Potato Prices: आलू के भाव में भारी गिरावट से किसानों में आक्रोश MSP की मांग तेज पश्चिम बंगाल और उत्तरप्रदेश की बंपर पैदावार बनी बड़ी वजह

Potato Prices

Potato प्रिंसेस :आज हम बात कर रहे हैं आलू किसानों की उस चिंता की जो इस समय पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। पश्चिम बंगाल और उत्तरप्रदेश में इस साल आलू की बंपर पैदावार हुई है लेकिन खुशी की यह खबर किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। बाजार में आलू के दाम पिछले साल से करीब दस रुपए तक सस्ते हो गए हैं जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

आलू के भाव में लगातार गिरावट से बढ़ी चिंता

इस साल आलू की अच्छी पैदावार होने से बाजार में आपूर्ति बढ़ने की संभावना है। हालांकि अभी मंडियों में उतनी आवक नहीं हो रही जितनी होनी चाहिए। उज्जैन के कारोबारी विनोद सिद्धवानी के अनुसार मंडी में आलू की आवक सामान्य से कम है क्योंकि कई किसानों ने अभी तक खेतों से आलू निकाला ही नहीं है। आने वाले दिनों में जब बड़े स्तर पर आलू बाजार में आएगा तो दाम और गिरने की आशंका जताई जा रही है।

व्यापारियों का कहना है कि चिप्स वाला आलू आठ से नौ रुपए किलो बिक रहा है जबकि सामान्य आलू चार से पांच रुपए किलो तक पहुंच गया है। यह दाम किसानों के लिए बेहद निराशाजनक हैं।

लागत से भी कम मिल रहा है भाव

आलू की खेती करना आसान काम नहीं है। बीज खाद दवा सिंचाई मजदूरी और ट्रांसपोर्ट पर भारी खर्च आता है। एक किलो आलू तैयार करने में जितनी लागत लगती है उससे कहीं कम दाम किसानों को बाजार में मिल रहा है। ऐसे में उनकी मेहनत और पूंजी दोनों दांव पर लग जाती हैं। कई किसान कर्ज लेकर खेती करते हैं और जब फसल का सही दाम नहीं मिलता तो उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर हो जाती है।

इस बार अचानक भाव गिरने से कई जगह किसान आलू की खुदाई तक नहीं कर पा रहे हैं। खेत से निकालने और बाजार तक पहुंचाने का खर्च भी निकल पाना मुश्किल हो रहा है। कुछ किसान मजबूरी में फसल को खेत में ही छोड़ने पर विचार कर रहे हैं।

किसानों ने उठाई MSP तय करने की मांग

देशभर की मंडियों में आलू के दाम नीचे चल रहे हैं जिससे किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। किसानों का कहना है कि वर्तमान में मिल रहा दाम उत्पादन लागत का आधा भी नहीं है। इसलिए उन्होंने सरकार से मांग की है कि आलू के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाए और बाजार में दाम स्थिर रखने के लिए हस्तक्षेप किया जाए।

किसानों की यह भी मांग है कि भंडारण और प्रोसेसिंग की बेहतर व्यवस्था की जाए ताकि फसल को सुरक्षित रखा जा सके और सही समय पर बेचा जा सके। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में आलू किसानों की स्थिति और भी खराब हो सकती है।

देशभर की मंडियों में यह चल रहे हैं आलू के भाव

गुजरात में आलू ग्रेड ए पांच सौ से सात सौ पचास रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है। बनासकांठा में आलू दो सौ पचासी से छह सौ पचपन रुपए प्रति क्विंटल तक है। भरूच में ग्रेड ए आलू एक हजार से तेरह सौ रुपए प्रति क्विंटल के बीच बिक रहा है। दाहोद सब्जी मंडी में लोकल आलू सात सौ से एक हजार रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंचा है। कच्छ में देसी आलू नौ सौ से बारह सौ रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है।

कपडवंज एपीएमसी खेड़ा में मीडियम आलू चार सौ से आठ सौ पचास रुपए प्रति क्विंटल है। नडियाद एपीएमसी खेड़ा में आलू चौदह सौ से अठारह सौ रुपए प्रति क्विंटल तक दर्ज किया गया है। मेहसाणा वेज एपीएमसी में लोकल आलू दो सौ से एक हजार रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है। नवसारी एपीएमसी में ग्रेड ए आलू आठ सौ से बारह सौ रुपए प्रति क्विंटल के बीच है। पोरबंदर एपीएमसी में रेड नैनीताल आलू एक हजार से पंद्रह सौ रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंचा है।

इन दामों से साफ है कि कई जगहों पर भाव में भारी उतार चढ़ाव है और किसानों को स्थिर आय नहीं मिल पा रही है।

आखिर में यही कहा जा सकता है कि आलू की बंपर पैदावार जहां एक ओर अच्छी खेती का संकेत है वहीं दूसरी ओर कम दाम किसानों के लिए चिंता का विषय बन गए हैं। जरूरत है कि सरकार समय रहते ठोस निर्णय ले ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके और वे आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें।

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