Barwani wildlife update: बड़वानी वन विभाग द्वारा मध्यप्रदेश में प्रदेशव्यापी गिद्ध गणना का कार्य 20 फरवरी और 22 फरवरी 2026 को किया जाएगा। यह गणना प्रदेश के सभी 63 वन मंडलों में एक साथ संपन्न होगी। बड़वानी जिले में भी वन अमले द्वारा इसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
वन विभाग के अनुसार गिद्धों की पहचान और प्रजातिवार गणना एक तकनीकी प्रक्रिया है, जिसे प्रशिक्षित क्षेत्रीय कर्मचारियों के माध्यम से किया जाएगा। गिद्ध पारिस्थितिक तंत्र में सफाईकर्मी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और मृत पशुओं के अवशेषों को नष्ट कर पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हैं।
जानकारी के मुताबिक वर्ष 1990 से 2003 के बीच गिद्धों की संख्या में लगभग 98 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई थी। विशेषज्ञों के अनुसार पशुओं को दी जाने वाली दर्दनिवारक दवा डायक्लोफ्नेक इसके प्रमुख कारणों में शामिल रही है। इस दवा से उपचारित पशु के शव को खाने पर गिद्धों की मृत्यु हो जाती है। वहीं मेलोक्सिकैम दवा को गिद्धों के लिए सुरक्षित माना गया है।
विश्वभर में गिद्धों की 23 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से 9 प्रजातियां भारत में और 7 प्रजातियां मध्यप्रदेश में देखी जाती हैं। प्रदेश में गिद्ध गणना का कार्य वर्ष 2016 से प्रारंभ हुआ, जिसे शीतकालीन और ग्रीष्मकालीन सत्र में वर्ष में दो बार आयोजित किया जाता है।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2016 में प्रदेश में 7057 गिद्ध दर्ज किए गए थे, जबकि वर्ष 2024 की गणना में यह संख्या बढ़कर 10845 हो गई है। गिद्ध गणना का मुख्य उद्देश्य उनकी आबादी के रुझान समझना, स्वास्थ्य का आकलन करना और संरक्षण योजनाओं को प्रभावी बनाना है।
वन विभाग का कहना है कि यह पहल गिद्धों की घटती संख्या को नियंत्रित करने और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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