सरसों बेचने वालों के लिए बड़ा मौका या बड़ा जाल… 23 मार्च से शुरू हुई योजना में एक गलती और पैसा खत्म

सरसों

मध्य प्रदेश में किसानों के लिए बड़ा फैसला सामने आया है लेकिन इसके साथ ही कई सख्त नियम भी लागू कर दिए गए हैं। सरसों बेचने वाले किसानों को अब सीधे फायदा मिल सकता है लेकिन अगर एक भी नियम छूट गया तो पूरा लाभ हाथ से निकल सकता है। 23 मार्च से शुरू हुई इस नई व्यवस्था ने किसानों के बीच हलचल बढ़ा दी है।

इंदौर समेत पूरे मध्य प्रदेश में शुरू हुई नई खरीदी

इंदौर सहित पूरे मध्य प्रदेश की मंडियों में 23 मार्च 2026 से सरसों की खरीदी शुरू हो गई है। यह खरीदी भावांतर भुगतान योजना के तहत हो रही है और इसकी आखिरी तारीख 30 मई 2026 तय की गई है।

इंदौर के किसान इस योजना को लेकर खासे सक्रिय नजर आ रहे हैं। मंडियों में पहले ही दिन से किसानों की आवाजाही बढ़ गई है क्योंकि सभी चाहते हैं कि उन्हें सरकार की तरफ से तय लाभ मिल सके।

सिर्फ मुख्य मंडी में ही मिलेगा फायदा

इस योजना का सबसे बड़ा नियम यह है कि किसान को अपनी उपज केवल मुख्य मंडी प्रांगण में ही बेचनी होगी। इंदौर में भी यही नियम लागू है और उपमंडी में सरसों बेचने पर कोई लाभ नहीं मिलेगा।

इसके अलावा किसान को उसी जिले की मंडी में जाना होगा जहां उसका पंजीयन है। अगर इंदौर का किसान है तो उसे इंदौर जिले की मंडी में ही सरसों बेचनी होगी।

कितनी सरसों बेच पाएंगे किसान

सरकार ने इस बार खरीदी की मात्रा भी तय कर दी है। एक हेक्टेयर पर अधिकतम 13.22 क्विंटल सरसों ही इस योजना में शामिल होगी।

अगर किसी किसान ने 1 मार्च से 22 मार्च के बीच पहले ही सरसों बेच दी है तो वह मात्रा उसकी कुल पात्रता से घटा दी जाएगी। यानी अब वह केवल बची हुई मात्रा पर ही लाभ ले सकेगा।

भुगतान का नियम बदला तो खेल बदल गया

इंदौर के किसानों के लिए सबसे अहम नियम भुगतान से जुड़ा है। इस योजना में नकद पैसा लेना पूरी तरह से मना है।

अगर किसान ने नकद भुगतान लिया तो उसे योजना का कोई लाभ नहीं मिलेगा। व्यापारी को पूरी राशि ऑनलाइन ही डालनी होगी और वही मान्य होगी।

MSP से कम रेट पर मिलेगा फायदा

सरसों का समर्थन मूल्य इस बार 6000 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। अगर मंडी में इससे कम भाव मिलता है और सरकार के मॉडल रेट से ऊपर रहता है तो ही भावांतर का लाभ मिलेगा।

इंदौर में कई किसान इसी गणित को समझने में लगे हुए हैं ताकि उन्हें सही समय पर सही फायदा मिल सके।

मंडी में एंट्री से पहले ये काम जरूरी

इंदौर की मंडियों में प्रवेश के लिए भी नए नियम लागू किए गए हैं। किसान को अपनी ट्रॉली के साथ एंट्री गेट पर रुकना होगा और सरसों का सैंपल दिखाना होगा।

उसे प्रवेश पर्ची भी लेनी होगी और साथ में आधार कार्ड की कॉपी और पंजीयन दस्तावेज रखना अनिवार्य है। बिना इन दस्तावेजों के मंडी में एंट्री मुश्किल हो सकती है।

बिना नंबर प्लेट के वाहन नहीं चलेंगे

इस बार एक और सख्ती की गई है। अगर किसान का वाहन नंबर प्लेट के बिना आता है तो उसे योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

इंदौर में कई जगह इस नियम को लेकर पहले ही सख्ती शुरू हो गई है ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न हो।

नई सरसों ही होगी मान्य

इस योजना का लाभ केवल नई फसल पर ही मिलेगा। पुरानी सरसों को इसमें शामिल नहीं किया गया है।

साथ ही सरसों की क्वालिटी भी साफ सुथरी होनी चाहिए तभी किसान को लाभ मिलेगा। खराब या गंदी सरसों पर योजना लागू नहीं होगी।

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