आधुनिक दुनिया में उपयोगिता
विशेष व्याख्यान में मुख्य वक्ता डॉ सरिता जैन ने संस्कृत की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं है बल्कि विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी इसकी उपयोगिता बढ़ रही है।
इस अवसर पर डॉ नीरज जैन लैंग्वेज विंग की संयोजक डॉ सारिका तिवारी और कई वरिष्ठ संकाय सदस्य मौजूद रहे। कार्यक्रम का समन्वय डॉ पूर्णिमा श्रीवास्तव ने किया। संस्थान के इस कदम को भारतीय मूल्यों और आधुनिक कौशल के सुंदर समावेश के रूप में देखा जा रहा है।

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