आज हम आपके साथ इंदौर जिले से जुड़ी एक बेहद गंभीर और जरूरी खबर साझा कर रहे हैं। यह मामला सीधे आम लोगों की सेहत से जुड़ा है। प्रशासन ने जनस्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक अवैध आयुर्वेदिक फैक्ट्री पर सख्त कार्रवाई की है। इस कार्रवाई से साफ संदेश गया है कि लोगों की जान से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए लगातार चल रहा अभियान
कलेक्टर श्री शिवम वर्मा के निर्देशन में इंदौर जिले में स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन को जैसे ही सूचना मिली कि एक निजी फैक्ट्री नियमों को ताक पर रखकर आयुर्वेदिक दवाइयों का निर्माण कर रही है तुरंत कार्रवाई की योजना बनाई गई। इसी कड़ी में ग्राम धरमपुरी सोलसिंदा क्षेत्र में स्थित रेबिहांस हर्बल प्राइवेट लिमिटेड का निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई
प्रशासनिक अमले ने जब फैक्ट्री का निरीक्षण किया तो हालात बेहद चिंताजनक पाए गए। फैक्ट्री में तीस से अधिक प्रकार के आयुर्वेदिक सिरप बनाए जा रहे थे लेकिन उनकी गुणवत्ता जांचने के लिए कोई भी प्रयोगशाला व्यवस्था मौजूद नहीं थी। दवाइयों में इस्तेमाल होने वाले घटकों से जुड़ी जरूरी फाइलिंग और दस्तावेज भी मौके पर उपलब्ध नहीं कराए जा सके।
अलग अलग कंपनियों के नाम और कोई वैध समझौता नहीं
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि फैक्ट्री में तैयार किए जा रहे उत्पादों पर अलग अलग कंपनियों के नाम अंकित थे। इनमें पंजाब और देहरादून की कंपनियों के नाम शामिल थे। जब इन कंपनियों से जुड़े वैध अनुबंध की जानकारी मांगी गई तो कोई भी प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जा सका। इससे साफ हो गया कि लोगों को भ्रमित कर दवाइयां बेची जा रही थीं।
योग्यता और तकनीकी मानकों का भी अभाव
फैक्ट्री में कार्यरत केमिस्ट ने बताया कि उन्होंने इंदौर से बीएससी की पढ़ाई की है और सिरप निर्माण का अनुभव उन्हें एक निजी फार्मा कंपनी में काम करने के दौरान मिला था। लेकिन जांच में यह स्पष्ट हुआ कि निर्धारित नियमों के अनुसार आवश्यक योग्यता और अधिकृत तकनीकी व्यवस्था का अभाव था। यह स्थिति मरीजों के लिए बड़ा खतरा बन सकती थी।
आवासीय परिसर में हो रहा था दवाइयों का निर्माण
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि आवासीय परिसर में बिना किसी सुरक्षा मानकों के आयुर्वेदिक दवाइयों का निर्माण किया जा रहा था। वहां स्वच्छता स्वास्थ्य सुरक्षा और फायर सेफ्टी से जुड़ी कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी। इस तरह का लापरवाह रवैया गंभीर दुर्घटना और जनहानि का कारण बन सकता था।
फैक्ट्री को किया गया सील
इन सभी गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए प्रशासन और आयुष विभाग ने फैक्ट्री को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान एसडीएम सांवेर श्री घनश्याम धनगर तहसीलदार श्रीमती पूनम तोमर राजस्व निरीक्षक पटवारी और आयुष विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन ने साफ किया है कि आगे भी जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
प्रशासन का सख्त संदेश
इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि इंदौर प्रशासन किसी भी कीमत पर लोगों की सेहत से समझौता नहीं करेगा। अवैध रूप से दवाइयों का निर्माण और बिक्री करने वालों पर नजर रखी जा रही है और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

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