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  • MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की बड़ी घोषणाएँ, गाय का दूध खरीदेगी सरकार, किसानों को सोलर पंप और बहनों को 1500 रुपये प्रतिमाह

    MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को रतलाम जिले के कुंडाल गांव में 246 करोड़ रुपये की लागत से बने 57 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। इस मौके पर उन्होंने किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए कई घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब सरकार भैंस के साथ-साथ गाय का दूध भी खरीदेगी और इसके दाम अधिक दिए जाएंगे। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के तहत गौशालाओं को अनुदान देने और बड़ी गौशालाओं पर 25 प्रतिशत निवेश लागत माफ करने की भी घोषणा की गई।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि 2028 तक मध्यप्रदेश को “मिल्क कैपिटल” बनाने का लक्ष्य है। उन्होंने किसानों को सोलर पंप देने की योजना का उल्लेख किया जिससे किसानों को बिजली बिल से मुक्ति मिलेगी। साथ ही प्रदेश में बहुत जल्द “मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा योजना” शुरू करने, जावरा से उज्जैन तक ग्रीन कॉरिडोर बनाने और रतलाम-खाचरोद के बीच फोरलेन सड़क निर्माण की बात कही।

    उन्होंने कहा कि सरकार आने वाले वर्षों में 2.5 लाख शासकीय पदों पर भर्ती करेगी और पुलिस विभाग के सभी रिक्त पद तीन साल में भर दिए जाएंगे। रोजगार आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने और स्थानीय युवाओं को नौकरी देने पर प्रोत्साहन राशि देने की योजना भी बताई गई।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अब हर गरीब को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलेगा और गंभीर स्थिति में एयर एम्बुलेंस सेवा भी उपलब्ध कराई जाएगी। राहवीर योजना के तहत सड़क दुर्घटना पीड़ित का डेढ़ लाख रुपये तक इलाज होगा और मदद करने वाले को 25 हजार रुपये दिए जाएंगे।

    उन्होंने यह भी घोषणा की कि दीपावली की भाईदूज से लाड़ली बहनों को हर महीने 1500 रुपये दिए जाएंगे, जिसे पांच साल में बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह कर दिया जाएगा।

    इस मौके पर सांसद अनीता सिंह चौहान, विधायक मथुरालाल डामोर समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे। मुख्यमंत्री का स्वागत जनजातीय परंपरा के अनुसार पगड़ी और तीर-कमान भेंट कर किया गया।

  • Indore News: हुकुमचंद मिल सिटी फॉरेस्ट को बचाने के लिए राजबाड़ा पर हुआ विरोध प्रदर्शन, नागरिक बोले – हमें फ्लैट नहीं, ऑक्सीजन चाहिए

    इंदौर। शहर के बीचों-बीच स्थित हुकुमचंद मिल का प्राकृतिक सिटी फॉरेस्ट इन दिनों बड़े खतरे में है। मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड द्वारा इस हरे-भरे क्षेत्र को काटकर फ्लैट बनाने की योजना बनाई गई है। इसके विरोध में शनिवार शाम 5 बजे से 6 बजे तक पर्यावरण प्रेमियों और नागरिकों ने राजबाड़ा चौक पर मानव श्रृंखला बनाकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर संदेश दिया – “पेड़ बचेंगे तो इंदौर बचेगा, हमें फ्लैट नहीं ऑक्सीजन चाहिए।”

    हुकुमचंद मिल परिसर में फैला यह सिटी फॉरेस्ट केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि हजारों पक्षियों और जीव-जंतुओं का घर है। यह शहर की आबोहवा को संतुलित रखने और प्रदूषण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नागरिकों का कहना था कि यदि यह प्राकृतिक धरोहर नष्ट हुई तो आने वाली पीढ़ियों को केवल कंक्रीट का जंगल और प्रदूषण मिलेगा।

    जानकारी के अनुसार, हाउसिंग बोर्ड की योजना है कि अगले छह महीने में इस सिटी फॉरेस्ट को काटकर यहां फ्लैटों का निर्माण शुरू किया जाए। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस योजना का कड़ा विरोध किया है और सरकार से मांग की है कि इस क्षेत्र को स्थायी रूप से संरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया जाए।

    राजबाड़ा पर हुई इस मानव श्रृंखला में शहर के कई प्रमुख लोग और नागरिक शामिल हुए। इनमें ओपी जोशी, शिवाजी मोहिते, रामेश्वर गुप्ता, दिलीप वाघेला, अजय लागू, अभय जैन, अरविंद पोरवाल, विश्वनाथ कदम, शैला शिंत्रे, संदीप खानवलकर, प्रकाश पाठक, रामस्वरूप मंत्री, प्रणीता दीक्षित, स्वप्निल व्यास, मनीष काले, प्रमोद नामदेव, डॉ. सम्यक जैन, शबाना पारेख, चन्द्रशेखर गवली, प्रकाश सोनी, जावेद आलम, आराध्य दीक्षित, आशीष राय और डॉ. सृष्टि सहित बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे। सभी ने एक सुर में कहा कि प्रशासन को तुरंत इस परियोजना को रोकना चाहिए और आने वाली पीढ़ियों के लिए इस फॉरेस्ट को बचाना होगा।

    प्रदर्शन में शामिल लोगों ने साफ कहा कि हमें फ्लैट नहीं, हमें ऑक्सीजन चाहिए। पेड़ कटेंगे तो शहर की सांसें रुक जाएंगी। सिटी फॉरेस्ट इंदौर की धड़कन है और इसे हर हाल में बचाना होगा। इंदौर का यह विरोध प्रदर्शन केवल हुकुमचंद मिल के सिटी फॉरेस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहरवासियों की उस चिंता को दिखाता है जो लगातार बढ़ते प्रदूषण और कंक्रीट के जंगलों से है। नागरिकों का स्पष्ट संदेश है कि विकास जरूरी है, लेकिन पर्यावरण की कीमत पर नहीं।

  • इंदौर जन्माष्टमी उत्सव 2025: राजवाड़ा के पास स्थित गोपाल मंदिर और बांके बिहारी मंदिर का 200 साल पुराना इतिहास और होल्कर परिवार की आस्था की कहानी

    इंदौर जन्माष्टमी उत्सव 2025:: जन्माष्टमी नजदीक आते ही हर जगह उत्साह का माहौल है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव इस बार शनिवार को देशभर में धूमधाम से मनाया जाएगा। इंदौर में भी तैयारियां जोरों पर हैं, खासकर राजवाड़ा के पास स्थित दो ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर गोपाल मंदिर और बांके बिहारी मंदिर में। यह दोनों मंदिर करीब 200 साल पुराने हैं और इनका निर्माण होल्कर राजघराने की महिलाओं ने कराया था। इनकी कहानी जितनी रोचक है उतनी ही श्रद्धा से भरी हुई भी है।

    दरअसल, इंदौर शहर की पहचान 1725 के बाद से शुरू हुई थी और यह होल्कर रियासत का केंद्र बना। मराठा शासकों के शासनकाल में ज्यादातर शिव और देवी के मंदिर बने लेकिन भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर अपेक्षाकृत कम थे। इसी कमी को दूर करने के लिए राजवाड़ा के पास गोपाल और बांके बिहारी मंदिर का निर्माण कराया गया। इन मंदिरों का इंदौर की धार्मिक आस्था और इतिहास से गहरा जुड़ाव है।

    गोपाल मंदिर का निर्माण महारानी कृष्णाबाई होल्कर ने वर्ष 1832 में कराया था। उस समय करीब 80 हजार रुपये की लागत आई थी जो उनकी निजी निधि से खर्च किए गए थे। यह मंदिर लकड़ी और पत्थरों से बना है और इसकी संरचना मराठा शैली की झलक पेश करती है। प्रवेश द्वार के सामने गरुड़ और गणेश की मूर्तियां हैं, जबकि बाहर का विन्यास और शिखर नागर शैली का है। मंदिर की मजबूती पर संदेह दूर करने के लिए इसके छत पर हाथी को चलाकर परीक्षण भी किया गया था। जब हाथी आसानी से घूम गया तो होल्कर परिवार को संतोष हुआ कि मंदिर मजबूत है। मंदिर बनने के बाद जन्माष्टमी पर इसकी प्राण प्रतिष्ठा की गई और परंपरा के अनुसार मध्यरात्रि में पांच तोपों की सलामी देकर उत्सव शुरू होता था। खास बात यह भी है कि वर्ष 1937 में महाराजा यशवंत राव होल्कर ने हरिजन समाज के लिए मंदिर के द्वार खोल दिए थे। हाल ही में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत इसका जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण किया गया है।

    वहीं, राजवाड़ा के समीप स्थित बांके बिहारी मंदिर भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यह दो मंजिला मंदिर है जिसमें श्रीकृष्ण के तीन विग्रहों के साथ भगवान दत्तात्रेय का विग्रह भी है। यहां जन्माष्टमी के अलावा दत्तात्रेय जयंती भी विशेष रूप से मनाई जाती है। इस मंदिर में पंच अवतार श्रीकृष्ण, दत्तात्रेय, चक्रपाणि महाराज, चक्रधर महाराज और गोविंद प्रभु की पूजा होती है।

    इन मंदिरों के निर्माण के पीछे महानुभाव पंथ का भी प्रभाव रहा। इस पंथ के संस्थापक चक्रधर स्वामी महाराष्ट्र के समाज सुधारक संत थे और इस पंथ में भगवान कृष्ण को ही सर्वोच्च महत्व दिया गया है। यह जाति प्रथा के विरोध में खड़ा हुआ आंदोलन था और होल्कर राजघराने की महिलाएं भी इसके अनुयायी थीं। इसी कारण उन्होंने श्रीकृष्ण के इन मंदिरों का निर्माण करवाया और इन्हें इंदौर की पहचान बना दिया।

    आज ये दोनों मंदिर न सिर्फ इंदौर की धार्मिक आस्था का केंद्र हैं बल्कि 200 साल पुराने इतिहास और परंपरा के जीवंत प्रतीक भी हैं। जन्माष्टमी पर इन मंदिरों में होने वाला विशेष अभिषेक और पूजन हर किसी के लिए अद्भुत और दिव्य अनुभव होता है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज इंदौर और धार के कार्यक्रमों में होंगे शामिल, उज्जैन के लिए रवाना

    आज हम बात करेंगे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के खास दौरे की। यह दौरा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें धार्मिक कार्यक्रमों के साथ विकास कार्यों की समीक्षा भी शामिल है। लोग बड़ी संख्या में उन्हें देखने और सुनने के लिए पहुंचे जिससे माहौल बेहद उत्साहपूर्ण रहा।

    इंदौर से धार तक धार्मिक रंग

    दोपहर 3 बजकर 50 मिनट पर मुख्यमंत्री इंदौर से रवाना हुए और धार जिले के अमझेरा पहुंचे। यहां उन्होंने कृष्ण पर्व में हिस्सा लिया और स्थानीय नागरिकों से संवाद किया। लोग अपने लोकप्रिय नेता से मुलाकात कर बेहद खुश नजर आए।

    इसके बाद शाम 5 बजकर 25 मिनट पर मुख्यमंत्री जानापाव महू पहुंचे। यहां का कार्यक्रम पूरी तरह धार्मिक और सांस्कृतिक रंगों से भरा हुआ था। मुख्यमंत्री ने यहां भी लोगों से जुड़ाव कायम किया और परंपराओं को संजोने का संदेश दिया।

    उज्जैन की ओर बढ़ते कदम

    जानापाव की यात्रा पूरी करने के बाद मुख्यमंत्री शाम 6 बजकर 35 मिनट पर इंदौर एयरपोर्ट पहुंचे। यहां उनकी मुलाकात जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से हुई। इस मुलाकात में आने वाले महीनों की योजनाओं और विकास कार्यों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना जताई गई। इसके बाद वे उज्जैन के लिए रवाना हो गए।

    तिरंगा यात्रा और राष्ट्रभक्ति का संदेश

    मुख्यमंत्री का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वे हाल ही में इंदौर की तिरंगा यात्रा में शामिल हुए थे। इस मौके पर उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने देश की सेना की वीरता का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी जांबाज सेना ने हमेशा दुश्मनों को करारा जवाब दिया है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है और हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह लोकतंत्र और उसके प्रहरियों का सम्मान करे। उनके शब्दों में राष्ट्र के प्रति गर्व और तिरंगे की शान झलक रही थी।

    विकास और आस्था का संतुलन

    डॉ मोहन यादव के इस दौरे में धार्मिक आस्था और विकास योजनाओं का अनोखा संतुलन देखने को मिला। जहां एक ओर उन्होंने कृष्ण पर्व और जानापाव के धार्मिक आयोजनों में भाग लेकर परंपराओं को संजोया वहीं दूसरी ओर अधिकारियों से मुलाकात कर प्रदेश के विकास की दिशा भी तय की

  • Indore News: इंदौर में फिर चमत्कार — जन्मी दो सिर, चार हाथ और दो दिल वाली बच्ची, डॉक्टर भी हैरान

    Indore News: कभी-कभी जिंदगी ऐसे चमत्कार दिखा देती है जिन्हें देख इंसान और विज्ञान दोनों ही हैरान रह जाते हैं। मध्यप्रदेश के इंदौर में एक बार फिर ऐसा ही अद्भुत और दुर्लभ मामला सामने आया है जिसने सभी को भावुक कर दिया है। यहां एक नवजात बच्ची का जन्म हुआ है जिसके दो सिर हैं, चार हाथ हैं, दो दिल हैं और दो पैर हैं। यह बच्ची खरगोन जिले के मोथापुरा गांव की सोनाली नामक महिला ने 13 अगस्त की रात इंदौर के एमटीएच अस्पताल में जन्म दिया। बच्ची का सीना और पेट एक ही है लेकिन सिर और हाथ अलग-अलग हैं। डॉक्टरों ने बताया कि जब एक बच्ची रोती है तो दूसरी बच्ची के अंगों में हलचल होने लगती है और उसकी नींद टूट जाती है।

    शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील आर्य के अनुसार मेडिकल भाषा में इस तरह के जन्म को कंजोइंड ट्विन्स कहा जाता है और यह पूरी दुनिया में बेहद दुर्लभ होते हैं। फिलहाल बच्ची को एमवाय अस्पताल के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट में ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है और डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी हालत पर नजर रख रही है। मुख्य अंग साझा होने की वजह से सर्जरी से अलग करने की संभावना बेहद कम है। यह चमत्कारिक जन्म एक महीने में दूसरी बार हुआ है। इससे पहले 22 जुलाई को देवास जिले की एक महिला ने दो सिर वाली बच्ची को जन्म दिया था, लेकिन जन्म के करीब 12 दिन बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और घर ले जाते समय उसकी मौत हो गई थी। अब सभी की दुआ है कि इस बार जन्मी बच्ची स्वस्थ जीवन जी सके।

  • Indore News: आरएपीटीसी ग्राउंड में कलेक्टर आशीष सिंह ने किया झंडा वंदन, इंदौर ने जोश के साथ मनाया 79वां स्वतंत्रता दिवसg

    Indore News: इंदौर शहर में 79वां स्वतंत्रता दिवस इस बार पूरी शान और उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही शहर के कोने-कोने में तिरंगे की शान लहराती दिखी और लोगों के चेहरों पर देशभक्ति का उल्लास साफ झलक रहा था। इस मौके पर एआईसीटीएसएल ऑफिस में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने ध्वजारोहण किया। खास बात यह रही कि महापौर अपनी टीम के साथ साइकिल चलाकर कार्यक्रम स्थल पहुंचे जिससे पर्यावरण और फिटनेस का संदेश भी दिया गया।

    मुख्य आयोजन महेश गार्ड लाइन स्थित आरएपीटीसी ग्राउंड में हुआ जहां कलेक्टर आशीष सिंह ने झंडा वंदन किया। पहली बार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संदेश भोपाल से सीधे प्रसारित किया गया जिसके लिए पूरे मैदान में बड़ी-बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गईं। जैसे ही मुख्यमंत्री का संदेश सुनाया गया पूरे मैदान में तालियों की गूंज और देशभक्ति के जयघोष सुनाई देने लगे।

    समारोह में 17 दलों की भव्य परेड ने सभी का मन मोह लिया। सीमा सुरक्षा बल, जिला पुलिस बल, नगर सेना, यातायात पुलिस, स्काउट-गाइड और कई अन्य दलों ने अपने अनुशासित कदमों से मंचासीन अतिथियों को सलामी दी। इस परेड का नेतृत्व उप पुलिस अधीक्षक आरएपीटीसी नीति दंडोतिया ने किया जबकि टूआईसी सूबेदार सोनाली वास्कले उनके अनुकरण में रहीं। बीएसएफ और प्रथम वाहिनी का बैंड विशेष आकर्षण का केंद्र रहा जिसकी धुनों ने माहौल को और भी जोशीला बना दिया।

    सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह को रंगीन और भावनात्मक बना दिया। गरिमा विद्या मंदिर, शासकीय उत्कृष्ट बाल विनय मंदिर, शासकीय सांदीपनि अहिल्या आश्रम कन्या विद्यालय और उमिया पाटीदार कन्या विद्यालय के विद्यार्थियों ने देशभक्ति गीतों और लोकनृत्यों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के दौरान वर्षभर उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान समारोह का सबसे प्रेरणादायक पल बना जिसने सभी को गर्व से भर दिया।

  • इंदौर की तिरंगा यात्रा में सीएम मोहन यादव का देशभक्ति भरा अंदाज़, सड़क पर रुककर पिया केसरिया दूध और किए मंदिर दर्शन

    इंदौर तिरंगा यात्रा 2025 : इंदौर की गलियों और चौकों में बुधवार को देशभक्ति का एक अनोखा नज़ारा देखने को मिला जब तिरंगा यात्रा में शामिल मुख्यमंत्री मोहन यादव अपने पूरे जोश और अनोखे अंदाज़ से लोगों का दिल जीतते नज़र आए। कभी उन्होंने सड़क किनारे रुककर गरमागरम केसरिया दूध का स्वाद लिया तो कभी रास्ते में बने मंदिरों में भगवान के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने तिरंगा लहराकर लोगों में देशप्रेम का उत्साह भर दिया।

    यह तिरंगा यात्रा लाखों नागरिकों की मौजूदगी में देशभक्ति के रंग में रंगी हुई थी। यात्रा के मार्ग पर जगह-जगह 100 से अधिक मंच सजाए गए थे जहां भाजपा संगठन के सभी 35 मंडलों के कार्यकर्ता, विभिन्न मोर्चों और प्रकोष्ठों के सदस्य, सामाजिक संस्थाएं, युवा, महिला, व्यापारी और औद्योगिक संगठन पूरे जोश से शामिल हुए।

    यात्रा की शुरुआत मां अहिल्या की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर की गई। देशभक्ति के तरानों से गूंजते माहौल में ब्रास बैंड ने अपनी धुनों से रंग भरे, वहीं अनुसूचित जनजाति समाज की नृत्य मंडली ने पारंपरिक नृत्यों से लोगों का मन मोह लिया। महाराष्ट्रियन समाज की महिलाएं पारंपरिक वस्त्र पहनकर नासिक ढोल की थाप पर थिरकती नज़र आईं।

    यात्रा के दौरान कई युवा महापुरुषों की वेशभूषा में सजकर देश की महान विरासत को जीवंत कर रहे थे। सिख समाज के लोग भगवा पगड़ी में विशेष आकर्षण का केंद्र बने। पूरे मार्ग में देशभक्ति के नारे, तिरंगे की लहराती छटा और लोगों का जोश देखने लायक था। यह सिर्फ एक यात्रा नहीं बल्कि इंदौर में देश के प्रति प्रेम और एकता का अद्भुत संगम था

  • Indore News : इंदौर में दर्दनाक हादसा या हत्या? कनाड़िया में महिला की संदिग्ध मौत से फैली सनसनी

    Indore News :इंदौर शहर के कनाड़िया इलाके में बुधवार शाम एक ऐसी घटना घटी जिसने पूरे मोहल्ले को हिला कर रख दिया। 30 वर्षीय रानी नाम की महिला अपने ही घर के पास गंभीर रूप से घायल पड़ी मिली और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। पति उसे लेकर तुरंत एमवाय अस्पताल पहुँचे और डॉक्टरों को बताया कि यह एक एक्सीडेंट था लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती क्योंकि मायके पक्ष ने इस मामले में पति पर ही गंभीर आरोप लगाए हैं।

    रानी की शादी को कई साल हो चुके थे लेकिन परिजनों के अनुसार पिछले दो साल से पति-पत्नी के रिश्ते में कड़वाहट आ गई थी। आरोप है कि पति का किसी दूसरी महिला से प्रेम संबंध था और इसी बात को लेकर घर में आए दिन झगड़े होते थे। मायके वालों का कहना है कि इस वजह से कई बार थाने में शिकायत भी दर्ज कराई गई थी लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं हुआ।

    परिजनों ने दावा किया कि पति अक्सर उस महिला का नाम लेकर रानी को धमकाता था और मानसिक रूप से परेशान करता था। घटना के दिन भी क्या हुआ यह अब तक साफ नहीं है लेकिन रानी का इस तरह घायल अवस्था में मिलना और फिर मौत हो जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। मोहल्ले में लोग हैरान हैं कि आखिर यह वाकई एक सड़क हादसा था या फिर किसी साजिश का नतीजा।

    फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सच सामने आएगा लेकिन इस घटना ने एक बार फिर रिश्तों में विश्वास और हिंसा के बीच की खाई को उजागर कर दिया है।

  • Indore News: इंदौर सिर्फ स्वच्छता में नहीं अब सड़क सुरक्षा में भी बनेगा देश का नंबर 1 शहर

    Indore News: हम सभी को इंदौर की सफाई पर गर्व है लेकिन अब वक्त आ गया है कि हम अपने शहर को सड़क सुरक्षा और यातायात सुधार में भी देश का सिरमौर बनाएं। सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष और पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने इंदौर को इस दिशा में नई ऊर्जा देने का संदेश दिया है।

    उनकी अध्यक्षता में हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि इंदौर में वह सारी क्षमताएं हैं जो इसे न केवल स्वच्छता में बल्कि सड़क सुरक्षा के मामले में भी अव्वल बना सकती हैं। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि छह महीने के भीतर इस दिशा में बदलाव जमीन पर दिखाई देना चाहिए।

    जस्टिस सप्रे ने कहा कि इंदौर में हेलमेट पहनने की आदत को मजबूती से बढ़ावा देना होगा। सिर्फ कहने भर से नहीं बल्कि सभी नागरिकों को इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी। सरकारी कर्मचारी हों या आम जनता हर कोई अगर नियम मानेगा तो यह बदलाव संभव है। उन्होंने साफ कहा कि जो लोग शराब पीकर गाड़ी चलाते हैं या सीट बेल्ट नहीं लगाते उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए।

    जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम, स्मार्ट सिटी और इंदौर विकास प्राधिकरण सहित सभी विभागों को मिलकर इस मुहिम को अंजाम तक पहुंचाना है। स्कूल-कॉलेजों में पढ़ने वाले युवाओं को भी हेलमेट पहनना अनिवार्य किया जाएगा ताकि भविष्य की पीढ़ी नियमों के साथ जीना सीखे।

    इस बैठक में इंदौर के कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया कि सड़क सुरक्षा को लेकर पहले से ही कई कार्य किए जा रहे हैं लेकिन अब इन्हें और तेज़ गति से आगे बढ़ाया जाएगा। चालान की कार्रवाई के साथ जनजागरूकता अभियानों को भी शहरभर में फैलाया जाएगा।

    बैठक में यह भी बताया गया कि सड़क हादसों में अधिकतर मौतें हेलमेट न पहनने, सीट बेल्ट न लगाने और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करने से होती हैं। इसलिए अब ऐसे लोगों पर बिना देर किए कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही घायलों को तुरंत इलाज मिले इसके लिए राहवीर योजना और कैशलेस ट्रीटमेंट योजना को और प्रभावी बनाया जाएगा।

    न्यायमूर्ति सप्रे ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को बचपन से ही सड़क पर सुरक्षित चलना सिखाएं। हर व्यक्ति की जान अनमोल है और हम सभी का कर्तव्य है कि इसे बचाने के लिए जागरूक बनें।

    अब समय आ गया है कि हम सभी मिलकर इस मिशन को सफल बनाएं। क्योंकि जब शहरवासी जागरूक होंगे तभी हमारा इंदौर एक बार फिर देश का सिरमौर बनेगा।

  • लॉर्ड्स टेस्ट में इंग्लैंड की उम्मीदों को झटका, फिर चोटिल हुए कप्तान बेन स्टोक्स – फिटनेस पर आया चिंताजनक अपडेट

    टेस्ट क्रिकेट के इस शानदार मुकाबले में जब भारत और इंग्लैंड की टीमें लॉर्ड्स के मैदान पर आमने-सामने हैं, तब इंग्लिश फैंस के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है। इंग्लैंड के करिश्माई कप्तान बेन स्टोक्स एक बार फिर इंजरी का शिकार हो गए हैं, जिससे उनकी फिटनेस को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। पहली पारी में जब स्टोक्स क्रीज पर थे, तब उन्होंने एक बार फिर अपनी टीम को मजबूती देने की कोशिश की, लेकिन दिन के आखिरी ओवर्स में कुछ ऐसा हुआ जिसने सभी को चौंका दिया।

    मैच के पहले दिन इंग्लैंड ने 251 रन पर 4 विकेट खोकर दिन का खेल समाप्त किया। स्टंप्स तक स्टोक्स 39 रन बनाकर नाबाद रहे, लेकिन मैदान पर उनकी चाल ढाल में परेशानी साफ देखी गई। आखिरी ओवरों में वह लंगड़ाते हुए भागते नजर आए और एक रन लेने से मना कर दिया। इसके चलते जो रूट अपने शतक से महज एक रन दूर रह गए और 99 पर नाबाद लौटे।

    अब सवाल यह है कि क्या स्टोक्स फिट हैं? क्या वे आने वाले दिनों में बल्लेबाजी और कप्तानी की जिम्मेदारी उठा पाएंगे?

    ओली पोप का अपडेट – उम्मीद बाकी है

    खेल के बाद मीडिया से बातचीत में इंग्लैंड के उपकप्तान ओली पोप ने स्टोक्स की हालत पर बयान दिया। उन्होंने कहा, “उम्मीद है कि स्टोक्स कुछ मैजिकल कर सकेंगे और जल्द ठीक होकर लौटेंगे। मैंने उन्हें स्टंप्स के बाद नहीं देखा, लेकिन उम्मीद करता हूं कि यह गंभीर चोट नहीं है। हमारे सामने अब चार दिन और दो बड़े मैच हैं, इसलिए हमें उन्हें स्मार्टली मैनेज करना होगा।”

    दोस्तों, यह बात बहुत अहम है क्योंकि स्टोक्स न केवल एक धाकड़ बल्लेबाज हैं, बल्कि उनकी कप्तानी में टीम को नई दिशा मिली है। उनका चोटिल होना इंग्लैंड की रणनीति पर भारी असर डाल सकता है।

    पहले भी घायल हुए हैं स्टोक्स, अब क्या होगा?

    आपको बता दें कि बेन स्टोक्स हाल ही में हैमस्ट्रिंग सर्जरी से लौटे हैं और उनका शरीर अब उतना मजबूत नहीं रहा जितना पहले हुआ करता था। वे कभी लंबे स्पेल्स में गेंदबाजी करते थे, लेकिन अब उनका योगदान सीमित हो गया है। बावजूद इसके, उन्होंने एक ऑलराउंडर के रूप में टीम में अपनी जगह बनाई हुई है।

    अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या स्टोक्स अगले दिन मैदान पर उतर पाएंगे? क्या वह अपनी पुरानी फॉर्म वापस पा सकेंगे?

    भारत के लिए ये मौका सुनहरा है

    अगर स्टोक्स पूरी तरह फिट नहीं होते हैं, तो यह भारत के लिए एक बड़ी रणनीतिक बढ़त साबित हो सकती है। स्टोक्स की गैरमौजूदगी में इंग्लैंड की बल्लेबाजी और कप्तानी दोनों कमजोर हो सकती है। ऐसे में रोहित शर्मा की टीम इस मौके का भरपूर फायदा उठाकर सीरीज में बढ़त बनाने की कोशिश करेगी।