इंदौर जैसे स्वच्छ शहर की पहचान रखने वाले शहर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने हर किसी का दिल दुखा दिया है। शहर के भगीरथपुरा इलाके में दूषित पानी की सप्लाई से कई परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। लोग रोजमर्रा की जरूरत के लिए जिस पानी पर भरोसा करते थे वही पानी उनकी जिंदगी पर भारी पड़ गया।
भगीरथपुरा में पानी बना मौत की वजह
भगीरथपुरा क्षेत्र में लंबे समय से पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें की जा रही थीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बदबूदार और गंदा पानी लगातार सप्लाई किया जा रहा था। धीरे धीरे लोग बीमार पड़ने लगे और हालात इतने बिगड़े कि कई लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इंदौर को झकझोर कर रख दिया।
Jitu Patwari ने उठाए प्रशासन पर सवाल
कांग्रेस नेता Jitu Patwari ने इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि लोगों की शिकायतों को समय रहते गंभीरता से नहीं लिया गया। उनका आरोप है कि सरकार मौत के असली आंकड़े छुपा रही है। उनके अनुसार जहां सरकार चार मौतों की बात कह रही है वहीं असल संख्या सोलह तक हो सकती है। उन्होंने इसे प्रशासन की बड़ी लापरवाही बताया।
Kailash Vijayvargiya से इस्तीफे की मांग
जितु पटवारी ने सीधे तौर पर बीजेपी सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने Kailash Vijayvargiya पर निशाना साधते हुए कहा कि जब जनता मर रही थी तब जिम्मेदार लोग चुप थे। उन्होंने महापौर और नगर निगम आयुक्त से भी इस्तीफे की मांग की और दोषी अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने की बात कही।
भाजपा का जवाब और सफाई
बीजेपी की ओर से प्रवक्ता Brijgopal Loya ने इस घटना को बेहद दुखद बताया। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले की जिम्मेदारी लेती है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौत के आंकड़े पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही तय किए जाएंगे। उनका कहना है कि सरकार का पूरा ध्यान इस समय पीड़ितों की जान बचाने पर है।
प्रशासन की कार्रवाई और भरोसा
सरकार की ओर से नगर निगम आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और अतिरिक्त आयुक्तों की नियुक्ति भी की गई है। भाजपा का कहना है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होगी और सच सामने आएगा। इस बीच भगीरथपुरा के लोग अब भी डरे हुए हैं और साफ पानी की मांग कर रहे हैं।
लोगों के मन में डर और गुस्सा
इस घटना ने इंदौर के लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या समय पर कार्रवाई होती तो जानें बच सकती थीं। क्या स्वच्छ शहर का तमगा सिर्फ कागजों तक सीमित है। लोग चाहते हैं कि राजनीति से ऊपर उठकर सच्चाई सामने आए और भविष्य में ऐसा हादसा दोबारा न हो।

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