इंदौर मेट्रो को लेकर शहर के लोगों के मन में कई उम्मीदें हैं। मेट्रो को आधुनिक इंदौर की पहचान माना जा रहा है लेकिन फिलहाल इसकी कमाई चिंता का विषय बनी हुई है। वजह साफ है मेट्रो अभी बहुत कम दूरी में चल रही है। जब मेट्रो लंबी दूरी तय करेगी तब यात्रियों की संख्या भी बढ़ेगी और आय का रास्ता खुलेगा।
कम दूरी में चलने से नहीं मिल रही मेट्रो को कमाई
इस समय इंदौर में मेट्रो का संचालन सीमित हिस्से में हो रहा है। कम दूरी होने के कारण हर फेरे में बहुत कम यात्री सफर कर रहे हैं। शुरुआत में तो हालात ऐसे रहे कि एक बार में गिने चुने लोग ही मेट्रो में नजर आते थे। बाद में संचालन में बदलाव किया गया जिससे यात्रियों की संख्या कुछ बढ़ी लेकिन फिर भी खर्च निकालना मुश्किल बना हुआ है।
गांधी नगर से रेडिसन चौराहा तक ट्रायल रन
इंदौर मेट्रो का ट्रायल रन गांधी नगर स्टेशन से रेडिसन चौराहे तक अलग अलग गति पर किया जा रहा है। इस हिस्से में संचालन के लिए जरूरी विभागों से अनुमति लेने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जैसे ही अनुमति मिलेगी मेट्रो का दायरा और बढ़ जाएगा जिससे शहर के बड़े हिस्से को सीधा फायदा मिलेगा।
रोबोट चौराहा तक मेट्रो चलाने की तैयारी
मेट्रो को गांधी नगर से रोबोट चौराहा तक चलाने के लिए सर्वे का काम पूरा हो चुका है। पूरे रुट का निरीक्षण रिसर्च डिजाइन स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन की टीम ने किया है। निरीक्षण के बाद मेट्रो के संचालन की संभावित तिथि मार्च दो हजार छब्बीस तय की गई है। इस रुट पर मेट्रो चलने से यात्रियों की संख्या में बड़ा उछाल आने की उम्मीद है।
नए स्टेशनों पर तेजी से चल रहा काम
ट्रैक तैयार होने के बाद अब अधिकारियों का पूरा ध्यान नए स्टेशनों के निर्माण पर है। चंद्रगुप्त मौर्य प्रतिमा स्टेशन सुखलिया ग्राम स्टेशन विजय नगर और रेडिसन चौराहा स्टेशन को प्राथमिकता में रखा गया है। लक्ष्य है कि फरवरी तक इन स्टेशनों का काम पूरा कर लिया जाए ताकि मार्च तक मेट्रो को रोबोट चौराहे तक चलाया जा सके।
यात्रियों को मिलेगी राहत और सुविधा
जब मेट्रो लंबी दूरी तक चलेगी तो शहर के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। रोजाना सफर करने वालों का समय बचेगा और ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा। मेट्रो रोबोट चौराहा तक पहुंचते ही ऑफिस जाने वाले लोग छात्र और व्यापारी बड़ी संख्या में इससे जुड़ेंगे।
खर्च ज्यादा आय कम बनी चुनौती
फिलहाल मेट्रो कॉरपोरेशन को संचालन से पर्याप्त आय नहीं हो पा रही है। जबकि मेट्रो के संचालन और स्टेशनों पर तीन सौ से ज्यादा कर्मचारियों का स्टाफ तैनात है। जब तक यात्री नहीं बढ़ेंगे तब तक लागत निकालना मुश्किल रहेगा। अधिकारियों को पूरा भरोसा है कि रुट बढ़ते ही यह स्थिति बदल जाएगी।
अंडरग्राउंड रुट पर भी बनेगा नया प्लान
मुख्यमंत्री मोहन यादव की घोषणा के बाद अब मेट्रो के अंडरग्राउंड रुट को लेकर नई योजना बनाई जाएगी। बदलाव के बाद यह रुट करीब एक किलोमीटर और बढ़ सकता है। इसके लिए नए मेट्रो स्टेशन की जमीन भी तलाशनी होगी। यह कदम इंदौर मेट्रो को और मजबूत बनाएगा।
इंदौर मेट्रो से जुड़ी उम्मीदें
इंदौर मेट्रो सिर्फ एक परिवहन साधन नहीं बल्कि शहर के भविष्य की दिशा है। जैसे जैसे इसका दायरा बढ़ेगा वैसे वैसे लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा। आने वाले समय में मेट्रो इंदौर की पहचान बन सकती है।

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