Indore district hospital: इंदौर में जिला अस्पताल के निर्माण में हो रही लगातार देरी से पश्चिम क्षेत्र की जनता सबसे ज्यादा परेशान है। छोटे मोटे इलाज के लिए भी लोगों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। नूरानी नगर चंदन नगर सिरपुर बांक द्वारकापुरी सहित दर्जनों बस्तियों और आसपास के गांवों के लोग इसी अस्पताल पर निर्भर हैं लेकिन आज भी उन्हें यहां पूरा इलाज नहीं मिल पा रहा है।
जिला अस्पताल का निर्माण कार्य पिछले सात साल से चल रहा है लेकिन अब तक यह पूरा नहीं हो सका है। शहर में जहां निजी अस्पताल एक साल में बनकर तैयार हो जाते हैं वहीं सरकारी अस्पताल का काम वर्षों से अधूरा पड़ा है। इससे लोगों में नाराजगी और निराशा बढ़ती जा रही है।
300 बेड के दावे पर भी नहीं हुआ काम पूरा
शुरुआत में जिला अस्पताल को सौ बेड का बनाने की योजना थी लेकिन वह भी पूरी नहीं हो सकी। बाद में इसे दो हजार पच्चीस तक तीन सौ बेड का बनाने का दावा किया गया था लेकिन यह लक्ष्य भी पूरा नहीं हो पाया।
यहां बार बार योजना बदली जाती रही और टेंडर बदलते रहे। इसके बावजूद निर्माण की रफ्तार नहीं बढ़ सकी। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की सख्ती भी कभी नजर नहीं आई जिससे काम समय पर पूरा हो सके।
सिर्फ स्त्री एवं प्रसूति विभाग शुरू
फिलहाल अस्पताल के नाम पर यहां केवल स्त्री एवं प्रसूति विभाग ही शुरू किया गया है। जनप्रतिनिधि और अधिकारी कई बार निरीक्षण कर चुके हैं लेकिन हर बार जल्द काम पूरा होने का आश्वासन देकर चले जाते हैं।
स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने भी दो हजार पच्चीस तक निर्माण पूरा होने की बात कही थी लेकिन अब निरीक्षण तक नहीं हो रहा है। मरीज कई बार शिकायत कर चुके हैं लेकिन कोई ठोस बदलाव नहीं हुआ है।
इसका सीधा असर गरीब और जरूरतमंद मरीजों पर पड़ रहा है। उन्हें मजबूरी में निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराना पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों की परेशानी और भी बढ़ गई है।

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