Indore News: इंदौर से आई यह खबर समाज और कानून दोनों के नजरिए से बेहद अहम मानी जा रही है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने एक अहम टिप्पणी करते हुए साफ कहा है कि अगर महिला वयस्क है तो वह अपनी इच्छा के अनुसार किसी के साथ भी रह सकती है चाहे वह शादीशुदा ही क्यों न हो।
हाई कोर्ट में पुलिस सुरक्षा के बीच पेश हुई महिला
मामला एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से जुड़ा है जिसकी सुनवाई के दौरान महिला को शुक्रवार को पुलिस सुरक्षा के बीच हाई कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट के सामने महिला ने साफ शब्दों में कहा कि वह याचिकाकर्ता के साथ रहना चाहती है लेकिन उसके माता पिता ने उसे जबरन अपने पास रखा हुआ है।
माता पिता ने शादी का दिया तर्क
सुनवाई के दौरान महिला के माता पिता ने कोर्ट में कहा कि उसकी पहले ही शादी हो चुकी है और शादी के बाद उसे अपने पति के साथ ही रहना चाहिए। इस पर कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और महिला के बयान को महत्वपूर्ण माना।
पहले भी दर्ज हो चुके हैं बयान
इस मामले में पिछली सुनवाई दो दिसंबर को हुई थी। उस समय कोर्ट ने महिला का बयान दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। इससे पहले भी न्यायिक दंडाधिकारी के सामने महिला के बयान दर्ज किए गए थे। उन बयानों में भी महिला ने यही कहा था कि उसके माता पिता उसे जबरन अपने कब्जे में रखे हुए हैं।
हाई कोर्ट का स्पष्ट आदेश
शुक्रवार को हुई अंतिम सुनवाई में हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि महिला वयस्क है और उसे अपनी मर्जी से जीवन जीने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने आदेश दिया कि महिला को धीरज नायक के साथ ही रहने दिया जाए और उसकी सुपुर्दगी याचिकाकर्ता को सौंप दी गई।
पुलिस को दिया सुरक्षा का निर्देश
कोर्ट ने पुलिस को यह भी आदेश दिया कि वह दोनों को अपनी सुरक्षा में सवाई माधोपुर तक सुरक्षित पहुंचाए। इस फैसले के बाद महिला को राहत मिली है और यह आदेश व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को मजबूत करता है।

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