मकर संक्रांति से पहले इंदौर में बड़ी कार्रवाई शहर भर में भिक्षुकों की बढ़ती भीड़ पर प्रशासन का कड़ा अभियान सैकड़ों नाबालिग बच्चों का रेस्क्यू और पुनर्वास की प्रक्रिया तेज

मकर संक्रांति

इंदौर शहर इन दिनों मकर संक्रांति के त्योहार से पहले एक गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है। त्योहार के दौरान दान के अवसर और ठंड के बढ़ते असर के कारण शहर में भिक्षुकों खासकर नाबालिग बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी है। इसी बढ़ती गतिविधि को देखते हुए जिला प्रशासन ने एक व्यापक और सख्त अभियान शुरू किया है ताकि भिक्षावृत्ति पर रोक लगाई जा सके और जरूरतमंद लोगों को सुरक्षित व बेहतर विकल्प दिए जा सकें।

त्योहार से पहले भिक्षुकों की बढ़ती संख्या पर प्रशासन की सख्त नजर

मकर संक्रांति के आसपास हर वर्ष शहर में बाहरी राज्यों से आने वाले भिक्षुकों की संख्या बढ़ जाती है। इस बार भी यही रुझान देखा गया जिसके चलते जिला प्रशासन तुरंत सतर्क हो गया है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि शहर में प्रवेश करने वाले भिक्षुकों की आवाजाही पर खास निगरानी रखी जाए और यह पता लगाया जाए कि वे किन मार्गों से आ रहे हैं।

प्रशासन का कहना है कि मंदिरों चौराहों और भीड़भाड़ वाले बाजारों में गतिविधियां सबसे अधिक दिखाई देती हैं इसलिए यहां संयुक्त टीमें लगातार रेस्क्यू अभियान चला रही हैं।

भिक्षुकों के पुनर्वास की दिशा में तेजी से काम

प्रशासन केवल रोकथाम ही नहीं बल्कि पुनर्वास को भी प्राथमिकता दे रहा है। पिछले वर्ष चलाए गए अभियान में तीन हजार से अधिक भिक्षुकों को पकड़ा गया था जिनमें से कई को पुनर्वास केंद्रों में भेजा गया। करीब ग्यारह सौ लोगों को लघु रोजगार कौशल प्रशिक्षण और आजीविका कार्यक्रमों से जोड़कर उन्हें एक नया जीवन शुरू करने का अवसर दिया गया।

महिला एवं बाल विकास विभाग और अन्य तीन विभागों की संयुक्त टीमें इस बार भी पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरी हैं और शहर को भिक्षुक मुक्त बनाने के लक्ष्य को मजबूत कर रही हैं।

नाबालिग बच्चों पर विशेष ध्यान और काउंसलिंग की व्यवस्था

इस अभियान का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण हिस्सा नाबालिग बच्चों का रेस्क्यू है। अब तक करीब पांच सौ बच्चों की पहचान की जा चुकी है जिनमें से दो सौ से अधिक को स्कूलों आश्रय गृहों और बाल भवनों में भेजा गया है। पचास से ज्यादा बच्चों को उनके परिवारों से मिलाकर घर भेजा जा चुका है।

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बच्चों को रेस्क्यू करने के बाद तुरंत काउंसलिंग कराई जाती है ताकि वे सुरक्षित वातावरण में अपनी शिक्षा और जीवन को फिर से आगे बढ़ा सकें। ठंड और त्योहार के माहौल में चौराहों पर बच्चों की संख्या अक्सर तेजी से बढ़ जाती है जिसे रोकने के लिए टीमें चौबीस घंटे सतर्क हैं।

देवगुराड़िया और अन्नपूर्णा क्षेत्रों में सबसे अधिक गतिविधियां

शहर के प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों के आसपास भिक्षुकों की संख्या सबसे ज्यादा देखी जा रही है। देवगुराड़िया अन्नपूर्णा बिजासन और पितृ पर्वत जैसे स्थानों पर बच्चों के रेस्क्यू अभियान लगातार चल रहे हैं।

प्रशासन का कहना है कि त्योहार के दौरान दान मिलने की संभावना बढ़ जाती है जिसके कारण भिक्षावृत्ति का चलन अचानक तेज हो जाता है। इस स्थिति से निपटने के लिए कलेक्टर ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे भिक्षा न दें और पुनर्वास अभियान का समर्थन करें क्योंकि जब तक दान का प्रवाह नहीं रुकेगा तब तक भिक्षावृत्ति का चक्र टूट नहीं सकेगा।

इंदौर के लिए यह अभियान सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के लिए एक मानवीय पहल भी है। बच्चों को सुरक्षित जीवन देना और भिक्षुक परिवारों को सम्मानजनक आजीविका प्रदान करना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है। प्रशासन और नागरिक दोनों मिलकर ही शहर को स्थायी रूप से भिक्षुक मुक्त बना सकते हैं।

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