Rich beggar Indore: इंदौर में भीख मांगने वालों को लेकर एक हैरान करने वाली सच्चाई सामने आई है। शहर में कुछ भिक्षुक ऐसे मिले हैं जो करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं और भीख को पेशे की तरह चला रहे हैं। सराफा बाजार से रेस्क्यू किए गए दिव्यांग भिक्षुक मांगीलाल का मामला सामने आने के बाद पूरे शहर में चर्चा तेज हो गई है।
मांगीलाल को सराफा क्षेत्र से बचाया गया था। जांच में पता चला कि उसके पास कई फ्लैट हैं कई ऑटो किराए पर चलते हैं और एक डिजायर कार भी है। उसकी मां का घर आधुनिक सामान से भरा हुआ है जिसमें फ्रिज वाशिंग मशीन और टीवी शामिल हैं।
ब्याज का कारोबार और हाई क्लास भिक्षुक
जांच में सामने आया कि मांगीलाल सराफा के व्यापारियों और ठेले वालों को ऊंचे ब्याज पर पैसे देता था। रोज ब्याज लेने के लिए वह बाजार आता था। यही नहीं वह लोगों की सहानुभूति का फायदा उठाकर हर दिन मोटी कमाई भी करता था।
मांगीलाल अकेला मामला नहीं है। अक्टूबर दो हजार चौबीस में बाईस भिक्षुक पकड़े गए जो रात में होटल में रहते थे। इनमें कई परिवार पूरे के पूरे भीख में लगे थे। राजस्थान से आए ग्यारह नाबालिग बच्चे भी केवल भीख मांगने के लिए इंदौर पहुंचे थे।
दिसंबर दो हजार चौबीस में एक महिला भिक्षुक के पास पचहत्तर हजार रुपये नकद मिले जो उसकी एक सप्ताह की कमाई थी। अनुमान लगाया गया कि महीने की कमाई ढाई से तीन लाख रुपये तक पहुंच जाती है। फरवरी दो हजार चौबीस में इंदिरा नाम की महिला भिक्षुक के पास दो मंजिला मकान प्लॉट और महंगा मोबाइल मिला था।
प्रशासन की सख्ती और नया नियम
इन मामलों के बाद प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। इंदौर में वर्ष दो हजार पच्चीस से भीख पर पूरी तरह रोक लगाने का फैसला लिया गया है। भीख देने और लेने दोनों को अपराध माना जाएगा। भीख देने वालों पर एक हजार से पांच हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा।
मांगीलाल के मामले के बाद फिर से छापेमारी शुरू कर दी गई है। प्रशासन का कहना है कि पेशेवर भिक्षुकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि असली जरूरतमंद लोगों की पहचान हो सके। शहर में अब भीख को कारोबार बनाने वालों पर नजर रखी जा रही है।

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