इंदौर की सर्दी ने इस बार हर किसी को चौंका दिया है। शहर में ठंड ने ऐसा असर दिखाया है जो बीते 35 साल में देखने को नहीं मिला। दिन में हल्की धूप जरूर नजर आई लेकिन रात होते ही कंपकंपा देने वाली ठंड ने लोगों को घरों में दुबकने पर मजबूर कर दिया। इस बार इंदौर ने प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी को भी पीछे छोड़ते हुए ठंड का नया इतिहास रच दिया।
पचमढ़ी से भी ज्यादा ठंडा रहा इंदौर
इंदौर में गुरुवार रात न्यूनतम तापमान 4.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह तापमान इस पूरे दिसंबर महीने का सबसे कम तापमान रहा। खास बात यह रही कि पचमढ़ी में इसी रात न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री सेल्सियस रहा। यानी हिल स्टेशन से भी ज्यादा ठंडा इंदौर रहा। प्रदेश में न्यूनतम तापमान वाले शहरों में इंदौर दूसरे स्थान पर रहा जबकि पहले स्थान पर शिवपुरी रहा जहां तापमान 4 डिग्री दर्ज किया गया।
दिन में राहत लेकिन रात में रिकॉर्ड तोड़ ठंड
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार दिन के तापमान में भले ही सामान्य से करीब एक डिग्री ज्यादा रहा लेकिन रात का तापमान लगातार गिरता चला गया। इसी गिरावट ने 35 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया। इस साल दिसंबर में अब तक हर दिन न्यूनतम तापमान सामान्य से कम ही दर्ज किया जा रहा है जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि ठंड का असर अभी और बढ़ सकता है।
अच्छी बारिश और ज्यादा ठंड का कनेक्शन
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी साल अच्छी और लंबी बारिश होती है तो सर्दी भी ज्यादा पड़ती है। इस साल जून से लेकर अक्टूबर के अंत तक लगातार बारिश होती रही। नवंबर महीने की शुरुआत ठंड के साथ हुई और 15 नवंबर को न्यूनतम तापमान 6.4 डिग्री दर्ज किया गया जो दशक का सबसे ठंडा नवंबर दिन माना गया। तभी से यह अंदाजा लग गया था कि इस बार सर्दी कोई नया रिकॉर्ड जरूर बनाएगी।
कहीं 1936 का रिकॉर्ड न टूट जाए
दिसंबर में चल रही शीत लहर को देखते हुए मौसम विभाग को आशंका है कि कहीं 27 दिसंबर 1936 का 1.1 डिग्री सेल्सियस का रिकॉर्ड न टूट जाए। 11 दिसंबर को जब तापमान 4.5 डिग्री तक गिरा तभी यह साफ हो गया था कि ठंड इस साल कुछ अलग करने वाली है। 18 दिसंबर की रात 4.1 डिग्री तापमान ने इस डर को और मजबूत कर दिया है।
ठंडी हवा और कम दृश्यता ने बढ़ाई परेशानी
रात के समय ठंडी हवाओं की रफ्तार भी तेज रही। हवा की गति करीब 11 किलोमीटर प्रति घंटे रही और दृश्यता घटकर 1500 मीटर तक पहुंच गई। मौसम विभाग के अनुसार पहाड़ी इलाकों में हो रही बर्फबारी का सीधा असर मैदानी इलाकों पर पड़ रहा है। इसी वजह से इंदौर पचमढ़ी से भी ज्यादा ठंडा महसूस किया जा रहा है।
ठंड के साथ बढ़ता वायु प्रदूषण
सर्दी के साथ शहर की हवा भी लगातार प्रदूषित होती जा रही है। 18 दिसंबर को इंदौर का एक्यूआई 153 दर्ज किया गया। इसी महीने 12 दिसंबर को यह आंकड़ा 300 तक पहुंच गया था। विशेषज्ञों के अनुसार शहर में निजी वाहनों पर बढ़ती निर्भरता प्रदूषण का बड़ा कारण है। करीब पचपन प्रतिशत प्रदूषण वाहनों से फैल रहा है। पर्यावरणविद ओ पी जोशी का कहना है कि शहर में तेजी से घटते पेड़ों की संख्या भी इसकी एक बड़ी वजह है।
बढ़ती बीमारियां बन रहीं चिंता का कारण
प्रदूषित हवा और कड़ाके की ठंड का असर लोगों की सेहत पर भी दिखने लगा है। सर्दी खांसी और वायरल बुखार के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों की संख्या में भी इजाफा देखा जा रहा है। डॉक्टरों की सलाह है कि लोग ठंड से बचाव करें और जरूरत न हो तो सुबह और रात के समय बाहर निकलने से बचें।
दिसंबर 2025 में तापमान का लगातार गिरता ग्राफ
11 दिसंबर से लेकर 18 दिसंबर तक इंदौर में न्यूनतम तापमान लगातार सामान्य से नीचे दर्ज किया गया। 11 दिसंबर को 4.5 डिग्री तापमान दर्ज हुआ। 16 दिसंबर को यह 4.9 रहा। 17 दिसंबर को 4.5 और 18 दिसंबर को 4.1 डिग्री तक पहुंच गया। यह साफ दिखाता है कि ठंड का असर दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है।
इंदौर के ठंडे इतिहास की झलक
इंदौर में इससे पहले सबसे कम तापमान 27 दिसंबर 1936 को 1.1 डिग्री दर्ज किया गया था। इसके बाद 24 दिसंबर 1955 को 3.3 और 14 दिसंबर 1964 को 2.4 डिग्री तापमान दर्ज हुआ था। 1983 और 1990 में भी दिसंबर के आखिरी दिनों में तापमान 3 से 4 डिग्री के बीच रहा था। अब 2025 में एक बार फिर इतिहास दोहराने के संकेत मिल रहे हैं।
लोगों की दिनचर्या पर पड़ा असर
इस रिकॉर्ड तोड़ ठंड ने आम लोगों की दिनचर्या को भी प्रभावित किया है। सुबह जल्दी उठना मुश्किल हो गया है। बाजार देर से खुल रहे हैं और सड़कों पर भी आवाजाही कम नजर आ रही है। गर्म कपड़ों और हीटर की मांग अचानक बढ़ गई है। बच्चों और बुजुर्गों को लेकर परिवार ज्यादा सतर्क हो गए हैं।
इंदौर की यह ठंड न सिर्फ मौसम के लिहाज से खास है बल्कि लोगों के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गई है। पचमढ़ी से ज्यादा ठंडा रहना अपने आप में एक बड़ा संकेत है। आने वाले दिनों में अगर तापमान और गिरता है तो 1936 का रिकॉर्ड टूटना भी असंभव नहीं लगता। ऐसे में जरूरी है कि लोग सावधानी बरतें और अपनी सेहत का खास ध्यान रखें।

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