मंत्री ने बताया कि भगीरथपुरा में तीन दिन के भीतर नर्मदा का साफ पानी पहुंचाया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि तब तक किसी भी नागरिक को बोरिंग का पानी पीने नहीं दिया जाए क्योंकि जांच में यह पानी क्लोरीनेशन के बाद भी पीने लायक नहीं पाया गया है। टैंकर से मिलने वाला पानी साफ है लेकिन उसे उबालकर ही उपयोग करने की सलाह दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई और पाइपलाइन का काम
कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम भगीरथपुरा की हर गली और हर परिवार तक पहुंच रही है। लगभग पचास हजार से साठ हजार लोगों की स्वास्थ्य जांच का लक्ष्य रखा गया है। जहां जरूरत होगी वहां तुरंत इलाज भी दिया जा रहा है ताकि हालात और न बिगड़ें।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इलाके में पाइपलाइन और ड्रेनेज का काम तेजी से चल रहा है। अब तक तीस प्रतिशत क्षेत्र में नई पाइपलाइन डाली जा चुकी है और उसकी जांच भी कर ली गई है। साथ ही पूरे शहर के पानी के टैंकों की जांच कराने की योजना भी सामने आई है।
हाईकोर्ट की सख्ती और सरकार को फटकार
इस पूरे मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट इंदौर बेंच में पांच याचिकाओं पर सुनवाई हुई। अदालत ने सरकार के रवैये को असंवेदनशील बताया और साफ कहा कि स्वच्छ पेयजल हर नागरिक का मौलिक अधिकार है।
हाईकोर्ट ने चेतावनी दी कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही पर अधिकारियों की नागरिक और आपराधिक जिम्मेदारी तय की जा सकती है। साथ ही पीड़ित परिवारों को दिए जाने वाले मुआवजे को लेकर भी अदालत ने हस्तक्षेप के संकेत दिए हैं। भगीरथपुरा के लोग अब राहत और न्याय दोनों की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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